>JANOKTI : जनोक्ति

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JANOKTI : जनोक्ति


1 लाख 76 हजार करोड़ का घोटाला|

Posted: 26 Nov 2010 02:41 AM PST

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देश के विकास में इंजन की भूमिका निभा सकता है बिहार

Posted: 26 Nov 2010 12:40 AM PST

बिहार की जनता ने अभूतपूर्व और ऐतिहासिक जनादेश देकर राजग गठबंधन को बिहार के विकास की जिम्मेदारी सौंपी है | सर्वप्रथम मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उप-मुख्यमंत्री सुशील मोदी को इस विकास आधारित विजय पर हार्दिक शुभकामनायें !

बिहार की जनता ने आखिरकार जातिवाद की जकड़न को तोड़ते हुए विकास की राजनीति पर मुहर लगा हीं दिया | बिहार में एक नया सवेरा है , जहाँ आम आदमी के सपने हैं बिहार को पुनः विश्व गौरव बनाने का , और इन सपनों को पूरा करने की बड़ी जिम्मेवारी नीतीश कुमार के कन्धों पर है |

लोकतंत्र में सरकार का पहला काम कानून का शासन सुनिश्चित करना है | राज्य सत्ता की अपनी पहली पारी में नीतीश कुमार ने कानून -व्यवस्था को दुरुस्त किया है | आज पीढ़ियों से अराजकता से पीड़ित आम आदमी फिर से सड़कों पर सुरक्षित रूप से चल सकता है | चुनाव परिणाम वाले दिन टेलीविजन पर बहस के दौरान कई लोग बिहार में विकास की बात को नकार रहे थे | लेकिन वो भूल रहे थे कि नीतीश को जो बिहार शासन के लिए मिला था वह बिहार पंद्रह सालों के जंगलराज से ग्रसित था | तत्कालीन बिहार में विकास के लिए प्रदेश में कानून -व्यवस्था का सुचारू रूप से संचालन पहली प्राथमिकता थी जिसे नीतीश ने बखूबी निभाया | राज्य के छोटे-बड़े माफियाओं को सलाखों के पीछे पहुँचाया | पुलिस -प्रशासन में व्याप्त कुव्यवस्था को दुरुस्त करते हुए राज्य में अधिकारियों को और अधिक कुशल बनाया | हर थाने से लेकर डीएम ऑफिस में जनता दरबार का प्रचलन शुरू किया ताकि आम आदमी को न्याय-व्यवस्था में सुविधा मिल सके | भ्रष्टाचार के विरुद्ध बंद पड़ी राज्य की जांच एजेंसियों को पुनर्जीवित किया |

राज्य में नई-पुरानी सडकों का निर्माण राजग सरकार की एक महत्पूर्ण उपलब्धि है जिसको लेकर भी जनता का विश्वास नीतीश के ऊपर बना हुआ है | नीतीश सरकार ने प्रदेश में गड्ढों वाली सडकों को चलने लायक बनाया और सालों से अटके पड़े फ्लाईओवरों का काम पूरा किया | नीतीश राज में प्रदेश की स्थिति आश्चर्यजनक रूप से सुधरी है | यह सच है कि एक नागरिक को जो चाहिए, वह अभी वहां प्राप्त नहीं है | लेकिन एक आदर्श राज्य का महल खड़ा करने के लिए पिछले कार्यकाल में राजग सरकार ने सुशासन की नींव रखी है |

लोगों के रहने के लिए आज बिहार एक सुरक्षित स्थान के रूप में अपनी स्वीकार्यता हासिल कर रहा है | अब ऐसी स्थिति पैदा हो गयी है जब सरकार राज्य के आर्थिक पुनरुत्थान पर ध्यान केंद्रित कर सकती है | राज्य में बुनियादी ढांचों के निर्माण की दिशा में राजमार्गों और फ़्लाइओवरोन से शुरुआत की जा चुकी है | राज्य में बाहरी निवेश के साथ-साथ पारंपरिक कृषि और कुटीर उद्योगों तथा नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्रों में नई परियोजनाएँ शुरू करने के लिए उद्योगपतियों को आमंत्रित किया गया है , हालांकि ज्यादातर परियोजनाएं मंजूर के स्तर पर बनी हुई है | और सरकार की नई पारी में तमाम विकास परियोजनाओं को फाइलों से निकाल कर जमीनी रूप देने का कार्य करना नीतीश सरकार की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए |

