अन्न्पूर्णाजी की फरमाईश पर सरस्वतीदेवी का दुर्लभ गाना

मैं तो बम्बई से दुल्हन लाया रे।

महफिल की पहली कड़ी में अन्नपूर्णा जी ने फरमाईश की थी कि उन्हें सरस्वती देवी का गाना सुनाया जाये। अन्नपूर्णाजी ने बताया था कि सरस्वती देवी पहली महिला संगीतकार थी। जी यह बात बिल्कुल सही है; परन्तु आपने जिस गाने का जिक्र किया ” चल चल रे नौजवान” यह फिल्म बंधन का है और इस फिल्म का संगीत सरस्वती देवी और राम चन्द्र पाल दोनों ने ही दिया था परन्तु चल चल रे का संगीत रामचन्द्र पाल ने दिया था।

सरस्वती देवी ने बहुत सी फिल्मों में संगीत दिया था, उनमें से प्रमुख है अछूत कन्या, झूला, बंधन , कंगन, नया संसार, जीवन नैया आदि प्रमुख है।

चल चल रे नौजवान तो जाना माना गाना है, लगभग यह गाना हम अक्सर रेडियो और टीवी पर सुनते हैं, पर मेरी कोशिश रहती है कि आपको दुर्लभ गाना सुनाऊं। आज इस कड़ी में आपके लिये प्रस्तुत कर रहा हूँ झूला फिल्म का गाना – मैं तो बम्बई से दुल्हन लाया रे ए बाबूजी। आशा है अन्न्पूर्णा जी को यह गाना पसन्द आयेगा।

अगली कड़ियों में सरस्वती देवी के एक ऐसा गाने को सुनाने का प्रयास करूंगा जिसके संगीत से प्रेरणा ( या नकल ? ) ले कर राहुल देव बर्मन ने पड़ोसन फिल्म के एक चतुर नार, कर के सिंगार… की रचना की थी, और किशोर दा के इस गाये इस गाने ने धूम मचा दी थी और आज तक यह गाना, हिन्दी के सबसे हिट गानों में से एक माना जाता है।

आज जो गाना मैं सुना रहा हूँ वह फिल्म झूला 1941 का है और इसे अशोक कुमार तथा रहमत बानो ने गाया है। सबसे पहले गीत के बोल और बाद में गाना। गाना बहुत पुराना है और उस जमाने में साऊंड प्रूफ रिकार्डिंग स्टूडियो नहीं होती थी, अत: हो सकता है गाने की क्वालिटी आपको उतनी अच्छी ना लगे, पर गाना आपको जरूर पसन्द आयेगा।

अ. कु. – मैं तो दिल्ली से दुलहन लाया रे ऐ बाबू जी -२
र. बा. – मेरा बम्बई से बालम आया रे ऐ बाबू जी -२
अ. कु.- मैं तो दिल्ली से दुलहन लाया रे ऐ बाबू जी

अ. कु. -बीवी मेरी नाज़ुक
र. बा. – सजन अलबेला -२
दोनों- नये ज़माने के मजनूं ओ लैला -२
सोने में सुहागा मिलाया रे ऐ बाबू जी-२

र. बा.- बाबू जी मैं हूँ सौदागर की छोरी -२
हाय सैंया ने कर ली मेरे धन की चोरी
अ. कु. – हें चोरी कैसी चोरी
र. बा.- इनने गुपचुप – इनने गुपचुप मेरा दिल चुराया रे ऐ बाबू जी -२
मेरा बम्बई से बालम आया रे ऐ बाबू जी

अ. कु. – बाबू जी इतनी अरज सुनो मोरी -२
अरे मैने कल ही तो दिल्ली में
इसके बाप का करजा चुकाया रे ऐ बाबू जी -२

र. बा.- मेरे बाप का नाम न लेना झूठों के सरदार
वरना ताना दूँगी गाली बीस हज़ार
देखो – देखो जी, देखो-देखो जी हज़ार
हमको छेड़ो ना बेकार
वरना मेरा भी गुस्सा सवाया रे ऐ बाबू जी -२

