>बौद्धिक खतना करवा चुके लोग चले फ़िलीस्तीन… पाकिस्तान द्वारा वीज़ा देने से इंकार… Caravan to Palestine, Pakistan and Israel, Indian Seculars and Communists

>कुछ दिनों पहले एक पोस्ट में सूचना दी थी, कि भारत के कुछ सेकुलर और वामपंथी संगठनों के छँटे हुए लोग फ़िलीस्तीन के प्रति एकजुटता(?) दिखाने और इज़राइल की “अमानवीय”(?) गतिविधियों के प्रति विरोध जताने के लिये एशिया के विभिन्न सड़क मार्गों से होते हुए गाज़ा (फ़िलीस्तीन) पहुँचेंगे, जहाँ वे कुछ लाख रुपये की दवाईयाँ और एम्बुलेंस दान में देंगे… (यहाँ क्लिक करके पढ़ें)

अन्ततः वह दिन भी आ गया जब 50 से अधिक बौद्धिक खतना करवा चुके कथित बुद्धिजीवी नई दिल्ली के राजघाट से प्रस्थान कर गये। जैसा कि पहले बताया जा चुका है कि ये लोग पाकिस्तान-ईरान-तुर्की-सीरिया-जोर्डन-लेबनान-मिस्त्र होते हुए गाज़ा पहुँचने वाले थे, लेकिन इस्लाम का सबसे बड़ा पैरोकार होने का दम्भ भरने वाले और तमाम आतंकवादियों को पाल-पोसकर बड़ा करने वाले पाकिस्तान ने इन लोगों को इस लायक नहीं समझा कि उन्हें वीज़ा दिया जाये। पाकिस्तान ने कहा कि “सुरक्षा कारणों” से वह इन लोगों को वीज़ा नहीं दे सकता (यहाँ देखें…) (यानी एक तरह से कहा जाये तो फ़िलीस्तीन के मुस्लिमों के प्रति, तथाकथित सॉलिडेरिटी दिखाने निकले इस प्रतिनिधिमण्डल की औकात पाकिस्तान ने दिखा दी, औकात शब्द का उपयोग इसलिये, क्योंकि प्रतिनिधिमण्डल में शामिल जापान के व्यक्ति को तुरन्त वीज़ा दे दिया गया)। झेंप मिटाने के लिये, इस दल के मुखिया असीम रॉय ने कहा कि “हमारी योजना लाहौर-कराची-क्वेटा और बलूचिस्तान होते हुए जाने की थी, लेकिन चूंकि अब पाकिस्तान ने वीज़ा देने से मना कर दिया है तो हम तेहरान तक हवाई रास्ते से जायेंगे और फ़िर वहाँ से सड़क मार्ग से आगे जायेंगे…”।

बहरहाल, कारवाँ-टू-फ़िलीस्तीन के सदस्यों द्वारा गिड़गिड़ाने और अन्तर्राष्ट्रीय मुस्लिम बिरादरी का हवाला दिये जाने की वजह से पाकिस्तान ने इन लोगों को भीख में लाहौर तक (सिर्फ़ लाहौर तक) आने का वीज़ा प्रदान कर दिया है। अभी सिर्फ़ 34 लोगों को लाहौर तक का वीज़ा दिया है बाकी लोगों को बाद में दिया जायेगा (यहाँ देखें…), प्रतिनिधिमण्डल वाघा सीमा के द्वारा लाहौर जायेगा। इनकी योजना 28 दिसम्बर को गाज़ा पहुँचकर नौटंकी करने की है। “नौटंकी कलाकारों की इस गैंग” को, राजघाट से मणिशंकर अय्यर (जी हाँ, वीर सावरकर को गरियाने वाले अय्यर) एवं दिग्विजयसिंह (जी हाँ, आज़मगढ़ को मासूम बताकर वहाँ मत्था टेकने वाले ठाकुर साहब) ने हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया।

