>पुट्टपर्थी में सेकुलर गिद्ध मंडराने लगे हैं… Satya Sai Baba Trust Puttaparthi, Hindu Temples

>समूची दुनिया में करोड़ों भक्तों के श्रद्धास्थान अनंतपुर जिले में स्थित पुट्टपर्थी के श्री सत्य साईं बाबा का स्वास्थ्य, बेहद नाज़ुक स्थिति में चल रहा है। डॉक्टरों ने उन्हें वेंटिलेटर पर रखा है। 85 वर्षीय सत्य साँई बाबा अब अपने जीवन के आखिरी चरण में पहुँच चुके हैं। बाबा के करोड़ों भक्त उनके स्वास्थ्य हेतु दुआएं माँग रहे हैं और प्रार्थनाएं कर रहे हैं।

एक कहावत का मिलता-जुलता स्वरूप है – “मुर्दा अभी घर से उठा नहीं, और तेरहवीं के भोज की तैयारियाँ शुरु हो गईं…”। लगभग यही “मानसिकता” दर्शाते हुए आंध्रप्रदेश की कांग्रेस सरकार ने 40,000 करोड़ रुपये के विशाल टर्नओवर वाले सत्य साँई ट्रस्ट (Satya Sai Trust) पर राजनेताओं द्वारा कब्जा करने हेतु, पहला पाँसा फ़ेंक दिया है। मुख्यमंत्री किरण कुमार की पहल पर राज्य सरकार ने पाँच सदस्यों का एक विशेष प्रतिनिधिमण्डल पुट्टपर्थी भेजा है, जो इस बात की देखरेख करेगा कि साईं बाबा की मृत्यु के पश्चात सत्य सांई ट्रस्ट कैसे संचालित होगा, इस ट्रस्ट के ट्रस्टियों ने इस विशाल अकूत सम्पत्ति की ठीक से देखभाल एवं विभिन्न सेवा प्रकल्पों के सुचारु संचालन हेतु क्या-क्या कदम उठाए हैं।

पाँच सदस्यों की इस टीम में राज्य के मुख्य सचिव, वित्त सचिव एल वी सुब्रह्मण्यम, स्वास्थ्य सचिव पीवी रमेश, राज्य मेडिकल शिक्षा के निदेशक डॉ रघु राजू, उस्मानिया अस्पताल (Usmania Hospital) के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ लक्ष्मण राव एवं डॉ भानु प्रसाद शामिल हैं। इस प्रतिनिधिमण्डल ने (यानी आंध्र की कांग्रेस सरकार ने) अपने बयान में कहा कि, “चूंकि डॉक्टर साईं बाबा के स्वास्थ्य (Satya Sai Baba Health) के बारे में सशंकित हैं, इसलिये हम ट्रस्ट के सभी प्रमुख सदस्यों से चर्चा कर रहे हैं कि साईं बाबा के निधन के पश्चात, क्या ऐसी कोई व्यवस्था है जो उनके सभी “चैरिटी” संस्थानों की ठीक तरह से देखभाल कर सके? क्या ट्रस्ट में कोई “केन्द्रीय व्यवस्था” है जो सभी संस्थाओं को एक छतरी के नीचे ला सके?” राज्य के मुख्य सचिव ने कहा कि चूंकि सत्य साईं ट्रस्ट को विदेशों से भारी मात्रा में चन्दा और दान प्राप्त होता है, इसलिये हमारी टीम यह भी देख रही है कि क्या ट्रस्ट के 40,000 करोड़ के टर्नओवर की विधिवत अकाउंटिंग की गई है अथवा नहीं? यदि ट्रस्ट के अकाउंट्स में कोई गड़बड़ी पाई गई तो राज्य सरकार इस समूचे ट्रस्ट का अधिग्रहण करने पर विचार करेगी”। उल्लेखनीय है कि सत्य साईं केन्द्रीय ट्रस्ट पुट्टपर्थी में एक विश्वविद्यालय, एक सुपर-स्पेशल विश्व स्तरीय सुविधाओं वाला अस्पताल (Satya Sai Super Speciality Hospital), एक वैश्विक धर्म म्यूजियम, एक विशाल तारामण्डल, एक रेल्वे स्टेशन, एक स्टेडियम, एक संगीत महाविद्यालय, एक हवाई अड्डा एवं एक इनडोर स्टेडियम जैसे बड़े-बड़े प्रकल्प संचालित करता है, इसके साथ ही विश्व के 180 से अधिक देशों में सत्य साईं बाबा के नाम पर 1200 से अधिक स्वास्थ्य एवं आध्यात्मिक केन्द्र चल रहे हैं…।