अगले पांच वर्षों में नीतीश सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती शैक्षिक क्षेत्र में बिहार को आत्मनिर्भर बनाने की होगी | देखा जाए तो देश के किसी अन्य राज्य की अपेक्षा बिहार की जनता की प्राथमिकताओं में शिक्षा सबसे ऊपर रहती है | अभिवावक अपने जरूरतों की अनदेखी करके भी अपने बच्चों के लिए शिक्षा सुनिश्चित करते हैं | दुर्भाग्य से, राज्य में अनिश्चित माहौल और स्थानीय शिक्षण संस्थानों की निराशाजनक स्थिति के कारण, वे अपने बच्चों को भेजने के लिए विवश हैं | राज्य से पलायन में कामगारों से अधिक विद्यार्थी वर्ग का योगदान है जो उच्च शिक्षा के लिए और तदनुपरांत उपयुक्त नौकरी के लिए राज्य से बाहर जाते हैं | एक अध्ययन के मुताबिक राज्य के मेधावी युवा राज्य से बाहर अध्यनरत हैं और जो आर्थिक तंगी की वजह से बाहर नहीं जा सकते वैसे छात्र अक्सर दसवीं या बारहवीं के बाद अपनी पढाई छोड़ कर छोटे-मोटे धन्धों में लग जाते हैं या बेरोजगार हैं |

केवल बौद्धिक पलायन हीं नहीं अपितु बिहार के लोगों की कमाई का एक बड़ा हिस्सा राज्य से हर वर्ष बाहर जाता है | अनुमानतः एक छात्र साल भर में औसतन दो लाख रुपये अपनी पढाई पर बाहर रहकर खर्च करता है और ये पैसा कुल मिलाकर चालीस हजार करोड़ रूपये से भी ज्यादा है | अगर राज्य में प्राथमिक शिक्षा के साथ-साथ दिल्ली और बंगलौर की तरह उच्च शिक्षा की उपयुक्त और गुणवत्ता वाली व्यवस्था की जाए तो यह रकम वापस बिहार में लौटेगी | जो शुरुआत प्राथमिक शिक्षा के क्षेत्र में , परिवहन के बुनियादी और सुविधाजनक मोड, अर्थात् साइकिल से लैस छात्रा के रूप में दिखाई पड़ती है | अब उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक पुनर्जागरण लाने का समय आ गया है | शैक्षिक उत्कृष्टता के नए केंद्रों को सीमित भूमि और पूंजीगत व्यय की तुलना की आवश्यकता होगी | बिहार में इस तरह के नए संस्थानों में पढ़ाने के लिए शिक्षकों की उपलब्धता प्रचुर मात्र में है | यह अनुमान है कि राजधानी पटना में उच्च शिक्षा के कम से कम पांच इंजीनियरिंग या चिकित्सा या कम्प्यूटर संस्थानों का निर्माण और संचालन सुचारू रूप से किया जा सकता है | राज्य के अन्य छोटे शहरों और कस्बों में भी ऐसे दो संस्थान बनाये जाने चाहिए |

उच्च शिक्षा में पुनर्जागरण नये बिहार की नींव रखने के साथ-साथ भविष्य की आर्थिक समृद्धि को सुनिश्चित करते हुए अगले पांच सालों में अग्रणी राज्यों की कतार में सबसे आगे खड़ा होगा | हमें पूरी उम्मीद है कि इस प्रकार बिहार देश में विकास के लिए इंजन के रूप में उभर सकता है |

