>JANOKTI : जनोक्ति

> h1 a:hover {background-color:#888;color:#fff ! important;} div#emailbody table#itemcontentlist tr td div ul { list-style-type:square; padding-left:1em; } div#emailbody table#itemcontentlist tr td div blockquote { padding-left:6px; border-left: 6px solid #dadada; margin-left:1em; } div#emailbody table#itemcontentlist tr td div li { margin-bottom:1em; margin-left:1em; } table#itemcontentlist tr td a:link, table#itemcontentlist tr td a:visited, table#itemcontentlist tr td a:active, ul#summarylist li a { color:#000099; font-weight:bold; text-decoration:none; } img {border:none;}

JANOKTI : जनोक्ति


एक पत्थर तो तवीयत से उछालों यारों।

Posted: 07 Dec 2010 03:18 AM PST

R S Chaudhary

हिन्दू धर्म आदिकाल से वर्ण व्यवस्था मे बटा हुआ है। इस वर्ण व्यवस्था मे सवसे बुरी स्थिति उन लोगों की है जिन्हे समाज की सेवा का दायित्व दिया गया था। कालान्तर मे उनके कार्यों की प्रकृति के कारण उन्हे अछूत की श्रेणी मे डाल दिया गया। समय बदला और जागरुकता बढने से इनमे से कुछ जातियों ने अपने पैतृक कार्य छोडकर अपनी सामाजिक स्थिति मे सुधार कर लिया लेकिन कुछ जातियां आज भी पुरानी व्यवस्था को ढो रही है। उनमे से एक वर्ग है स्वच्छकारों का जो आदि काल से लोगों के मल उठा कर अपना भरण पोाण कर रही है। यह व्यवस्था विषेषकर पष्चिम उत्तर प्रदेष के जिलो मे प्रचलित है। बदायूं जनपद उनमे से एक है जहां आज भी 2000 से अधिक परिवारों को अपनी जीविका के लिये लोगों का मल उठाना पड रहा है। बदायू का नाम लेते ही एक ऐसे जनपद की तस्वीर उभरती है जहां गरीबी अषिक्षा अपराध और बीमारियां व्याप्त है। यदि ईमानदारी से देखा जाय तो ये सारी समस्याएं वास्तव मे किसी न किसी रुप मे इस जनपद मे व्याप्त है। रामगंगा और गंगा की कटरी मे छोटे मोटे कई गिरोह आज भी सक्रिय हैं। बीमारियों का यह आलम है कि पोलियों और जनपद बदायूं एक दूसरे के प्रर्याय बन गये है। ग्रीष्म ऋतु की शुरुआत होते ही डायरिया का प्रकोप ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों मे होने लगता है और बरसात आते आते यह विकराल रुप धारण कर लेता है। पोलियों और डायरिया के अतिरिक्त बरसात की शुरुआत होते ही अन्य जल जनित बीमारियां भी अपना रौद्र रुप धारण कर लेती है। यही कारण है कि बदायू जनपद जो मेंथा के उत्पादन मे पूरे देष मे जाना जाता है गेहू और आलू की उत्तम फसल पैदा करने वाला यह जनपद आज भी आर्थिक रुप से पिछडा हुआ है। इसके पिछडे होने मे मुख्य रुप से दो कारण है पहली षिक्षा (म्कनबंजपवद) और दूसरा स्वच्छता (ैंदपजंजपवद)।

