>तथाकथित "देशभक्त" मीडिया

>भाई राजीव दीक्षित के अंतिम दर्शन करने और अंत्येष्टि क्रिया में शामिल होने उसी दिन (३० नव. को) हम चले गएकल ही वापस पहुंचे हैंदुःख की क्या बात करें उसका कोई पारावार नहींमुझे तो स्वामीजी के वो वचन याद रहे हैं किसफल तो हम होंगे ही पर इस बात दुःख होगा कि उस सफलता को देखने के लिए भाई राजीव जी नहीं रहे‘। पर उनके जो विचार हैं और उनका जो चरित्र है वह प्रेरणा देने के लिए उनका संरक्षित कार्य सी डी के रूप में जो हमें उपलब्ध होगा वह ज्यादा से ज्यादा कार्यकर्ताओं को देखना चाहिए जिससे हमारा ज्ञान और समझाने का तरीका विकसित होगा

अब इस राष्ट्रीय मीडिया का हाल देखिये जो व्यक्ति पिछले तीस वर्षों से समाज सेवा में लगा है इस समय भी स्वदेशी के प्रचार और भ्रष्टाचार के विरुद्ध स्वामी रामदेव जी के साथ पूरे समर्पण भाव से लगा था और भारत स्वाभिमान आन्दोलन का सेनापति था उसके निधन का समाचार तक इस तथाकथित “देशभक्त” मीडिया ने नहीं दिखाया , इससे इस देशभक्त मीडिया का भ्रष्ट चरित्र ही उजागर होता है और करोड़ों देशवासी और भारत स्वाभिमान के सदस्य मीडिया के इस दोगलेपन को अपने दिलों में तोल रहे हैं कि कैसे इनके इस चरित्र का तोड़ तैयार करें ?

बिहार में राजकुमारों-रानियों और जातिवादी-भ्रष्टाचार की राजनीति करने वाले बड़े-बड़ों की हार से झुंझलाया-झल्लाया मीडिया तो ख़ुशी मना रहा होगा कि एक ऐसा योद्धा इस दुनिया से चला गया जिसके अभियान से उनकी अय्याशी के साधनों (विदेशी कम्पनियों के विज्ञापनों) में कमी आने का भय था ।

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12 Comments

  1. December 4, 2010 at 4:18 am

    >धिक्कार है इन पर..

  2. ajit gupta said,

    December 4, 2010 at 1:50 pm

    >इस मीडिया के साथ व्‍यंग्‍य में भी देशभक्‍त शब्‍द का प्रयोग ना करें। ऐसी म‍ीडिया जिस देश में होगी वह देश कभी भी उन्‍नति नहीं कर सकती। राजीव जी ने वह कार्य किया था जो आजतक इस देश का कोई भी व्‍यक्ति नहीं कर सका था। अब तो उनकी वाणी गली-गली मुहल्‍ले-मुहल्‍ले बजनी चाहिए।

  3. December 4, 2010 at 2:14 pm

    >अजित जी ने सही कहा, पूर्ण सहमत!!

  4. December 6, 2010 at 3:20 pm

    >मै आपके साथ सहमत हूँ।

  5. December 6, 2010 at 3:24 pm

    >मै आपके साथ सहमत हूँ।

  6. December 7, 2010 at 3:15 am

    >भारतीय मिडिया यानि भड़ुओं की जमात…..ये क्या जाने इंसान किसको कहतें हैं ये तो खुद साले भ्रष्ट मंत्री और उद्योगपतियों के सहारे जिन्दा है…….असल पत्रकार आज रो रहा है और इन भ्रष्ट मंत्रियों और उद्योगपतियों के भडुए इस मिडिया को चला रहा है…..

  7. December 8, 2010 at 8:47 pm

    >अजीत जी से सहमत। आज का मीडीया तो रांडिया के इशारों पर नाचता है, उसे सांप, भूत प्रेत मे ज्यादा रस आता है, बिग बास के खेल मे उसे छुपे हुए जन सरोकार के राज नजर आते हैं राजीव जी के लिए इनके पास समय कहां है?

  8. JAGDISH BALI said,

    December 11, 2010 at 8:45 am

    >आपकी नाराज़गी ज़ायज़ है ! यहां कोतवाल को भी कोतवाली करने वाला चाहिए ! मेरे ब्लोग पर भी पधारें व फ़ोलो करें !!

  9. December 13, 2010 at 7:38 am

    >आपकी इस बात से सहमत नही हुआ जा सकता है कि श्री राजीव या इनके जैसे लोगो के कारण ग़लत काम करने वालो पर कोई प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा. प्रिंट मीडीया के कारण हमे उनके निधन की खबर पता चली. जहाँ तक एलेक्ट्रॉनिक मीडीया का प्रश्न है इसके कर्ताधार्ताओ के लिए तो एक शानदार जूता मार कार्यक्रम आयोजित किया जाना चाहिए.

  10. Manas Khatri said,

    December 15, 2010 at 10:21 pm

    >बहुत ही बढियाँ प्रस्तुति| आप का ब्लॉग पढ़ कर अच्छा लगा|शुभकामनाएं|

  11. Manas Khatri said,

    December 15, 2010 at 10:23 pm

    >बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति..आप का ब्लॉग पढ़ कर बहुत अच्छा लगा**शुभकामनाएं**

  12. December 16, 2010 at 1:05 pm

    >आप मेरे ब्लाग "एक्टिवे लाइफ" पर पधारे के लिए दिल से शुक्रियाआपका ब्लाग "ब्लॉग संसद" का प्रयास अच्छा है मैं आपके ब्लाग को फालो कर रहा हूँ । आप भी कृपया मेरे ब्लाग "एक्टिवे लाइफ" को फालो करें. धन्यवाद…http://sawaisinghrajprohit.blogspot.com/


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