>अल्पसंख्यकों की “अपनी” सरकार का दूसरा रोल मॉडल बनेगा केरल… Kerala Elections, Assembly Elections in India, Minority Appeasement

>जैसा कि अब सभी जान चुके हैं, कांग्रेस पार्टी अल्पसंख्यकों के वोट बैंक को हड़पने और भुनाने के लिये किसी भी हद तक गिर सकती है, लेकिन केरल के आगामी चुनावों में कांग्रेस के नेतृत्व में UDF मोर्चे के उम्मीदवारों की लिस्ट देखकर चौंकना स्वाभाविक है। हालांकि उम्मीद तो नहीं है फ़िर भी कांग्रेस के उम्मीदवारों (Congress Candidates in Kerala) की इस लिस्ट से “सेकुलरों” के मन में बेचैनी उत्पन्न होना चाहिये, एवं कांग्रेस के भीतर भी जल्दी ही इस बात पर विचार मंथन शुरु होना चाहिये कि उनका भविष्य क्या है।

सेकुलरों को यह जानकर खुशी(?) होगी कि केरल के आगामी विधानसभा चुनावों (Kerala Assembly Elections) में “खानग्रेस” पार्टी ने कुल 140 में से 74 टिकिट अल्पसंख्यकों को दिये हैं। यह तो अब एक स्वाभाविक सी बात हो गई है कि जिन विधानसभा क्षेत्रों में मुस्लिम अथवा ईसाई जनसंख्या का बहुमत है, वहाँ एक भी हिन्दू को टिकिट नहीं दिया गया है (“सेकुलरिज़्म की रक्षा” की खातिर दिया ही नहीं जा सकता), लेकिन ऐसे कई अल्पसंख्यक उम्मीदवार (Minority Community Candidates in Kerala) हैं जिन्हें हिन्दू बहुल क्षेत्रों से “खान्ग्रेस” ने टिकिट दिया है। यह रवैया साफ़ दर्शाता है कि “खानग्रेस” पार्टी को पूरा भरोसा है कि ईसाई और मुस्लिम वोट तो कभी भी “सेकुलरिज़्म” नाम के लॉलीपाप के झाँसे में आने वाले नहीं हैं, इसलिये जहाँ ईसाईयों और मुस्लिमों का बहुमत है वहाँ सिर्फ़ उसी समुदाय के उम्मीदवार खड़े किये हैं, जबकि हिन्दू तो चूंकि परम्परागत रूप से मुँह में “सेकुलरिज़्म” (Secularism of Hindus) का चम्मच लेकर ही पैदा होता है इसलिये वहाँ “कोई भी ऐरा-गैरा” उम्मीदवार चलेगा, वह तो उसे वोट देंगे ही। ज़ाहिर है कि यह सिर्फ़ और सिर्फ़ हिन्दुओं की जिम्मेदारी है कि “केरल में धर्मनिरपेक्षता” बरकरार रहे…।

जिस प्रकार कश्मीर में सिर्फ़ मुसलमान व्यक्ति ही मुख्यमंत्री बन सकता है, उसी प्रकार अगले 10-15 साल में केरल में यह स्थिति बन जायेगी कि कोई ईसाई या कोई मुस्लिम ही केरल का मुख्यमंत्री बन सकता है, यानी केरल “अल्पसंख्यकों की एक्सक्लूसिव सरकार” दूसरा रोल मॉडल सिद्ध होगा। अब यह तो “खानग्रेस” पार्टी के हिन्दू सदस्यों, विधायकों, पूर्व विधायकों, सांसदों को आत्ममंथन कर सोचने की आवश्यकता है कि 1970 में खान्ग्रेस से कितने अल्पसंख्यकों को टिकट मिलता था और 2010 में उसका प्रतिशत कितना बढ़ गया है, तथा सन 2040 आते-आते खान्ग्रेस पार्टी में हिन्दुओं की स्थिति क्या होगी, शायद उस वक्त 100 से अधिक उम्मीदवार मुस्लिम या ईसाई होंगे?

एक बात और… 170 सीटों में से 74 उम्मीदवार अल्पसंख्यक समुदाय से हैं, जबकि बाकी बचे हुए 66 उम्मीदवार सिर्फ़ कहने के लिये ही हिन्दू हैं, क्योंकि सही स्थिति किसी को भी नहीं पता कि इन 66 में से कितने “असली” हिन्दू हैं और इनमें से कितने “अन्दरखाने” धर्म परिवर्तन (Conversion in India) कर चुके हैं। जिस प्रकार भारत के भोले (बल्कि मूर्ख) हिन्दू सोनिया गाँधी (Sonia Gandhi a Christian) और राजशेखर रेड्डी (YSR is Christian) जैसों को हिन्दू समझते आये हों, वहाँ इन 66 उम्मीदवारों के असली धर्म का पता लगाने की “ज़हमत” कौन उठायेगा? और मान लें कि यदि 66 उम्मीदवार हिन्दू भी हुए, तब भी असल में वे हैं तो इटली की मैडम के गुलाम ही…