आपने कई बार देखा होगा कि घर में बाप आखिरी साँसें गिन रहा होता है और सबसे नालायक, जुआरी और शराबी बेटा उसके मरने से पहले ही, मिलने वाली सम्पत्ति और बंटवारे के बारे में चिल्लाने लगता है, जुगाड़ फ़िट करने लगता है। कुछ-कुछ ऐसा ही “सेकुलर” गिद्धों से भरी कांग्रेस पार्टी भी कर रही है। तिरुपति देवस्थानम (Tirupati Devasthanam) के ट्रस्टियों में “बाहरी” एवं “सेकुलर” लोगों को भरने तथा तिरुमाला की पवित्र पहाड़ियों पर चर्च निर्माण की अनुमति देकर “सेमुअल” राजशेखर रेड्डी ने जो “रास्ता” दिखाया था, उसी पर चलकर अब कांग्रेस की नीयत, सत्य साईं ट्रस्ट पर भी डोल चुकी है। अब यह तय जानिये कि किसी न किसी बहाने, कोई न कोई कानूनी पेंच फ़ँसाकर इस ट्रस्ट में कांग्रेसी घुसपैठ करके ही दम लेंगे।

आंध्रप्रदेश सरकार का यह तर्क अत्यंत हास्यास्पद और बोदा है कि सरकार सिर्फ़ यह सुनिश्चित करना चाहती है कि साँई बाबा के पश्चात ट्रस्ट का संचालन एवं आर्थिक गतिविधियाँ समुचित ढंग से संचालित हों एवं इसमें कोई गड़बड़ी न हो। सोचने वाली बात है कि सत्य साँई बाबा के भक्तों में ऊँचे दर्जे के बुद्धिजीवी, ऑडिटर्स, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, शिक्षाविद, इंजीनियर एवं डॉक्टर हैं, क्या वह ट्रस्ट साँई बाबा के जाने के बाद अचानक लावारिस हो जायेगा? क्या सत्य साँई बाबा के अधीन काम कर रहे वर्तमान विश्वस्त साथियों ने इस स्थिति के बारे में पहले से कोई योजना अथवा कल्पना करके नहीं रखी होगी? क्या ये लोग इतने निकम्मे हैं? स्वाभाविक है कि कोई न कोई “बैक-अप प्लान” अवश्य ही होगा और वैसे भी आज तक बड़े ही प्रोफ़ेशनल तरीके से सत्य साईं ट्रस्ट का संचालन होता रहा है, कभी कोई समस्या नहीं आई। लेकिन सरकार (यानी कांग्रेस) येन-केन-प्रकारेण सत्य साँई ट्रस्ट में “अपने राजनीतिक लुटेरों” को शामिल करना चाहती है।

उल्लेखनीय है कि सत्य साँई ट्रस्ट द्वारा संचालित अस्पताल विश्वस्तरीय हैं जहाँ मरीजों को लगभग मुफ़्त इलाज दिया जाता है, यह भी जरूरी नहीं है कि मरीज साईं बाबा का भक्त हो। परन्तु सांई बाबा के जाने के बाद यदि इसमें सरकारी कांग्रेसी दखल-अंदाजी शुरु हो गई तो इसकी हालत भी दिल्ली के किसी सरकारी अस्पताल जैसी हो जायेगी। बशर्ते “बाबूगिरी” इसमें अपनी नाक न घुसेड़े…

