>कुत्ते की टेढ़ी पूँछ पाकिस्तान तथा विदेश मंत्रालय और मीडिया से बेहतर आवारा कुत्ते…… Pakistan’s Anti-India Policy and Stray Dogs in Kashmir

>हाल ही में भारतीय सेना की इंटेलिजेंस कोर ने सीमापार से जो रेडियो संदेश पकड़े हैं उनके मुताबिक पाकिस्तान की खुफ़िया एजेंसी ISI ने कश्मीर में आतंकवादियों को रास्ता दिखाने वाले और सीमा पार करवाने वाले “भाड़े के टट्टुओं” यानी गाइडों का भत्ता चार गुना बढ़ा दिया है। पहले एक बार आतंकवादियों के गुट को सीमा पार करवाने पर गाइड को 25,000 रुपये मिलते थे, लेकिन अब ISI (ISI Pakistan) ने इसे बढ़ाकर सीधे एक लाख रुपये कर दिया है।

विगत कुछ माह से भारतीय सेना ने जिस प्रकार आतंकवादियों पर अपना शिकंजा कसा है और आतंकवादियों के घुसने के रास्तों पर पहरा और चौकसी बढ़ाई है, उसे देखते हुए घुसपैठ में काफ़ी कमी आई है। इसीलिये ISI को अपने कश्मीरी गाइडों का भत्ता बढ़ाने पर मजबूर होना पड़ा है। अमूमन गर्मियों में जब बर्फ़ पिघलती है तब भारी संख्या में आतंकवादी भारत में घुसने में कामयाब हो जाते हैं, जबकि ठण्ड में बर्फ़बारी की वजह से कई पहाड़ी रास्ते बन्द हो जाते हैं। परन्तु इन गर्मियों में पाकिस्तान को आतंकवादी इधर ठेलने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि भारतीय सुरक्षा बलों (Indian Army in Kashmir) ने छोटे-छोटे रास्तों पर जमकर पहरेदारी की है, और जंगल में चरवाहों के भेष में भटकने वाले “गाइडों” को खदेड़ दिया है। मजबूरी में ISI ने एक फ़ेरे की फ़ीस बढ़ाकर एक लाख कर दी है, फ़िर भी उन्हें गाइड आसानी से नहीं मिल रहे हैं…

खुफ़िया सूचना के मुताबिक इस समय पाक के “अनधिकृत कब्जे वाले” (Pakistan Occupied Kashmir) कश्मीर में लगभग 45 ट्रेनिंग कैम्प चल रहे हैं जिसमें 2000 आतंकवादी भारत में घुसने का इंतज़ार कर रहे हैं, ISI को इन्हें खिलाना-पिलाना और पालना-पोसना महंगा पड़ता जा रहा है। भारतीय सुरक्षा बलों ने ऊँची-ऊँची पहाड़ियों पर स्थित रास्तों को खतरनाक आतंकवादियों के लिये मुश्किल बना दिया है। लेकिन ISI और पाकिस्तान, कुत्ते की उस टेढ़ी पूँछ के समान हैं जिसे 25 साल तक एक सीधी नली में डालकर भी रखा जाये तब भी बाहर निकालने पर टेढ़ी ही रहेगी…

 इसी “टेढ़ी पूँछ” को मोहाली में अपने पास बैठाकर, घी-मक्खन लगाकर सीधी करने की बेवकूफ़ाना कोशिश, कुछ “परम आशावादी” नॉस्टैल्जिक सेकुलर्स और अमन की आशा पाले बैठी कुछ नाजायज़ औलादें करेंगी…

अब बात कुत्तों की चली है, तो एक और खबर…

भारतीय सेना ने कश्मीर घाटी में आवारा कुत्तों (Stray Dogs in Kashmir) की हत्या और उनके गायब होने के सम्बन्ध में जाँच शुरु कर दी है। श्रीनगर में पिछले एक वर्ष में ऐसा देखने में आया है कि आवारा कुत्तों के समूह के समूह अचानक मृत पाये जाते हैं या गायब हो जाते हैं। सीमारेखा पर स्थित गाँवों में यह स्थिति बार-बार देखने में आई है। सेना की दसवीं डिवीजन के प्रवक्ता लेफ़्टिनेंट कर्नल एनके आयरी ने कहा है कि यह आवारा कुत्ते (जिन्हें आवारा कहना भी एक तरह की क्रूरता है) सेना के जवानों के लिये काफ़ी मददगार सिद्ध हो रहे हैं, रात के समय किसी भी संदिग्ध गतिविधि को देखकर ये कुत्ते भौंककर जवानों को आगाह कर देते हैं। सेना के कई अफ़सरों को ये कुत्ते बेहद प्रिय हैं।

