>JANOKTI : जनोक्ति

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JANOKTI : जनोक्ति


जब थोड़ी दूर हीं थे चले

Posted: 08 Dec 2010 06:59 AM PST

जिंदगी की राह पर हम कदम ज्यों हीं रखे ,

ज़मीन खिसक गयी पैरों तले जब थोड़ी दूर हीं थे चले |

 

इन्सान भूल चुका था इंसानियत ,

परदे के पीछे से छलकती थी हैवानियत ,

हर कोई था खुद के नशे में चूर ,

इंसानियत थी उनसे कोसों दूर ,

ईमान बिक रहा था सारे आम बाज़ार में ,

और पता नहीं , हम क्यूँ खड़े थे आस लगाये इंसानियत की चाह में |

 

हर जगह छला गया औहाम में जीता रहा ,

अहरमन के जाल में हर वक़्त मैं फंसता रहा ,

इहतिदा की खोज में फंस गये मेरे गले ,

ज़मीन खिसक गयी पैरों तले जब थोड़ी दूर हीं थे चले |

 

थी आस माँ की लाल मेरा करके कुछ दिखायेगा ,

एक अहल आदम बनेगा ,नाम खूब कमाएगा ,

अज़हरे दिल माँ का था कौन समझाता उसे ,

किस तरह हम जिंदगी की राह में आकर फंसे ,

हर चेहरे पर नया चेहरा लगा दिखा हमें ,

दास्तान-ए-दिल का हम जाकर बयाँ करते किसे ,

हिंद-ए-रखवाले से हीं हिंद शर्मसार है ,

अफसर-ए-बलादस्त भी आज यहाँ बेकार है ,

अफज़ले हो हिंद इसका है यहाँ सबको फिकर ,

सुबहो-शाम इसी बात का घर-घर में होता है जिकर ,

आज ज़िक्र हीं सिरफ़ बना मसले -निदान है ,

हम फ़ातिरे बनकर जियें बस यही फ़रजाम है |

 

हैं सोचते सब कि फ़राखे हौसला कोई आएगा ,

जो हिंद-ए-ज़ुल्म को जड़ से यहाँ मिटाएगा ,

मसला है ,बिल्ली के गले में घंटी कौन लटकायेगा ,

हम जिंदगी की राह पर थे ले खड़े ये सिलसिले ,

ज़मीन खिसक गयी पैरों तले जब थोड़ी दूर हीं थे चले |

भारत और इंडिया का अंतर पाटने की योजनायें

Posted: 08 Dec 2010 02:48 AM PST

भारत और इण्डिया। दुनिया के सबसे बड़े लोकतन्त्र के यह दो रूप हैं।। दोनों में अन्तर है। अन्तर है विकास का, सुविधाओं का । बहरहाल सरकार इस अंतर को पाटना चाहती है। कहीं बुनियादी जरूरतों से वंचित न रह जाए इसके लिए केन्द्रीय कार्यक्रमों की एक लम्बी फेहरिस्त है। जहां गांव में भारत निर्माण किया जा रहा है। वहीँ  शहरों की बुनियादी सुविधाओं के लिए जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीकरण की शुरूआत की गई है। ग्रामीण विकास के महत्वपूर्ण कार्यक्रम निम्नलिखित है।

इन्दिरा आवास योजना

1985 से शुरू हुई इस योजना का मकसद हर गरीब को छत मुहैया कराना है। इस योजना के तहत सरकार पहाड़ी इलाको में 45000 और प्लेन इलाकों में 48500 रूपये मुहैया करा रही है। 2017 तक हर गरीब परिवार को छत मुहैया कराने का लक्ष्य रख गया है।

प्रधानमन्त्री ग्राम सड़क योजना

2000 से astitw  में आई इस योजना का मकसद ग्रामीण भारत में बारहमासी सड़कों का जाल फैलाना है। बहरहाल इस योजना का मकसद हर गांव को जिसकी आबादी पहाडी क्षेत्र में 250 और सामान्य क्षेत्र में 500 हो को बारहमासी सडकों से जोड़ना है।

सम्पूर्ण स्वच्छता अभियान

हर घर में शौचालय के निर्माण के लिए केन्द्रीय सहायता प्रदान करना। बहरहाल इस योजना को देश में के 606 जिलों में क्रियान्वयित  किया जा रहा है। प्राथमिक स्कूलों और आंगनवाड़ी को भी शामिल गया है। लगभग 40 फीसदी ग्रामीण आबादी को अभी इस योजना के दायरे में लाना है।

