>यदि कोर्ट का निर्णय चर्च के खिलाफ़ है…… तो नहीं माना जायेगा (भाग-2)… Church, Vatican, Conversion and Indian Judiciary (Part-2)

>(भाग-1 से आगे जारी…)
आप सोच रहे होंगे कि बिनायक सेन तो नक्सलवादियों के समर्थक हैं, उनका चर्च से क्या लेना-देना? यहीं आकर “भोला-भारतीय मन” धोखा खा जाता है, वह “मिशनरी” और “चर्च” के सफ़ेद कपड़ों को “सेवा और त्याग” का पर्याय मान बैठा है, उसके पीछे की चालबाजियाँ, षडयन्त्र एवं चुपके से किये जा रहे धर्मान्तरण को वह तवज्जो नहीं देता। जो इसके खिलाफ़ पोल खोलना चाहता है, उसे “सेकुलरिज़्म” एवं “गंगा-जमनी तहजीब” के फ़र्जी नारों के तहत हँसी में उड़ा दिया जाता है। असल में इस समय भारत जिन दो प्रमुख खतरों से जूझ रहा है वह हैं “सामने” से वार करने वाले जिहादी और पीठ में छुरा मारने वाले मिशनरी पोषित NGOs व संगठन। सामने से वार करने वाले संगठनों से निपटना थोड़ा आसान है, लेकिन मीठी-मीठी बातें करके, सेवा का ढोंग रचाकर, पीठ पीछे छुरा घोंपने वाले से निपटना बहुत मुश्किल है, खासकर जब उसे देश में “उच्च स्तर” पर “सभी प्रकार का” (Article about Sonia Gandhi) समर्थन मिल रहा हो… 

खैर, बात हो रही थी बिनायक सेन की… ध्यान दीजिये कि कैसे उनके पक्ष में अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर माहौल बनाया गया, तमाम मानवाधिकार संगठन और NGOs रातोंरात मीडिया में एक लोअर कोर्ट के निर्णय को लेकर रोना-पीटना मचाने लगे, यह सब ऐसे ही नहीं हो जाता है, इसके लिये चर्च की जोरदार “नेटवर्किंग” और “फ़ण्डिंग” चाहिये। उल्लेखनीय है कि बिनायक सेन के इंडियन सोशल इंस्टीट्यूट अर्थात “ISI” से भी सम्बन्ध हैं।  इस “भारतीय ISI” (Indian ISI) के बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टरों की सूची, इसका इतिहास, इसके कामों को देखकर शंका गहराना स्वाभाविक है… इस संस्था की स्थापना सन 1951 में फ़ादर जेरोम डिसूजा द्वारा नेहरु के सहयोग से की गई थी, वह वेटिकन एवं नेहरु के बीच की कड़ी थे। पुर्तगाल सरकार द्वारा भारतीय चर्चों के कब्जे से मुक्ति दिलाने हेतु उस समय फ़ादर जेरोम, नेहरु एवं वेटिकन मिलजुलकर काम किया। यह जाँच का विषय है कि बिनायक सेन के इस भारतीय ISI से कितने गहरे सम्बन्ध हैं? डॉ सेन, जंगलों में गरीब आदिवासियों की सेवा करने जाते थे या किसी और काम से? 

इस संस्था की पूरी गम्भीरता से जाँच की जाना चाहिये…

1) कि इस संस्था के जो विभिन्न केन्द्र देश भर में फ़ैले हुए हैं,

2) उन्हें (यदि अर्ध-सरकारी है तो) भारत सरकार की तरफ़ से कितना अनुदान मिलता है,

3) (यदि गैर-सरकारी है तो) विदेशों से कितना पैसा मिलता है,

4) 1951 में इसका “स्टेटस” क्या था और इस संस्था का वर्तमान “स्टेटस” क्या है, सरकारी, अर्ध-सरकारी या गैर-सरकारी?,

5) यदि सरकारी है, तो इसके बोर्ड सदस्यों में 95% ईसाई ही क्यों हैं? सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में इस संस्था द्वारा किये जा रहे कार्य, गरीबों की सेवा के नाम पर खड़े किये गये सैकड़ों NGOs की पड़ताल, इस संस्था का धर्मान्तरण के लिये “कुख्यात” World Vision Conspiracy of Conversion नामक संस्था से क्या सम्बन्ध है? जैसे कई प्रश्न मुँह बाये खड़े हैं…