हबीब रहमान नामक सेना से रिटायर्ड लेफ़्टिनेंट बताते हैं कि यह आवारा कुत्ते आसानी से सीख जाते हैं, इन्हें खाने-खिलाने का खर्च भी कम है तथा रात को इन्हें बिना किसी खतरे के इधर-उधर घूमने के लिये खुला भी छोड़ा जा सकता है। सबसे बड़ी बात यह कि इन्हें सेना के विशालकाय कुत्तों की तरह आसानी से पहचाना भी नहीं जा सकता कि ये जवानों के मददगार हैं। परन्तु सेना की मदद करने की वजह से पिछले कुछ समय से इन कुत्तों की सामूहिक हत्या शुरु हो गई है। मेजर जनरल अशोक मेहता (रिटायर्ड) ने काफ़ी पहले अपने एक लेख में कृपा नामक एक कुत्ते का जिक्र किया है जिसे पहाड़ों मे घूमते समय वे पकड़ लाये थे। नियंत्रण रेखा पर गोरखा राइफ़ल्स का वह प्रिय कुत्ता था और उसने कई आतंकवादियों और घुसपैठियों को ढेर करने में मदद की थी।

आंध्रप्रदेश के DGP स्वर्णजीत सेन ने भी नक्सलवादियों के इलाकों में स्थित पुलिस थानों को ऐसे ही आवारा कुत्तों को पालने और उन्हें अपना “मित्र” बनाने की सलाह दी थी और उसके नतीजे भी काफ़ी अच्छे मिले हैं। माओवादियों (Maoists in India) और नक्सलवादियों ने कुत्तों की इस “जागते रहो” मुहिम से चिढ़कर अन्दरूनी गाँवों में कुत्तों का सफ़ाया करना शुरु कर दिया, और गाँववालों को भी धमकियाँ दी हैं कि वे गाँव में एक भी कुत्ता न रखें।

आवारा कुत्तों की संख्या में कमी लाने हेतु Animal Welfare Board ने इनकी नसबन्दी करने का प्रस्ताव जम्मू-कश्मीर सरकार को भेजा है, लेकिन सरकार की तरफ़ से अभी तक कोई सहमति नहीं मिली है। इसकी बजाय सरकार में बैठे कुछ “संदिग्ध लोग” “कुत्तों को मार देने” जैसे प्रस्ताव की माँग कर रहे हैं (Stray Dogs killing in Kashmir) । विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अपने एक अध्ययन में पाया है कि कुत्तों को मारने की बजाय संख्या में कमी के लिये उनकी नसबन्दी ही अधिक कारगर उपाय है, परन्तु सीमापार से आने वाले आतंकवादियों के लिये यही आखिरी रास्ता बचता है कि वे दूरदराज के गाँवों से धीरे-धीरे कुत्तों को मारते चलें, ताकि सुरक्षा बलों पर निशाना साधने में आसानी हो…।

इधर भारतीय सुरक्षा बल मुस्तैदी से घुसपैठ भी रोक रहे हैं और उनकी मदद करने वाले इन कुत्तों से दोस्ती भी बढ़ा रहे हैं… जबकि उधर मोहाली में “अमन की आशा” (Aman ki Asha) करने वाले सेकुलर्स, वोटों की खातिर अपने देश की सुरक्षा को खतरे में डालकर 6500 स्पेशल वीज़ा जारी कर रहे हैं…

आम आदमी यह सोच-सोचकर उबला जा रहा है कि मुम्बई हमले (Mumbai Terror Attack 26/11) में शहीद हुए 150 से अधिक परिवारों के दिल पर क्या गुज़रेगी, जब मनमोहन सिंह हें-हें-हें-हें-हें-हें करते हुए गिलानी का स्वागत करेंगे…।