यहाँ पर स्वाभाविक सा प्रश्न खड़ा होता है, कि जिस समय मदर टेरेसा (Mother Teresa) गम्भीर हालत में थीं और अन्तिम साँसें गिन रही थीं, तब सरकार “मिशनरीज़ ऑफ़ चैरिटी” (Missionaries of Charity) को मिलने वाले अरबों के चन्दे और उस ट्रस्ट के संचालन तथा रखरखाव के बारे में इतनी चिंतित क्यों नहीं थी? ये सारे सवाल साईं बाबा के ट्रस्ट के समय ही क्यों खड़े किये जा रहे हैं? और वह भी निष्ठुरता की इस पराकाष्ठा के साथ, कि अभी सत्य साँई बाबा मरे नहीं हैं, सिर्फ़ गम्भीर हैं। साईं बाबा ट्रस्ट से सम्बन्धित सभी “कांग्रेसी सेकुलर आशंकाएं” उस समय कभी सामने क्यों नहीं आईं, जब बाबा पूर्णतः स्वस्थ थे और उनके कार्यक्रमों में शंकरदयाल शर्मा, टीएन शेषन, अब्दुल कलाम, नरसिंहराव इत्यादि सार्वजनिक रूप से शिरकत करते थे? अब जबकि बाबा अपनी मृत्यु शैया पर हैं तब कांग्रेस को यह याद आ रहा है? साईं बाबा ने हमेशा आध्यात्म और भक्ति-प्रार्थना को ही अपना औज़ार बनाया है, साँई बाबा पर ढोंग करने, पाखण्ड करने सम्बन्धी आरोप लगते रहे हैं और विवाद होते रहे हैं, परन्तु साँई बाबा पर घोर कांग्रेसी भी “साम्प्रदायिकता फ़ैलाने” का आरोप नहीं लगा सकते… परन्तु साँई बाबा द्वारा खड़े किये गये 40,000 करोड़ के साम्राज्य पर “सेकुलर गिद्धों” की बुरी निगाह है, यह बात आईने की तरह साफ़ है। ये बात और है कि केन्द्र सरकार के बाद, पूरे देश में सबसे अधिक जमीनों और रियल एस्टेट पर कब्जा यदि किसी का है तो दूसरे नम्बर पर “चर्च” और मिशनरी ही हैं, लेकिन याद नहीं पड़ता कि कभी कोई सरकार इस बारे कभी चिन्तित हुई हो… क्या उस अकूत सम्पत्ति के अधिग्रहण के बारे में कभी किसी ने विचार किया है? किसी की हिम्मत नहीं है (खासकर सोनिया गाँधी के रहते)।

महाराष्ट्र की कांग्रेस सरकार ने वहाँ के सभी प्रसिद्ध और बड़े मंदिरों के ट्रस्टों का पिछले दरवाजे से अधिग्रहण कर रखा है, मंदिरों में आने वाला भारीभरकम चढ़ावा सरकारों के लिये “दूध देती गाय” के समान है (लेकिन सिर्फ़ और सिर्फ़ हिन्दू मन्दिर ही)। मन्दिरों की दुर्दशा पर किसी का ध्यान नहीं जाता, लेकिन वहाँ से आने वाली 85% कमाई सरकार की जेब में जाती है। हाल ही में महाराष्ट्र सरकार ने हिन्दू, सिख एवं जैन धार्मिक स्थलों के अधिग्रहण हेतु एक प्रस्ताव केन्द्र सरकार को भेजा है, जो कि “उचित माहौल और समय” आने पर पारित कर लिया जायेगा। आम हिन्दू ऐसे मुद्दों पर समर्थन और ठोस कार्रवाई के लिये भाजपा की तरफ़ देखता है, लेकिन उसे निराशा ही हाथ लगती है। भाजपाई, हिन्दुओं के हितो का सिर्फ़ “दिखावा” करते हैं, और तय जानिये कि सेकुलर “दिखाई देने” के चक्कर में, वे न घर के रहेंगे और न घाट के…। विकल्पहीनता के अभाव में फ़िलहाल हिन्दू भाजपा को वोट दे रहे हैं… लेकिन यह स्थिति हमेशा रहेगी, ऐसा नहीं कहा जा सकता…। जब सत्य साँई बाबा और शंकराचार्य जैसे हिन्दुओं के बड़े आस्था पुंज पर अथवा लक्ष्मणानन्द सरस्वती की हत्या से लेकर साध्वी प्रज्ञा को जेल में ठूंसने पर भी भाजपा सिर्फ़ तात्कालिक हो-हल्ला करके चुप्पी साध लेती हो तब तो निश्चित रूप से भविष्य अंधकारमय ही है, हिन्दुओं का भी और भाजपा का भी…