लेकिन जैसा कि मैंने कहा सत्ता-पैसे-नेटवर्क का यह गठजोड़ इतना मजबूत है, और बिकाऊ मीडिया को इन्होंने ऐसा खरीद रखा है कि “चर्च” के खिलाफ़ न तो कोई खबर छपती है, न ही इसके कारिन्दों-फ़ादरों-ननों (Indian Church Sex Scandals) आदि के काले कारनामों (Sister Abhaya Rape/Murder Case) पर मीडिया में कोई चर्चा होती है… और अब तो ये भारत की न्यायिक व्यवस्था को भी आँखें दिखाने लगे हैं… इनका साथ देने के लिये वामपंथी, सेकुलर्स एवं कथित मानवाधिकारवादी भी सदैव तत्पर रहते हैं, क्योंकि ये सभी मिलकर एक-दूसरे की पीठ खुजाते हैं…।

तीस्ता सीतलवाड को फ़र्जी गवाहों और कागज़ातों के लिये कोर्ट लताड़ लगाता है, तब मीडिया चुप…, तीस्ता “न्याय”(?) के लिये विदेशी संस्थाओं को निमंत्रण देती है, सुप्रीम कोर्ट नाराज़ होकर जूते लगाता है… तब मीडिया चुप…, शाहबानो मामले में खुल्लमखुल्ला सुप्रीम कोर्ट को लतियाकर राजीव गाँधी मुस्लिमों को खुश करते हैं… तब भी मीडिया चुप…, ए राजा के मामले में, आदर्श सोसायटी मामले में, कॉमनवेल्थ मामले में, और अब CVC थॉमस की नियुक्ति के मामले में सुप्रीम कोर्ट आये-दिन लताड़ पर लताड़ लगाये जा रहा है, कोई और प्रधानमंत्री होता तो अब तक शर्म के मारे इस्तीफ़ा देकर घर चला गया होता, लेकिन मनमोहन सिंह को यह काम भी तो “पूछकर ही” करना पड़ेगा, सो नहीं हो पा रहा…। मीडिया या तो चुप है अथवा दिग्विजय सिंह को “कवरेज” दे रहा है…

जेहादियों के मुकाबले “चर्च” अधिक शातिर है, दिमाग से गेम खेल रहा है… हिन्दुओं को धर्मान्तरित करके उनके नाम नहीं बदलता, बस उनकी आस्था बदल जाती है… आपको पता भी नहीं चलता कि आपके पड़ोस में बैठा हुआ “हिन्दू नामधारी” व्यक्ति अपनी आस्था बदल चुका है और अब वह चर्च के लिये काम करता है…। स्वर्गीय (Rajshekhar Reddy) राजशेखर रेड्डी इसका साक्षात उदाहरण है… इसी प्रकार स्वामी लक्ष्मणानन्द सरस्वती की हत्या का प्रमुख आरोपी एवं षडयन्त्रकारी उड़ीसा से कांग्रेस का राज्यसभा सदस्य राधाकान्त नायक (Radhakant Nayak) (क्या सुन्दर हिन्दू नाम है) भी “फ़ुल” ईसाई है, World Vision का प्रमुख पदाधिकारी भी है। पहले तो चर्च ने बहला-फ़ुसलाकर दलितों-आदिवासियों को ईसाई बना लिया, नाम वही रहने दिया ताकि “आरक्षण” का लाभ मिलता रहे, और अब “दलित-ईसाई” नामक अवधारणा को भी आरक्षण की माँग हो रही है… यानी “ओरिजिनल दलितों-पिछड़ों” के हक को मारा जायेगा…और आदिवासी इलाकों में बिनायक सेन जैसे “मोहरे” फ़िट कर रखे हैं… इसीलिये मैंने कहा कि सामने से वार करने वाले जिहादी से तो निपट सकते हो, लेकिन चुपके से षडयन्त्र करके, पीठ पीछे मारने वाले से कैसे लड़ोगे?