अ. कु. – प्यारी गुइयाँ आओ आओ सारी बातें भूल जाओ -२
र. बा. – बोलो मेरी क़सम,
अ. कु. – हाँ हाँ
र. बा. हाँ हाँ हाँ बोलों मेरी क़सम
अ. कु. हाँ हाँ तेरी क़सम
तेरे भाई की क़सम तेरी अम्मा की क़सम तेरे बाप की क़सम

दोनों- आज मौसम सलोना आया रे ऐ बाबू जी -२
आज मौसम सलोना – सलोना रे – हाँ सलोना रे
दिन सलोना रुत सलोनी मौसम सलोना रे
चमके चमाचम मेरे सपने -२ जैसे चांदी सोना रे
आज मौसम सलोना – सलोना रे
दिन सलोनी रुत सलोनी मौसम सलोना रे ..

मैं तो दिल्ली से दुल्हन लाया रे ए बाबूजी

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>अन्न्पूर्णाजी की फरमाईश पर सरस्वतीदेवी का दुर्लभ गाना

>मैं तो बम्बई से दुल्हन लाया रे।

महफिल की पहली कड़ी में अन्नपूर्णा जी ने फरमाईश की थी कि उन्हें सरस्वती देवी का गाना सुनाया जाये। अन्नपूर्णाजी ने बताया था कि सरस्वती देवी पहली महिला संगीतकार थी। जी यह बात बिल्कुल सही है; परन्तु आपने जिस गाने का जिक्र किया ” चल चल रे नौजवान” यह फिल्म बंधन का है और इस फिल्म का संगीत सरस्वती देवी और राम चन्द्र पाल दोनों ने ही दिया था परन्तु चल चल रे का संगीत रामचन्द्र पाल ने दिया था।

सरस्वती देवी ने बहुत सी फिल्मों में संगीत दिया था, उनमें से प्रमुख है अछूत कन्या, झूला, बंधन , कंगन, नया संसार, जीवन नैया आदि प्रमुख है।

चल चल रे नौजवान तो जाना माना गाना है, लगभग यह गाना हम अक्सर रेडियो और टीवी पर सुनते हैं, पर मेरी कोशिश रहती है कि आपको दुर्लभ गाना सुनाऊं। आज इस कड़ी में आपके लिये प्रस्तुत कर रहा हूँ झूला फिल्म का गाना – मैं तो बम्बई से दुल्हन लाया रे ए बाबूजी। आशा है अन्न्पूर्णा जी को यह गाना पसन्द आयेगा।

अगली कड़ियों में सरस्वती देवी के एक ऐसा गाने को सुनाने का प्रयास करूंगा जिसके संगीत से प्रेरणा ( या नकल ? ) ले कर राहुल देव बर्मन ने पड़ोसन फिल्म के एक चतुर नार, कर के सिंगार… की रचना की थी, और किशोर दा के इस गाये इस गाने ने धूम मचा दी थी और आज तक यह गाना, हिन्दी के सबसे हिट गानों में से एक माना जाता है।

आज जो गाना मैं सुना रहा हूँ वह फिल्म झूला 1941 का है और इसे अशोक कुमार तथा रहमत बानो ने गाया है। सबसे पहले गीत के बोल और बाद में गाना। गाना बहुत पुराना है और उस जमाने में साऊंड प्रूफ रिकार्डिंग स्टूडियो नहीं होती थी, अत: हो सकता है गाने की क्वालिटी आपको उतनी अच्छी ना लगे, पर गाना आपको जरूर पसन्द आयेगा।

अ. कु. – मैं तो दिल्ली से दुलहन लाया रे ऐ बाबू जी -२
र. बा. – मेरा बम्बई से बालम आया रे ऐ बाबू जी -२
अ. कु.- मैं तो दिल्ली से दुलहन लाया रे ऐ बाबू जी

अ. कु. -बीवी मेरी नाज़ुक
र. बा. – सजन अलबेला -२
दोनों- नये ज़माने के मजनूं ओ लैला -२
सोने में सुहागा मिलाया रे ऐ बाबू जी-२