ग्रामीण क्षेत्रों मे अस्वच्छता का मुख्य कारण सम्पूर्ण जनपद मे दूर दूर तक फैले षुष्क षौचालय है जो बीमारियों के प्रसार मे सहायक सिद्ध हो रहे है। जनपद मे षुष्क षौचालयों को समाप्त करने का बीडा उठाया जनपद मे नवागन्तुक जिलाधिकारी श्री अमित गुप्ता ने। वर्ष 2009 के अक्टूबर माह मे जिलाधिकारी के पद पर तैनाती के बाद से ही श्री गुप्ता को यह बात परेषान कर रही थी कि क्या कारण है कि इस जनपद मे इतनी अच्छी मेन्था,गेहूं,आलू और गन्ने की फसल होने के वावजूद जनपद मे इस कदर पिछडापन व्याप्त है। इसके कारण का पता उन्हे तब चला जब उन्होने जनपद के रमजानपुर गांव का दौरा किया। गांव के दौरे के समय उन्हंे जनपद की असली तस्वीर देखने को मिली। श्री गुप्ता के अनुसार “जब मैने गांव मे घूमकर देखा तो पाया कि गांव के अधिकांष घरों मे षुष्क षौचालय है जो घर के बाहर रास्ते की तरफ खुलते है। इन शुष्क शौचलयों मे मल 24 घन्टे तक पडा रहता है कुछ घरों मे शौचालय और भोजन बनाने के स्थान मे बीच कुछ फीट की दूरी है और कुछ घरों मे तो शौचालय और भोजनालय एक दूसरे से सटे हुए है। ” उन्होने बताया कि यह स्थिति देखते ही उन्हे बात समझ मे आ गयी कि इस समस्या की जड मे क्या है। गांव के भ्रमण से लौटने के बाद तुरन्त वाद उन्होने जनपद के अधिकारियों की एक बैठक बुलाई और जनपद के ग्रामीण क्षेत्रों मे फैले शुष्क शौचालयों को समाप्त करने का बीडा उठाया।

आमतौर पर सरकारी तंत्र जो अपनी अक्षमता और भ्रष्टाचार के लिये जाना जाता है लेकिन श्री गुप्ता ने जिला पंचायत राज अधिकारी श्री आर.एस.चैधरी को इस तंत्र को सबोध्दित कर इस कार्य मे लगाने का जिम्मा सौपा,और श्री चैधरी ने इस काम को बखूबी अन्जाम दिया। गोष्ठी की शुरुआत मे जब श्री चैधरी ने लोगों से पूछा कि कितने लोग है जो 1000; 2000;या 5000 रुपया लेकर रास्ते मे पडे किसी व्यक्ति के मल को उठा कर फंेक सकते है तो वहां पर उपस्थित कोई भी अधिकारी इस काम के लिये तैयार नही हुआ। श्री चैधरी ने कहा कि जब हम किसी रास्ते से गुजर रहे होते है ं और हमारे पैर मे मल लग जाय तो सबसे पहले उसे जमीन की दूब से साफ करते है फिर पानी से साफ करते है और जब घर पर पहुचते हैं तो दो तीन वार साबुन से धोने के बाद भी इस बात की आशंका बनी रहती है कि कही षौच पैर मे लगा तो नही रह गया है। उन्होने कहा कि जिस मल को विशर्जित करने के बाद हम देखना पसन्द नही करते जिसे हम हजार दो हजार और पांच हजार रुपये लेकर भी उठाने को तैयार नही है उसे हमारे जैसा हाड मांस का बना आदमी उठाता है और वह भी एक रोटी के लिये। जब श्री चैधरी ने लोगों से पूछा कि क्या यह उचित है तो उपस्थित सभी अधिकारियों ने एक स्वर से कहा कि यह उचित नही है और इस प्रथा को समाप्त करने मे जो भी उनसे बन पडेगा वे करेगें। यह थी इस अभियान की शरुआत।

जिलाधिकारी श्री गुप्ता ने इसके बाद जिले के सर्वेक्षण का कार्य प्रारम्भ कराया। प्रारम्भिक सर्वेक्षण मे ही जनपद के 73 ग्राम पंचायतों मे पन्द्रह हजार से अधिक शुष्क शौचालयों का पता चला। जिलाधिकारी के निर्देषन मे इन शुष्क शौचलयों को जल प्रवाहित शौचालयोें मे परिवर्तित करने का कार्य शुरु किया गया।