महात्मा गांधी नरेगा

2006 में अमल में आए इस कानून के तहत हर परिवार को साल में 100 दिन रोजगार पाने का अधिकार है। ग्रामीण विकास मन्त्रालय के बजट का सबसे बड़ा भाग इस योजना के पास है। अकेले 2010-11 के लिए इस योजना को 41100 करोड़ आवंटित किये गए है।

स्वर्ण जयन्ती ग्राम स्वरोजगार योजना

बेरोजगारी को समाप्त करने की दिशा में यह कार्यक्रम मील का पत्थर साबित हो रहा है। यह कार्यक्रम 1999 में सामने आया। इससे पहले यह एकीकृत ग्रामीण विकास कार्यक्रम के नाम से जाना जाता था। खासकार उन युवाओ के लिए जो अपने पैर पर खड़ा होना चाहते है। सरकार ऋण पर सब्सिडी देती है। व्यक्तिगत तौर पर यह सब्सिडी 30 फीसदी और अनुसूचित जाति जनजाति और विकालांगों के लिए 50 फीसदी है। स्वयं सहायता समूह को भी 50 फीसदी सब्सिडी देने का प्रावधान है। बहरहाल इस कार्यक्रम का भी नाम बदलकर अब ग्रामीण आजीविका मिशन रख दिया गया है।

मां का दिल

Posted: 08 Dec 2010 12:16 AM PST

बात पुरानी है !  राजा-महाराजाओं का जमाना था !  एक बलोच (ऊंट पालने वाले को बलोच कहते हैं) की एक ऊंटनी गुम हो गई !  काफी खोज-बीन के बाद उस ऊंटनी का सुराग लगा ! ऊंटनी एक सेठ के घर बन्धी थी !  बलोच ने सेठ से ऊंटनी वापिस करने को कहा !  सेठ ने साफ इंकार कर दिया !  वह उसे अपनी ऊंटनी बताता था !

बात बढ गई !  लडाई – झगडे की नौबत आ पहुंची !  लोगों के समझाने-बुझाने पर दोनो राजा के दरबार में जाने को राजी हो गए !  भरे दरबार में मुकदमा शुरू हुआ !  बलोच कहता था ऊंटनी मेरी है और सेठ कहता था ऊंटनी मेरी है !

राजा ने बलोच से पूछा – “तुम कहते हो कि ऊंटनी तुम्हारी है !  तुम्हारे पास इस बात का कोई सबूत है ?”

बलोच बडे अदब से एक कदम पीछे हट कर, झुक कर बोला – “जनाब, एक सबूत है !”

“क्या ?” – सेठ ने घूरा !

“क्या ?” – राजा ने पूछा !

“महाराज, अगर ऊंटनी को मारकर इसके दिल को चीरकर देखें तो उसमें आपको तीन सुराख मिलेंगे !”  बलोच ने उत्तर दिया !

राजा हैरान !  सेठ हैरान !  दरबारी हैरान !  सभी हैरान !

“यह तुम कैसे कह सकते हो कि इसके दिल में तीन सुराख हैं !”  राजा ने आश्चर्य से पूछा – “तुम ज्योतिष विद्या जानते हो क्या ?”

“महाराज” – बलोच ने बडे अदब से उत्तर दिया –”जब किसी मां का बेटा भरी जवानी में मर जाता है तो उस मां के दिल में एक सुराख हो जाता है !  जो जिन्दगी भर नहीं भरा जा सकता !  इस ऊंटनी को मैंने बचपन से पाला है !  इसकी आंखों के सामने इसके तीन बेटे एक के बाद एक भगवान को प्यारे हो गए !  इसलिए इसके दिल में तीन सुराख अवश्य मौजूद होंगे !  मां का दिल जो ठहरा !”

दरबार में सन्नाटा-सा छा गया !  सभी हैरानी से एक-दूसरे का मुंह ताकने लगे !

कहने की जरुरत नहीं कि राजा ने सेठ की सफाई सुनने की भी आवश्यकता न समझी !  ऊंटनी बलोच के हवाले करने का हुक्म दे दिया !

khuranarkk@yahoo.in

Ram Krishna Khurana

बाबरी की आड़ में बंद करो ये आतंकी खेल !