मैं न तो साँई बाबा का भक्त हूँ और न ही साईं बाबा के “तथाकथित चमत्कारों”(?) का कायल हूँ, परन्तु यह तो मानना ही होगा कि उन्होंने अनन्तपुर जिले के कई गाँवों के पीने के पानी की समस्या से लेकर अस्पताल, स्कूल जैसे कई-कई पारमार्थिक काम सफ़लतापूर्वक किये हैं। निश्चित रूप से उनका भक्त वर्ग बहुत बड़ा है, श्रद्धा अथवा अंधश्रद्धा जैसे प्रश्नों को यदि फ़िलहाल दरकिनार भी कर दिया जाए, तब भी इस बात में कोई शक नहीं है कि हिन्दुओं के आस्था केन्द्रों पर सेकुलर हमलों की लम्बी सीरिज की यह एक और कड़ी है…

=============
चलते-चलते :- अभी कुछ दिनों पहले गोआ के एक मंत्री को मुम्बई एयरपोर्ट पर एक लाख से अधिक अवैध डॉलर के साथ पकड़ा गया था (Goa Minister Held with Dollars), साफ़ है कि वह पैसा ड्रग्स से कमाया गया था और देश के बाहर ले जाया जा रहा था। लेकिन 65 लाख रुपये के लिये राहत फ़तेह अली खान पर हंगामा करने वाले मीडिया ने भी गोआ के इस “ईसाई मंत्री” के कुकर्म पर आँखें मूंदे रखीं, जबकि कस्टम विभाग ने भी उसे बगैर जाँच के छोड़ दिया है… कहा गया है कि गोवा के मंत्री को छोड़ने का आदेश “ऊपर से” आया था…। यानी लुटेरों(कलमाडी) और डाकुओं (ए राजा) के साथ-साथ, अब दिल्ली में “ड्रग स्मगलरों” की भी सरकार काम कर रही है…

देश का ध्यान जब अण्णा हजारे की तरफ़ लगा हुआ है, तब भी “सेकुलर गैंग” अपने घिनौने “हिन्दुओं को दबाओ, अल्पसंख्यकों को उठाओ” अभियान में लगी हुई है… जन-लोकपाल बिल यदि पास हो भी गया, तब भी वह सेकुलरों-वामपंथियों के इस “सतत जारी नीचकर्म” का क्या उखाड़ लेगा?

24 Comments

  1. Ashwani said,

    April 9, 2011 at 6:41 am

    >Thats what going on from long time period…media is SLUT.

  2. April 9, 2011 at 8:15 am

    >“मिशनरीज़ ऑफ़ चैरिटी” पर चिंता कैसी. चिंता उस पर है जिसका धन "चैरिटी" के लिए उपयोग में लाया जा सकता है. मृत्यु-भोज की बेशर्म तैयारी है.