समाजवादी आंदोलन – 2

Posted: 25 Nov 2010 10:31 PM PST

संघर्ष से आएगा समाजवाद

समाजवाद और समाजवादी आन्दोलन ही किसानों,मजदूरों,छात्र-छात्राओं,महिलाओं एवं आम जनों के अधिकार बहाली का एकमात्र रास्ता है। पूंजीवाद का राक्षस समाज के प्रत्येक अंग को निगल चुका है।भ्रष्टाचारियों का काकस समाज व देश का रक्त चूसता ही चला जा रहा है। पूंजीवाद के राक्षस और भ्रष्टाचार के दानव का मुकाबला आम जन में सदाचरण,नैतिकता,सामूहिकता,सामाजिक एकता व देश-प्रेम के बीज रोपित,अंकुरित,पोषित व पल्लवित करके ही किये जा सकते हैं।शासन सत्ता के जिम्मेदार लोग भ्रष्टाचार में सराबोर होकर बेशर्मी का लबादा पहने हुए भारत के लोकतन्त्र को भीड़तन्त्र में तब्दील करके एक कुशल चरवाहे की तरह भारतीय जनमानस को जानवरों की मानिन्द हांक रहें हैं।

जनता के प्रतिनिधि आज अव्वल दर्जे के स्वार्थी हो गये हैं।राजनीति में सत्ता प्राप्ति और सत्ता प्राप्ति के पश्चात् जनता के द्वारा दिये गये विभिन्न राजस्व करों से अर्जित धन से बने विकास कार्यों के प्रचुर धन की लूट व बन्दर-बाँट ही इनकी राजनीति का प्रमुख उद्देश्य बन चुका है।आज महामानव महात्मा गाँधी के ग्राम्य स्वराज्य की कल्पना अनियंत्रित व अनियोजित औद्योगीकरण के चलते दम तोड़ चुकी है।क्रांतिकारियों के बौद्धिक नेता भगत सिंह के अनुसार-क्रांति की वास्तविक सेनायें किसान व मजदूर हैं,और आज भी भारत का किसान अपनी कृषि गत् समसयाओं से परेशान है,किसान अपनी कृषि योग्य बेशकीमती भूमि के मनमाने अधिग्रहण से भयाक्रांत है।किसान को खाद,बीज,सिंचाई,बिजली,शिक्षा,स्वास्थ्य परक सुविधा कुछ भी समय पर पूर्णतःमयस्सर नहीं है।मजदूर कल-कारखानों के मालिकान की शोषक नीति के शिकार हो कर दयनीय जीवन जीने को मजबूर हैं।

डा0राम मनोहर लोहिया ने कहा था कि लोग मेरी बात सुनेंगें जरूर,लेकिन मेरे मरने के बात।डा0लोहिया की बातें मात्र 12वर्ष की उम्र में ही आत्मसात् कर चुके,आज 72वर्ष की उम्र के मुलायम सिंह यादव ने डा0लोहिया के विचारों व समाजवाद की अग्नि को प्रज्जवलित करे रहने का बहुत ही बड़ा, नेक,सराहनीय व अनुकरणीय काम किया है।संघर्षों की ज्वाला में तपकर व समाजवादी मूल्यों की बदौलत मुलायम सिंह यादव ने अपने राजनैतिक जीवन में अपना लोहा समस्त राजनैतिक दलों व नेताओं को मनवाया।मुलायम सिंह यादव की राजनैतिक-मानसिक दृढ़ता का कारण उनकी महात्मा गाँधी ,भगत सिंह,डा0लोहिया,चौधरी चरण सिंह जैसी महीन विभूतियों के आदर्शों,विचारों पर पकड़ और अनवरत् चलते रहने का संकल्प ही है,एैसा मेरा अपना मानना है।अब समाजवादी आन्दोलन,लोहिया के लोगों,समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं,मुलायम सिंह यादव के अनुयायियों को समाजवाद के मायने व समाजवादी आन्दोलन व कार्यक्रम पुनःपढ़ना चाहिए।डा0लोहिया के द्वारा प्रदत्त कार्यक्रम समाजवादी विचारधारा व आन्दोलन के प्राण हैं।डा0लोहिया के कार्यक्रमों पर चले बगैर,जनता को साथ लिए बगैर,सामाजिक चेतना का काम किए बगैर कोई भी पक्का समाजवादी कार्यकर्ता नहीं हो सकता है।अपने को समाजवादी कहने मात्र से,किसी समाजवादी संगठन में पदाधिकारी हो जाने मात्र से कोई समाजवादी नही हो जाता है।समाजवादी तो वही है जिसने समाजवाद के सिद्धान्तों को आत्मसात् किया हो,उन सिद्धान्तों पर चला हो,अड़िग रहा हो,जिसके लिए राजनीति सत्ता साधन मात्र हो-साध्य नही।समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव समाजवाद की कसौटियों पर खरे साबित हो चुके हैं।13मार्च,2003 को समाजवादी पार्टी के विशेष राष्टीय सम्मेलन में मुलायम सिंह यादव ने कहा,”क्या याद है,4-5नवम्बर1992 को जिस बेगम हजरत महल पार्क के ऐतिहासिक मैदान में फैसला लिया था,संकल्प किया था,क्या वह संकल्प याद है?क्या आप उस संकल्प पर चलने के लिए तैयार हैं?इसीलिए हम कहते हैं कि किस खेत की मूली है यह सरकार,चाहे वह दिल्ली की हो,चाहे उत्तर-प्रदेश की हो।हम लोग वे लोग हैं जो देश के गरीब लोगों के लिए इस देश के नौजवान विद्यार्थियों के लिए,इस देश के किसानों के लिए,झुग्गी-झोपड़ी वाले लोगों के लिए जिन्होंने 56साल की आजादी के बाद भी पक्की छत नहीं देखी,उनको छत दिलाने के लिए,नौजवानों को रोजगार दिलाने के लिए,किसानों की लूट बचाने के लिए,वैट द्वारा व्यापारियों को आतंकित करके उनका पूरा धंधा बर्बाद करने के खिलाफ,मॅंहगाई बढ़ाने के खिलाफ,इस देश के विकास के लिए,उत्तर प्रदेश के विकास के लिए,सारे हिन्दुस्तान के विकास के लिए,चाहे हम लोगों को खून नहीं,जीवन की आहुति भी देनी पड़ेगी तो देंगें,हम इस व्यवस्था को बदलेंगे।’

