>JANOKTI : जनोक्ति

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JANOKTI : जनोक्ति


सोमरस के विषय में कुछ निराकरण

Posted: 25 Nov 2010 04:23 AM PST

बहुत दिनों के पहले हमने सोमरस पर एक लेख लिखा था जिसमें कई वैदेशिक विद्वानों के मतों का उल्‍लेख तथा यथाशक्‍य उनका दुराग्रह खण्‍डन किया गया था  ।  किन्‍तु पर्याप्‍त अध्‍ययन के अभाव में लेख पूर्णता को प्राप्‍त नहीं हुआ  ।  किन्‍तु अब जब कि ईश्‍वर की कृपा से शोध के सन्‍दर्भ में वेद भगवान के अध्‍ययन का सौभाग्य प्राप्‍त हुआ तो कई बातें स्‍पष्‍ट होती जा रही हैं  ।

इसी क्रम में सोम के विषय में प्रचलित कुछ अपवादों का निराकरण निम्‍नोक्‍त मन्‍त्रों के द्वारा करने का प्रयास कर रहा हूँ  ।

मन्‍त्र: –  सुतपात्रे …………………………………………..  दध्‍याशिर: ।। (ऋग्‍वेद-1/5/5)

मन्‍त्रार्थ: –  यह निचोडा हुआ शुद्ध दधिमिश्रित सोमरस , सोमपान की प्रबल इच्‍छा रखने वाले इन्‍द्र देव को प्राप्‍त हो  ।।

मन्‍त्र: –  तीव्रा: सोमास…………………………………….. तान्पिब ।। (ऋग्‍वेद-1/23/1)

मन्‍त्रार्थ: – हे वायुदव यह निचोडा हुआ सोमरस तीखा होने के कारण दुग्‍ध में मिश्रित करके तैयार किया गया है  ।  आइये और इसका पान कीजिये  ।।

मन्‍त्र: – शतं वा य: शुचीनां सहस्रं वा समाशिराम्  ।  एदु निम्‍नं न रीयते  ।। (ऋग्‍वेद-1/30/2)

मन्‍त्रार्थ: – नीचे की ओर बहते हुए जल के समान प्रवाहित होते सैकडो घडे सोमरस में मिले हुए हजारों घडे दुग्‍ध मिल करके इन्‍द्र देव को प्राप्‍त हों ।।

उपर्युक्‍त मन्‍त्रों में सोम में दधि और दुग्‍ध मिश्रण की बात कही गयी है  ।  आजतक मैने किसी भी व्‍यक्ति को शराब में दूध या दही मिलाते हुए नहीं देखा है अत: इस बात का तो सीधा निराकरण हो जाता है कि सोम शराब है  ।  कुछ विद्वानों ने सोम को एक विशेष प्रकार का कुकुरमुत्‍ता माना है  । किन्‍तु क्‍या आपने कुकुरमुत्‍ते की सब्‍जी में दूध या दही मिलाये जाते देखा है  ।  मैने तो नहीं देखा  ।  खैर कदाचित् ऐसा कहीं होता भी तो कुकुरमुत्‍ते की सब्‍जी तो सुनी थी पर किसी ने कुकुरमुत्‍ते को निचोड कर पिया हो ऐसा तो कभी नहीं सुना  है और उूपर साफ वर्णित है कि सोम को ताजा निचोडा जाता है  ।

ऋग्‍वेद में आगे सोम का और भी वर्णन है , एक जगह पर सोम की इतनी उपलब्‍धता और प्रचलन दिखाया गया है कि मनुष्‍यों के साथ गायों तक को सोमरस भरपेट खिलाये और पिलाये जाने की बात कही गई है  ।  कुकुरमुत्‍ता तो पशु खाते ही नहीं फिर तो समस्‍या स्‍वयं ही और भी निराकृत हो जाती है  ।

विचार करने पर सोम आज के चाय की तरह ही कोई सामान्‍य प्रचलित पेय पदार्थ लगता है, जिसे सामान्‍य जन भी प्रतिदिन पान किया करते थे  ।।

क्रमश: ……….