  3. Hari said,

    April 9, 2011 at 8:27 am

    >Anna ji ko ye zimedari di ja sake ho acha ho

  4. Hari said,

    April 9, 2011 at 8:29 am

    >Ye zimedari bhi anna ji hazare ke kandho par dal de to desh ka bhala ho jaye baki ye neta log loot lenge

  5. April 9, 2011 at 9:51 am

    >दूध कि रखवाली के लिए बिल्ली, बिल्ले, कुत्ते और पिल्लै को भे जा गया है. मेरा भारत महान

  6. April 9, 2011 at 1:09 pm

    >सत्य सांई बाबा ने एक पुल भी बनवाया है जो सरकारें आजादी के कई साल बाद तक नहीं बनवा सकीं….. सिक-उलर देखिये क्या क्या कर बैठते हैं..

  7. K M Mishra said,

    April 9, 2011 at 1:33 pm

    >आशंका तो पहले भी थी लेकिन आपके लेख से भ्रष्ट कांग्रेसियों के एक और घिनौने चेहरे का पर्दाफाश हुआ.

  8. April 9, 2011 at 1:36 pm

    >बेहद शर्मनाक!

  9. ajeet said,

    April 9, 2011 at 3:19 pm

    >यह तो पूरा भारत वर्ष जानता है की जितने भी धार्मिक संगठन,, मंदिर ,अनाथालय, इत्यादि मानवीय एवं धार्मिक भावनाएं बेच कर अंधाधुन्द पैसा कमाते हैं, मुझे यह कहने मै बिलकुल संकोच नहीं हो रहा है की यह पूरी तरह गलत भी नहीं है, और इन संस्थाओं को अगर लम्बे समय तक टिके रहना है तो इन्हें परोपकारी चोला पहनने की भी आवश्यकता है, और चतुर संस्थाएं ऐसा करती भी हैं, इससे एक बहुत बड़े वर्ग को जाने अनजाने फायदा पहुच जाता है, अगर हम गोर करेंगे तो देखेंगे की हिन्दू धार्मिक संस्थाएं केवेल टिके रहने एवं उतरोत्तर प्रगती करने के लिए समाज कल्याण करती है इन संस्थाओं की धर्म परिवर्तन की दिशा में कोई रुची नहीं है, जबकि इसाई संस्थाओं का मूल उद्देश्य ही धर्म परिवर्तन होता है, मेरी इतनी लम्बी दलील का मात्र इतना उद्देश्य है की जब भी धार्मिक संस्थाओं की कमाई की बात होती है तब केवल हिन्दू संस्थाओं को ही निशाना बनाया जाता है तब हमारे ये बजरंग दल, विश्व हिन्दू परिषद्, भाजपा कुम्भ्करनी नींद क्यों लेने लगती है जबकि इनका आस्तित्व ही हिदू धर्मोंतथान पर टिका है, जब कांग्रेस चर्चों की सम्पति की तरफ आँख उठा कर नहीं देख सकती तो हिन्दू संथाओं की तरफ देखने की उनकी हिम्मत भी नहीं होनी चाहिए इसमें मैंने मुस्लिम संस्थाओं का ज़िक्र इसलिए नहीं किया क्योंकि तुष्टिकरण के चलते ना तो उनकी तरफ कोई आँख उठा कर देख सकता है ना उनका समाजसेवा से कोई लेना देना है.

