>अज़ीज़ बर्नी की अक्ल ठिकाने लगाने हेतु श्री विनय जोशी को बधाईयाँ… … Aziz Burney Apologized, Book 26/11 RSS Conspiracy

>मुम्बई हमले के बाद से लगातार पिछले 2 साल से राष्ट्रीय सहारा (उर्दू) के सम्पादक अज़ीज़ बर्नी ने 100 से अधिक लेख एवं एक पुस्तक “26/11, RSS Conspiracy” नाम की बेहूदा और देशद्रोही पुस्तक लिखकर न सिर्फ़ देश को अन्तर्राष्ट्रीय कूटनीति के स्तर पर शर्मिन्दा किया बल्कि RSS एवं हिन्दुओं के खिलाफ़ सतत जहर उगलते रहे। इनकी हाँ में हाँ मिलाने व पिछलग्गूपन को मात करते हुए दिग्विजय सिंह भी इसकी पुस्तकों के विमोचन समारोहों में जाते रहे, संघ को गरियाते रहे।

अब राष्ट्रीय सहारा ने अज़ीज़ बर्नी का खेद व माफ़ीनामा प्रकाशित किया है, जिसमें उसने कहा है कि “मेरा इरादा किसी को ठेस पहुँचाने का नहीं था, यदि मेरी बातों से किसी की भावनाओं को दुख पहुँचा हो तो मैं उसके लिये माफ़ी माँगता हूँ…”। देखा आपने, हद है मक्कारी की… यदि ठेस पहुँचाने का इरादा नहीं था तो इस पुस्तक को दो साल तक बाजा बजा-बजाकर क्यों बेच रहे थे? क्यों बार-बार हेमन्त करकरे की स्वर्गीय आत्मा को नोच रहे थे? संघ के बारे में जानते नहीं थे, तो क्यों अपना सड़ा हुआ मुँह फ़ाड़ रहे थे? और अब माफ़ी का ढोंग कर रहे हैं… जी हाँ ढोंग ही है, क्योंकि अभी भी अज़ीज़ बर्नी ने अपने बयान (माफ़ीनामे) में यह नहीं कहा कि 26/11 के लिये संघ पर आरोप लगाती हुई मेरी पुस्तक नम्बर एक की कूड़ा पुस्तक है…।

और ऐसा भी नहीं कि अज़ीज़ बर्नी की अक्ल अचानक ठिकाने आ गई हो, इसके पीछे नवी मुम्बई स्थित श्री विनय जोशी हैं जिन्होंने अपने वकील प्रशान्त मग्गू के जरिये, अज़ीज़ बर्नी और सहारा प्रकाशन, लखनऊ के खिलाफ़ दो साल पहले नवी मुम्बई की अदालत में देशद्रोह, भारत की सुरक्षा से खिलवाड़, मानहानि, भावनाएं भड़काने, भावनाओं को चोट पहुँचाने सम्बन्धी कोर्ट केस दायर किया था। इस कोर्ट केस की वजह से बर्नी को लगातार मुम्बई के चक्कर काटने पड़े, जिस वजह से उसे अपने अन्य अखबारी एवं व्यावसायिक काम करना मुश्किल हो गया था। अज़ीज़ बर्नी ने इस कथित माफ़ीनामे सम्बन्धी जो ई-मेल श्री विनय जोशी को भेजा है उसका मजमून इस प्रकार है–

———- Forwarded message ———-
From: Aziz Burney
Date: 28 January 2011 21:45
Subject: Letter for apology
To: Vinay Joshi

Dear Mr.Vinay Joshi,

Since last two years I am writing various articles regarding 26/11 Mumbai terror attack.You had filed court suit against me and Sahara Publications in Navi Mumbai court for my articles regarding Mumbai attack.I never wrote anything to deliberately hurt the feelings of anyone.But if you are disturbed or hurt due to any article or anything I quoted in my article,then I am extremely sorry for this.Hope you would accept my apology.