ऐसा कहा और माना जाता है कि सत्कर्मों और चैरिटी की शुरुआत अपने घर से करना चाहिये… लेकिन सेकुलरों की यह गैंग भारत के कश्मीरी पण्डितों को “अपना” नहीं मानती, इसलिये सुदूर फ़िलीस्तीन के लिये, दिल्ली में पाकिस्तानी दूतावास के सामने गिड़गिड़ाने में इन्हें शर्म नहीं आई, जबकि दिल्ली में ही झुग्गियों में बसर कर रहे, कश्मीर से विस्थापित होकर आये पण्डितों का दर्द जानने की फ़ुरसत इन्हें नहीं मिलती…, बांग्लादेश और पाकिस्तान में हिन्दुओं पर होने वाले अत्याचारों को लेकर कभी ये बौद्धिक खतने, चटगाँव या पेशावर तक अपना कारवाँ नहीं ले जाते…। विदेश न सही, भारत के असम में बांग्लादेशी शरणार्थी(?) जिस प्रकार की दबंगई  दिखा रहे हैं उसके लिये कभी कारवां निकालने की ज़हमत नहीं उठायेंगे… और जैसा कि पिछले लेख में कहा था कि सेकुलरों-वामपंथियों का यह गुट न तो गोधरा जायेगा जहाँ 56 हिन्दू जलाकर मार दिये गये, न तो यह गुट उड़ीसा जायेगा जहाँ धर्मान्तरण के खिलाफ़ आवाज़ उठाने वाले वयोवृद्ध स्वामी लक्षमणानन्द की हत्या कर दी जाती है… लेकिन यह सभी लोग भाईचारा दर्शाने(?) फ़िलीस्तीन अवश्य जाएंगे…। कारण भी साफ़ है कि असम हो या कन्याकुमारी, फ़िजी हो या कैलीफ़ोर्निया… हिन्दुओं के पक्ष में आवाज़ उठाने से न तो “मोटा विदेशी चन्दा” मिलता है, न ही राजनीति चमकती है, न ही कोई पुरस्कार वगैरह मिलता है… और इतना सब करने के बावजूद पाकिस्तान की निगाह में इन लोगों की हैसियत “मुहाजिरों” जैसी है, इसीलिये इन्हें सुरक्षा देना तो दूर, वीज़ा तक नहीं दिया, बावजूद इसके, “बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना” की तर्ज पर उनके तलवे चाटने से बाज आने वाले नहीं हैं ये लोग…।

ऐ इज़राइल वालों… भारत से एक सेकुलर पार्सल आ रहा है “उचित” साज-संभाल कर लेना… अर्ज़ करते हैं कि पसन्द आये या न आये आप अपने यहाँ रख ही लो, वापस भेजने की जरुरत नहीं… इधर पहले ही बहुत सारे पड़े हैं…
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बौद्धिक खतना :- बड़ी देर से पाठक सोच रहे होंगे कि यह “बौद्धिक खतना” कौन सा नया शब्द है। मुस्लिमों के धार्मिक कर्म “खतना” के बारे में आप सभी लोग जानते ही होंगे, उसके पीछे कई वैज्ञानिक एवं धार्मिक कारण गिनाये जाते रहे हैं, मैं उनकी डीटेल्स में जाना नहीं चाहता…। खतना करवाने वाले मुस्लिम तो अपने धर्म का ईमानदारी से पालन करते हैं, उनमें से बड़ी संख्या में भारतीय संस्कृति एवं हिन्दुओं के खिलाफ़ दुर्भावना नहीं रखते…। जबकि “बौद्धिक खतना” सिर्फ़ हिन्दुओं का किया जाता है, यह एक ऐसी प्रक्रिया होती है, जिसमें हिन्दुओं के दिमाग की एक नस गायब कर दी जाती है जिससे वह हिन्दू अपने ही हिन्दू भाईयों, भारतीय संस्कृति, भारत की अखण्डता, भारत के स्वाभिमान, राष्ट्रवाद… जैसी बातों को या तो भूल जाता है या उसके खिलाफ़ काम करने लगता है…। इस प्रक्रिया को एक दूसरा नाम भी दिया जा सकता है – “मानसिक बप्तिस्मा”, यह भी सिर्फ़ हिन्दुओं का ही किया जाता है और बचपन से ही “सेंट” वाले स्कूलों में किया जाता है।