अब आप ही बताईये कश्मीर में सेना की मदद करने वाले आवारा कुत्ते ज्यादा बेहतर और आदरणीय हैं, या “क्रिकेट डिप्लोमेसी” नाम की फ़ूहड़ता परोसने वाले विदेश मंत्रालय के अधिकारी और घोटालों-अपराधों को भुलाकर क्रिकेट-क्रिकेट भजने वाले मीडिया के घटिया भाण्ड…?   आपसे अनुरोध है कि मीडिया के पागलों, भ्रष्ट नेताओं और मूर्ख अफ़सरों को चाहे कुछ भी सम्बोधन दें, लेकिन “कुत्ता” न कहें, प्रशिक्षित हों या आवारा… निश्चित रुप से कुत्ते इनसे बेहतर हैं।

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37 Comments

  1. March 29, 2011 at 6:28 am

    >आवारा कुत्ते काम के, तो अधिकृत (चुने हुए) कुत्ते भी काम के मगर उनके लिए.

  2. March 29, 2011 at 6:31 am

    >बहुत खूब…काश आपके जैसे दस-बीस वाच-डॉग इस देश को मिल जाते तो निश्चय ही इं नाली कुत्तों का सफाया होना संभव होता. आस्तीन के सांप है ये सभी हरामखोर.

  3. March 29, 2011 at 6:35 am

    >बिलकुल सही बात हमारे देश के ज्यादातर उच्च संवेधानिक पदों पर बैठे भ्रष्ट और गद्दार लोगों को कुत्ता भी नहीं कहा जा सकता ….इनकी प्रजाति जानवर से भी बदतर प्रजाति है….

  4. March 29, 2011 at 6:46 am

    >सुरेश जी , नमस्कार लम्बे इंतजार के बाद लेख पढने को मिला , इन कमीने नेताओं को क्या कहे ………… इन्हें कुत्ता कहना बेबकूफी होगी ये साले कुत्ते की दुम है ! सारे नेता साले बुड्ढे होकर सठिया गए है ! इन रगों का खून ठंडा हो गया है ! और सब गाँधी जी के सच्चे भक्त है ………इसलिए एक गाल पर पकिस्तान से चाटा पड़ता है तो दूसरा गाल हमारे नेता तुरंत बढ़ा देते है ……..लगभग पिछले ६५ साल से ये लोग कोई सबक नहीं सीखे ….बस यही कहते फिरते है हमारी सब्र का इन्तहां न ले हम दोस्ती करना चाहते है ! लाल बहादुर शास्त्री जी ने एक बात कभी साफ़ कही थी ………."जो देश हमसे टूट कर अलग हुआ है ओ कुछ और हो सकता है हमारा दोस्त या भाई नहीं" ! लेकिन इन नेताओं को तो अक्ल है नहीं बस यही कहते फिरते है हमारे सब्र इम्तहान न ले, हमारे यहाँ आतंकवादी न भेजे ………जिस दिन कोई इमानदार युवा देश का प्रधानमंत्री बनेगा उसकी बोली बदल जाएगी और वो कहेगा "जिसे जितनी आतंकवादी भेजने हो भेजे हमारी सेना उन्हें गोलीओं से स्वागत करने को तैयार है !" जय हिंद

  5. March 29, 2011 at 7:13 am

    >niyat sahi ho……to pai lagan bhi kar de……..lekin salon ki niyatbari khot hai…….bhau…..ye sudhrenge thore…."जिसे जितनी आतंकवादी भेजने हो भेजे हमारी सेना उन्हें गोलीओं से स्वागत करने को तैयार है !"ye kahne ka madda hizre systam ko jabho jayegi……..sale micor-scop sebhi nazar nahi aayenge………pranam.

  6. INDIAN said,

    March 29, 2011 at 7:27 am

    >भ्रष्टाचार मे सिर से लेकर पैर तक डूबा मनमोहन सिँह इस तरह की नौटंकी करके लोगो का ध्यान अपने पापो से हटा रहा है.और ये सब चेले चपाटे मैदान मे जा के खिलाड़ियो की मुश्किल बढ़ायेँगे.

  7. P K Surya said,

    March 29, 2011 at 8:16 am

    >sahi hai bhaiya sahi hai kahan ye wafadar kutte, waise ye kutte bhi apni madam k wafadar he desh k wafadar hona to enhe ata he nahi,,

  8. madhav said,

    March 29, 2011 at 8:24 am

    >Isliye Hamare kisi sant mein Kutte ko Guru Mana tha…….

