>हसन अली को बचाने वाली अदृश्य शक्तियाँ कौन सी हैं…?…… Hasan Ali Tax Evador, Swiss Banks, Black Money in India

>देश की सुप्रीम कोर्ट लगातार कांग्रेस सरकार को फ़टकार पर फ़टकार लगाये जा रही है, लेकिन सुधरना तो दूर, सरकार के कर्ताधर्ता चिकने घड़े की तरह बड़ी बेशर्मी से मुस्करा रहे हैं। ताज़ा मामला हसन अली का है, प्रवर्तन निदेशालय के दस्तावेजों में साफ़ दर्ज है कि हसन अली ने “अज्ञात स्रोतों”(?) से करोड़ों रुपये (डॉलर) स्विटजरलैण्ड की बैंकों में जमा किये हैं, लेकिन मजबूरी में (यानी सुप्रीम कोर्ट द्वारा पिछवाड़े में डण्डा करने के बाद ही) जब हसन अली (Hasan Ali Khan)  पर कार्रवाई करने की नौबत आई तो सरकारी एजेंसी ऐसा कोई सबूत ही पेश नहीं कर पाई, और अदालत ने हसन अली को सशर्त जमानत पर रिहा कर दिया। हसन अली सिर्फ़ एक-दो दिन के लिये हिरासत में रहा।

जिस व्यक्ति को जरा भी ज्ञान न हो, एकदम बेवकूफ़ हो या एकदम बोदे दिमाग वाला हो… वह भी आँख बन्द करके बता सकता है कि 50,000 करोड़ से अधिक की टैक्स चोरी (Tax Evation by Hasan Ali)  करने वाला “सिर्फ़ घोड़े का व्यापारी” या “स्क्रेप आयात करने” वाला नहीं हो सकता। सभी जानते हैं कि अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर सबसे अधिक पैसा ड्रग्स डीलिंग और हथियारों के सौदे की कमीशनखोरी में है। जब बोफ़ोर्स जैसा सिर्फ़ 64 करोड़ का सौदा क्वात्रोच्ची को मालामाल कर देता है तो आजकल अरबों के जो सौदे होते हैं उसमें अदनान खशोगी (Adnan Khashoggi Arms Dealer)  जैसे बड़े हथियार डीलरों (कमीशनबाजों) और भारत में उसके एजेण्ट हसन अली और दाऊद जैसे लोग अपने-आप में एक “अर्थव्यवस्था” हैं, और यह राजपाट बगैर उच्च स्तर के राजनैतिक संरक्षण के सम्भव ही नहीं है।

जानते सभी हैं, मानते सभी हैं, लेकिन “ऊपरी दबाव” इतना ज्यादा है कि हसन अली का बाल भी बाँका नहीं हो रहा। यदि जाँच एजेंसियों और आयकर विभाग के पास कोई सबूत नहीं था, तो फ़िर मुम्बई आयकर विभाग ने हसन अली को विदेशी बैंक में खाता रखने और उसे घोषित करने के आरोप में नोटिस क्यों भेजा? और नोटिस भेजा था तो उस पर आगे अमल क्यों नहीं किया गया, आयकर विभाग अब तक क्यों सोता रहा? राज्यसभा में 4 अगस्त 2009 को ही जब सरकार ने लिखित में मान लिया था कि हसन अली 50,0000 करोड़ का देनदार है, तो पिछले 2 साल में मनमोहन सिंह-प्रणब मुखर्जी-चिदम्बरम-मोंटेक सिंह वगैरह क्या अब तक तेल बेच रहे थे?

यह विशालतम (और कल्पनातीत) डॉलरों के आँकड़े और कारनामे तो हम आज की तारीख की बात कर रहे हैं, लेकिन हसन अली रातोंरात तो इस स्तर पर पहुँचा नहीं होगा। सीढ़ी-दर-सीढ़ी राजनेताओं, अफ़सरों और व्यवस्था को पुचकारते-लतियाते-जुतियाते ही यहाँ तक पहुँचा होगा। सवाल उठता है कि उसके पिछले अपराधों पर अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई? हसन अली खान को उसकी युवावस्था में बचाने वाले नेता और अफ़सर कौन-कौन हैं? आईये देखते हैं हसन अली के पुराने कारनामों को –

हसन अली का बाप आबकारी अधिकारी था, हैदराबाद (Hyderabad India)  के मुशीराबाद इलाके के इस परिवार में हसन अली का एक भाई और चार बहनें हैं। हसन अली ने शुरुआत में कबाड़ खरीदने-बेचने से शुरुआत की, फ़िर वह पुरातत्व की वस्तुओं और मूर्तियों के निर्यात के बिजनेस में उतरा (गजब का संयोग है कि सोनिया गाँधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा भी इसी धंधे में हैं, और सोनिया गाँधी के परिवार के भी इटली में शो-रुम हैं जो “एंटीक” वस्तुओं का आयात-निर्यात करते हैं)। खैर… हसन अली हैदराबाद से पुणे चला गया और वहाँ घोड़ों को खरीदने-बेचने-ट्रेनिंग देने और रेस में पैसा लगाने का धंधा शुरु कर लिया, उसकी दूसरी बीबी (वर्तमान) इस धंधे में उसकी पार्टनर बताई जाती है। जबकि पहली बीबी मेहबूबुन्निसा बेगम अपने दो बेटों के साथ आज भी हैदराबाद के “सुपर-पॉश” बंजारा हिल्स इलाके में रहती है।