जिस प्रकार “बौद्धिक खतना” होने के बाद ही व्यक्ति को “ग” से गणेश कहने में शर्म महसूस होती है, और वह “ग” से गधा कहता है… उसी प्रकार मानसिक बप्तिस्मा हो चुकने की वजह से ही सरकार में बैठे लोग, सिस्टर अल्फ़ोंसा की तस्वीर वाला सिक्का जारी करते हैं… या फ़िर कांची के शंकराचार्य को ठीक दीपावली के दिन गिरफ़्तार करते हैं… रामसेतु को तोड़ने के लिये ज़मीन-आसमान एक करते हैं, ताकि हिन्दुओं में हीन-भावना निर्माण की जा सके। नगालैण्ड में “नागालैण्ड फ़ॉर क्राइस्ट” का खुल्लमखुल्ला अलगाववादी नारा लगाने वाले एवं जगह-जगह इसके बोर्ड लगाने के बावजूद यदि कोई कार्रवाई नहीं होती…, तिरंगा जलाने वाले  हुर्रियत के देशद्रोही नेता भारत भर में घूम-घूमकर प्रवचन दे पाते हैं…, भारत की गरीबी बेचकर रोटी कमाने वाली अरुंधती रॉय भारत को “भूखे-नंगों का देश” कहती है… एक छिछोरा चित्रकार नंगी कलाकृतियों को सरस्वती-लक्ष्मी नाम देता है और बचकर निकल जाता है… यह सब बौद्धिक खतना या मानसिक बप्तिस्मा के ही लक्षण हैं…

(इन शब्दों की व्याख्या तो कर ही दी है, उम्मीद करता हूँ कि “शर्मनिरपेक्षता” और “भोन्दू युवराज” की तरह ही यह दोनों शब्द भी जल्दी ही प्रचलन में आ जायेंगे…)

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31 Comments

  1. December 10, 2010 at 3:10 pm

    >अरे वाह साहब क्या नामांकरण किया है " बौद्धिक ख़तना", सच में मजा आ गया. अब पाकिस्तान सरकार कि भी मज़बूरी रही होगी. भला उन लोगो को कैसे पता चलता कि इनका भी ख़तना हुआ पड़ा है. चेक नहीं कर सकते ना..

  2. KS THAKUR said,

    December 10, 2010 at 3:27 pm

    >सुरेश चिपलूनकर साहब आपका भी कोई जवाब नहीं, कई दिन से पुराने लेखों से काम चला रहा था 🙂 आपकी हिम्मत और खोजी पत्रकारिता को नमस्कार!! खूब लिखें और इतना लिखें की असंजे ने जो हालत अमेरिका की कर दी है वही हालात एक न एक दिन आप अराष्ट्रवादी, भ्रष्टाचारियों और देशद्रोहियों की अपने लेखों से करें!

  3. Raj Kumar said,

    December 10, 2010 at 3:38 pm

    >अब जनता इन बौद्धिक खतना कराये हुये लोगों की असलियत जान चुकी है. कल तक अरुन्धती का नाम लेकर जो उछल कूद कर रहे थे, अब अपना मुंह औधांये पडे सिसक रहे हैं.जनता ने अपने हाथ में जूता उठा लिया है और जो भी बेशर्म गद्दार मिलेगा, हर एक में कस कस कर दस लगायेगी

  4. December 10, 2010 at 3:48 pm

    >अभी एक ब्लोग पर पढ़ा 'खतना से एड्स का डर जाता रहता है' (शायद पूरा खतना कराने की बात करते होंगे, न रहेगा बांस न बजेगी बांसुरी)। इस आधार पर तो इन बौद्धिक खतना हुए लोगो को ब्रेन हेमरेज का खतरा भी नहीं है। बढिया है, जरा ध्यान से मालूम कीजीए कि एक नस काटी गई है या पूरा दिमाग निकाल लेते हैं।

  5. December 10, 2010 at 3:53 pm

    >हीन भावना से ग्रस्त व्यक्ति अंग्रेजी बोल कर खुद को बुद्धिजीवि होने का आश्वासन देता है. वैसे ही चुक गई विचारधारा को उसी तरह चिपकाए रखने वाले जैसे "मरे बच्चे को बन्दरिया छाती से चिपका कर रखती है" ये लोग अपनी हीन भावना या राष्ट्रवाद को गरीयाकर या देशद्रोही गतिविधियों का समर्थन कर या कथित कारवाँ निकाल कर संतुष्ट करते है. "बौद्धिक खतना" अच्छा शब्द है.