  9. RAIHARI said,

    March 29, 2011 at 8:48 am

    >suresh ji bank a/c no. aur ifsc/rtgs code ke sath bank address bhi dena hota hai. ye sab isliye bata raha hu ki mai ek accountant (pvt. co.) hun. suresh ji mai aap ke sare lekh poadhta hun aap ka prawash ke bad pahala lekh achha bahut hi achha hai.thank you,rajeshraihari@yahoo.com

  10. rohit said,

    March 29, 2011 at 9:49 am

    >भैये सरकार तो यह का आज कर रही है सहारा चेन्नल वाले तो शोएब मालिक को जाने कब से पाल रहे है यही हाल आई बइ एन ७ का भी है वो जहीर अब्बास और इमरान खान को लिए बैठे है वसीम अकरम तो जाने कब से लोगो को मधुमेह के लिए प्रचार करते फिर रहे है वीणा मालिक भी अब कह रही है की भारत ही जीते लेकिन दिल में क्या है सभी जानते है

  11. ty said,

    March 29, 2011 at 10:09 am

    >पाकिस्तानी नेताओ को बुलाने के पीछे ये मकसद बता रहे है की यदि वे लोग आयेंगे तो मैच के दौरान आतंकवादी हमले नही होंगे !!!!क्या हमारी ख़ुफ़िया एजेंसी इतनी कमजोर है की इनकी कोशिशे नहीं रोक सकती ???? कुछ तो स्वाभिमान रखो …. अगर उनका सामना नही कर सकते तो दोस्ती का हाथ बढा क्या साबित करना चाहती है ये सरकार ….

  12. March 29, 2011 at 11:37 am

    >पूरे देश में एक नई विचारधारा के उदय की आवश्यकता है, अन्यथा हम इन्हें यूं ही बगल में बिठायेंगे और इनकी छुरी अपना काम करती रहेगी..

  13. March 29, 2011 at 12:31 pm

    >भाई कोई भी अपने घर से तो कुछ देता नहीं है अब वो सोनिया गाँधी हो, राहुल बाबा हो या मनमोहन सिंह सब अपनी व्यक्तिगत छवि को चमचमाने और अपने घर भरने में इंट्रेस्टेड है. अपने यहाँ से तो कुछ नहीं जाता. सुरक्षाकर्मी मरे तो मरे, मुंबई में लोग मरे तो मरे. पर मेरा प्रशन दूसरा है की पाकिस्तान को यह नहीं पता की वो १९९० के भारत से नहीं लड़ रहा है वो २०११ की विश्व महाशक्ति से लड़ रहा है. और भारत के नपुंसक नेताओ को एक बात जान लेनी चाहिए की पाकिस्तान को भी मानलो अपने कब्जे में लेलो तो कर क्या लोगे, २० करोड़ मुस्लमान यहाँ है और फिर वहां के भी हो जायेंगे तो कर क्या लोगे, फिर अंत में आना तो "हिन्दू आत्मा" को ही प्रतिष्ठित करने होगा. जब तक इस देश की आत्मा हिन्दू के हिसाब से देश का राष्ट्र्ये चरित्र निर्माण नहीं होगा पाकिस्तान से युद्ध या शांति दोनों के कोई मायेने नहीं है. पाकिस्तान तो अपनी आखरी सांसे गिन रहा है चिंता हिन्दुस्थान की है. क्रिकेट प्रिकेट से कुछ नहीं होगा मुख्य मुद्दों पर बात कर पाकिस्तान तो मरती कौम और देश है चीन से टक्कर लो और मुकाबला करो, पाकिस्तान से दोस्ती और दुश्मनी दोनों भूत की बाते है भविष्य आपका चीन और अमेरका से है, हमे पाकिस्तान की दुश्मनी की लोलीपोप में मत उलझाओ, हमें एक मरे राष्ट्र को मरे सांप की तरह गले में लटकाय नहीं ही घूमना चाहिए, भले ही वो आपको आज विजय होने के गर्व की ही चाहे क्यूँ न अनुभूति देता हो. समझो संकट क्रिकेट के बल्ले से नहीं कंक्रीट के मजबूत जिगर से होगा और वो चीन है पाकिस्तान नहीं.www.parshuram27.blogspot.com

  14. March 29, 2011 at 5:29 pm

    >कश्मीर में सामूहिक कुत्तों कि मौत से चिंतित होने कि जरुरत नहीं है, हमारे देश में बहुत शे वफादार कुत्ते हैं, ""माइनो"" का पूरा कुनबा वहां भेंज देंगे इनशे वफादार कुत्ते आप को कही नहीं मिलें गें….!!!!