भवदीय:- आनन्‍द:

हकीम की दुकान पर राहुल-लालू-पासवान

Posted: 25 Nov 2010 03:59 AM PST

हकीम लुकमान ने दुकान खोली, तो आज हर दिन की अपेक्षा अधिक रोगी दिखाई दिये। इतना ही नहीं, कई अति विशिष्ट जन (वी.आई.पी) भी उनकी प्रतीक्षा में था। हकीम साहब ने पहले उन्हें निबटाना ठीक समझा। पहला नंबर लालू जी का था।

लालू – हकीम साहब, क्या बताऊं; दिल टांग टूटी भैंस जैसा बैठ गया है। आवाज नहीं निकल रही है। आंखें लालटेन की रोशनी में भी ठीक नहीं देख पा रहीं। सब ओर अंधेरा सा लगता है। माई समीकरण उड़न फ्लाई हो गया।

हकीम – सुबह नंगे पांव हरी घास में टहलिये; पर इससे आगे न बढ़ें। सुना है घास देखते ही आपकी पूर्वजन्म की आदतें जाग जाती हैं। मैं नुस्खा देता हूं। राबड़ी जी इसे बनाकर प्यार से खिलाएंगी, तो कुछ दिन में ठीक लगने लगेगा।

लालू – उसकी बात न कहें। खाना बनाने को कहते ही वह खाने को दौड़ती है। दोनों सीटों से क्या हारीं, दोनों हाथ और पांव सुन्न हो गये हैं। दोनों भाई भी हार गये। जनता ने मुंह दिखाने लायक नहीं छोड़ा। मुझसे भी घूंघट की ओट से बात करने लगी है।

अगला नंबर पासवान जी का था – मेरी हालत तो और भी खराब है हकीम साहब ! मुंह कुएं सा सूख रहा है। मुसलमानों के लिए मैंने क्या नहीं किया ? पिछले चुनाव में ओसामा बिन लादेन जैसा आदमी साथ लेकर घूमा; पर तब की तरह इस बार भी वे दगा दे गये। मेरे भाई, भतीजे, दामाद सब हार गये। फोन करता हूं, तो काट देते हैं। मेरी मेल गाड़ी तो पैसेंजर से भी पीछे चल रही है। जनता ने घर से बेघर कर दिया।

हकीम – मैं दवा देता हूं; पर इसके साथ आपको अगले पांच साल आगे की बजाय, पीछे की ओर मुंह कर टहलना होगा।

पासवान – पर यह देखकर लोग क्या कहेंगे ?

हकीम – लोगों की तुम चिन्ता न करो। यदि लोग तुम्हारे साथ होते, तो तुम्हारी यह हालत क्यों होती ?

तभी गाड़ियों के शोर के बीच राहुल बाबा का प्रवेश हुआ।

राहुल – हकीम साहब ! कुछ दवा मुझे भी दें। मेरा तो सारा भविष्य ही बिहार ने चैपट कर दिया। जहां-जहां मैंने प्रचार किया, वहां जीत तो दूर, कांगे्रस चैथे नंबर पर पहुंच गयी। लोग मुझे देखते ही ‘जहां-जहां चरण पड़े राहुल के, वहां-वहां बंटाधार’ गाने लगते हैं। मम्मी ने बिहार में शून्य से शुरू करने की बात कही थी, तो जनता ने उसके पास ही पहुंच दिया। पैरों पर खड़े होने के लालच में हाथ भी गंवा बैठे। युवक और युवतियों के चक्कर में क१लिजों में धक्के खाये; पर अब वे मुझे देखते ही ऐसे मुंह फेर लेते हैं, मानो मैं कोई बूढ़ा हूं। जिस विदेशी लड़की से बात चल रही थी, उसने भी कई दिन से फोन नहीं किया।

हकीम – आप युवा है, जल्दी ठीक हो जाएंगे। टहलना आपको भी जरूरी है; पर पैर की बजाय हाथ के बल चलने से लाभ जल्दी होगा। इससे आपके हाथ मजबूत होंगे। सोचिये, यदि आपके हाथ ताकतवर होते, तो आपको राजा, कलमाड़ी या अशोक चव्हाण को हटाने की जरूरत नहीं पड़ती।