(हसन अली के समर्थक(?) और कांग्रेस के चमचे कहेंगे कि इसमें कौन सी बड़ी बात है, कोई भी व्यक्ति कोई सा भी धंधा कर सकता है, जब तक वह कोई गैरकानूनी काम नहीं करता)

लेकिन मामला इतना सीधा नहीं है, मार्च 1990 में (यानी आज से 21 साल पहले) हैदराबाद के SBI की चारमीनार ब्रांच (Charminar Hyderabad)  के मैनेजर ने पुलिस में FIR दर्ज की थी कि हसन अली ने फ़र्जी ड्राफ़्टों की धोखाधड़ी के जरिये 26 लाख रुपये निकाल लिये हैं और चेक बाउंस होने के बावजूद धड़ाधड़ चेक काटता रहा और माल उठाता रहा है। इसी से मिलती-जुलती शिकायत लिखित में हैदराबाद के ANZ Grindlays Bank के मैनेजर ने भी कर रखी है (कोई नहीं जानता कि 21 साल में इस धोखेबाज पर क्या कार्रवाई हुई)

सितम्बर 1991 में केन्द्र सरकार ने “अनोखी”(?) योजना जाहिर की थी कि जितने भी टैक्स चोर हैं, काले धन के मालिक हैं… वे अपनी सम्पत्ति में से 30% टैक्स दे दें तो उनकी सारी सम्पत्ति “सफ़ेद धन” मान ली जायेगी। (Voluntary Disclosure Income Scheme) यानी ऐ टैक्स चोरों, हमारी तो औकात है नहीं कि हम तुम्हें पकड़ सकें, इसलिये आओ और “भीख” में अपने 30% टैक्स का टुकड़ा डाल जाओ और ऐश करो… तुम्हें कोई कुछ नहीं कहेगा… (बड़े-बड़े हरामखोर मगरमच्छों को “प्यार से सहलाने” वाली इस अनोखी स्कीम के प्रणेता भी उस वक्त हमारे “ईमानदार बाबू” ही थे… तालियाँ…)। इस स्कीम(?) के दौरान हसन अली ने तीन NRI लोगों, सुरेश मेहता से 10 लाख, राजेश गुप्ता से 6 लाख, एक अन्य राजेश गुप्ता से 36 लाख, टी रामनाथ और पी कोटेश्वर राव से 18 लाख रुपये “सरेण्डर” करवाने का आश्वासन देकर फ़र्जी अन्तर्राष्ट्रीय मनीऑर्डरों को ड्राफ़्ट में बदलकर उन्हें और सरकार को कुल 70 लाख का चूना लगा दिया। हैदराबाद पुलिस ने हसन अली को 1991 और 1992 में दो बार गिरफ़्तार किया था, लेकिन “रहस्यमयी” तरीके से उस पर कोई खास कार्रवाई नहीं हुई।

(VDIS नामक बेशर्म और नपुंसक योजना में 30,000 करोड़ की सम्पत्ति उजागर हुई और सरकार को 7800 करोड़ का राजस्व मिला… लेकिन फ़िर भी कोई सत्ताधीश या वित्तमंत्री शर्म से डूब कर नहीं मरा…)

एक बार हसन अली अपनी माँ की बीमारी का बहाना बनाकर कनाडा भाग गया था, फ़िर हैदराबाद पुलिस इंटरपोल रेडकॉर्नर नोटिस (Interpol Red Corner Notice)  के जरिये उसे गिरफ़्तार करवाकर मुम्बई लाई और हैदराबाद ले गई। धोखाधड़ी के उस केस में हसन अली की चार कारें और एक मर्सीडीज़ (उस जमाने में भी मर्सीडीज़ थी उसके पास) जब्त कर लीं। जब केस कोर्ट में आगे बढ़ा तो जिन चारों NRI ने उसके खिलाफ़ रिपोर्ट दर्ज की थी, वे बयान देने भारत ही नहीं आये। फ़िलहाल इस केस की क्या स्थिति है, यह किसी को नहीं पता… लेकिन हैदराबाद पुलिस के अन्दरूनी सूत्रों का कहना है कि मां की बीमारी का सिर्फ़ बहाना था, असल में हसन अली, उन चारों व्यक्तियों को “धमकाने” के लिये ही कनाडा गया था।

हसन अली पर सबसे पुराना केस दर्ज हुआ है 1984 में, जब उसने अपने पड़ोसी डॉक्टर पी निरंजन राव पर एसिड फ़ेंक दिया था। डॉ राव के चेहरे पर 30 टांके आये थे, और पुलिस ने हसन अली को गिरफ़्तार भी किया था… आगे क्या हुआ, पुलिस के रिकॉर्ड से ही गायब है। (यानी कुल मिलाकर हसन अली खानदानी अपराधी लगता है…)

