>क्या आपने इरा नागरथ के गाने सुने हैं?

>

मेरी कोशिश रहती है कि महफिल में उन गायक- गायिकाओं के गाने आपको सुनाऊं जिन्हें उतनी शोहरत नहीं मिली जिनके वे हकदार थे। इस श्रेणी में आपको जो गाने सुनवा रहा हूँ उसमें पहले गाने में लता जी का साथ दिया है इरा नागरथ ने। आप अंदाजा लगा सकते हैं कि इरा नागरथ कौन थीं?…. इरा नागरथ; सुप्रसिद्ध संगीतकार रोशन की पत्नी थी। राजेश और राकेश रोशन की माँ तथा ऋत्विक रोशन की दादीजी।

इस गाने के बारे में कई मतभेद है कि यह गाना मीना कपूर ने गाया था, जो कि इस फिल्म के संगीतकार अनिल विश्वास की पत्नी थी। पर ध्यान से गाना सुनने पर आवाज मीना कपूर की नहीं लगती। कई लोगों का कहना है कि इरा नागरथ नहीं इरा मजूमदार ने यह गाना गाया है। शायद यूनुस भाई इस बारे में ज्यादा जानकारी दे सकें।

तब तक हम इन बातों में पड़ने की बजाय इस सुन्दर गाने का आनन्द लेते हैं।

इस गाने को लिखा है शम्स अज़ीमाबादी ने और संगीत … मेरे प्रिय संगीतकार अनिल विश्वास ने फिल्म का नाम है अनोखा प्यार जिसमें दिलीप कुमार, नलिनी जयवन्त, और नरगिस मुख्य भूमिका में थे और फिल्म के निर्देशक थे एम आई धर्मसे। धर्मसे ने दो और भी फिल्मों का निर्देशन किया था हमारी बात १९४३ और सौदागर १९५१

लता: ऐ दिल मेरी वफ़ा में कोई असर नहीं है

मैं मर रही हूँ जिन पर उनको खबर नहीं है

ऐ दिल मेरी वफ़ा में

मेरे ही दिल में रह कर मुझ पर नज़र नहीं है

ऐ दिल मेरी वफ़ा में …

इरा: दिल लेके अब कहाँ है दिल के जगाने वाले-२

आँखों से दूर क्यों है दिल में समाने वाले-२

कोई उन्हें बताएं मुझको खबर नहीं है

ऐ दिल मेरी वफ़ा में …

लता: उठते हैं दिल के शोले,आँखों में है अन्धेरा

मैं हो गई किसी की, कोई हुआ न मेरा-३

जो आग इधर लगी है, वो आग उधर नहीं है

ऐ दिल मेरी वफ़ा में …

इरा: अब याद में किसी की, मर मर के जी रही हूँ

आँसू जो आ रहें हैं, आँखों में पी रही हूँ

अब याद में किसी की, मर मर के जी रही हूँ

होती है दिल में और आँख कर रही है

ऐ दिल मेरी वफ़ा में …

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Ai Dil Meri Wafa M…

जब बात अनोखा प्यार फिल्म की चली हो तो लगे हाथ इस फिल्म के दो और सुन्दर गाने भी आपको सुनवा देता हूँ। और वह है जीवन सपना टूट गया– यह गाना जिया सरहदी ने लिखा है और इसे लता जी और मुकेश दोनो ने अलग अलग गाया है। दोनों गानों की पहली पंक्ति एक सी है – जीवन सपना टूट गया। बाकी का गाना पूरा अलग है। लीजिये दोनों गानों का आनन्द उठाईये। पहले लताजी का गाया हुआ।

http://res0.esnips.com/escentral/images/widgets/flash/note_player.swf
Jeevan Sapna Toot …

और मुकेशजी का गाया हुआ :

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क्या आपने इरा नागरथ के गाने सुने हैं?

