>नीरा राडिया तो अपना काम कर रही थी, लेकिन “ईमानदार बाबू”, आप क्या कर रहे थे?…… Nira Radia, Radia Tapes, A Raja, 2G Spectrum Scam

>सामान्य तौर पर एक “दलाल” का काम होता है, दो पार्टियों के बीच समुचित सौदा करवाना जिसमें दोनों पार्टियाँ सन्तुष्ट हों एवं बीच में रहकर दोनों से दलाली (या कमीशन) शुल्क लेना। नीरा राडिया क्या थी? टाटा जैसे कई उद्योगपतियों एवं नीतिगत निर्णय ले सकने वाले प्रभावशाली राजनेताओं के बीच दलाली का कार्य करने वाली एक “दलाल” (जिसे आजकल सभ्य भाषा में पब्लिक रिलेशन मैनेजर, लायज़निंग एजेंसी अथवा कमीशन एजेण्ट कह दिया जाता है, जबकि असल में होता वह “दलाल” ही है)। नीरा राडिया का काम था कि जिन उद्योगपतियों को नेताओं से मधुर सम्बन्ध(?) बनाने थे और अपना गैरकानूनी काम निकलवाना था, उनसे सही और सटीक सम्पर्क स्थापित करना और नीतियों को प्रभावित करके उनके बेशुमार फ़ायदे का सौदा करवाना… अब आप ही बताईये कि क्या नीरा राडिया “अपने काम” में उस्ताद नहीं है? क्या उसने उसका “पेशा” और “पेशेगत कार्य” ठीक से नहीं किया? बिलकुल किया, 100% से भी अधिक किया…

दिक्कत यह हुई है कि, जिन नेताओं और पत्रकारों का “जो काम” था वह उन्होंने ईमानदारी से नहीं किया…। नेताओं, नीतिगत निर्णय लेने वाली संस्था के अफ़सरों एवं सरकारी मशीनरी का यह फ़र्ज़ था कि वे यह देखते कि देश को सबसे अधिक फ़ायदा किसमें है? कौन सी प्रक्रिया अपनाने से देश का खजाना अधिक भरेगा? लाइसेंस लेने वाले किसी उद्योगपति के साथ न तो अन्याय हो और न ही किसी के साथ पक्षपात हो… परन्तु प्रधानमंत्री सहित राजा बाबू से लेकर सारे अफ़सरों ने अपना काम ठीक से नहीं किया…।

प्रधानमंत्री को तो विश्व बैंक से उनकी सेवाओं हेतु मोटी पेंशन मिलती है, इसके अलावा उन्हें कोई चुनाव भी नहीं लड़ना पड़ता… इसलिये माना जा सकता है कि उन्होंने स्पेक्ट्रम मामले में पैसा नहीं खाया होगा, परन्तु सोनिया गाँधी-राहुल गाँधी को कांग्रेस जैसी महाभ्रष्ट पार्टी चलाना और बढ़ाना है, ऐसे में कोई कहे कि अरबों-खरबों के इस घोटाले में से गाँधी परिवार को कुछ भी नहीं मिला होगा, तो वह महामूर्ख है… रही बात राजा बाबू एवं अन्य अफ़सरों की, तो वे भी अरबों रुपये की इस “बहती गंगा” में नहा-धो लिये….। गृह सचिव पिल्लई ने कहा है कि लगभग 8000 टेप किये गये हैं और अभी जितना मसाला बाहर आया है वह सिर्फ़ 10% ही है, आप सोच सकते हैं कि अभी और कितने लोग नंगे होना बाकी है। आज सीबीआई कह रही है कि राडिया विदेशी एजेण्ट है, तो पिछले 5 साल से इसके काबिल(?) अफ़सर सो रहे थे क्या? प्रधानमंत्री तो अभी भी अपनी चुप्पी तोड़ने के लिये तैयार नहीं हैं, उनकी नाक के नीचे इतना बड़ा घोटाला होता रहा और वे अपनी “ईमानदारी” का ढोल बजाते रहे? भ्रष्ट आचरण के लिये न सही, “निकम्मेपन” के लिये ही शर्म के मारे इस्तीफ़ा दे देते? लेकिन जिस व्यक्ति ने आजीवन हर काम अपने “बॉस” (चाहे रिज़र्व बैंक हो, विश्व बैंक हो, IMF हो या सोनिया हों) से पूछकर किया हो वह अपने मन से इस्तीफ़ा कैसे दे सकता है।