र. बा.- बाबू जी मैं हूँ सौदागर की छोरी -२
हाय सैंया ने कर ली मेरे धन की चोरी
अ. कु. – हें चोरी कैसी चोरी
र. बा.- इनने गुपचुप – इनने गुपचुप मेरा दिल चुराया रे ऐ बाबू जी -२
मेरा बम्बई से बालम आया रे ऐ बाबू जी

अ. कु. – बाबू जी इतनी अरज सुनो मोरी -२
अरे मैने कल ही तो दिल्ली में
इसके बाप का करजा चुकाया रे ऐ बाबू जी -२

र. बा.- मेरे बाप का नाम न लेना झूठों के सरदार
वरना ताना दूँगी गाली बीस हज़ार
देखो – देखो जी, देखो-देखो जी हज़ार
हमको छेड़ो ना बेकार
वरना मेरा भी गुस्सा सवाया रे ऐ बाबू जी -२

अ. कु. – प्यारी गुइयाँ आओ आओ सारी बातें भूल जाओ -२
र. बा. – बोलो मेरी क़सम,
अ. कु. – हाँ हाँ
र. बा. हाँ हाँ हाँ बोलों मेरी क़सम
अ. कु. हाँ हाँ तेरी क़सम
तेरे भाई की क़सम तेरी अम्मा की क़सम तेरे बाप की क़सम

दोनों- आज मौसम सलोना आया रे ऐ बाबू जी -२
आज मौसम सलोना – सलोना रे – हाँ सलोना रे
दिन सलोना रुत सलोनी मौसम सलोना रे
चमके चमाचम मेरे सपने -२ जैसे चांदी सोना रे
आज मौसम सलोना – सलोना रे
दिन सलोनी रुत सलोनी मौसम सलोना रे ..

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मैं तो दिल्ली से दुल्हन लाया रे ए बाबूजी

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हिन्दी फ़िल्मों का पहला "रैप" गाना – रेलगाडी…

इसे हिन्दी का पहला “रैप” गाना कहा जा सकता है… यूँ तो अशोक कुमार ने कई फ़िल्मों में कई गाने गाये हैं, बल्कि जब फ़िल्मों में अशोक कुमार का प्रवेश हुआ था तब देविका रानी के साथ उन्होंने कुछ गीत गाये । उस जमाने में हीरो को ही खुद का प्लेबैक देना होता था, जो कि शूटिंग के समय ही रिकॉर्ड कर लिया जाता था, उस परम्परा में के.एल.सहगल, सोहराब मोदी, चन्द्रमोहन आदि कई कलाकार उच्च कोटि के रहे… परन्तु यह गीत जो कि फ़िल्म आशीर्वाद का है, सन १९६८ का है, जब प्लेबैक गायन कोई नई बात नहीं रह गई थी, लेकिन संगीतकार वसन्त देसाई ने इस गाने को अशोक कुमार से ही गवाना उचित समझा… यह गाना यूँ तो एक बालगीत है, लेकिन बेहद तेज गति से गाया गया है, और यह कमाल कर दिखाया है अशोक कुमार ने.. गीत के कई शब्द पकड़ में नहीं आते, लेकिन ध्यान से सुनने पर मजा आ जाता है । इतना जरूर कह सकता हूँ कि “खांडवा-मांडवा” शब्द जरूर अशोक कुमार ने अपने आग्रह पर जोडा़ होगा । पूरे गांगुली परिवार का खंडवा (मप्र) से हमेशा विशेष प्रेम रहा है, यह गीत लिखा है हरेन्द्रनाथ चट्टोपाध्याय ने, जिन्होंने इस फ़िल्म में एक महत्वपूर्ण रोल भी किया । हरेन्द्रनाथ चट्टोपाध्याय ने फ़िल्म बावर्ची में भी एक अविस्मरणीय रोल किया था और एक गीत में पूरा अन्त्तरा भी गाया था… बहरहाल… इस “रैप” गाने का मजा लीजिये (नीचे दिये गये विजेट में प्ले पर चूहे का चटका लगायें)

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हिन्दी फ़िल्मों का पहला "रैप" गाना – रेलगाडी…