अब जबकि सुप्रीम कोर्ट हसन अली (यानी सरकार के) पीछे पड़ गया है तो ऐसे ही हल्का-पतला मामला बनाकर कोर्ट में पेश किया और सबूत न होने का बहाना बनाकर छुड़वा भी लिया। प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate of India)  और आयकर विभाग (Income Tax Department of India)  “सबूत नहीं है”, ऐसा कैसे कह सकते हैं… यही आश्चर्य और जाँच का विषय है, क्योंकि जनवरी 2007 में हसन अली के कोरेगाँव (पुणे) स्थित आवास पर छापा मारकर जो दस्तावेज जब्त किये थे, जिनसे साबित होता था कि हसन अली ने 8 बिलियन डालर यूबीएस बैंक (ज्यूरिख) में जमा किये हैं… वे कागज़ कहाँ गये? छापा इसलिये भी मारा गया था कि हसन अली ने 1999 से अब तक आयकर रिटर्न नहीं भरा है… क्या यह सबूत नहीं माना जाता? ऐसे कैसे पिलपिले सबूत लाये और कौन सी मरियल धाराएं लगाईं कि जज ने हसन अली को जमानत दे दी? जबकि साध्वी प्रज्ञा को तो बगैर किसी सबूत के हिरासत में प्रताड़ित कर-करके लगभग मौत के दरवाजे तक पहुँचा दिया है…

किसी आम आदमी को तो कोई भी सरकारी विभाग रगड़कर रख देता है…तो फ़िर हसन अली से उसके घर जाकर पूछताछ क्यों की गई? क्यों नहीं उसे घसीटकर थाने लाये, पिछवाड़ा गरम किया और उसके बाद पूछताछ की? साफ़ है कि आज की तारीख में हसन अली को कोई “अदृश्य शक्ति” बचा रही है? यदि अभी बचा भी रही है, तो इससे पहले के जो मामले आंध्रप्रदेश (हैदराबाद) में उस पर दर्ज हुए, उस वक्त किस शक्ति ने उसे बचाया? क्योंकि आंध्रप्रदेश में भी तो अधिकतर समय कांग्रेस की ही सरकार रही है, क्या YSR ने? या चंद्रबाबू ने? या फ़िर केन्द्र सरकार के “आर्थिक विशेषज्ञों” ने? या केन्द्र सरकार से भी ऊपर की किसी विशिष्ट अज्ञात शक्ति ने?

जब बाबा रामदेव चार-पाँच सवाल पूछते हैं तो दिग्गी राजा और कांग्रेस के “पालतू भड़ैती मीडियाई” तुरन्त बाबा रामदेव से हिसाब-किताब माँगने लगते हैं, उनके खिलाफ़ किस्से-कहानियाँ छापने लगते हैं, उल्टा-सीधा बकने लगते है, ये और बात है कि हसन अली से हिसाब माँगने और उसके “ऊँचे सम्बन्धों” की तहकीकात करने की औकात किसी भी मीडिया हाउस की नहीं है, क्योंकि दरवाजे पर खड़ा कुत्ता हड्डी की आस में सिर्फ़ पूँछ हिला सकता है, मालिक पर भौंक नहीं सकता…
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भड़ास :- (भारत की आम जनता भी बड़े “भोले किस्म की लोकतांत्रिक” है, जो सोचती है कि स्थितियाँ बदलेंगी, कोई अवतार आयेगा, भगवान फ़िर से जन्म लेंगे, या शिवाजी-सावरकर पुनर्जन्म लेकर हमें निजात दिलाएंगे। जबकि ताजा हकीकत ये है कि यदि “नागनाथ” जाएंगे, तो “साँपनाथ” आएंगे… ऐसे में क्या आपको नहीं लगता कि कम से कम 5 साल के लिये इस देश को किसी “देशभक्त हिटलर” के हाथों सौंप दिया जाये?… जो एक लाइन से सभी भ्रष्ट नेताओं-अफ़सरों के पिछवाड़े गरम करता चले…)