और आज नवम्बर,2010 में,वर्तमान परिस्थितियों में समाजवादी आन्दोलन से जुड़े लोगों विशेषकर समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं,पदाधिकारियों को आम जनता के मुद्दों पर संघर्ष की तैयारी करके संगठन करना चाहिए।मुलायम सिंह यादव में यह क्षमता विद्यमान है कि वे जनता के हित के मुद्दों पर आन्दोलन खड़ा कर देते हैं।समाजवादी आन्दोलन को अब कर्म प्रधान कार्यकर्ताओं की पुनःआवश्यकता आन पड़ी है।देश की समस्याओं,जनता के बुनियादी अधिकार व समाज के प्रति कत्र्तव्यों पर मुखरित होकर ही समाजवादी आन्दोलन अपना विकास कर सकता है।राजनीति का व्यवसायीकरण व आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों की राजनीति में प्रभावी कब्जेदारी के खिलाफ मोर्चा समाजवादियों को ही सम्भालना होगा।डा0लोहिया के कार्यक्रम क्रमशःसमान शिक्षा नीति,विशेष अवसर व समता के सिद्धान्त,चौखम्भा राज,पंचायती राज का अनुपालन,अल्पसंख्यकों की समस्याओं,न्यूनतम मजदूरी,कृषि योग्य भूमि के अधिग्रहण का विरोध,भारतीय संस्कृति का सर्व-धर्म समभाव प्रधान रूप,हिन्दी का प्रसार आदि वैचारिक क्रांति के रूप में हैं।इन कार्यक्रमों के जमीनी संचालन से एक लहर उत्पन्न होगी जो देश के समस्त समाजवादियों को जागृत करके देश को सशक्त-समृद्ध बनायेगी।प्रसिद्ध समाजवादी लेखक लक्ष्मीकांत वर्मा के कथनानुसार-कर्म और ज्ञान,बुद्धि और हाथ,चिन्तन और वाणी एक सजग प्रहरी के रूप में यदि समाजवादी आन्दोलन को दिशा देंगें और मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व में निरन्तर धार पैदा होती रहेगी तो निश्चय ही समाजवादी आन्दोलन का भविष्य उज्जवल होगा।

समाजवादी आन्दोलन,डा0लोहिया की सोच,मुलायम सिंह यादव का समाजवादी राज्य स्थापना का प्रयास व संकल्प तभी साकार हो सकते हैं,जब समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता व पदाधिकारी कर्म के क्षेत्र में समाजवादी विचारों को आन्दोलन का स्वरूप प्रदान करें।

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