मेरी कोशिश रहती है कि महफिल में उन गायक- गायिकाओं के गाने आपको सुनाऊं जिन्हें उतनी शोहरत नहीं मिली जिनके वे हकदार थे। इस श्रेणी में आपको जो गाने सुनवा रहा हूँ उसमें पहले गाने में लता जी का साथ दिया है इरा नागरथ ने। आप अंदाजा लगा सकते हैं कि इरा नागरथ कौन थीं?…. इरा नागरथ; सुप्रसिद्ध संगीतकार रोशन की पत्नी थी। राजेश और राकेश रोशन की माँ तथा ऋत्विक रोशन की दादीजी।

इस गाने के बारे में कई मतभेद है कि यह गाना मीना कपूर ने गाया था, जो कि इस फिल्म के संगीतकार अनिल विश्वास की पत्नी थी। पर ध्यान से गाना सुनने पर आवाज मीना कपूर की नहीं लगती। कई लोगों का कहना है कि इरा नागरथ नहीं इरा मजूमदार ने यह गाना गाया है। शायद यूनुस भाई इस बारे में ज्यादा जानकारी दे सकें।

तब तक हम इन बातों में पड़ने की बजाय इस सुन्दर गाने का आनन्द लेते हैं।

इस गाने को लिखा है शम्स अज़ीमाबादी ने और संगीत … मेरे प्रिय संगीतकार अनिल विश्वास ने फिल्म का नाम है अनोखा प्यार जिसमें दिलीप कुमार, नलिनी जयवन्त, और नरगिस मुख्य भूमिका में थे और फिल्म के निर्देशक थे एम आई धर्मसे। धर्मसे ने दो और भी फिल्मों का निर्देशन किया था हमारी बात १९४३ और सौदागर १९५१

लता: ऐ दिल मेरी वफ़ा में कोई असर नहीं है

मैं मर रही हूँ जिन पर उनको खबर नहीं है

ऐ दिल मेरी वफ़ा में

मेरे ही दिल में रह कर मुझ पर नज़र नहीं है

ऐ दिल मेरी वफ़ा में …

इरा: दिल लेके अब कहाँ है दिल के जगाने वाले-२

आँखों से दूर क्यों है दिल में समाने वाले-२

कोई उन्हें बताएं मुझको खबर नहीं है

ऐ दिल मेरी वफ़ा में …

लता: उठते हैं दिल के शोले,आँखों में है अन्धेरा

मैं हो गई किसी की, कोई हुआ न मेरा-३

जो आग इधर लगी है, वो आग उधर नहीं है

ऐ दिल मेरी वफ़ा में …

इरा: अब याद में किसी की, मर मर के जी रही हूँ

आँसू जो आ रहें हैं, आँखों में पी रही हूँ

अब याद में किसी की, मर मर के जी रही हूँ

होती है दिल में और आँख कर रही है

ऐ दिल मेरी वफ़ा में …

Ai Dil Meri Wafa M…

जब बात अनोखा प्यार फिल्म की चली हो तो लगे हाथ इस फिल्म के दो और सुन्दर गाने भी आपको सुनवा देता हूँ। और वह है जीवन सपना टूट गया– यह गाना जिया सरहदी ने लिखा है और इसे लता जी और मुकेश दोनो ने अलग अलग गाया है। दोनों गानों की पहली पंक्ति एक सी है – जीवन सपना टूट गया। बाकी का गाना पूरा अलग है। लीजिये दोनों गानों का आनन्द उठाईये। पहले लताजी का गाया हुआ।

Jeevan Sapna Toot …

और मुकेशजी का गाया हुआ :

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>कुछ और ज़माना कहता है, कुछ और है जिद मेरे दिल की