39 Comments

  1. March 16, 2011 at 8:29 am

    >"फ़िर वह पुरातत्व की वस्तुओं और मूर्तियों के निर्यात के बिजनेस में उतरा (गजब का संयोग है कि सोनिया गाँधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा भी इसी धंधे में हैं,.." NEW DELHI: New Delhi-based entrepreneur Robert Vadra, married into the country's most powerful family, has made a quiet and relatively unheralded entry into the real estate business, including a partnership with DLF Ltd. India's largest realty firm. Vadra, the son-in-law of the ruling United Progressive Alliance coalition chairperson Sonia Gandhi , has stayed away from electoral politics, maintaining that he wants to be known as a businessman.A JOINT VENTURE AND SOME LOANSSky Light Hospitality Pvt Ltd , a company wholly owned by Vadra and his mother Maureen Vadra, is a partner, along with DLF Hotel Holdings and others, in a partnership firm that owns the business hotel Hilton Garden Inn in the upscale South Delhi business district Saket. The hotel is located within the DLF Place mall, also known as DLF Courtyard. ?The Hilton Garden Inn Hotel in Saket is a small business hotel.DLF has given loans to Vadra?s companiesDLF has also extended loans to various companies owned by Vadra. Some of these are unsecured loans or debt without any collateral. As on March 2009, Sky Light Hospitality had received unsecured loans amounting to Rs 25 crore from DLF Ltd. As on March 2010, only Rs 10 crore remained. It's unclear from the statement of accounts if the rest was paid back or written off. Sky Light Hospitality has, in turn, loaned money to other Vadraowned companies such as Blue Breeze Trading Pvt Ltd, North India IT Parks Pvt Ltd, Real Earth Estates Pvt Ltd and Sky Light Realty Pvt Ltd.http://economictimes.indiatimes.com/news/news-by-company/corporate-trends/robert-vadra-ties-up-with-dlf-makes-low-key-entry-into-real-estate-business/articleshow/7698241.cms

  2. jay said,

    March 16, 2011 at 8:37 am

    >काफी तहकीकात करके लिखा गया …खोजी विवरण …सदा की तरह.पंकज झा.

  3. Anonymous said,

    March 16, 2011 at 8:58 am

    >Badiya aalekh mughey to lagata hai Men satta ki power bacha rahi hai usey, Sonia Desh ko kabada karva degi.

  4. March 16, 2011 at 9:02 am

    >जब आयकर वाले छापा मारते है तब आदमी को बुरी तरह से मानसीक अत्याचार देते है. घर की एक एक चीज तोड़ फोड़ देने में नहीं हिचकते. यह भयंकर अनुभव होता है. मिला तो मिला नहीं तो भी कोई क्या कर सकता है? गुजरात में निवेश करने के इच्छूक लोगों पर आयकर के छापे जारी है. ऐसा स्थानीय कॉंग्रेस के कहने पर केन्द्र कर रहा है. यानी लोगों को डराया जा रहा है. मोदी पर दुबारा जाँच जारी रहेगी, कुछ मिला नहीं तो…इधर क्वात्रोकि को छोड़ दिया.

  5. March 16, 2011 at 9:09 am

    >मुझे लगता है इसी नीच ब्लॉग के चलते सर्वाधिक ईमानदार, भले, भोले प्रधानमंत्री की सरकार को ब्लॉग की नसबन्दी करने वाला कानून लाने पर मजबूर होना पड़ा होगा.

  6. March 16, 2011 at 9:11 am

    >एक मजेदार बात जो मैं आपके पाठकों को यहाँ स्पष्ट करना चाहूंगा वह यह कि जो कुछ अंश ई टी की खबर से मैंने ऊपर अपनी टिपण्णी में पोस्ट किये है और जिन्हें बोल्ड अक्षरों से दर्शाया है, वह मैंने कहीं पर संचित करके रखे हुए थे ! आज अगर आप टिपण्णी के नीचे दिए गए लिंक पर जायेंगे तो पाओगे कि वह ओरिजिनल सामग्री रॉबर्ट वाड्रा की यूरोप से ई टी के साथ फोन पर हुई बातचीत के बाद हटा ली गई है ! इसकी दो ही वजहें हो सकती है या तो श्री वाड्रा ने कोई स्पष्ठीकरन दिया है, या फिर …………………ऊपर वाला जाने !

  7. March 16, 2011 at 9:17 am

    >good post visit my blog plzDownload latest musicLyrics mantra

  8. March 16, 2011 at 9:22 am

    >अदृश्य को दृश्टित करने वाले इसी ब्लॉग के कारण ब्लॉग नसबन्दी नामक कानून केवल लाया जा रहा है। ऐसा मुझे भी लगता है। :)प्रणाम

  9. March 16, 2011 at 9:27 am

    >एक और मजेदार ब्रेकिंग न्यूज :Sadiq Batcha, a key aide of former telecom minister A Raja, has committed suicide in Chennai.Batcha is the MD of Greenhouse Promoters, a company considered to be a front company of Raja. The Chennai-based export house is believed to have been a means of funds that were paid as kickbacks in the 2G spectrum allocation scam. His body has been taken to Apollo Hospital. He had been questioned by the CBI on February 23 and his company raided. Initial reports say he hanged himself in home in Chennai. Raja's wife was a director in Batcha's firm.

  10. Amit Singh said,

    March 16, 2011 at 9:55 am

    >बेचारे हसन अली के साथ कोई अनहोनी न हो जाय!सुनते हैं कि ए राजा के खास राजदार ने "आत्महत्या" कर ली.वैसे भी राजनैतिक सबूत या तो "आत्महत्या" कर लेते हैं या दुर्घटना में मर जाते हैं

  11. March 16, 2011 at 9:58 am

    >हसन अली के कारनामे मिडिया क्यूँ उजागर करेगी, "चोर चोर मौशेरे भाई" वाली कहावत आप ने नहीं सुनी है क्या? अधिकतर हिंदुस्तान कि मिडिया दिग्विजय कि तरह गाँधी परिवार के सामने दुम हिलाने वाले कुत्ते ही हो गएँ है, और इनको रोटी (इटालियन पिझा) भी तो मेडम ही डालती हैं, और ये हसन अली और रॉबर्ट का एक ही प्रकार का व्यापर मात्र सयोंग नहीं है, उश्के शिर पर भी बहुत बड़ा (सायद सबसे बड़ा) हाथ है,,, अब सुप्रीम कोर्ट पर हमें आशा है..