राहुल – क्या मम्मी के लिए भी कोई नुस्खा है ? उनके चेहरे की तो प१लिश ही उतर गयी है।

हकीम – बिना देखे मैं दवा नहीं देता, चूंकि ऐसे रोगों का इलाज लम्बा चलता है। वैसे उनका इलाज भारत की बजाय इटली में हो, तो अधिक अच्छा रहेगा। तब तक बाजार में उपलब्ध किसी भी प१लिश से काम चला लें। मैं तो सदा बिल्ली शू प१लिश इस्तेमाल करता हूं। चाहे तो उसे ही आजमा लें।

तभी हकीम साहब के पुत्र ने आकर कहा कि नीतीश जी आपसे फोन पर बात करना चाहते हैं।

हकीम – उन्हें क्या परेशानी हो सकती है। वे तो खुद इन सबकी परेशानी का कारण हैं। फिर भी बात कराओ।

नीतीश – हकीम साहब ! इतनी भारी जीत, बधाई और मिठाई के बावजूद दिल में धुकधुकी सी हो रही है। मेरी इच्छा थी कि भाजपा का ग्राफ कुछ गिरे, जिससे वे काबू में रहें। इसके लिए नरेन्द्र मोदी तक का अपमान किया; पर उन्होंने तो 90 प्रतिशत सीट जीतकर मुझे भी पछाड़ दिया। उनके वोट भी खूब बढ़े हैं। अब तो तीर की चुभन औरों के साथ मुझे भी महसूस हो रही है।

हकीम – देखो भाई, भारत और भारतीय जनता के मूड का कुछ पता नहीं लगता। धूल भी लात खाकर दाढ़ी में उलझ जाती है। भाजपा वालों ने दिल बड़ा रखकर जो पाठ पढ़ाया है, इसे समझने का प्रयास करो।

नीतीश – पर इसकी दवा.. ?

हकीम – इसके लिए दवा की जरूरत नहीं है। एक शेर सुनो, इसे हर दिन सुबह-शाम दोहराना ही काफी है।

मोहब्बत में सियासत की गंदगी न मिला

गर गले मिल नहीं सकता, तो हाथ भी न मिला।।

जानिये नये-नये ब्लॉग पते

Posted: 25 Nov 2010 01:31 AM PST

हर रोज नये -नये ब्लॉग अवतरित हो रहे हैं | एक ब्लोगवाणी था जो ब्लॉग पाठकों को इन नवागंतुकों की जानकारी देता रहता था अब थोड़ा बहुत काम चिट्ठाजगत कर रहा है | जनोक्ति पर “ब्लॉग-हलचल” स्तम्भ में हर रोज जानिये नये-नये ब्लॉग पते |

1. ANJANA SAMAJ (http://aanjana.blogspot.com/)
चिट्ठाकार: Sanwal Ram Choudhary

2. इतिहास और अपना समय (http://brajkishorprasad.blogspot.com/)
चिट्ठाकार: Dr. Braj Kishor

3. dillidhadkan (http://dillidhadkan.blogspot.com/)
चिट्ठाकार: pratibha

4. Sarasvat-Niketanam सारस्वत-निकेतनम् (http://sarasvat-niketanam-varshankjvinisa.blogspot.com/)
चिट्ठाकार: Sarasvat-Niketanam

5. ओशो अमृत (http://oshoamritvachan0.blogspot.com/)
चिट्ठाकार: Ajay

6. RAHMDEEN (http://rahmdeen.blogspot.com/)
चिट्ठाकार: RAHMDEEN

7. अग्निशिखा (http://sanyalsduniya2.blogspot.com/)
चिट्ठाकार: shantanu sanyal

8. Dr. DAVI SAHAY PANDEY ”DEEP” (http://davisahaypandeydeep.blogspot.com/)
चिट्ठाकार: davisahaypandeydeep

9. Media Rachna (http://media-rachna.blogspot.com/)
चिट्ठाकार: Media Rachna

10. manojnekaha (http://manojnekaha.blogspot.com/)
चिट्ठाकार: Manoj Kumar

11. for a change (http://nishasjourney.blogspot.com/)
चिट्ठाकार: nisha

12. HEADLINES PUNJAB (http://headlinespunjab.blogspot.com/)
चिट्ठाकार: Headline Punjb

13. मेरी दोस्‍ती मेरा प्‍यार (http://omylove-muskan.blogspot.com/)
चिट्ठाकार: muskan