अब समस्या थी कि किस प्रकार इस अभियान को सफल बनाया जाय। क्योकि दोनो समूहो के हित एक दूसरे के विरोधाभासी हैं। इस अभियान की सफलता के लिये आवष्यक था कि दोनो समूहों को इस कार्य के लिये तैयार किया जाय। जिस समय स्वच्छकार समुदाय के लोगों से बात शुरु की गई उस समय मुख्य रुप से तीन समस्याये प्रकाष मे आयी । पहली समस्या इस वर्ग की वे महिलायें थी जो पैतृक रुप से इस पेषे मे लगी हुई थी। इनका मानना था कि यह कार्य उनका पेषा है और वे इसे जीविका का साधन मान रही थी। उन्हे इस कार्य मे किसी प्रकार की बुराई नजर नही आ रही े थी।दूसरा वर्ग वह था जो इस पेषेे स छुटकारा पाना चाह रहा था लेकिन जीविका के अभाव मे मजबूरी मे इस कार्य मे लगा था। एक तीसरा वर्ग जो इस कार्य से मुक्ति चाहता था लेकिन ऐसे लोग जिनके घरों मे शुष्क शौचालय थे दववा के कारण वह इस कार्य से मुक्त नही हो पा रहा था। वास्तव मे इस वर्ग की अपनी समस्या थी। किसी ने न तो इन्हे प्रोत्साहित किया और न ही इन्हे इसकी जानकारी थी। तीनों वर्गो के लिये अलग अलग प्रयास की जरुरत थी और यही कार्य कि अमित गुप्ता जी की टीम ने। जिलाधिकारी ने समाज के सारे पहलुओं पर गम्भीरता से अध्ययन किया और निर्णय लिया कि समाज के उस वर्ग को सवसे पहले इस पहल मे लक्षित किया जाय जो इस कार्य को छोडना चाहते है लेकिन रोजी रोटी के अभाव मे मजबूरी मे इस पेषेे मे लगा हुआ है। इस समूह के पुर्नवास के लिये श्री गुप्ता ने बृहद नीति बनाई। उन्होने शासन द्वारा संचालित योजनाओं का लाभ देकर ऐसे लोगो की इस कार्य पर निर्भरता कम करने का निर्णय लिया। उन्होने जिला पूर्ति अधिकारी को निर्देष दिया कि ऐसे सभी परिवार जो इस कार्य को छोडने को तैयार है को अन्त्योदय या वी0पी0एल0 कार्ड उपलब्ध कराया जाये। निर्देष देने के एक सप्ताह के भीतर ही तीन सौ से अधिक अन्त्योदय और वी0पी0एल0 कार्ड उपलबध करा दिये गये। जिन लोगों के बच्चे षिक्षा ग्रहण कर रहे थे उन्हे विषेष छात्रवृति, पेंषन के पात्र लोगों को प्राथमिकता के आधार पर पेंषन तथा कुछ लोगों को इन्दिरा और महामाया आवास भी उपलबध कराया गया। एक अभियान के तहत सभी स्वच्छकारो को नरेगा मे जाब कार्ड बनवाया गया और उनको तत्काल लाभ पहुचाने के उददेष्य से सभी लक्षित ग्रामों मे एक या दो निर्माण कार्य प्रारम्भ करा दिये गये जिसमे प्राथमिकता के आधार पर स्वच्छकारों को कार्य दिया गया। इसका प्रभाव यह रहा कि ऐसे लोग जो जीविका के अभाव मे मजबूरी मे इस कार्य मे लगे थे उन्होने इस कार्य को छोडने का निर्णय लिया। यह इस अभियान की सकारात्मक शुरुआत थी। इससे उत्साहित होकर जिलाधिकारी श्री अमित गुप्ता ने ऐसे लोग जो शुष्क शौचालयों का प्रयोग कर रहे थें को भी लाभान्वित करने का निर्णय लिया। ऐसे लोग जो शुष्क शौचलयों को प्रयोग कर रहे थे का सवक्षर्णे का कार्य शुरु किया गया। सर्वेक्षण मे पाया गया कि अधिकांष परिवार जो शुष्क शौचालयों का प्रयोग कर रहे है के पास पहले से ही पक्का या कच्चा स्टक्चर है जिसका तत्काल प्रयोग किया जा सकता है। यह भी पाया गया कि ऐसे लाभार्थी जिनके पास पक्का स्टक्चर है के शुष्क शौचालय को को केवल सोलह सौ रुपये खर्च कर जल प्रवाहित शौचालय मे बदला जा सकता है। और शुरु हो गया एक महा अभियान। जिलाधिकारी श्री गुप्ता ने जिला पंचायत राज अधिकारी आर,एस,चैधरी को निर्देष दिया कि ऐसे ग्रामों को प्रथम चरण मे चिन्हित किया जाय जहां काफी संख्या मे शुष्क शौचालय है। और इन ग्रामों मे आवष्यकतानुसार धनराषि उपलब्ध कराई जाय। अब समस्या थी संसाधनों की। प्रथम चरण के चयनित 73 ग्रामों मे सोलह हजार से ज्यादा शुष्क शौचालय थे जबकि जिले स्तर पर केवल 6000 शौचालयोें की धनराषि उपलब्ध थी। इस समस्या के समाधान का रास्ता निकला कि पूर्व के वर्षो मे ग्राम पंचायतों को उपलब्ध कराई गई धनराषि जो ग्राम पंचायतों मे अप्रयुक्त पडी थी उसे एकत्र कर इन ग्राम पंचायतों को उपलब्ध कराया जाय। केवल एक माह के भीतर 1,5 करोड की धनराषि वापस कराकर एक अभूतपूर्व कार्य किया गया। इससे जहां एक ओर स्वच्छकारों को इस पेषे से मुक्त कराने मे मदद मिली वही ग्रामीण क्षेत्रों मे फैली बीमरियों को भी नियंत्रित करने तथा गावों के परिवेष की सफाई मे भी सुधार हुआ। दो महीने के अल्पकाल मे चैदह हजार से अधिक शौचालयों का निर्माण कराकर इक्यावन ग्रामों को पूर्ण रुपेण शुष्क शौचालयों से मुक्त करा दिया गया तथा इन ग्रामों मे अस्वच्छ पेषे मे लगे 566 परिवारों को इस पेषे मुक्त कराया गया। उल्लेखनीय यह था कि जहां लगातार वर्षा के वावजूद जहां कुछ ग्रामों मे केवल 6 और 9 शौचालयों का निर्माण कराया गया वही सकरी जंगल जैसे ग्राम मे दो माह के भीतर 632 रमजानपुर मे 718 शेखूपुर मे 565 खैरी मे 470 शौचालयों का निर्माण कराया गया।