  10. D.P.Chahar said,

    April 9, 2011 at 4:57 pm

    >श्रीमान सुरेश चिपलूनकर हिन्दुओ को राज करने में करने में मजा नही आता | उन्हें तो दूसरो की गुलामी करने में मजा आता है | पता नही आप जैसे सिरफिरे क्यों इन्हें डोज देते रहते हो | भारतवर्ष की जनसंख्या १२१ करोड़ हो गई है क्या आपके पास कोई फार्मुल्ला है जो ये बता दे, इसमे से कितने प्रतिसत मुस्लिम है और कितने प्रतिसत ईसाई | राजस्थान के चित्तोड़गढ़ के किले में काली माता के मंदीर का कोई विकास नही हुआ | अल्लाउद्दीन खिलजी के विरुध्द युध्द लड़ते हुए बलिदान होने वाले यहाँ के महाराणा रतन सिंह व जोहर कर अग्नि में स्वाहा होने वाली उनकी रानी पद्मिनी का कोई नाम लेवा नही है | लेकिन राजस्थान के कला व संस्कृति विभाग ने सरकारी धन से वहां "नो गज का पीर" पुजवा दिया है | गंगा-जमुनी संस्कृति का प्रचार तंत्र व अंध-विश्वासी हिन्दू भी वहां अपना शीश नावाने लगे है | हिन्दुओ की अक्ल तो जन्म से ही भांग खाई हुई है | गंगा हिन्दुओ की और जमुना भी हिन्दुओ की | इसमे अरब और इस्लाम कहा से पैदा हो गया है |

  11. anitakumar said,

    April 9, 2011 at 5:43 pm

    >Disgusting government

  12. April 9, 2011 at 8:49 pm

    >भाई, दोष इन हिन्दू धर्मादा संस्थानों और संतो का भी है. जब इन्हें 'सिर्फ हिन्दुओं' का ही धन दान के रूप में मिलता है, तो फालतू में उसे 'सर्वजन हिताय' में क्यों खर्च करके अस्पताल/स्कूल बनाते हैं? क्यों नहीं ये संत/संस्थान सिर्फ हिन्दू निर्धनों के कल्याण और धर्मान्तरित हिन्दुओं की घर वापसी में अपना धन-श्रम -संसाधन 'निवेश' करते हैं…? यह एक तकनीकी खामी है, जिससे सभी हिन्दू संत/संस्थान संक्रमित हैं. जब हिन्दुओं का धन है तो उसे केवल हिन्दू जन और हिन्दू धर्म के संवर्धन में ही खर्च करना चाहिये ना?? अपने उत्कर्ष में तो यह सेकुलर-वायरस से ग्रस्त होकर अपने ही लोगों की अनदेखी करते हैं. जिससे उनके खातिर लड़ने के लिए ना तो ढंग से अपने लोग तैयार होते हैं और ना ही पराये कभी उनके अपने होते हैं.मुम्बई की SIES कोलेज, सायन में अपने रिश्तेदार के प्रवेश के लिए आवेदन किया था. लेकिन उसे प्रवेष नहीं मिला. जबकि उससे कम प्रतिशत वाले एक मद्रासी मुस्लिम छात्र को उसमे प्रवेश मिला!! कारण: वह दक्षिणी भारतीयों का कोलेज था. यह शंकराचार्य चन्द्रशेखरेन्द्र सरस्वती की प्रेरणा और सहायता से बना एक नामी शिक्षण संस्थान है. और मैं चैलेन्ज के साथ कहा सकता हूँ कि इसमे सिर्फ और सिर्फ हिन्दू दक्षिण भारतीयों का ही योगदान है. किसी भी मुस्लिम या ईसाई दान दाता ने एक कौड़ी भी इसमे दान नहीं दी होगी, क्योंकि उनके 'अपने' संस्थान के अलावा वह किसी को भी दान नहीं देते. बावजूद इसके इन संस्थान में वह प्रवेश का पहला हक़ पाते हैं.दूसरा वाकया मेरे एक मित्र को यहाँ बुखार आने के कारण यहाँ के होली फेमिली स्पताल में ले जाया गया. वहां भर्ती करने से पहले उसका धर्म पूछा गया. और तीन दिन बाद उसका इलाज करके छूट्टी की गयी ८० हजार के बिल के साथ. क्योंकि वह ईसाई नहीं था. जबकि इसी अस्पताल में ईसाइयों का मुफ्त इलाज होता है. हैरत की बात ये है कि यह अस्पताल हिन्दुओं से भी भारी मात्रा में दान पाता है. कुछ साल पहले ही बोलीवुड अभिनेत्री रानी मुखर्जी (हिन्दू ) ने इस अस्पताल को उपकरण-यंत्र आदि खरीदने के लिए ५ लाख का दान दिया था…!! (शायद वह धन इस मिशनरी अस्पताल द्वारा ५०-१०० हिन्दुओं को ईसाई बनाने में 'निवेश' किया गया होगा)जब तक हिन्दुओ के परोपकार को हिन्दुओं तक ही केन्द्रित रखकर अपने ही वंचितों-दलितों-निर्धनों पर खर्च नहीं किया जाएगा. तब तक इन परोपकारी संस्थाओं को बचाने कोई आगे नहीं आयेगा. चाहे सिद्धी विनायक संस्थान हो या साईं बाबा शिरडी या फिर तिरुपति या सत्य साईं बाबा. और सेकुलर कोंग्रेसी -कम्युनिस्ट-पवार जैसे गिद्ध बैखौफ इन्हें नोचते रहेंगे.