Also I am requesting you for the immediate withdrawal of court case filed against me in Navi Mumbai court,as it is creating professional difficulties for me and I cannot afford to bear cost of litigation.I never intended to target India’s security apparatus and any patriotic organisation working in India.but if there are any references made in my articles by mistake then I am really sorry for that.I assure you that I will not write anything in future that may hurt anyone and I will take utmost care for the same.Expecting quick withdrawal of court case once again.

Thanks & regards,

Aziz Burney,
Sahara India Complex,
C-2,3,4; Sector 11,Noida-201301
Phone:0120-2553921,2598419
Fax:0120-2545231,2537635

आपने ईमेल की भाषा का नमूना देखा? माफ़ी भी माँग रहा है और अकड़ भी दिखा रहा है…। यह बर्नी भी, दिग्विजय सिंह का ही भाई लगता है, जो सरेआम “26/11, संघ की साजिश” नामक इस पुस्तक के विमोचन में उपस्थित रहते थे लेकिन फ़िर भी कहते रहते थे कि मुम्बई हमलों में पाकिस्तान की भूमिका से इंकार नहीं किया जा सकता, ऐसा दोमुँहापन कभीकभार ही देखने में आता है।

मैं सरकार से माँग करता हूँ कि इस पुस्तक को छापने और वितरित करने के पीछे क्या साजिश रही है इसकी विस्तार से जाँच होनी चाहिये, अज़ीज़ बर्नी को किसने यह पुस्तक लिखने के लिये पैसा दिया, बर्नी के खातों की भी जाँच होनी चाहिये, क्या इस पुस्तक के पीछे “कोई विदेशी हाथ” है, इस पुस्तक की कितनी प्रतियाँ अब तक बिकीं और कहाँ-कहाँ बिकीं? बिक्री की आय का क्या हुआ? इस प्रकार की जाँच शुरु किये जाने से भविष्य में देश की सुरक्षा एवं कूटनीति के खिलाफ़ किसी साजिश से बचा जा सकता है। भविष्य में ऐसी किसी पुस्तक के लेखक को सीधे जेल भेजने की व्यवस्था होनी चाहिये, सिर्फ़ फ़र्जी माफ़ीनामे से काम नहीं चलेगा।

श्री विनय जोशी को मेरी हार्दिक बधाईयाँ, आपके प्रयास स्तुत्य हैं। मैं आपसे अर्ज़ करता हूँ कि भले ही अज़ीज़ बर्नी ने “माफ़ी माँगने का नाटक” कर लिया हो, लेकिन इस केस को वापस नहीं लें, क्योंकि इसमें अभी कई रहस्य बरकरार हैं…। मकबूल हुसैन नामक फ़ूहड़ चित्रकार की तरह इसे भी तब तक जमकर रगड़ें, जब तक कि इसकी सारी हेकड़ी न निकल जाये…

और अज़ीज़ बर्नी में यदि ज़रा भी शर्म बची हो तो वे NDTV, तहलका और “टाइम्स नाऊ” के स्टूडियो (ये तीन सबसे बड़े हिन्दू विरोधी हैं) में अपने साथ दिग्विजय सिंह को ले जाएं और देश तथा संघ से खुलेआम माफ़ी माँगें, न कि इस तरह छिप-छिपाकर…। 

सन्दर्भ :- http://www.indianexpress.com/news/for-linking-rss-to-26-11-aziz-burney-says-sorry-on-front-page/743433/0

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40 Comments

  1. aarya said,

    January 30, 2011 at 3:28 pm

    >ये भारत के वो दलाल हैं जो पैसे के लिए कुछ भी कर सकते हैं …लेकिन इसमे जो दूसरा दलाल है …उसे तो सरेआम भडुआ घोषित कर देना चाहिए …ऐसे लोगों का राष्ट्रिय बहिष्कार होना चाहिए !