Posted: 07 Dec 2010 11:41 PM PST

6 दिसंबर को बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर की जयंती पर आयोजित ‘ सामाजिक समरसता दिवस ‘ के एक समारोह में राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर बोलते हुए मैंने आतंरिक सुरक्षा को देश का सबसे बड़ा खतरा बताया था | हालाँकि समारोह में कुछ लोगों ने अनुसार अब भारत आतंरिक तौर पर सुरक्षित है क्योंकि ओबामा आये और बड़ाई करके गये हैं , अभी -अभी राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान सब कुछ शांतिपूर्वक संपन्न हो गया , फ़िर कहाँ है आतंरिक सुरक्षा को खतरा ? तो इस सवाल का जबाव बनारस के घाट पर हुए आतंकी हमले ने दिया |

मंगलवार की शाम साढ़े छह बजे गंगा आरती के दौरान शीतला घाट जबरदस्त बम विस्फोट से दहल गया। इस बम विस्फोट में लगभग दो दर्जन लोग घायल हुए हैं, जबकि अस्पताल में उपचार के दौरान एक बच्ची की मौत हो गई। घायलों में आधा दर्जन विदेशी नागरिकों के होने की सूचना है। विस्फोट तब हुआ जब गंगा आरती चल रही थी। विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि घाट की रेलिंग और सीढि़यों के पत्थर तक उखड़ गये।

आतंक के इस खेल में केंद्र सरकार की भूमिका पिछले पांच सालों में शक के दायरे में आती है | दिल्ली , जयपुर , बनारस और मुंबई जैसे घातक आतंकी हमलों के दौरान केंद्र ने कोई भी ठोस कदम नहीं उठाया | हाँ , इसी सरकार ने दिल्ली में कोमनवेल्थ जरुर कराए क्योंकि ये उसकी प्रतिष्ठा का सवाल था ! लोग मरते हैं तो मरने दो , इन्हें तो 2G कमीशन से अपनी जेब भरने से फुरसत नहीं है | आतंकवाद निरोधक कानून ‘पोटा’ समाप्त कर दिया , अफजल गुरु अब तक जिंदा है , बटला हाउस कांड के आतंकियों को बचाने के लिए दिग्विजय आजमगढ़ की यात्रा करते हैं , कसाब की सुरक्षा में करोड़ों खर्च किया जा रहा है , लेकिन अफ़सोस कि इस सरकार ने एक भी ऐसा काम नहीं किया है जिससे देश में हो रहे आतंरिक हमलों पर रोक लगे और आतंकियों में खौफ पैदा हो ! ये सरकार पूरे देश के मुसलमानों को आतंकियों का समर्थक मानने की भूल कर रही है | केंद्र की नीतियों ने हीं देश के मुसलमानों को आतंकी होने का दाग लगाया है | बिहार के चुनाव परिणाम देख कर भी कांग्रेस आलाकमान नहीं संभल रही है | सोनिया की खडाऊं सरकार ये समझ ले तो बेहतर है कि अब आतंकियों का साथ देना या उनके प्रति नर्म रुख बनाये रखना उनको भारी पड़ेगा |

समाचार चैनलों के मुताबिक शीतला घाट पर हुए हमले की जिम्मेदारी इन्डियन मुजाहिद्दीन ने ली है | इन्डियन मुजाहिद्दीन ने मेल में कहा है कि ये ब्लास्ट बाबरी मस्जिद विध्वंश का बदला है | खैर , मीडिया में भी कई ऐसे लोग बैठे हैं जो इस कुत्सित औरत गैर-मानवीय काम को बदले की तराजू पर तौल कर सही ठहराने की कोशिश करते रहे हैं और अभी भी कर रहे होंगे ! लेकिन इन्डियन मुजाहिद्दीन या फ़िर ये तथाकथित सेक्युलर मीडियाकर्मी सबसे ये सवाल है कि कब तक बाबरी की आड़ में बदले का यह आतंकी खेल चलता रहेगा ? और अगर बदला ही न्याय है , बदला ही सही है तो फ़िर आगे बनारस के घाट पर आरती करते हुए विस्फोट के शिकार लोगों का कोई परिजन आतंकी बनेगा तो उसका जिम्मेदार कौन होगा ?