तात्पर्य यह कि “कानून अपना काम करेगा…”, “न्यायालयीन मामलों में राजनीति को दखल नहीं देना चाहिये…”, जैसी किताबी नसीहतें सिर्फ़ हिन्दुओं के लिये आरक्षित हैं, जब निर्णय चर्च या धर्मान्तरण के खिलाफ़ जायेगा तो तुरन्त “अपने” मीडियाई भाण्डों को जोर-जोर से गाने के लिये आगे कर दिया जायेगा। “नागालैण्ड फ़ॉर क्राइस्ट” (Nagaland for Christ) तो हो ही चुका, उत्तर-पूर्व के एक-दो अन्य राज्य भी लगभग 60-70% ईसाई आबादी वाले हो चुके, सो वहाँ अब वे “खुल्लमखुल्ला” चुनौती दे रहे हैं… जबकि शेष भारत में “घोषित रूप” से 3 से 5% ईसाई हैं लेकिन “अघोषित” (रेड्डी, नायक, महेश भूपति, प्रभाकरन जैसे) न जाने कितने होंगे…(एक और “कुख्यात शख्सियत” नवीन चावला (Navin Chawla) को भी तमाम आपत्तियाँ दरकिनार करते हुए चुनाव आयुक्त बनाया गया था, चावला भी “अचानक” मदर टेरेसा से बहुत प्रभावित हुए और उनकी “बायोग्राफ़ी” भी लिख मारी, एक फ़र्जी ट्रस्ट बनाकर “इटली” सरकार से एक पुरस्कार भी जुगाड़ लाये थे, चुनाव आयुक्त रहते वोटिंग मशीनों का गुल खिलाया… क्या कोई गारण्टी से कह सकता है कि नवीन चावला ईसाई नहीं है? ऐसे बहुत से “दबे-छिपे” ईसाई भारत में मिल जाएंगे जो हिन्दुओं की जड़ें खोदने में लगे पड़े हैं)… मतलब कि, ईसाई जनसंख्या का यह सही आँकड़ा तभी सामने आयेगा, जब वे भारत की सत्ता को “आँखें दिखाने” लायक पर्याप्त संख्या में हो जायेंगे, फ़िलहाल तो मीडिया को अपने कब्जे में लेकर, बड़ी-बड़ी संस्थाओं और NGOs का जाल बिछाकर, सेवा का ढोंग करके चुपचाप अन्दरखाने, गरीबों और आदिवासियों को “अपनी तरफ़” कर रहे हैं… जैसा कि मैंने पहले कहा “भोला भारतीय मन” बड़ी जल्दी “त्याग-बलिदान-सेवा” के झाँसे में आ ही जाता है, और कभी भी इसे “साजिश” नहीं मानता… परन्तु जब सुप्रीम कोर्ट या कोई आयोग इसकी पोल खोलने वाला विरोधी निर्णय सुनाता है तो “गरीबों की सेवा करने वालों” को मिर्ची लग जाती है…।

चलते-चलते :-

1) भारत में ईसाईयों का प्रतिशत और केन्द्रीय मंत्रिमण्डल में ईसाई मंत्रियों की संख्या के अनुपात के बारे में पता कीजिये…

2) केन्द्र के सभी प्रमुख मंत्रालयों के प्रमुख सचिवों, (विदेश-रक्षा-गृह-आर्थिक इत्यादि) में पदस्थ केरल व तमिलनाडु के IAS अधिकारियों की सूची बनाईये…। यह देखिये कि उसमें से कितने असली ईसाई हैं और कितने “नकली” (राधाकान्त नायक टाइप के)

3) सोनिया गाँधी ने थॉमस और नवीन चावला की नियुक्ति में इतना “इंटरेस्ट” क्यों लिया? और अब सुप्रीम कोर्ट की लताड़ खाने के बावजूद थॉमस को हटाने को तैयार क्यों नहीं हैं?

(थोड़ा गहराई से विचार करें, और ऊपर के तीनों सवालों के जवाब खोजने की कोशिश करेंगे तो आपकी आँखें फ़टी की फ़टी रह जाएंगी…, दिमाग हिल जायेगा)

4) कांची के शंकराचार्य (Kanchi Seer) को हत्या के आरोप में, नित्यानन्द (Nityanand Sex Scandal) को सेक्स स्कैण्डल में, असीमानन्द को मालेगाँव मामले में… फ़ँसाया और बदनाम किया गया जबकि लक्ष्मणानन्द सरस्वती (Laxmanand Saraswati Assanination by Church) को माओवादियों के जरिये मरवा दिया गया… क्या यह सिर्फ़ संयोग है कि चारों महानुभाव तमिलनाडु, कर्नाटक, गुजरात और उड़ीसा के आदिवासी क्षेत्रों में मिशनरी के धर्मान्तरण के खिलाफ़ बहुत प्रभावशाली काम कर रहे थे।

संकेत तो स्पष्ट रूप से मिल रहे हैं। हम ठहरे चौकीदार, सीटी बजाकर “जागते रहो-जागते रहो” चिल्लाते रहना हमारा काम है… आगे आपकी मर्जी…

(समाप्त)