  13. April 9, 2011 at 8:58 pm

    >कितने दुर्भाग्य की बात है की हिन्दुओ के लिए कुछ नहीं करने वाले संस्थाओं के पास हिन्दुओं के दान का ही अकूत धन है. जबकि हिन्दुओं के लिए लड़ने-मरने-खपने वाले RSS , VHP , और बजरंग दल को हिन्दुओं से कोई महत्वपूर्ण आर्थिक सहयोग नहीं मिलता.सारे मंदिरों और हिन्दू संस्थानों को RSS को सौंप देना चाहिए. क्योंकि सिर्फ वही इसका इमानदारी से प्रबंध कर सकता है. राष्ट्र और समाज हित में संघ को एक अखिल भारतीय मंदिर व्यवस्थापन समिती गठित करके मंदिरों का प्रबंध-संचालन अपने हाथ में लेना चाहिए. और प्राप्त धन को सिर्फ हिन्दू जन और धेम के संवर्धन में निवेश करना चाहिए.क्योंकि जब ईसाई और मुस्लिम ऐसा कर सकते हैं तो हिन्दू क्यों नहीं. बस हिन्दू जन और संतो को हुंकार भरनी होगी. फिर सरकार क्या उसकी सोनिया माई भी हिल जायेगी. (आधी तो अन्ना ने हिला ही दी है!!)आपको एक बात एयर बता दूं.. की पंवार, कलमाडी जैसे भ्रष्ट सेकुलर भले ही मंत्री समूह में पद नहीं पा सकते हैं, लेकिन किसी मंदिर में तरसती बनाकर वहां लूट जरूर कर सकते है. और दावे के साथ कहता हूँ इसके खिलाफ एक भी हिन्दू जंतर-मंतर पर धरने पे नहीं बैठेगा.

  14. April 10, 2011 at 4:24 am

    >जब तक जनता सड़क पर उतरकर कानून अपने हाथ में नहीं लेती है तब तक ऐसी लूट चलती रहेगी, और उस दिन हमारे विद्वन लोग कहेंगे कि यह सब गलत हो रहा है, अभी अपने मुँह पर और दिमाग पर ताला जड़कर बैठे हैं।

  15. Anonymous said,

    April 10, 2011 at 1:23 pm

    >कांग्रेस के इशारे पर मीडियाई गिद्वो ने बाबा रामदेव पर चौतरफा हमला बोल दिया है.जब कि बात बहुत मामूली थी.लेकिन रामदेव से खार खायी हुयी कांग्रेस ने इस मौके को चूका नही और अपने पालतू मीडियाई कुत्तो को इशारा किया.और कुत्तो ने रामदेव पर हमला बोल दिया और सुबह से शाम तक भौक रहे है.

  16. Anonymous said,

    April 10, 2011 at 1:30 pm

    >उधर अन्ना हजारे ने नरेन्द्र मोदी की तारीफ क्या की तो कांग्रेसी कुत्ते भड़क गये.और एक कांग्रेसी चमचे राशिद अल्वी की औकात तो देखो.स्टार न्यूज पर मोदी को राक्षस, नर पिशाच जाने क्या क्या बके जा रहा है.एक मुख्यमंत्री को नेशनल चैनल पर इस प्रकार गाली देने पर भाजपाईयो को चुप नही रहना चाहिये.इस राशिद अल्वी पर तुरंत मुकदमा ठोकना चाहिये.

