>JANOKTI : जनोक्ति

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JANOKTI : जनोक्ति


अपनी प्रतिक्रिया से इनका हौसला बुलंद करें |

Posted: 30 Nov 2010 05:21 AM PST

हिंदी चिट्ठाजगत में नवपदार्पण करने वाली इन कलियों का टिप्पणी रूपी भ्रमरों द्वारा स्वागत करें! लोग बड़ी तेजी से हिंदी ब्लोग्स को अपनी अभिव्यक्ति का माध्यम बना रहे हैं | आइये आगे बढ़कर इनका हौसला बुलंद करें |

1. खुसर-फुसर (http://khusar-fusar.blogspot.com/)
चिट्ठाकार: Ravinder Punj

2. boletoon.blogspot.com (http://boletoon.blogspot.com/)
चिट्ठाकार: RAKESH SHARMA

3. G@ur@v Mishr@ (http://gauravmishr.blogspot.com/)
चिट्ठाकार: G@ur@v’s Blog

4. Gurutvakaryalay’s Blog (http://gurutvakaryalay.wordpress.com)
चिट्ठाकार: gurutvakaryalay

5. मैं भी कुछ कहूँ (http://ankitkuchkahe.blogspot.com/)
चिट्ठाकार: ankit

6. हिन्दू धर्म की पूर्णता वेज्ञानिक आधार पर (http://vinekdubey.blogspot.com/)
चिट्ठाकार: विनेक दुबे

7. NEWSKKR (http://newskkr.blogspot.com/)
चिट्ठाकार: NEWSKKR

8. मेरे शब्द (http://wordsbymeforme.blogspot.com/)
चिट्ठाकार: shephali

9. Meri Bateen (http://arvindbasak.blogspot.com/)
चिट्ठाकार: Kunal

10. My manjar (http://mymanjar.blogspot.com/)
चिट्ठाकार: My manjar

11. हिन्दु-गाथा HINDU-GATHA (http://hindugatha.blogspot.com/)
चिट्ठाकार: RAM DAS SONI

12. बेतिया दुर्गाबाग मंदिर (http://b9431491033.blogspot.com/)
चिट्ठाकार: दुर्गाबाग मंदिर बेतिया

13. Laalan Paalan (http://laalan-paalan.blogspot.com/)
चिट्ठाकार: Minu

14. Swami News-Badalte Waqt Ka Gawaah (http://swaminews.blogspot.com/)
चिट्ठाकार: swami news

15. ।। रहस्‍योद्घाटन ।। (http://rahasyodghaatan.blogspot.com/)
चिट्ठाकार: आनन्‍द पाण्‍डेय

16. आपके ब्लॉग का शीर्षक (http://aapkeblogka.blogspot.com/)
चिट्ठाकार: xyz

17. जवाब …. सभी पहेलियों के (http://pahelikajavab.blogspot.com/)
चिट्ठाकार: बंटी चोर

अजमल कसाब को दूसरे जन्मदिन की बधाई !

Posted: 30 Nov 2010 05:06 AM PST

प्यारे कसाब  !

आज तुम्हारे दो साल पूरे करने पर हम लोग इतने खुश हैं कि जुबान से कुछ कहे नहीं बन पड़ रहा है |

तुम जब से आये हो हमारे सेक्यूलर इंडिया में बहारें आ गयी हैं |

अतिथि देवो भव – मेहमान हमारा भगवान होता है – लेकिन तुम तो अब हमारे घर के एक सदस्य बन गए हो |

अब हमें छोड़ कर जाने का ख्याल भी अपने मन में न लाना – हम जाने ही नहीं देंगे – हमारा दिल जो टूट जायेगा |

देखो न – हमने तुमको कितने जतन से रख रक्खा है – कितनी हिफाजत दे रक्खी है – तुम्हारे हर नाज-ओ नखरे ख़ुशी ख़ुशी उठाते हैं |

तुम्हारी अदाओं पे बलिहारी जाते हैं |

तुम हमारे ऊपर थूक भी देते हो तो हम उसका बिलकुल बुरा नहीं मानते बल्कि हम तो ये समझ कर खुश होते हैं कि चलो कम से कम तुमने हमको अपना तो समझना शुरू किया |