इन्डियन मुजाहिद्दीन का मेल पीडीएफ फ़ाइल में नीचे संलग्न है |

Indian Mujahideen

बनारस घाट हमले का करें लोकतान्त्रिक विरोध : डॉ तोगड़िया

Posted: 07 Dec 2010 10:48 PM PST

काशी में गंगा आरती के समय प्राचीन शीतला माता घाट और दशाश्वमेध घाट के बीचो बीच धमाका यह सादी आतंकी घटना नहीं हो सकती | मंगलवार के ही दिन 2006 में काशी के संकटमोचन मंदिर में धमाका हुआ था ; गंगा आरती के समय मंगलवार को ही धमाका कर गंगा आरती बीच में रोकने का यह जेहादी षड्यंत्र भारत की श्रद्धा और भारत का धार्मिक ह्रदय काशी इन दोनों पर घिनौना हमला है! कपूर आरती चल रही थी, हजारो श्रद्धालु गंगा माँ की पूजा में जुटे थे , अनेको पंडित मंत्रोच्चार कर रहे थे , छोटी छोटी गरीब बच्चियाँ नावों में बैठे हजारों श्रद्धालुओं को पत्ते के कोण में रखे दीप गंगा माँ में बहाने के लिए बेच रही थी , युवा पंडित हाथों में वजनदार अनेकों बातियों की आरतियाँ लेकर गंगा माँ की प्रार्थना कर रहे थे , ऐसे में यह धमाका करना केवल विकृत मानसिकता का परिचय नहीं; यह तो भारत की अतिप्राचीन और विश्व की एकमेव जीवित नगरी ख़त्म करने के लिए जान बूझ कर किया हुआ जेहाद है ! उसी समय आस पास की मस्जिदों में अजान चल रही थी और गंगा माँ की आरती के सारे सूर, मन्त्र, ताल रोकना और हिंदुओं की पूजा में विघ्न लाना यह उसी प्रकार का घिनौना जेहाद है जिस के तहत कभी काशी विश्वनाथ मंदिर, बिंदुमाधव मंदिर और कई ऐसे मंदिर तोड़े गए, अयोध्या का राम मंदिर तोडा गया! मुंबई में ताज पर हमला करनेवाली यही जेहादी मानसिकता है! हिंदुओं को ‘भगवा आतंकी’ कहकर उन्हें बदनाम कर हिंदू साधू संतों को जेल भेजनेवाले, आश्रमों में, आश्रमों के मंदिरों में बूट चप्पल पहनकर, तलाशी लेने के बहाने हिंदुओं का अपमान कर रहे हैं, जो मुस्लिम मतों के लिए घुटने टेक रहे हैं, क्या अब वे यह हिम्मत दिखाएँगे की आस पास की मस्जिदों में तलाशी लें कि वहाँ अब क्या है? काशी के 80 घाटों पर हिंदुओं की परंपरागतगत पूजाएँ, विधि चलते हैं, वहाँ हिंदू धर्म ना माननेवाले फिरंगियों का, गंगा आरती में श्रद्धा से आने वाले हिंदुओं को धक्के मारकर मजाक उड़ानेवाले टोपीवालों का क्या काम? तुरंत काशी के सभी घाटों पर अहिंदुओं का प्रवेश वर्जित किया जाय, काशी विश्वनाथ मंदिर की गली में और काशी की सभी गलियों में जहाँ जहाँ करीबन ६०० से अधिक प्राचीन मंदिर, तीर्थ, कुण्ड, कूप हैं, वहाँ अहिंदुओं का प्रवेश वर्जित किया जाय, सुरक्षा के नाम पर हिंदुओं को सतानेवाले क्या कर रहे थे जब गंगा माँ का ह्रदय चीर दिया गया, भगवान् शंकर का डमरू जब उस धमाके से छिन्न विछिन्न होकर गंगा किनारे पड़ा रहा, कइयो श्रद्धालू घायल हो गए, गंगा माँ की पूजा के लिए पहुंचाया गया दूध भी क्या अब सुरक्षित नहीं है काशी में? विदेशी टूरिस्टों के भेस में कौन आते हैं, घाटों पर क्या करते हैं, कौनसे वीसा पर ठहरते हैं, यह तलाशी केवल इसीलिए नहीं की जाती क्यों की फिरंग पूजा और मुस्लिम तुष्टिकरण में देश की सुरक्षा ताक पर रखी जा रही है – जिसमें डेविड हेडली जैसे कई जेहादी घुस कर भारत को घायल कर रहे हैं ! अगर हाज हॉउस में, मस्जिदों में हिंदुओं को प्रवेश नहीं, तो हिंदुओं की देव नगरी काशी के घाटों पर, मंदिरों – तीर्थो, कुंडो कूपों पर अहिंदुओं को प्रवेश क्यों? यह प्रवेश तुरंत वर्जित किया जाय और काशी को ‘विश्व संरक्षित धरोहर’ घोषित कर काशी के लिए सुरक्षा दी जाय I काशी में जितने मदरसे हैं उन्हें तुरंत ताला लगाया जाय और आस पास की मस्जिदों में हिंदू संतों के समक्ष अभी तलाशी ली जाय I काशी के और संपूर्ण देश और विश्व के हिंदुओं को विश्व हिंदू परिषद् आवाहन करती है की इस घिनौने जेहादी हमले का विरोध लोकतांत्रिक पद्धति से करे और जब तक अहिंदुओं को काशी के घाटों, मंदिरों, तीर्थो, कुण्डों, कूपों पर प्रवेश वर्जित ना किया जाय तब तक यह लोकतांत्रिक आंदोलन जारी रखे I

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