  2. January 30, 2011 at 3:30 pm

    >bravo! ऐसे लोगों की अकल इसी तरह ठिकाने लगानी चाहिए।

  3. January 30, 2011 at 3:33 pm

    >इस पर भी कई तथाकथित हिन्दू मुस्लिमों ने यह कहा है कि कुछ लोगों ने बर्नी पर दबाव डालकर यह कराया है…

  4. January 30, 2011 at 3:51 pm

    >विनय जी को बधाई .और उनके कार्य को साहस को सलाम

  5. January 30, 2011 at 4:09 pm

    >Jab Blogvani thee thab maine ise blog par hee padhaa thaa, mujhe to ek nambar kaa paagal lagaa.aur yah dickV uskaa bhee baap.

  6. January 30, 2011 at 4:14 pm

    >बर्नी की ईमेल भाषा से साफ़ ज़ाहिर है की वो सिर्फ लीपापोती के मकसद से खेद्प्रकाश कर रहा है. बाकी तो जो सवाल आपने उठाये हैं उनके भी तो अभी जवाब आना बाकी हैं.

  7. January 30, 2011 at 5:05 pm

    >अपनी सियासी पुंगी पर देशद्रोही राग आलापना इनकी पुरानी रीत है। मैंने भी इनके बारे में पढ़ा था। ये कांग्रेस के पोंगे हैं। जो चाहे करवा लो। बाद में मिमियाकर माफ़ी से भी गुरेज़ नहीं इन्हें। महेश भट्ट भी इनके समारोह में गए थे। वे हर उस शख्स के समारोहों में चले जाते हैं जो राष्ट्रवाद का विरोधी हो

  8. Anonymous said,

    January 30, 2011 at 8:24 pm

    >मैं थोडा हटकर एक बात करना चाहता हूँ. अखबार का सम्पादक आखिर होता क्या है ? एक नौकर ही न ? क्या मालिक दोषी नहीं है ? मालिक ने नौकर की लगातार ऐसी करतूत पर उसको नौकरी से क्यों नहीं निकाला ?

  9. January 31, 2011 at 4:36 am

    >ऐसे पढ़े-लिखे विवेकहीन और शातिर लोगों की कुटिलता भरी माफ़ी का कोई अर्थ नहीं है। बर्नी-दिविजय भाई-भाई! विनय भाई को केस वापस न लेकर उसके अंजाम तक पहुंचने देना चाहिए। माफ़ी मांगी जा रही है अपनी परेशानियों से निजात पाने के लिए न कि अपने कृत्य के लिए, जैसा कि पत्र की भाषा से स्पष्ट हो रहा है।

  10. January 31, 2011 at 4:46 am

    >ये लो "सच्ची-मुच्ची" की माफी भी माँग ली और पता भी न चला. वैसे माफी का लम्बा इतिहास रहा है, लिखने बैठो तो लेख बन जाए. कांग्रेस ने किस किस बात के लिए माफी मांगी है? कोई सुची तैयार करने बैठे तो थक जाए.

  11. Gandhi said,

    January 31, 2011 at 5:17 am

    >इंडियन एक्सप्रेस के आलावा यह खबर किसी अख़बार, चैनल या वेबसाईट ने प्रकाशित नहीं की.

  12. Meenu Khare said,

    January 31, 2011 at 7:19 am

    >बर्नी की हेकड़ी निकालने के लिए विनय जी को धन्यवाद.बर्नी जैसे जाने कितने देशद्रोही भारत में पल रहे है हमे इनका इतना विरोध करना चाहिए की यह बर्नी की तरह मजबूर हो जाए.खाते यहा का है और जड़ भी यही की खोदते है.देशद्रोह की सजा मौत होनी चाहिए.

  13. P K Surya said,

    January 31, 2011 at 7:44 am

    >kameene log kameeni congress sarkar, har samay dikhate rahte he apnee aukat, sahara wale bhi doshi hen unse bhi mafi mangwana chahiye ki aise harami logo ko naukri pe kyoun rakha he, ya sahara group bhi congress ke hath ke katputli he,

  14. sanjay jha said,

    January 31, 2011 at 7:51 am

    >are….ye kya….saharmnirpekshon ko tamacha………sukriya vinayjiko….pranam.