>कुछ वर्षों पहले रविवार की सुबह सुबह दूरदर्शन पर रंगोली देखने का मजा ही कुछ और था। धीरे धीरे केबल टी वी आया और दिन रात फिल्म फिल्म होने लगा तब से टी वी से उब हो गई। ऐसे मैं लगबग दस बारह साल पहले एक दिन मैं रंगोली देख रहा था एक गाना शुरु हुआ और थोड़ी ही देर में करंट चला गया। गाने का कुछ ही अंश मैं सुन पाया पर उस अंश ने इतना बैचेन कर दिया कि मैं पता लगाने लगा कि आखिर वह गाना था कौनसा? क्यों कि वह आवाज लता , आशा, गीता दत्त, शमशाद बेगम, मुबारक बेगम आदि किसी भी जानी मानी गायिका की नहीं थी।
अब ऐसे तो कैसे पता चलता फिर याद आया कि उस गाने में नादिराजी नाव में बैठी गा रही थी। बस इतना सा क्लू था और गाने की वह लाईन “या बात सुनुँ अपने दिल की” बस इन दो क्लू पर बहुत मेहनत करने पर मुझे वह गाना मिला और वह था मीना कपूर की आवाज में गाया हुआ गाना : कुछ और जमाना कहता है, कुछ और है जिद मेरे दिल की” मैने उस गाने को ओडियो कैसेट में रिकार्ड करवाया और उसे एक ही दिन में इतनी बार सुना कि बार रिवाईन्ड करने की वजह से कैसेट खराब हो गई ।
कुछ दिनों पहले नैट पर से उस गाने को फिर से मैने ढूंढ़ निकाला जिसे मैं आज आप सबके लिये पेश कर रहा हूँ।
मीना कपूर अनिल विश्वास की पत्नी थी। और उन्होने राजकपूर की गोपीनाथ में सारे गाने गाये थे। उनकी आवाज उस जमाने की स्थापित गायिकाऒं से कहीं उन्नीस नहीं थी पर जैसा होता आया है उगते सूरज को सलाम सब करते है। मीनाजी ने ज्यादा गाने नहीं गाये। जितने गाये वे सब अपने आप में लाजवाब हैं।
प्रस्तुत गाना फिल्म छोटी छोटी बातें 1965 का है फिल्म के निर्देशक और मुख्य अभिनेता स्वयं मोती लाल थे और फिल्म की नायिका थी नादिरा जो उन दिनों वेम्प की भूमिका में धीरे धीरे अपने पैर जमा रही थी।
नादिरा ने फिल्म अनुपमा में भी शर्मीली शर्मिला टैगोर की वाचाल सहेली का पॉजिटिव रोल किया था और बहुत ही लाजवाब अभिनय किया था।

खैर बातें बहुत कर ली अब गाना सुन लेते हैं। पिछले कुछ गाने कुछ ज्यादा ही पुराने हो गये थे पर मुझे विश्वास है कि आपको यह गाना जरूर पसन्द आयेगा क्यों कि यह बहुत ज्यादा पुराना नहीं है। और मीना कपुर की आवाज के तो क्या कहने ???

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MeenaKapoor-KuchhA…

कुछ और ज़माना कहता है,
कुछ और है जिद मेरे दिल की
मैं बात ज़माने की मानूँ,
या बात सुनूँ अपने दिल की
कुछ और ज़माना कहता है

दुनिया ने हमें बेरहमी से
ठुकरा जो दिया, अच्छा ही किया
नादान हम समझे बैठे थे
निभती है यहाँ दिल से दिल की
कुछ और ज़माना कहता है

इन्साफ़, मुहब्बत, सच्चाई
वो रहमो करम के दिखलावे
कुछ कहते ज़ुबाँ शरमाती है
पूछो न जलन मेरे दिल की
कुछ और ज़माना कहता है

गो बस्ती है इन्सानों की
इन्सान मगर ढूँढे न मिला
पत्थर के बुतों से क्या कीजे
फ़रियाद भला टूटे दिल की
कुछ और ज़माना कहता है

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कुछ और ज़माना कहता है, कुछ और है जिद मेरे दिल की