दूसरा समूह जो सामाजिक दववा के कारण इस पेषे को करने को मजबूर था उसके लिये जिलाधिकारी ने शासन के डन्डे का प्रयोग किया। जिलाधिकारी अमित गुप्ता ने सभी उप जिलाधिकारियों को निर्देष दिया कि ऐसे लोग जो स्वेच्छा से मल उठाने का कार्य छोडना चाहते है और गांव का कोई व्यक्ति यदि उन्हे डराता धमकाता है या किसी प्रकार का उत्पीडन करता है तो उसके विरुद्ध सुसंगत धाराओं के तहत कार्यवाही करें और यदि आवश्यक हो तो उनके विरुद्ध गुंडा एक्ट तथा अन्य धाराओं के अन्र्तगत कार्यवाही करे। जिलाधिकारी का यह स्पष्ट निर्देष समाज मे गया जिस कारण कोई भी समूह किसी प्रकार के उत्पीडन की कार्यवाही की हिम्मत नही बना सका। तीसरा समूह जो इस पेषे से स्वेच्छा से जुडा रहना चाहता था उसे विरत कराना एक कठिन कार्य था के लिये विषेष अभियान शुरु किया गया। कहा जाता है कि जहां चाह है वहां राह है। जनपद बदायू मे बाल्मीकी समुदाय के लोगो ंके कई संगठन कार्य करते है जिनमे एक सगठन है बल्मीकी सेना इसके अध्यक्ष मुकेष बल्मीकी अक्सर जिला पंचायत राज अधिकारी के पास समस्याएं लेकर आया करते थे। मुकेष एक दिन एक सफाई कर्मी की समस्या लेकर जिला पंचायत राज अधिकारी से मुलाकात की। जिला पंचायत राज अधिकारी श्री चैधरी ने मुकेष से कहा कि वे उनका काम तब करेगे जब वे इस अभियान मे उनका सहयोग करे। मुकेष सहर्ष तैयार हो गये। उन्होने अपने समुदाय के कुछ अन्य प्रभावी लोग जिनमे कालीचरन प्रमुख है को साथ मे लिया और निकल पडे इस महा अभियान पर। इस कार्य मे जीप और पोस्टर पंचायत राज विभाग द्वारा उपलब्ध कराया गया। नया सबेरा नाम का पोस्टर गावों मे वास्तव मे नया सवेरा ला दिया। बाल्मीकी समुदाय के लोगों की एक बात जो समुदाय पर सबसे अधिक प्रभाव डाली वह थी कि अगर ऐसे लोग जो मल उठाने का कार्य कर रहे है वे इस कार्य को नही छोडेगंे तो वे लोग न उन्हे अपनी बेटी देगें और न ही उनकी बेटी लेगें। इन लोगों ने समाज के लोगों मे आत्मविष्वास भरने का भी काम किया। उन लोगों ने समाज के लोगों को बताया कि वे महर्षि बाल्मीकी के बंषज है और महर्षि बाल्मीकी जी ने रामायण की रचना की उन्होने लव और कुष की परवरिष की ऐसे महापुरुष के बंषज होने के बाद भी उन पर मैला ढाने का कलंक लगा है उन्होने लोगों को प्रेरित किया कि वे इस कार्य को छोडे। बल्मीकी समुदाय के लोगो का प्रभाव यह रहा कि ऐसे लोग जो इस पेषे को अपनी रोजी रोटी का साधन मानते थे उन्होने भी इसको छोडने का मन बनाया। एक बात और प्रभावी रही। बल्मीकी समाज के लोग जब गावों मे जाते थे तो वे लोगों से पूछते थे कि जब गांव के लोग भिखारी को भीख देते है तो वे लोग उससे कितना दूरी बनाते है तो लो कहते कि उससे कोई दूरी नही बनाते है और फिर उनसे पूछते कि जब आप सिर मैला लेकर किसी रास्ते से गुजर रहे होते है तो लोग क्या करते है तो लोग कहते कि एक तो लोग मुह को हाथ से बन्द कर लेते है और दूसरे उनसे कई फीट की दूरी बना लेते है। इस पर वे लोग पूछते कि तो आप बताये कि आपकी स्थिति उस भिखारी से भी बदतर हुई कि नही। यह बात लोगों के जेहन मे बांड की तरह चुभी; और ऐसे लोग जो किसी भी कीमत पर इस कार्य को छोडने के लिये तैयार नही थे एक ही प्रयास मे इस कार्य से विमुख हो गये।