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15 Comments

  1. February 7, 2011 at 8:23 am

    >जो नक्शा आपने दिखाया है वही नक्सली बेल्ट भी है ये महज एक संयोग नहीं है । पूर्व गृह मंत्री तो नकसलवाद कोई समस्या नहीं बताते रहे और अब दिग्विजय जैसे चमचे छत्तीसगढ़ सरकार को इसके लिए जिम्मेदार बता रहे हैं । इस व्यक्ति ने तो मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ को कितना डुबाया यह कोई छुपी बात नहीं है। नकसलवाद की आड़ में धर्म परिवर्तन का खेल खेला जा रहा है और हमारे पढे लिखे लोग विनायक सेन के लिए आँसू बहा रहे हैं । इन का कहना सही है कि बड़े बड़े अपराधी तो बाहर घूम रहे हैं और इनका आदमी अंदर हो गया। एक आदमी कितनी पहुँच रखता है इसका बहुत बड़ा उदाहरण है विनायक सेन। और यह खेल यहीं नहीं विदेशों में भी खेला जा रहा है । भोले भाले भारतियों से देश के नाम पर चंदा इकट्ठा करके इन तक पहुंचाया जा रहा है ।

  2. February 7, 2011 at 8:53 am

    >आपको ज्ञात न हो तो ( 🙂 ) बता दुं, धर्मांतरित हिन्दु एक और पैंतरा आजमाने लगे है, वे अपनी ईसाई आस्था पड़ोसी तक के सामने उजागर नहीं करते. आपको पता ही नहीं चलता कितनों ने धार्मांतरण किया है. इस ईसाई आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए न हथियार है न उपकरण. यह क्षय है जिसको बढ़ते हुए देखने के लिए हम अभिशप्त हैं.

  3. February 7, 2011 at 9:07 am

    >लेकिन हम नहीं जागेंगेआप क्यों हमारी नींद खराब कर रहे हो?

  4. February 7, 2011 at 9:46 am

    >सुरेश जी मेडम तो इसाई है और वो इसाई यों कि वकालत करती है ये बात तो समझ में आती है, क्यों कि उसे हिंदी शंस्कृति और हिन्दुओं से कोई दूर दूर तक का नाता नहीं है, उश्के तो पूर्वज इसाई ही थे. लेकिन नकारे और अपने पूर्वजों का भी पता नहीं है ऐशे तथा कथित सोनिया प्रेमी हिन्दू, जिनको चाटुकार, भडवा, देश द्रोही, कमीने, और भारत माता के गद्दारों से कैसे निपटा जाय, अब इनके बारेमे सोचने का और इनको अपनी सही "मां" बताने का समय आ गया है, छाती में छुरा घोप दे उशसे तो लड़कर निपट लेंगें, लेकिन इन पीठ में छुरा घोंपने वाले कथित हिन्दू चापलूसों और नामर्दों को सबक सिखा ने का वाक्क्त आ गया है

  5. P K Surya said,

    February 7, 2011 at 11:31 am

    >Suresh bhaiya ko Namaskar, Ye sab me apne as pas k sabhi logo ko bata hun kee kaise ye Haramkhor or kameene log Dharma ka ganda natak khel rahen hen, kuchh samjhte hen or kuchh kahte hen esshse hume kya fark parta he En Hindu Gadho ko samjhane k chakkar me mujhe unhen bahut kuchh satya Net pe dikha k samjhana pdta he, Jai Bharat

  6. Man said,

    February 7, 2011 at 12:22 pm

    >जय श्री राम श्रीमान ,शोधपूर्ण और तथ्य आलेख प्रस्तुत करने के लिए धन्यवाद |इसाई मिशनरिया धीमे जहर के सामान हिन्दू समाज पे असर कर रही ,मानव सेवा की आड़ में एक बहुत बड़े तबके को इसाई धर्म में तब्दील कर दिया गया हे |और आपने अंत में जो यक्ष प्रशन पूछे हे वो भी किसी शक्तिशाली भारतीय आका की तरफ इशारा कर रहे हे शायद "'मुन्नी "'?

  7. February 7, 2011 at 2:15 pm

    >आप ठहरे सीटी बजाकर “जागते रहो-जागते रहो” चिल्लाते रहने वाले चौकीदार और हम (यानि तथाकथित हिन्दू) ठहरे चौकीदार की आवाज को सुनकर और भी मजे से दुबककर सो जाने वाले लोग…

  8. February 7, 2011 at 6:34 pm

    >वाकई मे आँखे फटी रह गयी है दिमाग कौंध गया हैबहुत कठिन चक्रव्यूह रचा जा रहा है हिँदुओ के खिलाफ.

