>JANOKTI : जनोक्ति

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JANOKTI : जनोक्ति


रोहन की मजेदार पार्टी

Posted: 11 Dec 2010 10:41 AM PST

रोहन की मजेदार पार्टी

रोहन की मजेदार पार्टी

एक बार रोहन अपने दोस्तों के साथ डिस्को में गया

जहां उसे एक बेहद खूबसूरत लड़की अकेली बैठी दिखाई दी…


रोहन मुस्कुराता हुआ लड़की के पास पहुंचा,

और उसे डांस के लिए प्रपोज़ किया…


लड़की ने भी मुस्कुराते हुए जवाब दिया,

“मैं बच्चे के साथ डांस नहीं करती…”

रोहन झट से बोला, “माफ कीजिएगा, मिस…

मुझे नहीं पता था कि

आप प्रेग्नेन्ट हैं…”

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इसका मूल लेख यहाँ पर क्लिककर पढ़े.

शिकायत

Posted: 11 Dec 2010 08:42 AM PST

ऐ मेरे मालिक! तेरी इस दुनियाँ में अगर इन्सान पत्थर के होते, या कुछ मिटी के होते, कोई रेत का होता या कोई सीमेंट का या फिर अगर इन्सान सँगमर्र का होता तो शायद दुनियाँ में इस क़दर दुख न होते, क्योंकि पत्थर के इन्सान तो गूँगे बहरे होते है, वे हर अहसास से परे होते हैं, वे क्या जाने किसी का दुख दर्द, या किसी की चाहत का मर्म वो क्या समझें? एक इन्सान की अना जब दूसरे इन्सान के मिट्टी और रेत से बने घरौंदे को टोड़ देने में कामयाब होती है, तब उस नशे में सोच साथ नहीं देती. उस झूठी शान में धँसा हुआ वह आदम क्या जाने उनके मर्म को, उनके टूटते हूए सपनों को, उनकी तकलीफ को, शायद वह सुन नहीं पाता टूटी हुई आशाओं की झनकार को, उन की पीड़ा या दुख-दर्द की झनझनाती चीखों को. अगर इन्सान इन्सान को जान लेता, पहचान लेता तो इस क़द्र चाहतों को तकलीफ न होती, दिलों को चोट न पहुँचती. क्यों बनाई ऐ मालिक यह खुदाई, जिस की रचना का स्वरूप आज इतना कुरूप होता जा रहा है कि इन्सान अपनी पहचान से बिछड़ कर उल्टी राह चल पड़ा है और मँजिल से दूर होता जा रहा है.
देवी नागरानी

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