1) नीरा राडिया और वीर संघवी के टेप का हिस्सा सुनने के लिये यहाँ क्लिक करें… (इसमें महान पत्रकार राडिया से अपने लिखे हुए को अप्रूव करवाता है)

2) इस टेप में राडिया कहती है बरखा ने कांग्रेस से वह बयान दिलवा ही दिया… थैंक गॉड… (यहाँ क्लिक करें )

3) इस टेप में वह किसी को आश्वस्त करती है कि राजा और सुनील मित्तल में वह सुलह करवा देगी और राजा वही करेगा जो वह समझायेगी…

4) राडिया और तरुण दास का टेप जिसमें कमलनाथ और मोंटेक सिंह अहलूवालिया के बारे में बातचीत की गई है…

ऐसे बहुत सारे टेप्स इधर-उधर बिखरे पड़े हैं, चारों तरफ़ इन कारपोरेटों-नेताओं और दल्लों के कपड़े उतारे जा रहे हैं,पूरा देश इनके कारनामे जान चुका है, जनता गुस्से में भी है और खुद पर ही शर्मिन्दा भी है…

सबूतों और टेप से यह बात भी सामने आई है कि “स्पेक्ट्रम की लूट” में दुबई की कम्पनी एटिसलाट डीबी को भी 15 सर्कल में लाइसेंस दिया गया है, यह कम्पनी पाकिस्तान की सरकारी टेलीकॉम कम्पनी PTCL की आधिकारिक पार्टनर है और इसके कर्ताधर्ताओं के मधुर और निकट सम्बन्ध ISI और दाऊद इब्राहीम से हैं। एटिलसाट के शाहिद बलवास के सम्बन्ध केन्द्र के कई मंत्रियों से हैं, यह बात गृह मंत्रालय भी मानता है… एटिसलाट के साथ-साथ टेलीनॉर कम्पनी का कार्यकारी मुख्यालय भी पाकिस्तान में बताया जाता है। इस सारे झमेले में एक नाम है फ़रीदा अताउल्लाह का, जो दुबई में रहती है और बेनज़ीर भुट्टो व सोनिया गाँधी की करीबी मित्र बताई जाती हैं… ये मोहतरमा प्रियंका गाँधी के विवाह में खास अतिथि थीं… लेकिन सोनिया-मनमोहन का रवैया क्या है – चाहे जो हो जाये न तो हम इन कम्पनियों के लाइसेंस निरस्त करेंगे, न तो इन कम्पनियों के शीर्ष लोगों पर छापे मारेंगे, न ही जेपीसी से जाँच करवायेंगे… जो बन पड़े सो उखाड़ लो…। अब आप सोच सकते हैं कि राष्ट्रीय सुरक्षा और भारत के उद्योगपतियों की निजता कितनी खतरे में है… आयकर विभाग द्वारा टेप किये गये फ़ोन पर टाटा-मित्तल इतने लाल-पीले हो रहे हैं, जब दाऊद इनके फ़ोन कॉल्स सुनेगा तो ये क्या कर लेंगे?

पत्रकारों और मीडिया का काम था भ्रष्टाचार पर निगाह रखना, लेकिन प्रभु चावला से लेकर बरखा दत्त, वीर संघवी जैसे “बड़े”(?) पत्रकार न सिर्फ़ कारपोरेट के “दल्ले” बनकर काम करते रहे, बल्कि राडिया के निर्देशों पर लेख लिखना, प्रश्न पूछना, प्रधानमंत्री तक सलाह पहुँचाना, मंत्रिमण्डल गठन में विभिन्न हितों और गुटों की रखवाली करने जैसे घिनौने कामों में लगे रहे। वीर संघवी तो बाकायदा अपना लेख छपने से पहले राडिया को पढ़कर सुनाते रहे, पता नहीं हिन्दुस्तान टाइम्स की नौकरी करते थे या टाटा-राजा की? मजे की बात तो यह है कि इस “हमाम के सभी नंगे” एक-दूसरे को बचाने के लिये एकजुट हो रहे हैं… चाहे जो भी हो “बुरका दत्त” पर आँच न आने पाये, कहीं किसी अखबार या चैनल पर “पवित्र परिवार” के बारे में कोई बुरी खबर न प्रकाशित हो जाये, इस बात का ध्यान मिलजुलकर रखा जा रहा है। क्या यही मीडिया का काम है?