  12. vijender said,

    March 16, 2011 at 10:02 am

    >sandar lekh ke liye hardik shubkamnaye, black money ke hissedaro ka dhyan rakhna congresh se sikhejai ram ji ki

  13. padm singh said,

    March 16, 2011 at 10:21 am

    >ऐसे में क्या आपको नहीं लगता कि कम से कम 5 साल के लिये इस देश को किसी “देशभक्त हिटलर” के हाथों सौंप दिया जाये?… जो एक लाइन से सभी भ्रष्ट नेताओं-अफ़सरों के पिछवाड़े गरम करता चले…)

  14. rohit said,

    March 16, 2011 at 10:43 am

    >हसन की कोई गलती नहीं है उसने देश के संसाधनों का सही उपयोग किया है आखिर देश के संसाधनों पर पहला हक तो उन्ही का है ना फिर क्यों चिल्ल पों मचा राखी है . भाई हसन घोड़े बेच रहा है और सरकार सो रही है घोड़े बेच के.

  15. March 16, 2011 at 10:55 am

    >केंद्र में बैठी कांग्रेस खुद देशद्रोह की पराकास्ठा को पार कर चुकी है सोचता हूँ अभी ३ साल और शेष इनके हाथ है और उनको अच्छी तरह पता है की वो अब कभी सत्ता में नहीं आयेंगे इस लिए वो ज़रूर कूटनीतिक कुचक्र चला कर इन सालो में कुछ ऐसा करेंगे की हमें किसी लायक नहीं रहे ! भविष्य देश के लिए दानव रूप में आता दिख रहा है पर हम कर भी क्या सकते है ???

  16. March 16, 2011 at 12:51 pm

    >सेकर की इतनी हिम्मत कहा जो ऐसे ब्यक्ति पर कार्यवाही करे क्यों की सब जानते है की इसके तर कहा से है कही इटली से तो नहीं ? कोई भगवा को आतंकी बनाना सुनियोजित योजना थोड़ी ही है .क्यों की इस समय तो देश भक्तो ही सजा दी जाएगी उन्हें ही राष्ट्रद्रोही बताया जायेगा—- ये तो सेकुलर दामाद है.

  17. March 16, 2011 at 1:20 pm

    >ऐसे हालत में एक ही चारा है की इन भ्रष्ट और गद्दार उच्च संवेधानिक और अदृश्य कुकर्मी शक्तियों को इस देश की ED ,RAW ,IB ,MI तथा पुलिस के इमानदार अधिकारी हत्या करें सुनियोजित ढंग से अगर इस देश व समाज को बचाना है तो….

  18. Chandan said,

    March 16, 2011 at 1:50 pm

    >दोष देश के लोगों की 'चलता है' और भाई भतीजावादी मानसिकता, कूप मंडूकता और हीन भावना का है.क्या 'हिटलर' दस सालों में मानसिकता बदल पाएगा? क्या एक ही इन्सान से सवा अरब लोगों की पीढ़ियों के संस्कारों को पूरी तरह बदल डालने की उम्मीद, इतने बड़े सिस्टम अकेले दम पर सुधारने की आशा रखना अवतार की प्रतीक्षा करना नहीं है? किन किन देशों में 'हिटलर' द्वारा क्रांति लाई गई है (चीन में माओ के नेतृत्व में जनक्रांति हुई थी, जो दशकों चली, पहले गृह युद्ध और फिर भीषण सांस्कृतिक दमन). वर्ना 'हिटलर' ने जर्मनी को डुबा ही दिया था, इतिहास देखें तो लालची शासन से त्रस्त जनता तानाशाहों को पहले तो बड़ी आशाओं के साथ सर आँखों पर बैठाती है, फिर जब ये निरंकुश हो जाते हैं असंतोष के कारण स्थितियां बिगड़ती चली जाती हैं. पाकिस्तान, उत्तरी कोरिया, लीबिया, युगांडा, जिम्बावे का उदहारण सामने है. आमूलचूल क्रांति के बिना देश सुधारने की कल्पना बेकार है. (मैं कम्युनिस्ट नहीं हूँ, यथार्थवादी अवश्य हूँ). पर क्रांति में अगली दो तीन पीढ़ियों को अपना सब कुछ खोना पड़ेगा, कौन कौन इसके लिए तैयार होगा? अंतरराष्ट्रीय प्रतिबन्ध झेलने होंगे. वैसे भी भारत कई देशों, भाषा, संस्कृतियों और समाजों का जटिल समूह है, यहाँ सर्वस्वीकार्य नेतृत्व होना बहुत मुश्ल्किल है. मोदी की स्वीकार्यता का वस्तुनिष्ट मूल्याङ्कन करें तो पता लगेगा की इनका अखिल भारतीय जनाधार सीमित है, और समर्पित सहयोगियों की जबरजस्त कमी. फिर यह तो तय है की हिटलर एक बार सत्ता में आ जाते हैं तो इतनी आसानी से गद्दी नहीं छोड़ते. चाहे जनता कितना भी उनकी असफलताओं से त्रस्त क्यों न हो. रोमांटिक होना एक बात है और यथार्थ देखना और.(मैं सोनिया, यूपीए, हसन अली, अमेरिका, चीन, माओवादियों या नक्सालियों का समर्थन नहीं कर रहा हूँ, बस हिटलर अवतार के सपने पर सवाल उठा रहा हूँ)