  9. February 7, 2011 at 11:14 pm

    >हिन्दू अपने हितों की रक्षा कभी नहीं कर सकता..

  10. February 8, 2011 at 7:49 am

    >अमित जैन (जोक्पीडिया )की कमेंट सुनी.. ये अनोखा तरीक़ा है।

  11. February 8, 2011 at 1:02 pm

    >ISI की लिंक भी पड़ी और बोर्ड ऑफ़ मेम्बेर्स की लिस्ट भी देखि ये रही उनकी सूचि पते सहित FR. EDWARD MUDAVASSERYPresident225, Jor Bagh New Delhi 110 003DR. JOHN CHATHANATTVice President ISI, Lodi Road New Delhi 110 003DR. CHRISTOPHER LAKRASecretary ISI, Lodi RoadNew Delhi 110 003BR. ANTONYTreasurer ISI, Lodi Road New Delhi 110 003DR. Mutholil K. GeorgeMemberDirector, Indian Social Institute24, Benson roadBangalore 560 046FR. XAVIER JEYARAJMemberCoordinator (JESA), C/O ISI, Lodi RoadNew Delhi 110 003MR. PAUL JACOBStaff RepresentativeISI, Lodi RoadNew Delhi 110 003MR. ROBERT D'SOUZAStaff RepresentativeISI, Lodi RoadNew Delhi 110 003FR. JOY KARAYAMPURAMMember Provincial of Patna, St.Xavier's, Gandhi Maidan Marg DT. Patna, Bihar 800 001FR. JOHN ARIAPILLYMemberDirector – Sahyog, St.Xavier's, 4 Raj Niwas marg Delhi 110 054MR. D.K. MANAVALANMemberExecutive Director (AFPRO)24/1A, Institutional Area, Pankha Road D-Block Janakpuri, New Delhi 110 058PROF. IMTIAZ AHMEDMember B-361, Vasantkunj EnclaveNew Delhi 110 070FR. VINCENT EKKAMemberISI, Lodi RoadNew Delhi 110 003DR. JOSEPH BARAMember1307, PoorvanchalJawaharlal Nehru University New Delhi 110 025MS. PAMELA PHILIPOSE Member S-314, Panchseel Park New Delhi 110 ००३एक भी हिन्दू नहीं है …

  12. February 9, 2011 at 11:14 am

    >पहले वो आए साम्यवादियों के लिएऔर मैं चुप रहा क्योंकि मैं साम्यवादी नहीं थाफिर वो आए मजदूर संघियों के लिएऔर मैं चुप रहा क्योंकि मैं मजदूर संघी नहीं थाफिर वो यहूदियों के लिए आएऔर मैं चुप रहा क्योंकि मैं यहूदी नहीं थाफिर वो आए मेरे लिएऔर तब तक बोलने के लिए कोई बचा ही नहीं था!!!भाऊ आप कितना भी ढोल भोपू बजा लो अपन गहरी निद्रा से उठने वाले नहीं है ! उनके मुख्य कारण निम्न है -१ गौतम बुद्ध जिसने शान्ति का ऐसा पाठ पढ़ाया जो छत्रियो ने सशत्र छोड़ दिए और नपुंसक हो गए !२ बुद्ध की दी नपुंसकता से मुग़ल जीते और हम सदियों से लात खा खा कर गुलाम और पिछड़े रहने के आदि हो गए है !३ बचे खुचे स्वाभिमानियो और पौरुश्पूर्नो के लिए आये गांधी जो अहिंसा के नाम पर हिन्दुओ की मारने की ट्रेनिंग दे गए !वैसे अपने समाज में पृथ्वीराज के वंशज कम और जैचंद के जने ज़्यादा है !बस भविष्य जो दिख रहा है की … " जय हो "

  13. I and god said,

    February 10, 2011 at 4:24 am

    >church is doing this, church is doing that, sonia is helping…..blah…. blah….where are hindus ! what they are doing ! why they do not do anything, except shouting , sher aayaa (lion come). jai shree ram

  14. Anonymous said,

    March 2, 2011 at 5:02 pm

    >Ek vyakti (Ramdev) haramkhoro ke khilaf khada hua hai…use hamare padhe-likhe bhai rajniti me na jaane ki nasihat dete hain….. baat ye nahi ki wo in haramkhoro ke virudh bol raha hai ……. pareshane sirf uske kapdo ke rang se hai….


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