एक दलाल होता है और दूसरा “दल्ला” होता है। दलाल को सिर्फ़ अपने कमीशन से मतलब होता है, जबकि “दल्ला” देश की इज्जत बेच सकता है, पैसों के लिये जितना चाहे उतना नीचे गिर सकता है… तात्पर्य यह कि नीरा राडिया तो “दलाल” है, लेकिन बाकी के लोग “दल्ले” हैं…
==========

मूल विषय से थोड़ा हटकर एक बात – ध्यान रहे कि “वर्णसंकर रक्त” बेहद खतरनाक चीज़ होती है…यह अशुद्ध रक्त बेहद गिरा हुआ चरित्र निर्माण करती है, खण्डित व्यक्तित्व वाला बचपन, बड़ा होकर देश तोड़ने में एक मिनट का भी विचार नहीं करता… बाकी आप समझदार हैं… कोई मुझसे सहमत हो या न हो, मैं “जीन थ्योरी” (Genes Theory) में विश्वास करता हूं…

जो पाठक इस घोटाले के बारे में और जानना चाहते हैं, तो निम्न लिंक्स को एक-एक करके पढ़ डालिये…

राजा बाबू और नीरा राडिया… (भाग-1)


राजा बाबू और नीरा राडिया… (भाग-2)

राजा बाबू और नीरा राडिया… (भाग-3) 

3G स्पेक्ट्रम नीलामी से राजा बाबू के पेट पर लात… 

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17 Comments

  1. December 13, 2010 at 1:36 pm

    >जो मैं हमेशा कहता हूं वही कहूंगा.. कुंयें में भांग पड़ी है… अफसर बनने से पहले सब दिखता है, बनते ही आंखों पर पट्टी चढ़ जाती है… भ्रष्टाचार ऊपर से नीचे की ओर बहता है…आशा की किरण सिर्फ बाबा रामदेव से है…

  2. December 13, 2010 at 1:55 pm

    >सुरेश जी , इनकी बखिया तो आपने कुछ महीनो पहले के अपने लेख में ही बखूबी उधेड़ दी थी ! एक बात जो आपके इस लेख के माध्यम से मैं यहाँ कहूंगा वह यह की इस देश के शिक्षित लोग अब यह समझे की उनका वोट डालना कितना आवश्यक हो गया है उसका उधाहरण है सोनिया का आज का बयान की तुम जो करलो, देश के अरबों रूपये बेकार हो तो होने दो, संसद बंद रहे , मगर हम जेपीसी नहीं बिठाएँगे ! उनके इस एक बयान ने यह साबित कर दिया है की असल पीएम वही है ! अन्यथा तो एक एम् पी और एक पार्टी की अध्यक्षा किस हैसियत से जनता की इस प्रबल मांग ( विपक्ष भी जनता का प्रतिनिधि है ) को ठुकरा रही है की हम जेपीसी नहीं बनने देंगे?

  3. imemyself said,

    December 13, 2010 at 1:59 pm

    >सबसे मुश्किल काम यह है कि अब यह गिरोह अंतराष्ट्रीय स्तर पर अपना विस्तार कर चुका है। सब कुछ इनके कब्जे में है, आप इनका कुछ नहीं उखाड़ सकते। चुनाव में इन्हे हरा नहीं सकते,इनके पास ईवीएम है, एलेक्शन कमीशन है और राष्ट्रपति है। न्यायलय इनकी जेब में हैं। कपाडिया साहिब जैसे एक दो लोग क्या कर लेंगे? चीख-चिल्ला कर भी सीवीसी का इस्तीफा नहीं करवा सके। कार्यपालिका के बाबू,अब "बिग टिकिट" माल बना रहे हैं, उनके बच्चे विदेशी कम्पनीयों में काम कर रहे हैं और "इंडिया स्टोरी" का असली मज़ा वही ले रहे हैं। अगर नेता का कुछ नहीं बिगडॆगा तो बाबू को कोई कैसे पकड़ॆगा। (एक आध छोटा मुर्गा हलाल हो जाये भ्रष्टाचार के इस महायज्ञ में तो क्या) चौथा खंबा पूरी तरह से राडिया-एक्टिव हो चुका है।