14. जांजगीर- प्रहार (http://janjgir-prahar.blogspot.com/)
चिट्ठाकार: प्रशांत सिंह ठाकुर

15. ओशो अमृत वचन (http://mereosho123.blogspot.com/)
चिट्ठाकार: raja

16 इसलाम धर्म (http://islamdharma.blogspot.com/)
चिट्ठाकार: DR. ANWER JAMAL

17 समालोचन (http://samalochan.blogspot.com/)
चिट्ठाकार: अरुण देव

18  मनकही (http://navneetbedar.blogspot.com/)
चिट्ठाकार: नवनीत बेदार

19 Akharikalam (http://akharikalam.blogspot.com/)
चिट्ठाकार: Krishan Kumar

20 MAYANK RAJ मयंक राज (http://rajmayank007.blogspot.com/)
चिट्ठाकार: 明光 मयंक राज

21 9 xm (http://9xmjok.blogspot.com/)
चिट्ठाकार: VISH

22. EMPTY SPACE (http://cyberspacez.blogspot.com/)
चिट्ठाकार: Rahul…

23. Dhananjay Pathak (http://dhananjaypathak.blogspot.com/)
चिट्ठाकार: Dhananjay Pathak

24. Kavita Kosh (http://freekavita.blogspot.com/)
चिट्ठाकार: Kavita Kosh

25. Youth Media (http://youth-media.blogspot.com/)
चिट्ठाकार: MAK

26. gaurav the pride (http://gauravshrma.blogspot.com/)
चिट्ठाकार: gauravsharma

27. Aaj Samaj (http://aaj-samaj.blogspot.com/)
चिट्ठाकार: Aaj Samaj

28. bluemango (http://virginisland-andaman.blogspot.com/)
चिट्ठाकार: blue mango

गुजरात की तरह बिहार ने विकास को चुना |

Posted: 24 Nov 2010 11:41 PM PST

डॉ. अतुल कुमार

ऐसा लगता था कि सदियों से राजा रानी वाली राजतंत्र की प्रशासन व्यवस्था में रह चुकी जनता ने लगभग साठ साल के गणतंात्रिक देश हिन्दुस्तान में ने हाल तक भी सभी भारतीयों की मानसिकता लोकतंत्र के लिए परिपक्व नहीं हो पायी है तभी तो सता पर पकड़ बनाये रखने के लिए नेहरू के वारिसों ने कांग्रेस के नाम से छद्म लोकतंत्र पर पूरे देश में अपने परिवार तंत्र का राज किया। जनता से राजगदृदी अपनाने के लिए राजनीति में जाति धर्म का कार्ड खेला। यह खेल इतने शातिर तरीके से खेला गया कि दूर दूर तक की सोच रखने वालों से भी कभी यह पकड़ नहीं जा सका।