तुम यहाँ जिन्दगी भर रहो ये मुल्क तुम्हारा ही है |

मुफ्त का खाना पीना कपड़े मकान सब तुम पर न्योंछावर हैं |

तुम्हारा मन लगा रहे – बठे बैठे कोफ़्त होती होगी – इसलिए हमने तुम्हारा मन बहलाने के लिए तरह तरह के काले कोट वाले ट्यूटर लगा रक्खे हैं |

वैसे तुम खुद ही सारा इल्म ले कर ही हमारे मुल्क में पैदा हुए थे रखते हो लेकिन फिर भी ट्यूटरों का काम अच्छे भले इन्सान को तोते की तरह पाठ पढ़ाना होता है सो वो अपना काम कर रहें है और उनके मेहनताने की परवाह मत करना – सब मुफ्त में है – खास तुम्हारे लिए |

हमारे मुल्क में कुछ निहायत घटिया किस्म के लोग जो खुद को ईमानदारी से टैक्स भरने वाला कहते फिरते हैं – यूँही बेकार की बकवास करते रहते हैं कि उनके पैसे पर तुम्हारी खिदमत की जा रही है – लेकिन उन बेवकूफों को ज़रा भी इल्म नहीं है कि हम लोग तो यह काम पिछले ६३ सालों से कर रहें हैं और करते रहेंगे जिसका सबूत यह है कि हमने तुम्हारे जैसों को जिन्दगी भर पालने के लिए पड़ोसियों को बार बार दरखास्त दी है – हाथ जोड़ कर गुज़ारिश की है – लेकिन वो हमारी तो सुनते ही नहीं है | पता नहीं कैसे कूढ़मगज पड़ोसियों से पाला पड़ा है |

प्यारे कसाब – जब तुम्हें शादी करने की जिस्मानी जरुरत महसूस होने लगे तो ज़रा भी शर्म मत करना – हमारे सेक्यूलर नेताओं ने तुम्हारे जैसे होनहार को दामाद बनाने के लिए “कवायद” शुरू कर दी है |

हमारे फ़िल्मी सेक्यूलर लोग तो तुम्हारे कारनामों को देख दंग हैं और तुम्हें हीरो की तरह ले कर कई फ़िल्में बनाने का काम शुरू कर दिया है |

कई सेक्यूलर हीरोइनों ने तो तुम्हारी हिरोइन बनाने की हसरत में उनके लड़की ही पैदा हो – ऐसी मन्नतें भी मांगी हैं |

तुम्हारी जिन्दगी इस मुल्क में ऐसी खुशहाल होगी कि तुम ख्वाबों में भी नहीं सोच सकते |

बस तुम्हें थोड़ी डायलौग डिलीवरी सीखनी पड़ेगी और थोड़ा सा कमर मटकाना – बस उसके बाद तो सारे खान चारों खाने चित्त पड़े मिलेंगे क्योंकि तमंचे बन्दूक चलाने और फायटिंग में तो तुम्हें जन्मजात महारत हासिल है |

फिल्मों के बाद तुम सेक्यूलर राजनीति में भी आ सकते हो – सच मानो – पैसा ही पैसा बरसेगा – हींग लगे न फिटकरी और रंग आये चोखा |

बस – हम तो यही फरियाद करते रहेंगे की – परदेसी परदेसी जाना नहीं – हमें छोड़ कर – हम जी न सकेंगे तुम्हारे बिना |