  6. December 10, 2010 at 3:54 pm

    >बढ़िया है बौद्धिक खतना याने ऊपर की मंजिल गायब

  7. December 10, 2010 at 4:53 pm

    >ये खतना पुरुषो का होता है तो अरुंधती रॉय का क्या होगा क्या इनके लिए भी कोई शब्ब्द आप ने सोच रखा है या नहीं…..??????

  8. L.R.Gandhi said,

    December 10, 2010 at 4:57 pm

    >भाई सुरेश जी … आप ने तो मानसिक किन्नरों का बौधिक – खतना कर डाला …किन्नरों की उछल- कूद पर कोई तवज्जो नहीं देता …इसी लिए पाक ने भी नहीं दी… ये सेकुलर शैतान केवल मिडिया में बने रहने के लिए नाचते रहते हैं ,यदि मिडिया इन्हें मूंह न लगाए तो अपनी मौत मर जाएंगे !इजरायल जेहादी शैतानों की परवाह नहीं करता -तो ये बेचारे किस खेत की मूली हैं.

  9. December 10, 2010 at 4:59 pm

    >…बहुत खूब सुरेश जी,कारवां-टू-फिलस्तीन से ज्यादा बेहूदा मजाक नहीं हो सकता… आज के परिदॄश्य में इजरायल हमारा सबसे भरोसेमंद व बड़ा साझीदार बन उभरा है, जबकि फिलस्तीन 'हमास' के तौर पर दुनिया के लिये समस्या बन गया है… देश हित की कुछ भी चिंता नहीं है कुछ लोगों को… मुझे तो इनको वीजा देने से इन्कार करने वाले पाकिस्तानी अधिकारी ज्यादा समझदार लगते हैं।…

  10. December 10, 2010 at 5:02 pm

    >बुद्धि होने पर ही बौद्धिक हो सकता है..

  11. December 10, 2010 at 5:49 pm

    >@Ravindra Nathअच्छा है. मुझे लगता है कि नस तो एक ही काटते होंगे पर उस से पूरा दिमाग पंगु हो जाता है. और सुरेश भाई, आपकी लेखनी की धार दिनोदिन तीखी होती जा रही है. 'अल्लाह' करे जोर-ए-कलम और भी ज्यादा.

  12. December 10, 2010 at 7:00 pm

    >बहुत खुब जी, नया शवद भी आप ने ढुढ लिया,बहुत करार लेख लिखा लेकिन सत्य लिखा, धन्यवाद

  13. abhishek1502 said,

    December 10, 2010 at 8:19 pm

    >हा हा हा हा बौद्धिक खतना सही शब्द खोजा है उन नौटंकीबाजों के लिए पाकिस्तान ने औकात बता दी है .जापानी नागरिक को वीजा दिया है और मज़े की बात ये है जापान दुनिया का वह अकेला देश है जहा पर मुस्लिमो को वीजा नही मिलता और वहा मुस्लिम न के बराबर है .ये नौटंकी वहा से से ईज्रईलियो के हाथो पिट कर यहाँ शान से आयेंगे

  14. December 10, 2010 at 8:46 pm

    >ऐसा कहा और माना जाता है कि सत्कर्मों और चैरिटी की शुरुआत अपने घर से करना चाहिये..इस बात को ध्यान मैं रखते हुए इन लोगों का यह क़दम सही तो है लें इन्साफ नहीं. इनको पहले देश मैं अपने भाइयों के हक के लिए आवाज़ उठाने चाइये फिर दूर देश के लोगों की फ़िक्र करनी चाहिए..

  15. Mahesh Kumar said,

    December 11, 2010 at 3:14 am

    >बौद्धिक खतना शीर्षक देना ज़रूरी था? बौद्धिक मुंडन क्यों नहीं दिया गया? इससे आपके मुस्लिम प्रशंसको ठेस पहुँच सकती हैं! कृपया ऐसी अशोभनीय बातें न करे!