  15. January 31, 2011 at 8:57 am

    >विनय जी को कोटि कोटि नमन |ऐसे देशद्रोहियों के साथ ऐसा ही सुलूक करना चाहिए ताकि और कोई इस तरह की हरकत करने से पहले अपना अंजाम भी सोच ले| वंदेमातरम

  16. January 31, 2011 at 9:21 am

    >ऐसे निहायत ही अवसरवादी और घटिया चरित्र के लोग हमारा ध्यान आकृष्ट करने के लायक नहीं है! पर अफ़सोस, ये कई लोगो का ध्यान आकृष्ट भी करते है और उन लोगो की आँखे खोलने के लिए श्री विनय जोशी जैसे लोगो को अपना समय, ऊर्जा और धन भी लगाना पड़ता है !

  17. January 31, 2011 at 9:37 am

    >आपको बता दू की श्रीमान बर्नी जी २५/११ २००८ को ही पाकिस्तान पहुच गए थे और २६/११ मुंबई हमलों के दौरान वही रहे इसके पीछे का राज क्या है

  18. kaverpal said,

    January 31, 2011 at 11:29 am

    >bhai sahab ye barni aur Diggi dono hi 26/11 ke samay par jarur saath -saath hi honge

  19. January 31, 2011 at 11:48 am

    >बेहतरीन लेख विनय जी जैसे क्रियाशील लोग ही कानूनन ऐसे केसों से निपट सकते हैं

  20. nitin tyagi said,

    January 31, 2011 at 12:15 pm

    >Again our pseudo secular media is hiding this important news from our poor indians thanks suresh ji for this news for good news we have to come and read this blog thanks

  21. vijay jha said,

    January 31, 2011 at 12:23 pm

    >सुरेश जी, अजीज वर्नी का तो करतूत तो सबको पता है, ओ एक पत्रकार कम एक मुस्लिम टेरिरिस्ट ज्यादा लगता है, समाज में वैमनस्य फैलाना ही उसका काम है . परन्तु तकलीफदेह बात है की सहारा जैसा राष्ट्रीय अख़बार को उसने अपना साम्प्रदयिक लेख के लिए माध्यम बनाया . क्या इसके लिए सहारा अखबार और उसका मालिक दोषी नहीं है ? क्या सहारा को इसके लिए माफ़ी नहीं मांगनी चाहिए ? और अंत में विनय जोशी जी को कोटिशः धन्यवाद, अजीज वर्नी को औकात में लाने के लिए, आशा करता हूँ जो सहारा को भी औकात में लायेंगे !-: विजय झा :-

  22. INDIAN said,

    January 31, 2011 at 12:37 pm

    >मै देख रहा हूँ आजकल इन भांड चैनलो पर दो दो कौड़ी के कुत्ते नरेन्द्र मोदी पर भौक रहे है.कांग्रेस की शय पर आजकल संघ और मोदी पर खूब कुत्ते भौक रहे हैअब इन कुत्तो के लिये एक शेर की दहाड़ जरुरी हैएक वो वस्तानवी है कह रहा कि मैने मोदी को क्लीन चिट नही दीमै कहता हूँ तू कौन होता है मोदी को क्लीन चिद देने या न देने वाला.अब बीजेपी को चुप नही रहना चाहिये. इन कुत्तो को दौड़ा दौड़ा के मारना चाहिये.आक्रामकता बहुत जरुरी है

  23. January 31, 2011 at 1:46 pm

    >विनय जोशी जी बधाई के पात्र हैं. अब ऐसे अभियानों में तेजी लानी होगी. लेकिन उपरोक्त सवाल का जवाब मिलना जरुरी है………..

  24. January 31, 2011 at 2:48 pm

    >तिस्ता जावेद की हालत भी ज्यादा ठीक नहीं है. खूदा रहमत रखे. कुछ नालायक लोग कानूनी रास्ते से परेशान कर रखा है, सुना है कभी भी गिरफ्तार हो सकती है. मैं तो गंगा-जमना संस्कृति को लेकर चिंतित हूँ.