तुम शाद रहो – आबाद रहो – बस इस सेक्यूलर मुल्क में ही रहो – यही तमन्ना है |

:- आनंद जी वर्मा

मुझे मस्त माहौल में जीने दो

Posted: 30 Nov 2010 03:39 AM PST

पूरा भारत इस कालखंड में मस्त है.कोई गांजा पीकर तो कोई अफीम खाकर तो कोई बिना कुछ खाए-पिए.चारों तरफ मस्ती है.मेरी पड़ोसन भी इन दिनों अपने तीनों सयाने हो चुके बेटों के साथ ‘मुन्नी बदनाम हुई’ गाना सुन-सुनकर मस्त हुई जा रही है.नेताओं,अफसरों और जजों की मस्ती तो हम-आप कई बार टेलीविजन पर देख चुके हैं.जनता भी कम मस्त नहीं.मस्ती की बहती गंगा में वो क्यों न डुबकी लगाए?देश की मस्त हालत को देखकर यदि बाबू रघुवीर नारायण आज जीवित होते तो मस्ती में फ़िर से गुनगुनाने लगते लेकिन कुछ परिवर्तन के साथ:-सुन्दर मस्त देसवा से भारत के देसवा से मोरे प्राण बसे दारू के बोतल में रे बटोहिया.महनार में जब मैं रहता था तो मेरे एक पड़ोसी के तीन बेटे थे.पड़ोसी भी राजपूत जाति से ही था.तीनों बेटे माता-पिता की तरह ही मस्त थे.न तो नैतिकता की चिंता और न ही किसी भगवान-तगवान का डर.पड़ोसी के बेटी नहीं थी. जिस पर मेरे एक मित्र का मानना था कि भगवान ने कितना अच्छा किया कि इन्हें बहन नहीं दिया वरना ये उससे ही शादी कर लेते.खैर भगवान को जो गलती करनी थी की.लेकिन इन्होंने उनकी गलती में जरूर सुधार कर दिया.बड़े लड़के ने अपनी सगी फूफी की लड़की से शादी कर ली.अब तो उसके कई बच्चे अवतरित भी हो चुके हैं जो दिन में मेरे पड़ोसी को दादा कहते हैं और रात को नाना.आज का पिता पुत्र को शराब पीने से रोकता नहीं है बल्कि उसके साथ में बैठकर पीता है और पिता का कर्त्तव्य बखूबी निभाता है.वो संस्कृत में कहा भी तो गया है कि प्राप्तेषु षोडशे वर्षे पुत्रं मित्रं समाचरेत.मैं अपनी दादी के श्राद्ध में जब वर्ष २००८ में गाँव गया तो सगे चाचाओं को मस्ती में लीन पाया.भोज समाप्त हो चुकने के बाद रोजाना लाउदस्पिकर पर अश्लील भोजपुरी गीत बजाकर नाच-गाने का कार्यक्रम होता.शराब की बोतलें खोली जातीं और घर के बच्चों को भी इस असली ब्रम्ह्भोज में सम्मिलित किया जाता.कबीर ने ६०० साल पहले मृत्यु को महामहोत्सव कहा था और चाचा लोग अब जाकर इसे चरितार्थ कर रहे थे.गाँव-शहर जहाँ भी मैं देखता हूँ लोग मस्त हैं.स्कूल-कॉलेज के बच्चों से तो मैंने बोलना ही छोड़ दिया है.न जाने कौन,कब मस्त गालियाँ देने लगे या शारीरिक क्षति पहुँचाने को उद्धत हो जाए.एक नया प्रचलन भी इन दिनों बिहार में देखने को मिल रहा है.अधेड़ या कुछ बूढ़े भी इतना मस्त हो जा रहे हैं कि पुत्र जब विवाह कर घर में पुत्रवधू लता है तो उस पर कब्ज़ा जमा ले रहे हैं.ऐसे महान पिता का पुत्र भी कम महान नहीं होता.वह भी जहाँ नौकरी कर रहा होता है वहीँ अपनी मस्ती का इंतजाम कर लेता है.मैं सोंचता हूँ कि इस मस्त माहौल में जब मेरे लिए साँस लेना भी दूभर हो रहा है कैसे जीवित रह पाऊँगा या फ़िर जब मेरे बच्चे होंगे तो उन्हें कैसे मस्त होने से बचा पाऊँगा?मैं मस्त तो नहीं हो सकता (पुराने संस्कारों वाला जो ठहरा) और न ही संन्यास ही ले सकता हूँ (मैं अपने माता-पिता का ईकलौता पुत्र हूँ).तो फ़िर क्या करुँ समझ में नहीं आ रहा.चलिए एक लाईफलाईन का ही प्रयोग कर लेता हूँ.तो औडिएंस आप बताईये मुझे इन परिस्थितियों में क्या करना चाहिए.राय देने के लिए आपका समय शुरू होता है अब.

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