  15. Anonymous said,

    March 30, 2011 at 12:47 am

    >इन गद्दार नेताओं को कुत्ते शब्द से संबोधित करना, वफादार कुत्ते जाती का घोर अपमान है| एक सुन्दर कविता कुछ समय पहले कहीं पढ़ी थी, इस लेख पर हु बहु लागू होती है | मेरी विनती है कि कृपया इन जाहिलों कि कुत्तों से तुलना न करें | कविता के लेखक को सच बोलने पर अत्यंत साधुवाद ….कुछ दिन पहले दिल्ली मे कुछ विवाद हुआ जब B.J.P के नेता गड्करी ने मुलायम सिंह ओर लालु यादव को सोनिया के कुत्ते का उपनाम दिया |एक बार फिर खादीधारी भारतीय नेताओं द्वारा भारतीय संस्कृति का क़त्ल हुआसंस्कृति को पिछे छोड कर, वाणी के संयम को तोड करगडकरी ने अनुशाशन की सभी सीमांओ को लांघ डालाजब उन्होने मुलायम ओर लालु को सोनिया का कुत्त्ता बना डालाकुत्तों का घोर अपमान हुआकुत्तों के दिलों पर इस का गहरा प्रत्याघात हुआकुतों के समाज में हलचल मच गयीओर गडकरी की जानों शामत ढ्ल गयी.कुतों की दुनिया के नंबर एक अखबार " The Alsatian Times “ मेंयह खबर मुख्य पृष्ठ पर छापी गयीओर गडकरी की सजा तय करने ले लियेकुतों की महासभा आपातकालिन बुलायी गयी.सोनिया , मुलायम ओर लालु को गवाही देने के लिये बुलाने का तय हुआऔर गडकरी को कडी से कडी सजा देने का प्रण हुआआपातकालिन महासभा संम्मलित हुयी ओर कार्यवाहि शुरु हुयीखुले आसमान के नीचे कुत्तों की विशाल महासभा ने लिया आकारतनाव से भरा हुआ था वातावरण ओर समस्या पर चल रहा था विचारकुत्ते शांति से बैठे हुए थे लेकिन जजबात सभी के भडके हुए थे.इस दोरान किसी बात पर , भडके हुए जजबात परकुछ कुत्तों मे आपस मे ही हो गया विवादओर एक कुते ने दुसरे कुते से कह दिया ,चुप हो जा नेता की ओलादयह सुनकर वह कुता गुस्से से कांपने लगातनी हुयी पुंछ लेकर इधर – उधर भागने लगाओर दांत निकाल कर पहले वाले कुत्ते को कच्चा खाने का उधोग करने लगाकठिन प्रयासों के बाद उस कुत्ते को वश में लिया गयाओर अध्यक्ष महोदय द्वारा उसे अपनी समस्या कोअनुशाशन से पेश करने का आदेश दिया गयागुस्से से कांपते हुए उस कुत्ते ने अध्यक्ष महोदय से पहले वाले कुत्ते की फरियाद लगायीओर फरियाद सुनकर अध्यक्ष महोदय ने पहले वाले कुत्ते को फट्कार लगयीअध्यक्ष महोदय बोले..गडकरी की तरह वाणी के संयम को तोडते हुएतुम्हें तनिक भी झिझक नहीं आयीओर अपने ही भाई को इतनी गंदी गाली देते हुए तुम्हें जरा भी शरम नहीं आयीअरे वफादारी कर के रोटी खातें हैं, चुराया नही कभी किसी भेंस का चाराना ही किसी को धर्म के नाम पर लडा लडा कर मारामालिक हमारा हिन्दु हो या मुसलमान, सिख हो या ईसाई,सुरक्षा सभी की बराबर करतें हैं,जाति के नाम पर आरक्षण का भेदभाव हम किसी से नहीं करते हैंअपनी ही गली मे भोंकते हैं , दुसरे की गली में जाकर बेकारण किसी को नहीं टोकते हैंपुलिस हो या मिलिटरी, घर हो या परिवार,सुरक्षा की सेवा सभी को नि:शुल्क देतें है मेरे यारअपनी ही कुतिया के साथ प्रेम से रहते हैं , किया नही कभी किसी दुसरी का बलात्कारओर ना ही कभी किया बच्चों की तस्करी का व्योपार |रात के अंधेरे मे भी , चोर हो या दुश्मन या फिर आंतकवादीका बंमजान पे खेलकर भी सुंघ सुंघ कर खोज लातें हैतब जाकर दुनियावाले चैन की नींद सो पातें है.इतना समझाने पर तुम खुद ही समझ जाना,ओर फिर भी समझ ना आए तो दुबारा महासभा मे मत आनादुबारा महासभा में इस तरह की बात अगर की जाएगीतो नि;संदेह उसे फांसी की सजा दी जाएगीयह हमारी महासभा है, सजा का अमल तुरंत किया जाएगाCongress सरकार नहीं जो अफजल गुरु को फांसी से पहले ही लटकाया जाएगाछोटी सी बात पर इतनी गंदी गाली दे कर तुमने अनर्थ कर डालाअनुशाशन से भरी हुयी थी सभा हमारीतुमने उसे लोकसभा बना डाला