अभियान की सफलता के लिये आवष्यक था कि सरकारी तंत्र के समानान्तर स्वतंत्र तंत्र विकसित किया जाय। इसके लिये विकास खण्ड स्तर पर ब्लाक प्रेरक और ग्राम स्तर पर ग्राम प्रेरको की तैनाती की गई। आमतौर प्रेरको के मानदेय के भुगतान मे देरी के कारण प्रेरक निष्क्रिय हो जाते है इसलिये ग्राम प्रेरको को समय से भुगतान सुनिष्चित करने के लिये लक्ष्य के अनुरुप प्रेरको का मानदेय ग्राम पंचायत के खाते मे स्थानान्तरित कर दिया गया। ग्राम पंचायत के ग्राम प्रधान तथा ग्राम पंचायत अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि समय समय पर प्रेरको के मानदेय का भुगतान करें। प्रेरको के मानदेय के भुगतान ने इस अभियान मे काफी गति प्रदान की। ब्लाक मोटीबेटर को पांच हजार प्रतिमाह आर्थिक मदद यूनिसेफ से प्राप्त होना भी इस अभियान को सफल बनाया।

जिले स्तर से ग्राम प्रधान और ग्राम स्तरीय प्रेरको के प्रषिक्षण की कार्यवाही भी की गई। प्रेरकों को नियमित रुप से प्रेरित करने के उददेश्य से जिला स्तर से जिला समन्वयको द्वारा ग्रामों का भ्रमण किया गया।

