>गीत :

हम

संजीव ‘सलिल’
*
सारे जग को जान रहे हैं
खुद को भी पहचानें हम….
*
कंकर-कंकर में शंकर है
देख सकें तो देखें हम.
मानव-सेवा माधव-सेवा
मानें सच अवलेखें हम..
स्वहित जन्म से करते आये
परहित मंजिल जानें हम.
सारे जग को जान रहे हैं
खुद को भी पहचानें हम….
*
राष्ट्रदेव आराध्य हो सके
विश्वदेव तब साध्य बने.
ऐसे दृढ़-संकल्पजयी हों
नियति-दैव भी बाध्य बने.
रच पायें सत-शिव-सुंदर नित
अपने मन में ठानें हम.
सारे जग को जान रहे हैं
खुद को भी पहचानें हम….
*
बिंदु-बिंदु में सिन्धु समाया
आत्मा में परमात्मा है.
कभी किसी को हेय न मानें
जीव-जीव विश्वात्मा है.
हर नर में नारायण बैठा
‘सलिल’ सभी संतानें हम.
सारे जग को जान रहे हैं
खुद को भी पहचानें हम….
*

 

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