  25. January 31, 2011 at 3:13 pm

    >लगता है इटली कि माइनो को कुत्ते पालने का बहुत सौख है, और उशने कई कुत्ते पाल रखे है. जैशे कि, खुजली वाला कुत्ता,, देश द्रोही कुत्ता,, भौंकने वाला कुत्ता,, कमीना कुत्ता,, आदि आदि, और ये सारे कुत्ते इतने वफादार और चापलुश हैं, कि मालकिन के टुकड़ों पर पलते हैं, और उश्के सामने दुम हिला कर खड़े रहते हैं, और मालकिन ने इन कुत्तों को अलग अलग कम सौप रखा है. जैसे कि नरेन्द्र मोदी को गाली देना, हिन्दुओं को बदनाम करना, जानबूझ कर हिन्दुओं कि भावना को ठेस पहुचाना, देह्द्रोहियों का समर्थन करना, और ये कुत्ते भी खूब वफ़ा दार और आज्ञा करी हैं. अपना काम निभा रहें हैं. लगता है इनकी _____??? पे पेट्रोल लगाने का समय आ गया है.

  26. Anonymous said,

    January 31, 2011 at 3:44 pm

    >जनार्दन मिश्र और आर्य के विचार से 100% सहमत और श्री विनय जोशी जी को कोटि कोटि साधुवाद

  27. anil yadav said,

    January 31, 2011 at 3:44 pm

    >दिग्विजय सिंह भारत के लिए पाकिस्तान से ज्यादा बड़ा खतरा है….उसके खिलाफ भी एक मुकदमा कायम होना चाहिए….

  28. Shiva said,

    January 31, 2011 at 4:08 pm

    >Burney should be hanged with Kasab.

  29. January 31, 2011 at 5:31 pm

    >पहली बात तो विनय जोशी को बरनी का अजीज बनने और मुकदमे वापस लेने से बचना चाहिए.दूसरी बात, हुसैन की तरह इसे भी इतना रगडा जाए कि बर्नियो की नानिया याद आ जाएँ.बेंगानी जी ने बिलकुल सही कहा है कि तीस्ता जावेद की हालत भी ठीक नहीं है. अब उसकी पोल खुल गयी है. उसने भोले मुस्लिमो को बहला-फुसला कर ढेर सारे इनाम-इकराम बटोरे हैं. कोर्ट से कई बार लताड़ खाई है. फिर भी तीस्ता खाला कुत्ते की दम की तरह टेढ़ी की टेढ़ी ही हैं. जो लगता है क़ानून की मार से ही सीधी होगी.आज जहां हिन्दू समाज को सुरेशजी जैसे तथ्य परक और तार्किक लेखको की जरूरत है, वैसे ही विनय जोशी जैसे कानूनी कुश्तीबाजो की भी जरूरत है.आखिर सरे आम सैकड़ो लोगो की जान लेने वाले जेहादी क़ानून की मदद लेकर बच जाते हैं तो, हमें भी जेहादियों और बिकाऊ सेकुलर भाँड़ो से देश की रक्षा के लिए क़ानून की मादा लेने में कैसा आलस??फिर देखना कैसे महेश भत्तो, तरुण तेज्पालो, बुर्का दत्तो और तीस्ताओ की अकाल ठीकाने आती है??

  30. sudesharma said,

    January 31, 2011 at 5:33 pm

    >thuk kar chaat bhi liya??kitna besharm h !! sahara ko bhi party bna kar mukadma chalana tha, aur mafi ke layak ye log h hi nahi,inko to anjam tak le jana jaruri hjoshi ji jaise logo ke hum aabhari h *saanch ko aanch nahi*

  31. Anonymous said,

    January 31, 2011 at 7:47 pm

    >Bharat ek Chhamashil desh Hia. Prithvi Raj Chouhan Ne Anoke Bar Md. Gori ko Maf kiya tha. Lekin Gori ne Prithvi Raj ko ek bar bhi Maf nahi Kiya. Kya uske mafi ne Gori ke dimag ko badal saka tha ? Naheeee. Phir Ye maafi Kyo. Kya vo hamari galati ko maaf karega (jise hum karte bhi nahi). Prithvi ke mafi ko aaj tak hum bhugat rahe hai. Mafi ki ek sima honi chaiye ya honi hi nahi chaiya. Aise logo ko to not at all.

