>तुलसी और स्वाइन-फ्लू —

>तुलसी जिसे अंग्रेजी में ‘होली-बेसिल‘, संस्कृत में मंजरी व कृष्णातुलसी -;मलयाली में त्रित्तावू ;तमिल-तेलगू में थुलसी;मराठी में तुलसी एवं वैज्ञानिक नाम “ओसीमम सेंकतम है ; यूँ तो हजारों गुणों से युक्त आयुर्वेदिक औषधि है ,परन्तु इसके दो मूल गुणशरीर के प्रतिरोधी तंत्र को सुद्रढ़ करना व एंटी-ऑक्सीडेंट गुण — हर प्रकार के फ्लू ,वाइरस,आदि से शरीर की रक्षा करता है ,अतः स्वाइन -फ्लू में सुबह-शाम दोनों समय तुलसी की पत्तियों को चाय के साथ उवाल कर पीने से रोकथाम व रोग में लाभ होता है
तुलसी पर ;आधुनिक चिकित्सा का अभी ध्यान गया है। इसे ‘इन्कम्परेब्ल वन ‘ ;द एलिक्सर ऑफ़ लाइफ ‘ ;क्वीन ऑफ़ हर्व्स ‘ ;भी कहा जाता है। तुलसी में यूजीनोल,बी -करियो फ़ाइलिन.,कुछ तर्पींस,केम्फींस ,कोलिस्त्रोल,व मिथाइल एस्तेर्स होते हैं।
तुलसी में सुगर -कंट्रोल करने,रक्त को पतला करने व फर्टीलिटीकम करने के गुण भी होते हैं।
—-सुवहों-शाम तुलसी के पत्तों की चाय पीयें ,स्वाइन -फ्लू से बचें ।

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