  4. December 13, 2010 at 2:23 pm

    >गोदियाल साहब और आइमीमाईसेल्फ ने पते की बात कही है…

  5. December 13, 2010 at 5:46 pm

    >15 करोड़ रिश्वत न देने की बात कर अपने आप को महान ईमानदार साबित करने वाले टाटा अब फोन टेप से क्यों परेशान हो रहे है ? शायद ईमानदारी की पोल जो खुल रही है |

  6. December 13, 2010 at 5:48 pm

    >सुरेश जीआप के इलेक्ट्रोनिक समाचार चेनल सुरु करदे, और इन नकली मिडिया के दलालों को नंगा करदे…..

  7. December 13, 2010 at 7:05 pm

    >बाप रे मै तो यह पढ कर ही चकरा गया…. कहां सोई हे देश की जनता? जिन का देश लुट रहा हे ओर जनता चुप चाप बेठी इन इमान दारो को देख रही हे

  8. sanjay jha said,

    December 14, 2010 at 5:35 am

    >trahimam…trahimam….pranam.

  9. kaverpal said,

    December 14, 2010 at 5:53 am

    >Dear suresh yeh jo aapnevarna sankar ke bare me bataya ,mera bhi is thyori me wisvas hai aur GEETA JI me LORD KRISHNA se Arjun ye hi kahata hai ki jab sab mar jayenge to aurte dusre admiyo ke pass jayengi aur samaj ka patan hoga theek us samay kavatawaran ban chuka hai aur yeh varn sankar hi pure desh ko girvi rakh rahe hain inki jab itisalat se aur telinor se sath ganth thi aur mujhe to Diggi ke bayan aur PM and Soniya maharani ke tewar se to yeh bhi abhas hota hai ki yeh Daud Ibrahim se bhe mile hua hain nahi to JPC se kyon dar rahe hain

  10. ajit gupta said,

    December 14, 2010 at 5:56 am

    >सत्ता में बैठे लोग देश को सरेआम लूट रहे हैं फिर भी बहस यह है कि संसद नहीं चलने से कितना नुक्‍सान। अरे इस बात पर तो देश ठप्‍प हो जाना चाहिए था। आपने लिखा कि मनमोहन सिंह को अकर्मण्‍यता के कारण ही इस्‍तीफा दे देना चाहिए था तो वे तो बने ही इसलिए थे कि केवल अकर्मण्‍य ही रहना है। इन घोटालों में तो सोनिया की दो बहनों का नाम भी आ रहा है और दाउद इब्राहिम का तो खैर है ही। मीडिया में जितने भी जंगबहादुर बैठे हैं सभी एक ही थाली के चट्टे बट्टे हैं।

  11. December 14, 2010 at 5:59 am

    >कृष्ण कुमार सोनी (रामबाबू)लोकतंत्र का स्तम्भ कहलवाने वाले पत्रकार खुद भ्रष्ट हो गए हें.राजनेताओं व पत्रकारों का बेमेल गठबंधन देश की सुरक्षा व समृद्दी पर ग्रहण लगा सकता हें