  19. March 16, 2011 at 1:58 pm

    >@ Chandan – मैंने "ईमानदार हिटलर" कहा है… और इसके अलावा कोई व्यावहारिक रास्ता हो तो आप सुझायें…। मैं भी मानता हूं कि हिटलर कोई अच्छा विकल्प नहीं है, लेकिन फ़िलहाल "आज के हालात" में लोकतन्त्र(?) की बदकारियां और बलात्कार से हम आज़िज़ आ चुके हैं…

  20. March 16, 2011 at 2:02 pm

    >यह एक सोची समझी सोच के तहत किया जा रहा है, अगर हम हर पहलुओ को ध्यान से देखे तो यही दिखाई देगा कि " भारत को गुलामी के जंजीरों से जकडने की एक शुरुवात हो रही है"१. आखिर क्यों भ्रष्ट लोगो को कांग्रेस पनाह दे रही है ?२. नरेन्द्र मोदी के खिलाफ, सरकारी तंत्र को क्यों लगा रही है ?३. सच्चाईयो को जबरदस्ती गलत क्यों कहलवा रही है ?४. हिंदुओं के खिलाफ किये जा रहे गतिविधियों को क्यों बढ़ावा दिया जा रहा है ?

  21. March 16, 2011 at 5:56 pm

    >बहुत सुंदर और जानकारी से परिपूर्ण लेख हे. कब तक हम लोग शिवाजी या सावरकरजी के फिर से जनम लेने का इंतजार करते रहेगे आब उठना होगा वर्ना आने वाली पीडी को क्या मुह दिखायगे

  22. March 16, 2011 at 5:56 pm

    >हसन अली तो कमाल का बन्दा है. और इसी कमाल के चलते…

  23. March 16, 2011 at 6:36 pm

    >जनता सब कुछ जान कर अभी तक सो रही हे, कब जागेगी यह जनता, जब देश किसी के पास गिरबी हो जायेगा…हम गुलाम हो जायेगे तब? कब आयेगी क्रांति?

  24. March 17, 2011 at 4:01 am

    >लेख पढ़कर.. सत्य जानकार बेहद घृणा भर जाती है वर्तमान सत्ता-संचालिका के प्रति.आपने 'देशभक्त हिटलर' का बड़ा सामयिक प्रयोग किया है… क्योंकि हिटलर ने जर्मनी में एक वर्ग को चिह्नित किया था देश की बार-बार पराजय में…दूसरी बात .. जापान समय-समय पर विभिन्न त्रासदियों को झेलकर भी बार-बार उठ खड़ा होता है. विकसित कहलाता है…. क्यों ? वजह है कि वहाँ … देशद्रोह करने वाली कौम … ने दस्तक नहीं दी है. या उसे वहाँ घुसने ही नहीं दिया जाता. यदि हमारे देश में भी कोई 'देशभक्त हिटलर' उस वर्ग [कौम] को चिह्नित कर 'कटुआ कत्लगाह' खुलवा पाया तो संभव है कि अपना देश भारत भी जापान के पद-चिह्नों पर चल पड़े. ………….. मुझे प्रतीक्षा है 'राम(देव) राज्य' की. … मुझे प्रतीक्षा है 'नमो नमः राज्य' की.

  25. indian said,

    March 17, 2011 at 5:57 am

    >लेख मैं तथ्यों का बहुत ही अछे से उपयोग किया गया हैं,ये इस सरकार की नियत दर्शाती हैं की किस प्रकार वो देश की भोली भाली जनता का शोषण कर रही हैं और जो लोग सही मायने में दोषी हैं उनका संरक्षण कर रही हैं ,अगर ५० हज़ार करोड़ का टैक्स न देने वाले के खिलाफ हमारे देश की कथित सबसे बड़ी जांच संस्था कोई सबूत नहीं दूंढ पाई तो ऐसी संस्था की देश को कोई जरूरत नहीं हैं.जय हिंद

  26. Rajesh said,

    March 17, 2011 at 7:44 am

    >Suresh ji bahut acha lekh likha. Ab ish desh ko eshe Tanashah ki Jarurat hai jo Bharat desh ki mitti se juda ho. Jo tayar kar sake eshe yodhayo ko jo kashe bhi dushto ko unki aukat dikha sake.