  16. March 30, 2011 at 3:04 am

    >फ़ेसबुक पर हमने लिखा था जो यहाँ टीप रहे हैंभारत पाक मैच ना हो गया महायुद्ध हो गया । क्या हम २६/११ के हमारे वीर जवानों की कुर्बानी भूल गये हैं, क्यों हमारे प्रधानमंत्री जी आतंक राष्ट्र के लोगों को बुलाकर शहीद जवानों के घाव पर नमक छिड़कने का काम कर रहे हैं ? क्या केवल क्रिकेट से आतंक खत्म हो जायेगा… बहुत ज्वलंत प्रश्न है… दरअसल क्रिकेट अब कार्पोरेट घरानों की रखैल हो गई है, जिसमें सरकार महज कठपुतली बनकर रह गई है।

  17. March 30, 2011 at 3:50 am

    >."पिछले दिनों संसद और संसद के बाहर मनमोहन सरकार की जितनी भद्द पिटी है उससे शर्मिन्दा होने की बजाय सरकार 'क्रिकेट नशे' में गंभीर आरोपों को भुला देना चाहती है. उसे लगता है कि अभी क्रिकेट का बुखार चढ़ा हुआ है, क्रिकेट समर्थकों की सहानुभूति बटोरी जा सकती है. और आजकल मीडिया तो मूर्खों के लिये मनोरंजन का झुनझुना बन कर रह गया है. गंभीर मुद्दे तो उसके लिये मनोरंजन के बाद आते हैं. यही फर्क है आज की और पुरानी पत्रकारिता में.".

  18. March 30, 2011 at 4:29 am

    >आपकी पोस्ट हमेशा आगाह करती है ,पर जिसे कुछ करना है वह अपनी अक्ल लगा कर समझे तब न ,शासन चलानेवाले उधार की पराई अक्ल लिए बैठे हैं उन्हें कौन रास्ते पर लाए ?

  19. RAHUL said,

    March 30, 2011 at 4:33 am

    >आज कई सारे भांड और नेता ,भोंदू युवराज की पूरी इटालियन फैमिली मैदान मे अपना मनहूस चेहरा दिखायेँगे.और भारतीय खिलाड़ियो की मुश्किल बढ़ायेँगे.क्या ये सब अपने घर मे मैच नही देख सकते जो चले आये मनहूसियत फैलाने.और मनमोहन इंडिया को कायदे से मैच खेलने देगा की नही.कि यहाँ भी राजनीति घुसेड़ दी.वैसे भी इंडियन टीम पर पहले ही इतना दबाब हैऔर ऊपर से मनमोहन ड्रामा फैला रहा है.यार कितने मूर्ख है ये इंडिया वाले.