कुछ वर्षों पहले रविवार की सुबह सुबह दूरदर्शन पर रंगोली देखने का मजा ही कुछ और था। धीरे धीरे केबल टी वी आया और दिन रात फिल्म फिल्म होने लगा तब से टी वी से उब हो गई। ऐसे मैं लगबग दस बारह साल पहले एक दिन मैं रंगोली देख रहा था एक गाना शुरु हुआ और थोड़ी ही देर में करंट चला गया। गाने का कुछ ही अंश मैं सुन पाया पर उस अंश ने इतना बैचेन कर दिया कि मैं पता लगाने लगा कि आखिर वह गाना था कौनसा? क्यों कि वह आवाज लता , आशा, गीता दत्त, शमशाद बेगम, मुबारक बेगम आदि किसी भी जानी मानी गायिका की नहीं थी।
अब ऐसे तो कैसे पता चलता फिर याद आया कि उस गाने में नादिराजी नाव में बैठी गा रही थी। बस इतना सा क्लू था और गाने की वह लाईन “या बात सुनुँ अपने दिल की” बस इन दो क्लू पर बहुत मेहनत करने पर मुझे वह गाना मिला और वह था मीना कपूर की आवाज में गाया हुआ गाना : कुछ और जमाना कहता है, कुछ और है जिद मेरे दिल की” मैने उस गाने को ओडियो कैसेट में रिकार्ड करवाया और उसे एक ही दिन में इतनी बार सुना कि बार रिवाईन्ड करने की वजह से कैसेट खराब हो गई ।
कुछ दिनों पहले नैट पर से उस गाने को फिर से मैने ढूंढ़ निकाला जिसे मैं आज आप सबके लिये पेश कर रहा हूँ।
मीना कपूर अनिल विश्वास की पत्नी थी। और उन्होने राजकपूर की गोपीनाथ में सारे गाने गाये थे। उनकी आवाज उस जमाने की स्थापित गायिकाऒं से कहीं उन्नीस नहीं थी पर जैसा होता आया है उगते सूरज को सलाम सब करते है। मीनाजी ने ज्यादा गाने नहीं गाये। जितने गाये वे सब अपने आप में लाजवाब हैं।
प्रस्तुत गाना फिल्म छोटी छोटी बातें 1965 का है फिल्म के निर्देशक और मुख्य अभिनेता स्वयं मोती लाल थे और फिल्म की नायिका थी नादिरा जो उन दिनों वेम्प की भूमिका में धीरे धीरे अपने पैर जमा रही थी।
नादिरा ने फिल्म अनुपमा में भी शर्मीली शर्मिला टैगोर की वाचाल सहेली का पॉजिटिव रोल किया था और बहुत ही लाजवाब अभिनय किया था।

खैर बातें बहुत कर ली अब गाना सुन लेते हैं। पिछले कुछ गाने कुछ ज्यादा ही पुराने हो गये थे पर मुझे विश्वास है कि आपको यह गाना जरूर पसन्द आयेगा क्यों कि यह बहुत ज्यादा पुराना नहीं है। और मीना कपुर की आवाज के तो क्या कहने ???

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कुछ और ज़माना कहता है,
कुछ और है जिद मेरे दिल की
मैं बात ज़माने की मानूँ,
या बात सुनूँ अपने दिल की
कुछ और ज़माना कहता है

दुनिया ने हमें बेरहमी से
ठुकरा जो दिया, अच्छा ही किया
नादान हम समझे बैठे थे
निभती है यहाँ दिल से दिल की
कुछ और ज़माना कहता है

इन्साफ़, मुहब्बत, सच्चाई
वो रहमो करम के दिखलावे
कुछ कहते ज़ुबाँ शरमाती है
पूछो न जलन मेरे दिल की
कुछ और ज़माना कहता है

गो बस्ती है इन्सानों की
इन्सान मगर ढूँढे न मिला
पत्थर के बुतों से क्या कीजे
फ़रियाद भला टूटे दिल की
कुछ और ज़माना कहता है

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