इस अभियान की सफलता मे त्वरित कार्यवाही तथा प्रभावी अनुश्रवण का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। धनराषि के हस्तान्तरण मे जहां जिलाधिकारी एवं मुख्य विकास अधिकारी ने जिला पंचायत राज अधिकारी को पूरी स्वायत्ता दे रखी थी।धनराषि के स्थानान्तरण मे जिला कार्यालय मे तैनात सहायक श्री रोहताश कुमार तथा सर्व यू0पी0 ग्रामीण बैंक सिविल लाईन शाख के मैनेजर श्री रणवीर सिंह ने भी अभूतपूर्व सहयोग किया। सी0वी0एस0 खातों मे धनराषि कुछ मिनटो मे ही स्थानान्तरित कर दी गई। यदि किसी शाखा मे धनराषि के आहरण मे किसी प्रकार की समस्या आई तो श्री सिंह ने स्वयं फोन पर बात कर उस समस्या का निराकरण कराया। बैंको द्वारा किया गया सहयोग भी इस अभियान मे गति प्रदान किया। जिलाधिकारी ने प्रभावी अनुश्रवण के लिये प्रतिदिन मेल के माध्यम सायं काल सूचना प्राप्त करने की व्यवस्था भी बना रखी थी। सायं काल जिला पंचायत राज अधिकारी को सभी ग्रामों की प्रगति रिर्पोट प्राप्त कर लक्ष्य और पूर्ति का विवरण प्रस्तुत करना होता था। जिलाधिकारी प्रातः आठ बजे प्राप्त सूचना की समीक्षा करते और विगत दिन की सूचना से मिलान करके प्रगति के संबन्ध मे खण्ड विकास अधिकारियोें उप जिलाधिकारियों तथा जिला पंचायत राज अधिकारी से वार्ता करते। प्रभावी अनुश्रवण के लिये जिलाधिकारी श्री गुप्ता ने प्रत्येक विकास खण्ड के लिये एक वरिष्ठ अधिकारी को नोडल अधिकारी नियुक्त किया और शौचालय निर्माण तथा पुर्नवास की प्रगति की समीक्षा के लिये उत्तरदायी बनाया। उप जिलाधिकारियों की नियमित समीक्षा से प्रषासन का भी सहयोग विकास कार्य मे मिला। यह जनपद के लिये एक नया प्रयोग था जो पूरी तरह सफल रहा। इस कार्य के सफल संचालन मे खण्ड विकास अधिकारियों का योगदान सराहनीय रहा। खण्ड विकास अधिकारियों द्वारा लगातार गांव गांव मे गोष्ठियों का आयोजन किया जा रहा है तथा विकास खण्ड स्तर पर प्रभावी समीक्षा की जा रही है।

सराकरी तंत्र से जुडे लोेगों के घरों मे शौचालयों के निर्माण कराने का भी शुरु किया गया। जिले मे जितने विभाग है उनमे कार्यरत कर्मचारियों के घरों मे शौचालयों के उपलब्धता की जानकारी एकत्र की जा रही है जिन लोगों के घरों मे शौचालय नही है उनको शौचालय निर्माण के लिये प्रेरित किया जा रहा है और इसके सकारात्मक परिणाम भी आये है षिक्षा विभाग के षिक्षा मित्रों से लेकर राशन के कोटेदार तक के घरों मे शौचालयों का निर्माण शुरु हो गया है।

अभियान के प्रभावी अनुश्रवण मे जनपद मे उपलब्ध संसाधनों का भी अहम रोल रहा है। जिलाधिकारी श्री गुप्ता ने अपने एक वैक्तिक सहायक को पूरी तरह से इस कार्य की समीक्षा पर लगा रखा है। जिला पंचायत राज अधिकारी कार्यालय मे स्थापित तीन डेस्कटाप तथा चार लैपटाप सूचनाओं के आदान प्रदान और संकलन मे प्रभावी रहे। कार्यालय मे तैनात लगभग सभी सहायक कम्प्यूटर फ्रेन्डली हैं। जिले मे तैनात डिस्टिक्ट कोआर्डिनेटर कनवर्जेंस मुहम्मद सावेज यूनिसेफ के जिला समन्वयक परीक्षित सेठ जिला समन्वयक सम्पूर्ण स्वच्छता अभियान जाबाज द्वारा इन्टरनेट के माध्यम से अभूतपूर्व प्रयास किया गया।

आज जनपद बदायू उत्तर प्रदेष के लिये एक रोल माडल बन गया है। बकौल अमित गुप्ता यदि सब कुछ ठीक रहा है तो दिसम्बर तक सम्पूर्ण जनपद को षुष्क शौचालय मुक्त कर दिया जायेगा। विगत सैकडो वर्षो से समाज मे भेदभाव का दंष झेल रहे इस समुदाय को एक नया सवेरा देखने को मिला है, तथा जनपद को पोलियों मुक्त करने की दिषा मे एक नई रोषनी। श्री अमित गुप्ता और उनकी टीम को बधाई।

ये परदा हसता है….