  27. March 17, 2011 at 8:51 am

    >ये इस भारत देश का दुर्भाग्य है कि इस देश को ऐसी मूर्ख जनता मिली है. यहाँ लोग अगर अपने घर मे कोई नौकर रखते है तो सोच समझकर रखते है कि नौकर की प्रष्ठभूमि कैसी है ?. कही चोर तो नही ? कि घर को लूट ले जाये .लेकिन अपने देश को किसी भी ऐरे गैरे चोर को आसानी से सौप देते है.हद तो तब हो जाती है कि ये साबित भी हो जाता है कि ये चोर है.उसके बाद भी दुबारा तिबारा उसी को सत्ता को सौप देते है.इसीलिये मै नेताओ को दोषी नही मानता. क्यो कि चोर का काम है चोरी करना .ये तो जनता की जिम्मेदारी है कि चोर लुटेरो को देश ना सौपा जाये.इसीलियेदेश की दुर्दशा के लिये सिर्फ और सिर्फ देश की जनता जिम्मेदार है.मेरा भी यही सोचना है कि इस देश को देशभक्त हिटलर ही सुधार सकता हैऔर इस देश मे ऐसे हिटलर मौजूद भी है.इंतजार केवल इस बात का है कि किसी तरह उन हिटलर को सत्ता मिले.

  28. R. K. Singh said,

    March 17, 2011 at 8:54 am

    >हसन अली ही नहीं बल्कि तमाम मामलो के लिए केवल सरकार हे दोसी नहीं होती, हम नागरिको को भी जागरूक होना चाहिए, आज भ्रस्ताचार के खिलाफ जो लड़ता है उसका ही hum uchit सहयोग नहीं करते है, बस तमासा देखते और कुछ नहीं. हम अपनी अन्दर छिपी असीम सक्ति को पहचान नहीं रहे है, किसी को कोसना कायरता है, सुरेश जी का प्रयास हमारे अन्दर छिपी ताकत को jaga रहा है, आशा है आने वाले कुछ दिनों में देश में आमूल चूल परिवर्तन की आंधी चलेगी, कृपया इस नंबर पर मिस कॉल कर सन्देश प्राप्त करे,02261550790 (India against crouption)

  29. Man said,

    March 17, 2011 at 9:00 am

    >वन्देमातरम सर ,कांग्रेस और और सरकारी ऐजेन्सियो ,प्रशासन के साथ कुख्यात गठजोड़ का और सम्लेंगिगता का एक और नायाब नमूना हसन अली एंड कंपनी |जिस प्रकार पकड़ने छोड़ने का हाई वोल्टेज ड्रामा हुआ उस से कोई भी समझ सकता हे की अली यदि पर्दा हटाता तो कितने नंगे एक साथ पकडे जाते

  30. Alok Nandan said,

    March 17, 2011 at 9:16 am

    >ईमानदार हिटलर…!!!पूरे देश को एक तानाशाह के हवाले करने की यह प्रवृति घातक है…लोकंत्र सड़ा है भारत में, इसमें कोई संदेह नहीं है, लेकिन पांच साल पर सरकार बदलने की शक्ति अभी भी जनता के पास ही है, ऐसे में एक तानाशाह की वकालत करना इस देश की जनता की संस्कृति और भावनाओं के साथ मजाक है…एक हिटलर खड़ा करो, उसके हाथ में डंडे दे दो और फिर वो उस डंडे से सबको हांके….मतलब साफ है कि यहां के लोग इसी के काबिल है…बेहतर विकल्प की तलाश होनी चाहिये….यह भी सच है कि सभी राजनीतिक दल सांपनाथ और नागनाथ ही है…ऐसे में निराशा और बढ़ती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हम ईमानदार हिटलर की तलाश शुरु कर दे….वैसे हिटलर जर्मनी के लिए बुरा नहीं था….

  31. March 17, 2011 at 9:59 am

    >क्या कहें…

  32. March 17, 2011 at 3:57 pm

    >हसन अली के माध्यम से कांग्रेस को दोहरा लाभ प्राप्त हो रहा है. एक : तुष्टिकरण ,दूसरा : आय. और कानून , पुलिस तो सिर्फ आम लोगों के लिए है . ये अति विशिष्ट लोग है, सरकारी दामाद. इनका कुछ होने वाला नहीं. ऊपर से अल्पसंख्यक. उसे कुछ विशेषाधिकार तो मिलना ही चाहिए. आखरी सरकार उनकी है.