  16. awyaleek said,

    December 11, 2010 at 3:52 am

    >रवीन्द्र जी,ना रहेगी बांस ना बजेगी बांसुरी ये उदाहरण तो सही नहीं है क्योंकि ऐसा कभी हो ही नहीं पाएगा क्योंकि जिस दिन ऐसा हो जाएगा उस दिन इस्लाम धर्म ही खत्म हो जाएगा।इस्लाम का एक मात्र अंतिम लक्ष्य सेक्स करना ही तो है॥इनके धर्म में अच्छे से अच्छा कर्म इसलिए किया जाता है ताकि स्वर्ग मिल सके और स्वर्ग में इनकी सेक्स करने की ताकत सौ गुणी हो जाएगी और इनके लिंग हमेशा खड़े ही रहेंगे और वहाँ 72 नंगी जवान कुंवारी लड़कियां मिलेंगी।नंगी इसलिए कि कपड़ा हटाने तक का भी इंतजार ना करना पड़े।खतना मुसलमान की निशानी है इसलिए बौद्धिक खतना बिलकुल उपयुक्त शब्द है जिसका अर्थ यही निकलता है कि ऐसा गैर मुसलमान व्यक्ति जिसके विचार मुसलमानी हो॥वैसे जहां कसाब जैसे देशद्रोही व्यक्ति को भी सिर्फ मुसलमान होने के लिए इतना नाम-प्रसिद्धि,सुख-सुविधा और आदर-सत्कार दिया जा रहा हो वहाँ पर अगर कोई हिन्दू, मुसलमान और देशद्रोही बनने के लिए ललच पड़े तो इस बात में किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए॥देशद्रोही बनने से पहले मुसलमान बनना जरूरी है इसलिए उसकी तैयारी तो कर ली है इन्होंने।हो सकता है कुछ दिन बाद ये किसी मंदिर परिषद में घुसकर 10-15 हिंदुओं को गोलियों से भून दे ताकि उसके बाद फिर कांग्रेसियों का दामाद बनकर जीवन भर ऐशों-आराम की जिंदगी बीताते रहें….

  17. December 11, 2010 at 4:14 am

    >सुरेश जी, जिस प्रकार इंग्लिश भाषा वाले अपनी भाषा को समृद्ध करने के लिए वैश्विक प्रचलन वाले शब्दों को आत्मसात कर लेते हैं – उसी प्रकार हिन्दी भाषा को भी आपके द्वारा रचित एवं सर्वमान्य शब्दों को आत्मसात कर अधिकतम प्रयोग कर समृद्ध होने की आवश्यकता है | आशा है कि इस प्रस्ताव का समस्त प्रबुद्ध जन अधिकाधिक प्रयोग द्वारा समर्थन करेंगे | "बौद्धिक खतना" तो केवल बुद्धि के अग्रभाग के संरक्षण के लिए प्रकृति प्रदत्त आवरण का अज्ञानवश त्याग करना है एवं निज अज्ञान को स्थापित करने के लिए नाना प्रकार के तर्क दिए जाते रहते हैं – परन्तु वर्तमान में यह चर्चा का विषय नहीं है | जिन गणमान्य महानुभावों का वर्णन कर रहें है उनका पहले "बौद्धिक शंढता प्रदायी" ऑपरेशन किया जा चुका है जिसके कारण वे "बौद्धिक निर्विर्यीकरण" की महान अवस्था को प्राप्त हुए हैं | "बौद्धिक निर्विर्यीकरण" होने के कारण ये महानुभाव निज संतानोत्पत्ति में असमर्थ हो जाते हैं परन्तु वंश वृद्धि हेतु "बौद्धिक पक्षाघात" से पीड़ित असाध्य रुग्णों को धनबल से अपना मानसपुत्र बनाने का शुभ कार्य करते हैं |

  18. December 11, 2010 at 8:26 am

    >बहुत अच्‍छा शब्‍दा का प्रयोग किया है इनके लिए आपनेा अभी अच्‍छा मौका है इनको देश से बाहर ही हमेशा के लिए निकाल देना चाहिएा इसी बहाने कम से कम 50 महान गद्रार तो कम हों जायेंगेा

  19. Man said,

    December 11, 2010 at 9:33 am

    >वन्दे मातरम सर ,बहुत ही बढ़िया और सटीक शब्द ढूँढा हे आप ने इन लाल सफ़ेद लंगूरों के लिए ,"'बोधिक खतना "'?शायद इनके बाप दादावो ने असली गुप्त खतने करवाए हो या गुप्त में येकिसी खतनो की ही ओलादे हो ?नकली ठाकुर दिग्विजय सिंह की जेसे ?फिर बाद में बोधीक खतना करवा के कारवा टू फिलस्तीन जेसी नोटंकीयां खेलते हे |इन लाल सफ़ेद गिरोहबाजो को को केवल फिलिस्तीन में मानवाधिकारो घडियाली चिन्ता पडी हे ,जेसे की वंहा इनका ननिहाल हे ?