  20. INDIAN said,

    March 30, 2011 at 4:42 am

    >और सुनो भाईआज जगह जगह हिदायत दी जा रही है कि सार्वजनिक जगह पर मैच न दिखाये.और अगर इंडिया जीतती है तो खुशी न मनाये.क्यो कि इससे हमारे कुछ देशभक्त !!! लोगो की भावनाये आहत होती है.धन्य है हमारा भारत जहाँ भोँदू युवराज ने जन्म लिया.

  21. March 30, 2011 at 5:45 am

    >@anonymus…………….right choicepranam.

  22. I and god said,

    March 30, 2011 at 7:39 am

    >a big conspiracy against the india, this article is written like a sattire, but it is a reality. the curropt govt. want to divert the public attention from their ghotalas to a cricket debate. and haeavy money being offered to whole team from big financers of the govt like hasan ali.a must read for all cricket lovers, if nothing else, you will enjoyTHE LINK FOR THE ARTICLE IS : http://www.esamskriti.com/essay-chapters/PM-requests-Dhoni-to-lose-semi~-final,-For-a-safer-Sub-Continent-1.aspxI AM SORRY THIS IS IN ENGLISH, IF ANY BODY CAN CHANGE IT TO HINDI, BUT IT IS BEAUTIFULLY WRITTEN.THE ARTICLE IS : PM Requests Dhoni To Lose Semi- Final, For A Safer Sub ContinentBy Sanjeev Nayyar , March 29 2011 [ esamskriti@suryaconsulting.net]1Chapter :Indian captain M S Dhoni had a dream last night where he spoke with PM Manmohan Singh Kohli. Here is a conversation that is supposed to have transpired between PM and Dhoni (referred to as MS). PM: Congrats MS. Your win has deflected public attention from the SCAMS that have rocked UPA. Thank you. I do not need to memorise any Urdu couplets now.MS: Thanks Sir. The boys played very well.PM: Now that the Pakistanis (referred to Paks henceforth) are playing at Mohali the possibility of a terror attack has gone down. Can you help the Government by allowing the Paks to play in Mumbai as well?The author is the founder of http://www.esamskriti.com

  23. Prem Yadav said,

    March 30, 2011 at 9:14 am

    >Ajj Sonia Gandhi Match Dekhne Ja Rahi Hai, Sonia Ke Kekarmo Ke karan Aaj Bharat Match Harega. Sonia Shubh Sagun Vali Bahi Hai.

  24. सुलभ said,

    March 30, 2011 at 9:23 am

    >शोर शोर में अक्सर चोर पतली गली से निकल जाते हैं.–वाह रे क्रिकेट………….!जो जानवर से बदतर हैं वे जानवरों को मार रहे हैं–वाह रे हिन्दुस्तान……………!

  25. ROHIT said,

    March 30, 2011 at 12:37 pm

    >भारत की हालत पतली हैऔर ये सब मनमोहन का किया धरा हैसालो ने मीडिया के साथ मिलकर 25 तारीख से ही नौटंकी करना शुरु कर दियाऔर आखिर कार भारत को नाक कटाने की नौबत पे ले आया.मनमोहन को भारत कभी माफ नही करेगा

  26. ROHIT said,

    March 30, 2011 at 12:50 pm

    >इतने सारे मनहूस चेहरे आज स्टेडियम मे है. तो भारत का ये हाल तो होना ही था.सबसे बड़ा मनहूस तो वो गिलानी है

  27. Prem Yadav said,

    March 30, 2011 at 1:36 pm

    >HAi Re Sonia Manhus Bhartat 275 Bhi Nahi Bana Paya

  28. March 30, 2011 at 4:51 pm

    >ये जनता को मुर्ख बना रहें हैं, क्रिकेट के नाम पर राजनीती हो रही है, गिलानी को भारत बुलाने में मनमोहन कि कमजोरो साफ दिख रही है, मनमोहन ने गिलानी को बुलाकर करोडो भारतीय का अपमान किया है, लेकिन अपनी सोनिया को खुश रखा है….!@!!!!