  33. nitin tyagi said,

    March 17, 2011 at 4:06 pm

    >Mafia raj hai bharat main ab

  34. vijay jha said,

    March 17, 2011 at 6:16 pm

    >कम से कम 5 साल के लिये इस देश को किसी “देशभक्त हिटलर” के हाथों सौंप दिया जाये?… जो एक लाइन से सभी भ्रष्ट नेताओं-अफ़सरों के पिछवाड़े गरम करता चले…)

  35. om said,

    March 18, 2011 at 8:58 am

    >as per my own opinion ……our country should follow CHINA and not America…model…….90 % problems will be resolved

  36. March 19, 2011 at 3:04 pm

    >बाप चोर है तो बेटा भी चोर बन जाये तो गलत क्या है ! कांग्रेस की १९४७ में नेहरु जब प्रधान मंत्री थे तब से ये सब चलता आ रहा है तो इसमें नया क्या है ? येसे भी टैक्स देकर क्या फ़ायदा है ? हम टैक्स भरे और ये दोगले नेता अपने बाप की सम्पति समझ कर वेदेशों में जमा कर के येश करते है ! हिन्दू शास्त्रों में लिखा है की कुपात्रों को दान देने से पाप लगता है ! तो हम पाप की भागिदार क्यूँ बने ? अली हसन ने शायद हिन्दुओं की शास्त्रों का अध्यन किया होगा इसी लिए उसने टैक्स की चोरी की ………………. मेरी तो राय यह है भारत के किसी भी नागरिक को टैक्स देना ही नहीं चाहिए ………..आप टैक्स देंगे और पाप के भागिदार बनेगे ………..भारत सरकार को मेरी एक सलाह है अगर टैक्स चोरी से बचना है तो इनकम टैक्स डिपार्टमेंट बंद करवाकर दान मांगने वाली संस्था खोल ले ……..मेरा दावा है अभी टैक्स में जितने रुपये मिलते है उस से कही ज्यादा दान में रूपये मिलेंगे ………क्यूँ की हिदुस्तान के लोग टैक्स देना नहीं चाहते लेकिन दान के लिए कोई भी आनाकानी नहीं करेगा !सरकार को अगर ये सलाह पसंद न आये तो कुछ सबूत है …………..आप कारगिल की लड़ाई याद करे या ओडिशा की सुनामी ………..न जाने कितने ही रूपये सरकार को दान मिली थी .! खैर ………….आप सभी को होली की ढेर सारी शुभकामनाये ………जय हिंद

  37. Mahendra said,

    March 19, 2011 at 9:31 pm

    >Wastv me hame hi kuch karana parega. Hum sub kuchh na kuchn sujhav dete rahate hain. Lekin Congress ke jeet ka sabase bara kaaran dekhe to mujhe yahi lagata hai ki wo keval muslim vote ke sahare jeet rahi hai. Hindu voting karane jate hi nahi. Hamare pichhale election me B.H.U. se (jo educated logo ka ek Kila hai) matra 15% voting hui thi. Jabki wahan ke log Central Govt. se sabse adhik Income (salery) lete hai. Mere samajh se ye bahut hi sharm ki baat hai. Varanasi se is baar Joshi Ji Jit kar gaye hain. Lekin vo agar jite hain to matra muslim vote ka congress ko na jane se. Yahan ye Prashna (question) banta hai ki akhir Varanasi ke last MP Rajesh Mishra Ki jamant Kyon japt ho gai. Kya vo achaanak aparaadhi ban gaya the ya unka charitra kharab ho gaya tha. Vo Kyo haar gaye. Muslim Bahaiyo ke sath unka Roja Kohlana, Khana pina, kahnde se khanda mila kar chalana sab bekar ho gaya. Wahi Ek aparadhi Joshi jaise personality ko takkar de raha hai.Iska kaaran bus yahi hai ki muslim sirf muslim ko pasand karte hain baki kisi ko nahi chahe vo jaisa bhi ho. Cangress ka vote JD, sp, etc. me bata tha to vo kamjor ho gai thi. Ab vo Phir se unke talve chaat Hinduvo ko kuchal kar muslimo ki masihaa ban gai hai. Ab chahe Congress jo (Chori, dakaiti, sinajori, loot)kare vo muslimo ke vote ke sahaare jitegi hi. Is liye hame yahi karana hai ki chahe jaise ho Hinduo ko voting karne ke liye Samjhana hi parega. Har desh bhakt ko isame lag jana chaiya. (Bus hindu Bhi Muslimo ki taraha Lag kar vote kare. Kyoki adhikatar hindu yahi samajhate hain ki mere 1 vot se kya hoga. Kya vo mujhe dal roti denge. Sab Beimaan hai. Kisko vot de? Iska Jawab yahi hai ki Sab Dukandar Khate hai, koi kam doi jayda. To hame us dukandaar ko chunanaa hai jo kam khata. Kyo ki isase Kam Khane wale ko protsaahan milega. Aur kam khane ki pravritti baregi. Mujhe Jamin par bas ek yahi rasta dikh raha hai jo kaam kar sakata hai. Congress ne kabhi bhi kul vot %age barane ka prayaas nahi kiya hai. Kyo ki vo jaanati hai ki isame uska nuksaan hai.

  38. Kapil Dev said,

    March 23, 2011 at 6:19 am

    >Great and informative post… I also shared this article on facebook because such content needs to be syndicated…Taki logon ki aankh khul saken…

  39. March 25, 2011 at 5:43 am

    >सत्ता के खेल में सब कुछ दाव पर लगा बैठे हैं ….अफ़सोस


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