  32. January 31, 2011 at 8:34 pm

    >यह कमीना माफी नही माँग रहा, स्पष्ट शब्दों मे अपने व्यावसायिक हित की रक्षा मांग रहा है, असली माफी तो अभी बहुत दूर की कौडी है।

  33. February 1, 2011 at 6:34 am

    >Lies have no legs.A lie can be pushed forward by more and more innovative and seemingly convincing lies till objective of the liar is achieved.Even when caught red handed, the expert liars have all the tricks up their sleeves.Either they tell still bigger lies to justify their lies as truth or finding no escape route blame others for misleading or plead that they acted under duress.झूठ के पैर नहीं होते हैं |एक झूठ बोलने वाला व्यक्ति अपने अभीष्ट की सिद्धि के लिए झूठ को आगे बढ़ाने के लिए पहले वाले झूठ से अधिक आश्वस्त करने वाले झूठ का निरंतर निर्माण करते रहता है |खानदानी – पेशेवर झूठ बोलने वाला शातिर – मक्कार व्यक्ति रंगे हाथों पकड़े जाने पर अपने बचाव के लिए और भी बड़ा झूठ बोलता है कि वही सच्चा है और उसे पकड़ने वाला झूठा |यदि यह कहने पर भी बचाव न होता दिखे तो अपने को निर्दोष साबित करने के लिए अपने सूचना के श्रोत को झूठा बता देता है या अंतिम हथियार के तौर पर यह कहता है कि वह तो मासूम है – उसे झूठ बोलने के लिए मजबूर किया गया | यदि कोई खानदानी – पेशेवर झूठ बोलने वाला शातिर – मक्कार व्यक्ति अंत में माफ़ी भी मांगता है तब भी उसकी बातों में झूठ भरा रहता है | झूठों की चिकनी चुपड़ी बातों पर विश्वास कर लेना मूर्खों का जन्मजात स्वभाव होता है |

  34. Rahul said,

    February 1, 2011 at 9:27 am

    >सुरेश जी "ज्योतिष शास्त्र(?)" पर आपने जो लेख लिखे है वो खुल नही रहे है मदद करे

  35. Man said,

    February 1, 2011 at 10:01 am

    >वन्देमातरम सर ,प्रणाम विनय जोशी जी को ,और आप को भी जो की एसी छूपी हुई खबरे लोगो के सामने लाते हे|जनार्दन भाई ने ठीक फ़रमाया हे की इन विभीन श्रेणी के वफादार कांग्रेसी शवानो के पेट्रोल चीटाने का टाइम आ गया हे ,उस से पहले इनकी नसबंदी जरूरी हे ?क्योकि कांग्रेस में एक से बढ़ के एक अलामो की ओद भरी पडी हे |http://jaishariram-man.blogspot.com/2011/01/blog-post_21.html

  36. February 1, 2011 at 3:31 pm

    >इन दोनों के स्विस खातों की जांच की जाए

  37. Alok Mohan said,

    February 1, 2011 at 3:38 pm

    >@vinay ji ko dhanywad….yeshi hi pol patti kholte rehiyega

  38. February 2, 2011 at 12:07 pm

    >श्री विनय जोशी जी के हम बहुत बहुत आभारी हैं…

  39. February 2, 2011 at 2:47 pm

    >सबसे पहले विनय जोशी जो को बधाई की ऐसे देशद्रोही को सबक सिखाया उन्हें ये केस उनके लाख गिद्ग्ग्दाने पर भी वापिस नहीं लेना चाहिए उसे सजा मिलनी ही चाहिए और हम सभी को भी ऐसे लोगों का बहिष्कार करना ही चाहिए ताकी ऐसे गद्दारों का नमो निशाँ मिट सके !

  40. Ashwani Jain said,

    February 3, 2011 at 3:52 pm

    >latest news….like all other natioal symbols..SCAMgress(congress) decalred a new symobl.NATIONAL BHADUA: Digvijay singh


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