  12. chankya said,

    December 14, 2010 at 6:55 am

    >कलयुग में धार्तराष्ट्र का चश्मा (धन)का जब नारद (मिडिया ) की आँखों पर चढ़ जाता है तभी तभी इसी घटनाएं घटती है , सही बात ये है की हवस की कोई सीमा नहीं नहीं होती है , यह पतन किस सीमा तक हो सकता है इसका अंदाजा लगाना बहुत मुश्किल है , 2G spectrum scam प्रकाश में अप्रैल के महीने में ही आ गया था पर कुछ लोग इस पर आज तक क्यों चुप थे ?जब तक पुरे तरीके से डूबने नहीं लगे तब तक हम भी हाथ पैर नहीं हिलाते . आपको याद होगा कि १९६८ में वाटर गेट काण्ड अमेरिका में हुआ था (जासूसी). जिसमे रिचर्ड निक्सन पर महाभियोग चलाया गया था . किसी ना किसी को पहल तो करनी ही होगी ? १० साल हो गए क्या हमारे देश के राष्ट्रपति को इतना भी अक्त नहीं कि २८ फ़ाइल निबटा सके . उसको क्यों नियुक्त किया जाता है ? उसका क्या कर्तव्य है ? इसपर भी एक प्रश्न चिन्ह नहीं है ? क्या इस देश कि जनता का इतना पैसा राष्ट्रपति भवन पर खर्चा होता है जब उसका इस देश के लिए कोई प्रयोग नहीं होता है .?राष्ट्रपति क्या सिर्फ एक अगर रबर कि मोहर है तो क्या उसको नहीं हटा देना चाहिए ? क्या आवश्कता है एसे पद कि ? राष्ट्रपति सेना के तीनो अंगो पर अपना अधिकार रखता है ..और अगर संसद में काम नहीं होता है तो उसको भंग करके दूसरा जनादेश का अधिकार (जनता से लेने का ) आदेश दे सकता है , वह किसी राजनितिक पार्टी से सम्बंधित नहीं होता है ?क्या हमारे देश के राष्ट्रपति अपने अधिकारों का उपयोग कर रहे है ? क्या इस पर प्रश्न चिन्ह नहीं है ? जब संसद में कार्य नहीं हो रहा है तो उसका ओचित्य ही क्या है ? क्यों हमारे द्वारा दिए कर कर को भ्रष्ट लोगो को दिया जा रहा है ? प्रश्न चिन्ह तो बहुत है , पर फर्क ये है कि पहले शहीद कोण होगा .Edit11:49 am

  13. Rupesh said,

    December 14, 2010 at 8:46 am

    >suresh bhaiya, jean theory ekdum sahi baat hai. aur samjhane wali baat kya hai, duniya janti hai ki nehru gandhi pariwar ka khoon kitna ganda raha hai. Pure Pariwar ne shuru se hi desh ko bantne ka kaam kiya hai. nehru ki jid se pakistan bana. indira ne bangladesh aur age dekhiye soniya kya gul khilati hai. jab tak desh ki janta ekjut hokar congress ka bahiskar nai karegi, ye loot chalti rahegi.

  14. Man said,

    December 14, 2010 at 12:57 pm

    >वन्देमातरम सर ,सता पक्ष तो तानाशाह बन बेठा हे ,विपक्ष और जनता को साफ़ सन्देश हे उखाड़ लो जो उखाड़ना चाहो ,जे .पि सी घठित नहीं करने हठ धर्मिता से साफ़ जाहिर इसमें सोनिया गाँधी को एक बहुत बड़ा शेयर गया हे ,इसकी दो बहनों को भी गया हे ,ईमानदारी और धर्मनिरपेक्षता का ढोंग करने वाले पाखंडियो की पोल खुल गयी हे |जेसा की आप ने कहा इस पवित्र परिवार को बचने के लिए षड्यंत्र पे षड्यंत्र रचे जा रहे हे ,तताकथित इमानदार बाबु की ईमानदारी ही चोरो की सबसे ढल बन गयी हे |मोहमद कसाब को कांग्रेस का घातक प्रयास शुरू हो गए हे …….http://jaishariram-man.blogspot.com/2010/12/blog-post_11.html

  15. December 14, 2010 at 1:27 pm

    >जगमोहन नामक एक नेता था. उसका हाल क्या हुआ? भई राजा बनना है तो दल्लागीरी से परहेज क्यों?

  16. December 15, 2010 at 5:42 am

    >इतने दिनो बाद अब छापे पड़ रहे हैं.अभी बहुत से राजा रानियां बाकि हैं जिनके गर्दनों तक पहुंचना है. अागे अागे देखिये, होता है क्या.

  17. P K Surya said,

    December 15, 2010 at 6:50 am

    >बाप रे मै तो यह पढ कर ही चकरा गया…. कहां सोई हे देश की जनता? जिन का देश लुट रहा हे ओर जनता चुप चाप बेठी इन इमान दारो को देख रही हे suresh bhaiya thak gain hen ye samjhate samjhate par janta ka dil he kee manta nahi.manta he to s gadhi Rahul gadhi ko samjhata nahi, ye GADHI FAMILY ITALI bhag jayegi jis din janta jagegi bus ushi din ka entjar he, jai bharat


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