मजे की बात तो यह है कि इतने सारे अल्पसंख्यक उम्मीदवारों के बावजूद, त्रिचूर के कैथोलिक चर्च (Catholic Church of Thrissur) ने UDF के समक्ष ईसाईयों को “पर्याप्त” सीटें न दिये जाने पर अप्रसन्नता व्यक्त की है, इसी प्रकार मलप्पुरम क्षेत्र की मुस्लिम एजुकेशन सोसायटी ने पूरे इलाके में समुदाय को सिर्फ़ 10 सीटें दिये पर नाराज़गी जताई है।

ऐसा नहीं है कि वामपंथी नेतृत्व वाला LDF कोई दूध का धुला है, बल्कि वह भी उतना ही राजनैतिक नीच है जितनी कांग्रेस। उन्होंने भी चुन-चुनकर कई हिन्दू बहुल इलाकों में ईसाई और मुस्लिम उम्मीदवार खड़े किये हैं और वे ढोल बजा-बजाकर यह प्रचारित भी कर रहे हैं कि वामपंथ ने अल्पसंख्यकों के लिये “क्या-क्या तीर” मारे हैं। वामपंथियों के, अब्दुल नासेर मदनी (Abdul Naser Madni) और पापुलर फ़्रण्ट ऑफ़ इंडिया (Popular Front of India) (जिसके खिलाफ़ NIA राष्ट्रद्रोह और बम विस्फ़ोटों के मामले की जाँच कर रही है) से मधुर सम्बन्ध काफ़ी पहले से हैं (ज़ाहिर है कि “धर्म अफ़ीम है” जैसा वामपंथी ढोंग, सरेआम और गाहे-बगाहे नंगा होता ही रहता है, क्योंकि उनके अनुसार “सिर्फ़ हिन्दू धर्म” ही अफ़ीम है, बाकी के सभी पवित्र हैं)।

स्वाभाविक सी बात है, कि जब आज की तारीख में खानग्रेस और वामपंथी शासित राज्यों में हिन्दुओं के हितों की रक्षा नहीं होती, तो जिस दिन केरल और बंगाल विधानसभा में सिर्फ़ और सिर्फ़ “अल्पसंख्यकों” का ही दबदबा और सत्ता पर कब्जा होगा तब क्या हालत होगी? अभी जो नीतियाँ दबे-छिपे तौर पर जेहादियों और एवेंजेलिस्टों के लिये बनती हैं, तब वही नीतियाँ खुल्लमखुल्ला भी बनेंगी… अर्थात निश्चित रूप से कश्मीर जैसी…। कांग्रेस के बचे-खुचे हिन्दू विधायक या तो मन मसोसकर देखते रह जायेंगे या फ़िर उन तत्वों से समझौता करके अपना मुनाफ़ा स्विस बैंक में पहुँचाते रहेंगे।

जनसंख्या बढ़ाकर, वोट बैंक के रूप में समुदाय को “प्रोजेक्ट” करने से क्या नतीजे हासिल हो सकते हैं यह जयललिता की इस घोषणा (Jayalalitha Announces travel to Bethlehem) से समझा जा सकता है जिसमें उन्होंने तमिलनाडु के मतदाताओं को सोने की चेन, लैपटॉप इत्यादि बाँटने का आश्वासन देने के बावजूद, सभी ईसाईयों को बेथलेहम (इज़राइल) जाने के लिये सबसिडी की भी घोषणा की है। जयललिता का कहना है कि जब मुस्लिमों को हज जाने पर सबसिडी मिलती है तो ईसाईयों को भी बेथलेहम जाने हेतु सबसिडी, उनका “हक” है। हिन्दू धर्म के अलावा, किसी भी अल्पसंख्यक समुदाय के लाभ हेतु की जाने वाली घोषणाओं से भारत का “धर्मनिरपेक्ष” चरित्र खतरे में नहीं पड़ता, भाजपा सहित सभी के मुँह में दही जम जाता है, सभी लोग एकदम भोले और अनजान बन जाते हैं। लेकिन जैसे ही विहिप अथवा नरेन्द्र मोदी, हिन्दुओं के पक्ष में कुछ कहते हैं तो हमारे मीडिया और मीडिया के तथाकथित स्वयंभू ठेकेदारों को अचानक सेकुलर उल्टियाँ होने लगती हैं, संविधान की मर्यादा तथा गंगा-जमनी संस्कृति इत्यादि के मिर्गी के दौरे पड़ने लगते हैं।