हाल के चुनाव पर अगर सर्वो के खबर को यकीन माने तो यह लगभग सच है कि मूल रूप से मुसलमानों ने वंशवाली कांग्रेस और राजद को वोट दिया क्योंकि कई कारणें के अलावा वो हिन्दु विरोधी भाषणों से खुश किये जाते रहे। सुन्नी मुसलमानों को आज तक देश के नागरिक के कर्तव्य और अधिकार दोनों को इमामों के हवाले कर दिया गया। मानों उपर वाला ने हिन्दुस्तान के इमामों को स्पेशल पोस्टींग करके भेजा है। लम्बें समय तक इमामों के फतवे पर सुन्नी मताधिकार का प्रयोग करते थे। पर इसमें कोई शक नहीं कि मदरसे की पढ़ाई और विज्ञान की भूमिका धीमे धीमे इमामों के मकडजाल से डॉ अब्दुल कलाम जैसे पढ़ लिखे कईयों को बाहर कर चुकी। अगर आस्था के नाम पर मूर्ख बनाये जाने वाले लोग जरा सी सोच और तर्क से दिमाग का इस्तेमाल करें तांे वे समझ सकते है कि जहाँ बनाने वाले खुदा के लिए इबादतगाह के नाम पर दकियानुसी सोच का जाल फैलाना क्यों जारी रहा? जलन और नफरत का माहौल फैला, फूट डाल कर सता कब्जायी गयी ताकि देश की गरीब जनता की दौलत को लूट कर विदेशों में केवल अपनी औलादों के ऐशो आराम के लिए रकम जमा करा दी जाए। आज आधे से कम को समझ आया है कल सबको आ जाएगा कि राज चलाने की जगह राज पर काबिज रहने के काम बडी ही सूझबूझ से किये जाते रहे। भ्रष्टाचार जब तक सौ करोड़ के खून में ना आ जाए तब तक काम नहीं किया जाता। जब तक हवलदार और सिपाही घूस ना लेने लगे तब तक तंख्वाह ना बढ़ाई। गरीबों को गरीबी हटाने के नाम पर लूटा गया। नियम कानून ऐसे बनाये कि एक ईस्ट इंडिया कंपनी की जगह हजार विदेशी कंपनीयों आज हमारे देश में आ कर मजदूर और किसान का खून चूस रही है। ईमानदार व्यवसायी को तंग कर करके मिट्टी में मिला दिया गया। हालात ऐसी बनायी गयी कि लोग कहें आजादी से अच्छी गुलामी।

आरक्षण के कार्ड को खेल कर सता पर पकड के लिए दलित मुसलमान, दलित इसाई जैसे शब्दो को जन्म देने वाली कांगे्रस सरकार का बस चला तो कल राजपूत मुसलमान और ब्राहमण ईसाई शब्दों की भी रचना कर देगी। वैसे इन दिनों दिख रहा है समाज खत्म कर चुकी कांग्रेस सरकार अब परिवार खत्म करने के लिए सात जन्म के रिस्तों को महज समझौता बना कर छोड देगी।

हद तो तब है जब दो दिन के राजनैतिक कद वाले युवराज कहे जाते जनाब मीडीया के सामने दलितों के यहां नहाने खाने का नाटक करेगें जबकि अगर कोई दलित 10 जनपथ पर आ जाऐ तो डंडे खाये। नमाजी टोपी पहने नाटक बस अपने लिए वोट लेने तक के लिए है। चार बीबी और चालीस बच्चे की छूट इसीलिये तो है कि वो बस कैटल क्लास वाला वोटर बन कर जिन्दा रहे फिर गटर में या किनारे घिसट घिसट कर जीते हुए गरीब ने मर ही तो जाना है। लेकिन वो दिन दूर नहीं जब एक एक करके मुसलमान जान लेगा कि एक बीबी एक बच्चा करके ही वो अपनी औलाद को आदमी की जिन्दगी देगा तब हिन्दुओं का वोट पूरी तरह खो चुकी कांग्रेस को एक वोट भी नहीं मिलेगा। बापू के सम्मान पर जब पटेल जी की जगह नेहरू को प्रधानमंत्री बना देना ही इतिहास की एक गलती हो गयी लेकिन सुधार की जिम्मेदारी आज के नौजवानों की है और बिहार के चुनाव के नतीजों ने विकास के वास्ते बदलाव का बिगुल बजा दिया। लालू को परिवार वाली कांग्रेस के विरूद्ध सता लाने के बाद जब लालू भी परिवार तंत्र का राज करने लगे तो कांग्रेस के साथ वह भी आज हाशिये पर चले गये। जनता जनार्दन ने माना तो भगवान भी बन सका भगवान है। किसी तंत्र के प्रशासन सफलता जनता के स्वीकारने पर है। यही सच है। फिर नेताओं की बिसात क्या है। जनता के हित में काम करने के लिए अगर चुना है तो उसे जिम्मेदारी से करना होगा। वर्ना अंजाम के कई उदाहरणों से दुनिया के इतिहास भरे है।

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