  29. March 30, 2011 at 5:51 pm

    >माफ़ कीजिये गा भारत क्रिकेट के खेल में विजई हो गाया, इटली वाला गाँधी परिवार, और कांग्रेश सरकार जो गिलानी को बुलाकर तोहफा देना चाहती थी वो अपने मकसद में कामयाब नहीं हो सके, भारतीय खिलाडियों ने सोनिया माइनो के दिलको ये मैच जीतकर के दुखाया है, मनमोहन का मुह देखकर लगता है वो कितने दुखी हैं, काश पाकिश्तन जित जाता तो ये इटली वाला गाँधी परिवार, और कांग्रेश सरकार अपने आका को खुश कर पाते..!!! """हिन्दुश्तान को हराने वाला अभी पैदा नहीं हुआ""" जय हिंद

  30. March 30, 2011 at 6:52 pm

    >काश इन कुत्तों की वफादारी से सफ़ेद टोपी वाले कुत्ते भी कुछ सीखते? और एक 'खानदान' की बजाय सारे देश से वफादारी दिखाते!

  31. ROHIT said,

    March 30, 2011 at 7:13 pm

    >ये करोड़ो भारतीयो की दुआओ का नतीजा है कि भारत ने मैच जीत लिया.वरना कुछ लोगो की नौटंकियो ने भारत पर इतना प्रेशर कर दिया था. कि……लेकिन करोड़ो भारतीयो की पूजा पाठ प्रार्थना,और सच्ची दुआओ ने पाकिस्तानियो को उनके अंजाम तक पहुचा दिया.वन्दे मातरम

  32. Rajesh said,

    March 31, 2011 at 6:40 am

    >Bahut hi acha likha hai Suresh Ji. Ye congress sarkar iske hee layak hai……

  33. March 31, 2011 at 9:05 am

    >आवारा कुत्ते हमारे काम के और चुने हुए?? उनके काम के

  34. March 31, 2011 at 1:45 pm

    >साँप को अमन पड़ोस में पाल रहे थे…. आज आस्तीन में पालने चले हैं…. उसकी तो फितरत है डसना तुम क्यों पगलाए मनमोहन ?

  35. Anonymous said,

    April 1, 2011 at 7:05 am

    >मूर्ख हिँदुओतुम लोग कभी मत जागना.चुल्लु भर पानी मे डूब मरोचाटते रहो इस भाईचारे की थूक को.ये भाई चारे की थूक चाटने का नतीजा है कि पश्चिम बंगाल अब हाथ से निकल गया.जो बात सुरेश जी कहते थे .वही बात आज अखबारो मे निकली है.कि "अब पश्चिम बंगाल का भविष्य बांग्लादेशी तय करेँगे."उसमे लिखा है कि पिछले दस सालो मे वहाँ बांग्लादेशी घुसपैठ से मुस्लिम आबादी मे 35 % की जबरदस्त बढ़ोत्तरी हुयी है.और उन सभी बांग्लादेशियो को वहा रह रहे मुसलमानो ने मिल कर वहाँ की नागरिकता प्रदान करवा दी है.और अब वहाँ हिँदुओ की कोई औकात नही.हिँदुओ को अपना त्यौहार मनाना तक दूभर हो गया है.आने वाले चुनावो मे वहाँ की सत्ता की चाबी केवल मुसलमानो के हाथ मे है.और सभी पार्टियाँ इनके पीछे पीछे भाग रही है.तो हिँदुओ अब बजाते रहो ढोल. अब कश्मीर के बाद पश्चिम बंगाल भी हाथ से निकल गया.और ये बांग्लादेशी पाकिस्तानी अब पश्चिम बंगाल फतह करने के बाद एक रणनीति के तहत अन्य प्रदेशो मे फैल रहे है.जैसे कल अभी आकड़े आये है कि उत्तर प्रदेश की आबादी 16 करोड़ से बीस करोड़ हो गयी है.तो भाई अब यूपी की बारी है.लेकिन अपने हिँदुओ को क्या फर्क पड़ता है वो तो भाईचारे की थूक चाटने मे बिजी है.

  36. waldia said,

    April 3, 2011 at 7:34 am

    >Gilani' visit was for safety purpose. Indian government could not have possibly checked terrorist attack during the match and so, they invited Gilani to make sure that isi will not try any attempt to sabotage the match. saradr is always not lik ethat as you think!

  37. K.R.Baraskar said,

    April 6, 2011 at 1:14 pm

    >mai inhe kutte ke bajaaye suwar ki aulaade kehta hu.. goo khane wale


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