इसे हिन्दी का पहला “रैप” गाना कहा जा सकता है… यूँ तो अशोक कुमार ने कई फ़िल्मों में कई गाने गाये हैं, बल्कि जब फ़िल्मों में अशोक कुमार का प्रवेश हुआ था तब देविका रानी के साथ उन्होंने कुछ गीत गाये । उस जमाने में हीरो को ही खुद का प्लेबैक देना होता था, जो कि शूटिंग के समय ही रिकॉर्ड कर लिया जाता था, उस परम्परा में के.एल.सहगल, सोहराब मोदी, चन्द्रमोहन आदि कई कलाकार उच्च कोटि के रहे… परन्तु यह गीत जो कि फ़िल्म आशीर्वाद का है, सन १९६८ का है, जब प्लेबैक गायन कोई नई बात नहीं रह गई थी, लेकिन संगीतकार वसन्त देसाई ने इस गाने को अशोक कुमार से ही गवाना उचित समझा… यह गाना यूँ तो एक बालगीत है, लेकिन बेहद तेज गति से गाया गया है, और यह कमाल कर दिखाया है अशोक कुमार ने.. गीत के कई शब्द पकड़ में नहीं आते, लेकिन ध्यान से सुनने पर मजा आ जाता है । इतना जरूर कह सकता हूँ कि “खांडवा-मांडवा” शब्द जरूर अशोक कुमार ने अपने आग्रह पर जोडा़ होगा । पूरे गांगुली परिवार का खंडवा (मप्र) से हमेशा विशेष प्रेम रहा है, यह गीत लिखा है हरेन्द्रनाथ चट्टोपाध्याय ने, जिन्होंने इस फ़िल्म में एक महत्वपूर्ण रोल भी किया । हरेन्द्रनाथ चट्टोपाध्याय ने फ़िल्म बावर्ची में भी एक अविस्मरणीय रोल किया था और एक गीत में पूरा अन्त्तरा भी गाया था… बहरहाल… इस “रैप” गाने का मजा लीजिये (नीचे दिये गये विजेट में प्ले पर चूहे का चटका लगायें)

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>हिन्दी फ़िल्मों का पहला "रैप" गाना – रेलगाडी…

>इसे हिन्दी का पहला “रैप” गाना कहा जा सकता है… यूँ तो अशोक कुमार ने कई फ़िल्मों में कई गाने गाये हैं, बल्कि जब फ़िल्मों में अशोक कुमार का प्रवेश हुआ था तब देविका रानी के साथ उन्होंने कुछ गीत गाये । उस जमाने में हीरो को ही खुद का प्लेबैक देना होता था, जो कि शूटिंग के समय ही रिकॉर्ड कर लिया जाता था, उस परम्परा में के.एल.सहगल, सोहराब मोदी, चन्द्रमोहन आदि कई कलाकार उच्च कोटि के रहे… परन्तु यह गीत जो कि फ़िल्म आशीर्वाद का है, सन १९६८ का है, जब प्लेबैक गायन कोई नई बात नहीं रह गई थी, लेकिन संगीतकार वसन्त देसाई ने इस गाने को अशोक कुमार से ही गवाना उचित समझा… यह गाना यूँ तो एक बालगीत है, लेकिन बेहद तेज गति से गाया गया है, और यह कमाल कर दिखाया है अशोक कुमार ने.. गीत के कई शब्द पकड़ में नहीं आते, लेकिन ध्यान से सुनने पर मजा आ जाता है । इतना जरूर कह सकता हूँ कि “खांडवा-मांडवा” शब्द जरूर अशोक कुमार ने अपने आग्रह पर जोडा़ होगा । पूरे गांगुली परिवार का खंडवा (मप्र) से हमेशा विशेष प्रेम रहा है, यह गीत लिखा है हरेन्द्रनाथ चट्टोपाध्याय ने, जिन्होंने इस फ़िल्म में एक महत्वपूर्ण रोल भी किया । हरेन्द्रनाथ चट्टोपाध्याय ने फ़िल्म बावर्ची में भी एक अविस्मरणीय रोल किया था और एक गीत में पूरा अन्त्तरा भी गाया था… बहरहाल… इस “रैप” गाने का मजा लीजिये (नीचे दिये गये विजेट में प्ले पर चूहे का चटका लगायें)

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