  17. April 10, 2011 at 10:38 pm

    >ऐसे गिद्धों को भी मालूम है अगर गलती से भी किसी चर्च या वक्फ बोर्ड पर नज़र डाल दी तो ये खुद ही शिकार बन जाएंगे।

  18. P K Surya said,

    April 11, 2011 at 6:08 am

    >बेहद शर्मनाक!

  19. April 11, 2011 at 8:13 am

    >बेहद ही घटिया मानसिकता का परिचय ईसाई एवं मुस्लिम परस्त कांग्रेसी सरकारों ने हमेशा दिया है, दे रही हैं और आगे भी देंगी, जिसे जो करना हो कर ले। इन कांग्रेसी दुमछल्लों या नागनाथों को वोट रूपी दूध पिलाकर जहर उगलने के लिए खुला छोड़ने वाले कौन लोग हैं? हिन्दुओं की अधिकांश जनसंख्या ही, जो इनकी हरामीगिरी को भली प्रकार समझ नहीं पा रही है, या समझ भी रही है तो तुच्छ स्वार्थों के वशीभूत इन्हें पुष्पित-पल्लवित कर रही है।

  20. April 11, 2011 at 11:55 am

    >bilkul sahi kaha suresh bhai

  21. ajeet said,

    April 11, 2011 at 3:29 pm

    >भाइयों जो भी face -book का उपयोग कर रहें हो वे जम कर कपिल सिब्बल और भांड मीडिया को कोसे , मोदी के बारें में हम लोगों को एक शब्द भी नहीं सुनना चाहिए.

  22. anusoni said,

    April 12, 2011 at 6:52 pm

    >ये अन्ना हजारे भारत रत्न के लिए सब कर रहा हे i………….. वो वही कर रहा हे जो कांग्रस सर्कार चाहती हे ……….. कांग्रेस बाबा राम देव से बहुत परेशां हे ……इसलिए हमारी मीडिया को पैसा खिलाकर अन्ना को बाबा के सामने खड़ा कर रही हे …………. जागो……. राजनीत को समझो

  23. Vijender said,

    April 15, 2011 at 11:58 am

    >suresh ji ram-ramjeet Bhargav ji ka ye kathan kiजब तक हिन्दुओ के परोपकार को हिन्दुओं तक ही केन्द्रित रखकर अपने ही वंचितों-दलितों-निर्धनों पर खर्च नहीं किया जाएगा. तब तक इन परोपकारी संस्थाओं को बचाने कोई आगे नहीं आयेगा. चाहे सिद्धी विनायक संस्थान हो या साईं बाबा शिरडी या फिर तिरुपति या सत्य साईं बाबा. और सेकुलर कोंग्रेसी -कम्युनिस्ट-पवार जैसे गिद्ध बैखौफ इन्हें नोचते रहेंगे. bilkul sahmat hu lakin sikke ka dusra pahulu ye bhi he ki hindu (hum ) un mandiro ko to dan dena pasand karte he jo sarkar ke control me hote he aur sarkar hindu devalayo ka paisa huj per anudan deti he parantu un mandiro/sangathano ko kani kodi bhi dena pasand nahi karte jo hindu samaj ke bhele (hit) ka liye sangarsh kar rahe he chachy wo vanvashi kalyan ashram ho ya sewa bahti,dharma jagran,Vishw Hindu Parisad.dusra in secular giddo ko samapt karne ke liye jaruri he ki hum milkar banduk rupi matdan me vote rupi gooli bharkar in secular giddo ko samapt kar de vishwas kariye jis din humne esa kiya us din se ye gidd jan bachate firange

  24. April 28, 2011 at 2:28 pm

    >आक्…थू


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