  20. December 11, 2010 at 1:41 pm

    >सुरेश जी आपने गज़ब का नामकरण किया है. "बौद्धिक खतना" परिचय देने के लिए बस नाम ही काफी है.इस गूढ़ अर्थ पूर्ण नामकरण के लिए बधाई.नारायण भूषणिया

  21. December 11, 2010 at 1:50 pm

    >“बौद्धिक खतना” गुरूजी, मान गए आपको, क्या शब्द ढूँढ कर निकला है. लेख पढ़ने के बाद ये निष्कर्ष निकला कि ….. “बौद्धिक खतना” के बाद ही आप असली शर्म निरपेक्ष नेता बन सकते हो. उससे पहले नहीं.साधुवाद.

  22. Man said,

    December 11, 2010 at 2:23 pm

    >बोधिक ख़तने धारी यंहा देखे अपनी स्थिति http://jaishariram-man.blogspot.com/2010/12/blog-post_05.html

  23. nitin tyagi said,

    December 12, 2010 at 5:41 am

    >"बौद्धिक खतना" bilkul sateek shabdh hai

  24. Man said,

    December 12, 2010 at 12:52 pm

    >कांग्रेस का कसाब बचावो अभियान शुरू ,पढ़िए विचारात्मक लेख http://jaishariram-man.blogspot.com/2010/12/blog-post_11.html

  25. December 12, 2010 at 1:10 pm

    >आपका लेख बहुत विचारोत्तेजक है। जिस विषय पर आपने लेखनी चलायी है…………..वह मत्हत्त्वपूर्ण है।

  26. December 12, 2010 at 6:32 pm

    >बहुत ही सटीक शब्द 'बौद्धिक खतना' इजाद करने के लिए मुबारकबाद.भाई साहब हमारे भारत के बुद्धिजीवियों को अपने दिमाग का 'खतना' कराने के बाद ही 'खैरात' मिलती है. और इन खैरात के भूखे बुद्धिजीवी अपनी बहन-बेतिया बेचने के लिए भी तैयार हो सकते है. बाकी अरुंधती, बुरका दत्त, चावला और संधवी ने तो अपनी कीमत (औकात) बता ही दी है.

  27. kaverpal said,

    December 13, 2010 at 5:42 am

    >Dear suresh babu aapne jo likha uske liye mai apko salam karta hun aur is diggi kutte ke mukh par thukta hun kyon ki is jaise ke karan hindustan bar-bar videshi shaktiyon ke hato masalta raha bhai sahab is kutte ko karkare ne bahut pahale atankvad ke bare me bata diya tha jaisa is kutte ne bhonka hai fir bhe yeh sala bomb futne ka aur do chaar vardateno ka intjaar karta raha.aur bhai sahab iska khatna ab nahin hua hai iska khatna to 2002 me hi ho gaya tha

  28. sanjay jha said,

    December 13, 2010 at 7:08 am

    >'boddhik khatna'……………….ye 'bimar' hai ya 'simar'……….jo bhi ho …..ye saare ek sath gaye……inki to @@##$$%%pranam.

  29. December 13, 2010 at 11:45 am

    >आप किसी शब्द की रचना करे और वो सफल न हो ये कैसे हो सकता है

  30. December 14, 2010 at 4:44 am

    >कब सबक लेंगे हमारे ये सेकुलर्स 😦

  31. ashwani jain said,

    December 16, 2010 at 3:10 pm

    >Ravindra Nath said…अभी एक ब्लोग पर पढ़ा 'खतना से एड्स का डर जाता रहता है' (शायद पूरा खतना कराने की बात करते होंगे, न रहेगा बांस न बजेगी बांसुरी)। इस आधार पर तो इन बौद्धिक खतना हुए लोगो को ब्रेन हेमरेज का खतरा भी नहीं है। बढिया है, जरा ध्यान से मालूम कीजीए कि एक नस काटी गई है या पूरा दिमाग निकाल लेते हैं।wah wah…..mazaaa aa gaya….Hindi Shabdkosh wale Arvind ji se baat kar ke ye naya sabd dictionary me hona chahiye.


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