लेकिन ज़ाहिर है कि इसके जिम्मेदार सिर्फ़ और सिर्फ़ हिन्दू और इनके हितों का दम भरने वाली पार्टियाँ ही हैं, जिन्होंने “राम” के नाम पर सत्ता की मलाई तो खूब खाई है, लेकिन “सेकुलरिज़्म” के नाम पर हिन्दुओं का जो मानमर्दन किया जाता है, उस पर चुप्पी साध रखी है। सेकुलरिज़्म और गाँधीवाद का डोज़, हिन्दुओं की नसों में ऐसा भर दिया गया है कि हिन्दू बहुल राज्य (महाराष्ट्र, बिहार) का मुख्यमंत्री तो ईसाई या मुस्लिम हो सकता है, लेकिन कश्मीर का मुख्यमंत्री कोई हिन्दू नहीं… जल्दी ही यह स्थिति केरल में भी दोहराई जायेगी।
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चलते-चलते :- मेरे लेखों को पढ़कर कई पाठक मुझे ई-मेल करते हैं, कुछ लोग टिप्पणियाँ करते हैं, जबकि कुछ सीधे ही ईमेल कर देते हैं। गत छः माह (जबसे मैं फ़ेसबुक पर अधिक सक्रिय हुआ हूँ) से देखने में आया है कि ईमेल में प्राप्त होने वाली सबसे “कॉमन” शिकायतें होती है कि –

1) “सेकुलरिज़्म और कांग्रेस को बेनकाब करते हुए इन मुद्दों को उठाकर तुम नकारात्मकता फ़ैला रहे हो…”

2) “यदि इन मुद्दों और घटनाओं को तुम रोक नहीं सकते, तो लोगों को भड़काते क्यों हो?”

3) “यदि इतने ही तेवरों वाले बनते हो, तो तुम खुद ही राजनीति में कूदो और ये बुराईयाँ दूर करो…”

4) “यदि भाजपा से भी मोहभंग हो चुका है, तो स्वयं कोई संगठन क्यों नहीं बनाते?”

इन सभी “आरोपों”(?) और “सवालों” पर कभी एकाध विस्तृत पोस्ट लिखने की कोशिश करूंगा… फ़िलहाल सिर्फ़ इतना ही कहना चाहूँगा कि “क्या प्रत्येक व्यक्ति हर प्रकार का (जैसे राजनीति में आना, संगठन बनाना इत्यादि) काम कर सकता है?”, “क्या जनजागरण हेतु “सिर्फ़” लेखन करना पर्याप्त नहीं है?” ये तो वही बात हुई कि बिल्डिंग के चौकीदार से आप कहें कि, “तू चोरों से आगाह भी कर, चोर को पकड़ भी, चोर को पकड़ने का उपाय भी बता, चोर कैसे पकड़ें उसके लिये संगठन भी बना और चौकीदारी भी कर… हम तो सिर्फ़ सोएंगे और जाग भी गये तो सिर्फ़ देखते रहेंगे, करेंगे कुछ भी नहीं…”

मेरे पाठक मुझे पढ़कर आंदोलित, आक्रोशित होते हैं, यह मेरे लिये खुशी की बात है, परन्तु हर बात के समाधान के लिये, वे मेरी तरफ़ ही क्यों देखते हैं? मुझे ही उलाहना क्यों देते हैं? मुझ से ही अपेक्षा क्यों रखते हैं? आखिर प्रत्येक आम आदमी की तरह मेरी भी कुछ आर्थिक, पारिवारिक सीमाएं हैं…। यदि किसी को ऐसा लगता है, कि मेरे लिखने से कोई फ़र्क नहीं पड़ने वाला, कुछ नहीं बदलने वाला… तो इसमें मैं क्या कर सकता हूँ? नकारात्मक विचारों वाला वह स्वयं है, या मैं? मेरा योगदान भले ही गिलहरी जितना हो, परन्तु मेरे आलोचक स्वयं विचार करें देश की स्थितियाँ जितनी बदतर होती जा रही हैं, क्या उसमें व्यक्ति का “सिर्फ़ पैसा कमाना” ही महत्वपूर्ण पैमाना है? देश के प्रति उसके कोई और दायित्व नहीं हैं? मैं अक्सर ऐसे “सेकुलर हिन्दू बुद्धिजीवियों” से मिलता हूँ, जिनके सामने “हिन्दुत्व और राष्ट्रवाद” की बात करने भर से ही उनका मुँह ऐसा हो जाता है मानो कुनैन की गोली खिला दी गई हो…। यदि देश का मुस्लिम नेतृत्व(?) अपने समुदाय के युवाओं को कट्टरवाद की ओर जाने से रोकने में असफ़ल हो रहा है तो इसमें किसी और का क्या दोष है? खानग्रेस और वामदलों की तुष्टिकरण की नीतियों और खबरों को उजागर करना साम्प्रदायिकता फ़ैलाना कैसे कहा जा सकता है? यदि कोई यह कहे कि भारत में बढ़ता इस्लामी कट्टरवाद और ईसाई धर्मान्तरण का जाल, नामक कोई समस्या है ही नहीं, तब तो उसे निश्चित रूप से “अच्छे इलाज” की जरुरत है…

केरल, गोवा, पश्चिम बंगाल और असम में अल्पसंख्यकों के तुष्टिकरण के चलते जो स्थितियाँ आज बनी हैं, वह कोई रातोंरात तो नहीं हुआ है…। मुझे भड़काने वाला एवं नकारात्मक लिखने का आरोप लगाने वाले सेकुलरों को मैं चुनौती देता हूँ कि यदि वे “वाकई असली सेकुलर” हैं तो कश्मीर में हिन्दू मुख्यमंत्री बनवाकर दिखाएं, या नगालैण्ड में ही किसी हिन्दू को मुख्यमंत्री बनवाकर देख लें… मैं उसी दिन ब्लॉगिंग छोड़ दूंगा…। यदि यह काम नहीं कर सकते, तो स्वयं सोचें कि आखिर ऐसा क्यों है कि मुस्लिम बहुल या ईसाई बहुल राज्य/देश में हिन्दू नेतृत्व नहीं पनप सकता…

अंत में सिर्फ़ इतना ही कहना चाहूंगा कि कुछ पाठक मेरे लेख पढ़कर आक्रोशित होते हैं, जबकि कुछ कुण्ठित हो जाते हैं (कि देश के हालात बदलने हेतु वे कुछ कर सकने में अक्षम हैं), परन्तु संकल्प लें कि इस हिन्दू नववर्ष से धैर्य बनाये रखेंगे, आक्रोश और ऊर्जा को सही दिशा में लगाने का प्रयास करेंगे, देश के लिये आप “जो भी” और “जैसा भी” योगदान दे सकते हों, अवश्य देंगे…

एक रजिस्टर्ड पत्रकार बनकर, किसी फ़ालतू से सांध्य-दैनिक में काम करते हुए सरकारी अधिकारियों को धमकाकर/ब्लैकमेल करके लाखों रुपये बनाना बहुत आसान काम है, जबकि बगैर किसी कमाई के, मुफ़्त में अपने ब्लॉग पर राष्ट्रीय राजनीति की खबरें और विश्लेषण डालना, किसी सिरफ़िरे का ही काम हो सकता है, और वह मैं हूं…

शायद पाँच राज्यों में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव, माननीय अण्णा हजारे का आमरण अनशन (Anna Hajare Fast unto Death), बाबा रामदेव की मुहिम (Baba Ramdev threat to congress) जैसी घटनाएं मिलकर देश के भविष्य में कुछ सकारात्मक करवट लेने वाले बनें… हम सभी को उम्मीद रखना चाहिये और देश के लिए अपना “सर्वाधिक सम्भव योगदान” करते रहना चाहिये…। क्रिकेट-फ़िल्मों-भूतप्रेत-ज्योतिष-नंगीपुंगी बालाओं जैसी “खबरों की वेश्यावृत्ति” में लगा हुआ चाटुकार, भाण्ड, अपने दायित्वों को भूल चुका तथा सत्ताधीशों के हाथों बिका हुआ मीडिया तो यह करने से रहा… यह काम तो आपको और मुझे ही करना है।

इसी आशा के साथ सभी को नूतन वर्ष की मंगल कामनाएं…

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29 Comments

  1. April 5, 2011 at 8:46 am

    >सुरेश जी इश्मे आपत्ति भी क्या है, सभी लोग परिवार वाद के लिए जीते हैं, और सोनिया माइनो भी अपने परिवार वालों को टिकिट देती है, तो इश्मे बुराई भी क्या है आखिर उश्का परिवार तो अल्प संख्यक ही है, तो वोभी अपने भाई भतीजे दामाद बेटी कोही तो टिकिट देगी, हाँ लेकिन इश विषय पर उन कथित हिन्दू (दिग्गी जैशे) सोनिया के चमचों को जरुर सोचना चाहिए कि उनकी औकात टिकिट पानेकी नहीं मात्र सोनिया माता के पैर दबाने कि है…!!!!

  2. Dev said,

    April 5, 2011 at 10:59 am

    >aapke aalochak mere hisaabs e dunia ke sabse badei negative thinker hain jo nirasahwaadi hain main aapko 1 saal se jada se follow kar raha hu or khaali samay mai sab lekha aapke padta hu ulta main jo nirash ho chuka tha ki "IS DESH KA KUCH NAHI HO SAKTA" aapki baate padkar ek energy aati hain ki haa ummid hain ummid hain or hos akta hain hain hum khud aware nahi hain system ke baare main isilie hum gawar bane hue hei aapke lekh se mujhe aajtak positiveness hi mili hain mili hain or aapko in bewkufo ko ek mooh tod jawab dena chahiyevaise chaukidaar ka example apne aap mai tagda mooh tod udaharan tha jo aapne dia.aap apna kaam bakhubi kar rahei hain or karte bhi rahei iski mai prathna karta hu dhanyawaaddev

  3. April 5, 2011 at 1:10 pm

    >"क्रिकेट-फ़िल्मों-भूतप्रेत-ज्योतिष-नंगीपुंगी बालाओं जैसी "खबरों की वेश्यावृत्ति" में लगा हुआ चाटुकार, भाण्ड, अपने दायित्वों को भूल चुका तथा सत्ताधीशों के हाथों बिका हुआ मीडिया तो यह करने से रहा… यह काम तो आपको और मुझे ही करना है"। |एक रजिस्टर्ड पत्रकार बनकर, किसी फ़ालतू से सांध्य-दैनिक में काम करते हुए सरकारी अधिकारियों को धमकाकर/ब्लैकमेल करके लाखों रुपये बनाना बहुत आसान काम है, जबकि बगैर किसी कमाई के, मुफ़्त में अपने ब्लॉग पर राष्ट्रीय राजनीति की खबरें और विश्लेषण डालना, किसी सिरफ़िरे का ही काम हो सकता है, और वह मैं हूधन्यवाद और साधुवाद , सुरेश जी आपके जज्बात को और आपके योगदान को और सकारात्मक सोच को

  4. Prem Yadav said,

    April 5, 2011 at 3:07 pm

    >Pichhle 15 Dino Se Ranchi Sahit Pure Jharkhand Me Atikraman Hataya JA Raha Tha. Koi Kuch Nahi Bola. Kintu Jab Islam Nagar Hatane Ki Bari Aai To YAhan Ke Sansad Maulana Sobodh Khan (Kant) Sahay Ji Kudne Lage. Lekin Prashana Ke Do Dande Padne Ke Bad Ve Delhi Bhag Gaye. Pahil Bar Jharkhnad Me Achha Kam Hua. Tustikaran Karne Gaye Neta Ko Pulish Ne Pita. Arjun Munda Ki Sarkar Tumhare Sare Pap MAf. Jai Ho.

  5. Prem Yadav said,

    April 5, 2011 at 4:04 pm

    >Ranchi (Jharkhand) Ke Muslimo Tatha Ranchi Ke Sansad Maulana Subodh Khan (Kant) Sahai Ke Pichhwade Prasashan Ne Mirchi Laga Diya. Arjun Munda Jai Ho.Subodh Khan Ke Liye Ye Sabd Nimn Karno Se IStemal KAr Raha Hu-Unka Bayan. 1. Chhutbhaye Afsaro Se Meri BAt Hui. 2. Chirkut Adhikariyon Ne Ye Kam Kiya. 3. Arjun Munda Jarmani Me Aiashi KAr Rahe Hain. Ajj Ke Lathicharge Me Tustikaran Karne Wale Kafi Neta Pitaye. Meyar, Dipty Meyar Ko Bhi Chot Lagi. Arjun Munda JAi Ho. Dusre Narendra Modi Ki Jai Ho.

  6. April 5, 2011 at 4:50 pm

    >''एक रजिस्टर्ड पत्रकार बनकर, किसी फ़ालतू से सांध्य-दैनिक में काम करते हुए सरकारी अधिकारियों को धमकाकर/ब्लैकमेल करके लाखों रुपये बनाना बहुत आसान काम है, जबकि बगैर किसी कमाई के, मुफ़्त में अपने ब्लॉग पर राष्ट्रीय राजनीति की खबरें और विश्लेषण डालना, किसी सिरफ़िरे का ही काम हो सकता है, और वह मैं हूं…''Bilkool Yahi Himmat Kaa Kaam Hai Sureshji. Aisi Himmat NDTVs, CNNs Times Ke Baahnd Nahi Dikhaa Sakte.

  7. April 5, 2011 at 5:22 pm

    >यदि अब भी हिन्दुओं के पैरोकार बनने का दिखावा करने वाले न चेते तो कुछ ही वर्षों के बाद उनके लिये भस्मासुर जैसी स्थिति पैदा होने वाली है..

  8. April 5, 2011 at 7:53 pm

    >जन जागरण करना भी एक बहुत बड़ा काम है… सुरेश चिपलूनकर के लेखों से निश्चित तौर पर हकीकत से पर्दा उठता है ये बात में दावे के साथ कह सकता हूँ… बदलाव लेन के लिए जन जागरण सबसे जरुरी है… दिमाग पर ताला लगा कर रजाई में दुबक कर सोने से से कुछ नहीं होने वाला… सच्चाई सबके सामने अणि ही चाहिए… आपका काम सार्थक है….

  9. Anonymous said,

    April 5, 2011 at 8:46 pm

    >6 करोड़ बांग्लादेशी भारत मे अवैध रुप से रह रहे है.और उनको भारतीय नागरिकता प्रदान की जा रही है.केरल मे 4000 हिँदु लड़किया लव जेहाद की रणनीति के तहत गायब कर दी गयी और उनको मुसलमान बना दिया गया.केरल,असम ,पश्चिम बंगाल सबका इस्लामीकरण हो चुका हैआखिर इन हिँदुओ को जागने के लिये और किस बात का इंतजार है.जब पूरे भारत का इस्लामीकरण हो जायेगा तब जागोगे कया सालो ?

  10. AK SHUKLA said,

    April 6, 2011 at 2:45 am

    >Sureshji Nav varsa ki Subh Kamnae, i am reading ur articles for last 2 yrs and i fully support ur veiws if Hindus will not stand unite then one day we will be in Miniorty and facing the problems like we are looking in other Hindu countries like Indonesia, etc. Those who critices u are beggars and these people are the servants of Britishers who had a faith in them.I also say to my friend through ur channel that support the move made by Sh. ANNAN HAZARE, SH KAZAREWALE & Madam KIRAN BEDI for JAN LOKPAL movement.JAI HIND

  11. April 6, 2011 at 5:28 am

    >ab ka kahen……matlab…..itna jada…..gira hua hai…….kaise uthega…..he bhagwan…..in sare 'sharmnirpekshkon' ko naitikta ka chyavanprash dilwaiye……kuch asar ho jaye……pranam.

  12. P K Surya said,

    April 6, 2011 at 5:38 am

    >khangres (Gadhi pari war)ho ya unke chamche sabhi maha kamine hain jab ye saale apne party k hinduon ko pakar pakar k khatna karenge ya jabrdasti ishai banayege uske bad jab bechare burke mai ghumenge sharm k mare tab pata chalega kee kya galti kar gayen, tab to chidiyan chug gai khet ho chuki hogi,, jai bharat

  13. rohit said,

    April 6, 2011 at 6:05 am

    >बंधू आपका लेख पढ़ा अच्छा लगा मन उद्वेलित भी हुआ और आंदोलित भी लेकिन फिर उसके बाद ………….? जी हाँ वोही रोज़ रोज़ की कसरत कमाने खाने की परिवार की गाडी के पहियों को खींचने की . यु प़ी ए अच्छी नहीं है एन दी ए भी अच्छी नहीं थी तो आखिर विकल्प क्या हो ? एक मुझ जैसे साधारण इंसान के पास क्या उपाय बच जाता है परिवार को देखू या देश के नपुंसक लोगो की रुदालिया और भड़ास को सुनु ? पहले भी बहुत बाबाओ पर विस्वास कर भा ज़ा पा को लाये थे की यह राम राज्य लायेंगे पर क्या हुआ सिर्फ निराशा ही हाथ लगी अपने लोगो को रेबदिया बांटी गयी. कुषा भाऊ ठाकरे , उमा भारती ,गोविन्दाचार्य और नरेन्द्र मोदी को छोड़ दे तो सभी एक ही थाली के चट्टे बट्टे है. आप राष्ट्र जागरण का एक महान कार्य कर रहे है लेकिन सोने का ढोंग करने वाले को कोई नहीं जगा सकता है. नपुंसक को कोई हकीम उसमानी या हकीम रहमानी भी पुरुषार्थ नहीं दे सकता है.

  14. R. K. Singh said,

    April 6, 2011 at 6:52 am

    >यह देश है वीर जवानो का अलबेलो का मस्तानो का — इस देश का यारो क्या कहना, हे! कलम के सिपाही सुरेश चिपलूणकर आपका हार्दिक अभिनन्दन है, जब मीडिया इछाधारी बाबाओ की डायरी में लिखे मोबइल नंबर खोज रही है, नंगीपुंगी, चाटुकार का खेल खेल रही है,( लगी खेलने लेखनी, सुख-सुविधा के खेल।फिर सत्ता की नाक में, डाले कौन नकेल।।) यसे वक्त में यह लेख धोनी के जेताऊ छक्के की तरह याद किया जायेगा. विस्फोट कॉम पर भी यह लेख प्रकाशित हुआ है, संजय-सुरेश का यह कदमताल, वन्देमातरम!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!

  15. April 6, 2011 at 7:45 am

    >सुरेश जी नमस्कार , यु तो आपका हर लेख पढ़ कर सोचने पे मजबूर करता है मगर इस बार इस बार कोई एसी बात नहीं आई …….ये सारे नेता गले तक तो भ्रस्टाचार में डूबे हुए है…..लोग भी अब जागरूक हो रहे है आने वाले चुनाव में भोट तो मिलने से रही तो इन्होने ये नई चाल सोची है …..और हम सब भी निकम्मे हो गए है सब कुछ जन सुन कर भी वही ढ़ाक के तीन पात …. इधर अन्ना हजारे साहब देश के लिए कुछ बेहतर करना चाह रहे है तो कुछ नेता उन्हें R.S.S का एजेंट बता रहे है . इन कमीनो को ज़रा सा भी शर्म नहीं है.कम से कम उनका साथ दे मगर यहाँ भी ये हराम के पिल्लै राजनीति करने लगे. दूसरी खबर ये है की कुछ लोग सचिन को भारत रत्न देने के लिए कह रहे है उसपे भी सरकार चुप है ! मैं दावे केव साथ कह सकता हु जिन दिन ये सरकार फिर से किसी भ्रस्टाचार में फसेगी उस दिन लोगो का ध्यान बदलने के लिए सचिन को भारत रत्न दे देंगे ताकि लोग उसे भी भूल जाये ………सुरेश जी हो सके तो इनसे भी कुछ राजनीति सिख लीजिये ……..क्यूँ की इनसे अगर हम कमीनापन नहीं सीखे तो इन्हें खदेड़ना मुश्किल हो जायेगा . इन का कमीनापन इन्हें भगाने में काम आएगा जय हिंद

  16. April 6, 2011 at 10:46 am

    >kuch buddijivi hote hain jo padhe likhe murkh hote hain aakhir bharat main kuch to dhrisrastra hain aur kuch duroydhar(paison) ki bajah se ganshari bane baithe

  17. April 6, 2011 at 10:47 am

    >anna hajre ji ka aanshan swagat yogya hai kuch hi log bache hain bharat main jo aamjit main sochte hain pura bharat unke saath hai

  18. April 6, 2011 at 1:19 pm

    >महोदय, अल्पसंख्यकों की “अपनी” सरकार का दूसरा-तीसरा और ना जाने कितना रोल मॉडल तैयार है। यह तो आप हैं, जो अभी "दूसरा" की गिनती तक अटके हुए हैं। जहां-जहां खानग्रेस या कमीनिस्टों की सरकार है, वहां यह हालात स्थापित नहीं हो चुके हैं, और भाजपा या एनडीए ही इस मामले में कौन सी दूध की धुली हुई है।अब "चलते-चलते" वाले आपके मुद्दे पर… देखिए, कुछ लोग होते हैं जो किसी सुनी-अनसुनी पर ध्यान ना देते हुए सिर्फ़ अपने काम पर ध्यान रखते हैं, जैसे- रा.स्व.सं., और कुछ लोगों का काम है, जिन्हें सिर्फ भौंकना ही आता है, चाहे आप लाख अच्छे काम क्यों ना करे, जैसे- कमीनिस्ट कलमघिस्सु। आप अपने पथ पर चलते रहें…. वो सुना है ना- "हाथी चले बाजार, कुत्ते भूंके हजार" ।अंत में, "विक्रम नव संवत्सर 2068 एवं चैत्र मास की नवरात्रि एवं राम नवमी की कोटिशः हार्दिक शुभकामनाएं"

  19. vijender said,

    April 7, 2011 at 6:09 am

    >sursh ji jai ram ji ki,vikrami sambat 2068 ki aap ko thatha sabhi pathko ko parivar sahit hardik shubkamnaye. alapsankhyako ke kitne hi role model state tayar he bhle hi mukhyamantri soniya ke charan dawane bale chadam hindu ke bhesh me chipe issa ke pujari ho/suresh ji jis tarah se kuch log app per nakaratmak tipni karte he wese hi hum per bhi tipni hoti he parantu jab unse kho ki aap apna kuch samay samaj sewa ke liye dena pasand karoge to jawaw hmese nakaratmak hi milage/ isliye apni chal me mast rahiye aur apne lekh rashtvadi patriko me bhejte rahiyetaki jo log(gramin chettro ke)internet use nahi kar pate he wo app ke rashtvadi leko se banchit na rahe

  20. Gyanu Jalan said,

    April 7, 2011 at 6:35 am

    >Anna Hazare Ke Sanghash Me Sabhi Achhe Log Unka Khulakar Samarthan Karen.

  21. April 7, 2011 at 12:35 pm

    >हो सकता है कि कुछ दिनों में अन्ना की इस मुहिम में आम जनता की दिलचस्पी कम होने लगे। अरे भाई, 8 अप्रैल से आईपीएल क्रिकेट जो शुरू होनेवाला है।

  22. Sms Hindi said,

    April 7, 2011 at 1:11 pm

    >Mujhe politicas me bahut interest nahi hai, lekin ye sab padhkar kisi ko bhi achha nahi lagega"अगले 10-15 साल में केरल में यह स्थिति बन जायेगी कि कोई ईसाई या कोई मुस्लिम ही केरल का मुख्यमंत्री बन सकता है,"

  23. Chandan said,

    April 7, 2011 at 7:30 pm

    >या तो इंग्लिश में लिख लें या हिंदी में… वैसे भी गूगल जबरजस्ती डाले गए कीवर्ड् मान्य नहीं करता.(आलोचना सही ढंग से लें, चाहें तो यह टिप्पणी हटा दें)

  24. सुलभ said,

    April 7, 2011 at 7:49 pm

    >.आक्रोश और ऊर्जा सही दिशा में है, आप जारी रहें.नाकारात्मक विचार वाले भी एक दिन जान बचाने के लिए डर से साकारात्मक हो जायेंगे.असल में अधिकाँश आम लोगों को अपनी काबिलियत पर भरोसा नहीं रह गया है. सिर्फ अपने परिवार का दुखड़ा रोते हैं. एक दिन में चौबीस घंटे होते हैं.जिसमे लोग 4-8 घंटे फ़ालतू के कामों में वक़्त गुजारते हैं और कहते हैं कि पारिवारिक मजबूरी है वरना हम में भी कभी आग था देश को सुधारने का, शर्म आती है ऐसे लोगों की बातें सुनकर.अपना भारत दुनिया के सबसे प्राचीन सभ्यता संस्कृति वाला संपन्न देश रहा है, १५ वर्ष के बालकों में भी वीरता स्वाभिमान भरा होता था.मैं तो बस इस उम्मीद पर जीता हूँ कभी तो वो दिन फिर से आएगा, फलस्वरूप कठिनाईयों में भी कुछ गंभीर कार्य इस दिशा में थोडा सा कर लेता हूँ,आप लिखते हैं लहर पैदा होती है मतलब आप नेक कार्य कर रहे हैं. साथ देने वालों की कमी नहीं होगी

  25. Rajesh said,

    April 8, 2011 at 6:06 am

    >Bahut hi accha likha Suresh Ji. Ye Napunsak Sarkar jab tak satta mein rahegi. Desh ko daldal me dalti rehegi. In 60 varson mein itna nukshan is desh ne uthaya hai, vo itna karod varson ke bit jane ke bad bhi nahi hua tha.

  26. P K Surya said,

    April 8, 2011 at 10:52 am

    >mai kal evning se le k 12.15 raaat tak Anna Hazare g k saat tha jantar mantar pe.. or ho saka to aj evning se kal tak bhi rahunga,, or han Anna Hazare g ko crore logo ka saath de k Anna g k nam k ahe carore lagana hai jai bharat jai hind

  27. jay said,

    April 8, 2011 at 4:02 pm

    >बजाते रहिये तूती चिपलूनकर जी..कही न कही कभी न कभी फर्क ज़रूर पड़ेगा..आप ब्लॉग नहीं लिख रहे हैं बल्कि इतिहास रच रहे हैं…आपके सरोकारों को व्यापक सफलता भी ज़रूर मिलेगा आज नहीं तो निश्चय कल..अनन्य-अशेष साधुवाद आपको.पंकज झा.

  28. Anonymous said,

    April 9, 2011 at 6:11 am

    >ये फिर पाजामे से बाहर आ रहा हैं . क्यों न जरा फिर से मुह तोड़ जवाब दिया जाये.पढियेगा जरूर …. इस पाकिस्तानी एजेंट के इस पोस्ट को http://swachchhsandesh.blogspot.com/2011/04/is-satya-sai-baba-god.html

  29. April 10, 2011 at 10:00 pm

    >सुरेश जी कोइ विशेष अंतर नही है, पहले कांग्रेस जिन्हे टिकट देती थी वो मंदिर जाने वाले मुस्लिम या इसाइ होते थे (शर्म-निरपेक्ष-वादी) और अब सीधे सीधे मस्जिद और गिरिजाघर जाने वाले लोगो को टिकट दे रहे हैं। मैं तो कहता हूं कि अब स्थिति बेहतर है, कम से कम हमे अपने विरोधी का असली चेहरा देखने को मिल रहा है, पहले तो नकाब के पीछे से राज करते थे ये धर्मांध। आप ही कहिए, मुलायम या लालू बेहतर या ए के एंटोनी (मुझे आपका उत्तर मालूम है) यह दोगले शर्मनिरपेक्ष तो किसी भी काम के नही हैं।रही बात आप पर शिकायतों की बौछार करने वालों की तो जो खुद किसी काम के नही होते हैं अगर वो किसी को कुछ करते या बनते देखते हैं तो उनका मिथ्या अभिमान आहत होता है, आगे आप स्वयं समझदार हैं।


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