Posted: 07 Dec 2010 02:41 AM PST

सिनमाई परदा बहुत कुछ कहता है…मसलन ये ना सिर्फ मंनोरंजन एक माध्यम है  बल्कि अभिव्यक्ति का एक हस्ताक्षर भी है.. इस माध्यम से अभिव्यक्ति का एक सशक्त हस्ताक्षर है..हास्य। सिनमाई परदें पर एक्शन .से भी ज्यादा लोगो हास्य को स्वीकार किया है…।यही कारण  साल भर में रिलीज होनेवाली फिल्मो में ज्यादातर फिल्म हास्य प्रधान होती हैं।..ये फिल्में लोगों केबीच ज्यादा यादगार तो होती ही हैं ज्यादा से ज्यादा याद भी की जातीहैं यही कारण है कि हर कलाकार पर्दे पर एक हास्य औरयादगार भूमिका निभाने के लिए लालयित रहता हैं। भारतीय परिवेश में उन फिल्मों को सफल माना जाता है जो
दर्शकों को हंसने पर मजबूर कर दें।दसअसल आज का दर्शक मल्टीप्लेक्स कल्चर में एक मोटीरकम खर्च कर विशुद्ध मंनोरंजन  की उम्मीद करता है…।और उसका ये मंनोरंजन पूरा होता है हास्य फिल्मो सें। वैसे हास्य प्रधान फिल्मों हमेशा ही सराहा गया है…फिर बातचाहे चलती का नाम गाडी से हो या फिर मुन्ना भाई हो….।कॉमेडी फिल्मों की कामयाबी यही है कि उसे हम अपनी जिंदगी की उलझनों के करीब पाते हैं।जो फिल्में हमारी जिंदगी के बीच जितनी करीब होती हैं वो उतनी सफल हो पातीहैं। किशोर कुमार की हाफ टिकट,कमल हसन की पुष्पक और चाची चार सौ बीस..से लेकर पंकज अडवाणी की अनरिलीज्ड उर्फ प्रोफेसर एक मिशाल हैं लोगों के दिलों में घर कर जाने और फिल्म इतिहास मेंमील का पत्थर साबित होने में…। गोलमाल में जिस तरह से जहीन हास्य को जिदंगी से जुडे किसी प्रगतिशील मूल्य से जोडागया है वह अपने आप में
अमूल्य हैं…।ऋदि दा की रिपीट फिल्मों में गोलमाल एक मील कापत्थर है….।इस फिल्म के लिए अमोल पालेकर को बेस्ट एक्टर का फिल्म फेयर का अवार्ड दिया गया था…।१९७९ में आई गोलमाल के बाद १९८२ की अंगूर..को फिल्मों में शेक्सपीयर का आगमन माना जाता है…इस फिल्म में गुलजार साहब
ने शेक्सपीयर के नाटक कामेडी ऑफ एरर्स को क्याखूब तरीके से हिंदुस्तानी लिबास पहनाया है…। वहीं चलती का नाम गाडी(१९८५) में हिंदी सिनेमा के आलराउंडर किशोर कुमार और दोनो भाईयों दादा मुनि और अनुप की बेमिशाल जोडी की धरोधऱ हैं। गोल्डन फिफ्टी की यह एक मशहूर कामेडी फिल्म है….।वहीं १९८१ में आई चश्मे बदूर अपने समय की बेहतरीन फिल्म है जिसकी खाम बात इस फिल्म में अपने समय और परिवेश में रचा बसा हास्य हैं।इसके कई संवादों में उस समय की कालेज लाइफ का कोई ना कोई संदर्भ जरूर है…।तो १९८३ मेंहिंदी सिनेमा में व्यंग्य के क्षेत्र में आई सबसे  बडीकेल्ट क्लासिक है जाने भीदो यारो।मात्र कामेडी ना होकर एक स्याह रंग लिए यह फिल्म विकास की अंधी दौड में शामिल लिबरल हिंदुस्तान की जीती जागती मिशाल हैं।२००६ में आई खोसला का घोंसला दिल्ली के मिडिल क्लास तबका पेशा लोगों की ऐसीकहानी है
जो कहीं कहीं हमारी जिंदगी के कुछ कतरन उधार लेकर बनाई गई है। निर्देशक दिबाकर मुखर्जी की पहली फिल्म और हिंदी सिनेमा की मार्डन कल्ट कही जाने वाली यह हिंदी सिनेमा में ऋषिकेश दा ,बासु चर्टजी,और संई पराजंपे की परंपरा को आगे बढाती हैं।तो वहीं२००६ की ही केमिकल लोटा वाली फिल्म लगे
रहो मुन्ना भाई…एक ऐसा हिंदुस्तानी पब्लिक मेल है जिसने लोगों के दिलो में ही नहीं बाद में मुस्कुराने को मजबूर कर दिया।एक मौलिक कहानी के साथ साथ इस फिल्म में कई प्रांसगिक संदेश भी हैं..जो हमें कदम कदम पर सोचने को मजबूर करते हैं।….. 

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: