>एन डी तिवारी के बारे में क्या -क्या पढ़ा आपने ?

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२१ वीं सदी के पहले दशक में भारतीय राजनीति और नेताओं के चारित्रिक पतन का सुनहला अध्याय लिखा गया .बीते दस सालों में नेताओं ने दर्जनों ऐसे कारनामे कर दिखाए जो भविष्य में मिल के पत्थर साबित होंगे .पैसे लेकर सांसद में सवाल पूछने वाले ये नेता तो एक दिन सांसद में ही नोटों की गड्डी लहराने लगे .हैरतअंगेज तरीके से पहली बार एक निर्दलीय मुख्यमंत्री बना और ४हजार करोड़ डकार गया .राजनीतिक गलियारों के एक जाने-माने फिक्सर नेता अमेरिका जाकर अपनी दलाली ले आए और एक बड़ी डील को अपना समर्थन दे दिया . बात पैसों तक हीं नहीं रुकी . सेक्स स्कैंडल तो नेताओं का विशुद्ध पैशन रहा है . टुच्चे -मुच्चे नेताओं के कारनामे तो काफी सामने आये पर ०९ ने जाते-जाते पहली बार किसी बड़े नेता को सेक्स के बबंडर में फंसा दिया या ये भी कह सकते हैं वो खुद फंस गये .जी , हाँ बात नारायण दत्त तिवारी की हो रही है जिन पर अस्सी प्लस की उम्र में तीन कमसिन बालाओं के साथ हमबिस्तरी का आरोप है जबकि पहले से एक नौजवान उनसे बाप होने का सर्टिफिकेट मांग रहा है . इस मुद्दे पर जब हिंदी चिट्ठों को खंगाल रहा था तब कुछ सटीक व्यंगात्मक पोस्ट मिले जिन्हें नीचे पुनः प्रकाशित कर रहा हूँ :- 

पुरुष समाज के मार्गदर्शक – श्री नारायण दत्त तिवारी

तिवारीजी राज भवन से विदा हो गये लेकिन उनकी रंगीन मिज़ाजी ने दो तरह की प्रतिक्रियाओं को जन्म दिया । एक तो हमेशा की तरह उच्चपदासीन लोगों के जीवन व्यवहार के बारे में, लेकिन दूसरी उनकी इस उम्र मे भी सक्रिय सेक्स लाइफ़ के बारे में । आज जहां तीस के ऊपर होते ही पुरुषों मे चिंता होनी शुरू हो जाती है और वे थर्टीप्लस, रिवाइटल, अनेक प्रकार के तेल और वियाग्रा ढूंढते रहते हैं वहां तिवारीजी की सक्रियता ईर्ष्या के साथ साथ उम्मीद की किरण भी जगाती है ।
देखिये तिवारीजी से ईर्ष्या तो होगी ही आखिर जहां आम पुरुष परफ़ार्मेंस एंजाइटी से परेशान और खिन्न रहता है वहां ८६ साल की उम्र में यह कारनामा, वह भी एक साथ तीन तीन सुंदरियों के साथ ! गुरू जी अब तो तुम्ही इस भटके समाज के पथप्रदर्शक हो । इसलिए अब जब आपका राजनैतिक जीवन समाप्त हो गया है आप निराश न हों , आपने सारी उम्र देश और समाज की सेवा की है, अब आपके पास ईश्वर ने एक और सेवा का मौका दिया है । आप अपनी डाइट और पौरुष शक्ति पर एक किताब लिखो, इससे आने वाली पीढ़ियां लाभान्वित होगीं । नीम हकीमों के चक्कर मे कौन पड़ेगा जब ऐसा आदर्श अपने अनुभव का पिटारा खोलेगा । मैं इस बात की गारंटी देता हूं कि यह किताब आल टाइम बेस्ट सेलर होगी । 

 
विजय प्रकाश सिंह 

त्यागपत्र के अवसर पर अध्यक्षीय भाषण


वैसे कान्ग्रेस के प्रवक्ता के आज के वक्तव्य को नही भूलना चाहिये जिन्होने इस अवसर को राजनीतिक परंपरा का उच्च आदर्श बताया है कल जो घटनाचक्र घटा वह भी राजनीति का उच्च आदर्श था यह अवश्य है कि इस पर किसी पार्टी ने मुँह नही खोला
हमारे यहाँ आदि काल से राज प्रसादो मे कोई हवन व आध्यात्मविद्या का कार्यक्रम नही चलता रहा था इतिहास गवाह है कि राजभवनो मे रनिवास और भोगविलास की समानान्तर गौरवशाली परंपरा रही है मुझे इसमे तनिक भी सन्देह नही है कि यदि स्वास्थ्य ठीक ठाक रहता तो महोदय राजकाज के और उच्च प्रतिमान स्थापित करने मे सफ़ल होते
 arun prakash 

नारायण दत्त तिवारी का इस्तीफा

८६ की आयु में क्या कोई मर्द ऐसी मर्दानगी का प्रदर्शन कर सकता है?

एक नहीं, दो नहीं बल्कि तीन तीन महिलाओं के साथ बिस्तर पर लेटे लेटे रति-क्रीडा करने की क्षमता रख सकता है?
क्या ये महिलाएं उनकी पोतियाँ के बराबर नहीं होंगी?
भारतीय परंपरा को ध्यान में रखते हुए क्या हम तिवारी जी के बारे में ऐसा सोच भी सकते है?
मेरा मानना है कि इस उम्र पहुँचते पहुँचते हम इन प्रवृत्तियों को पीछे छोड़ जाते हैं

क्या यह कोई राजनैतिक षडयन्त्र  है?
जरा टाइमिंग पर ध्यान दीजिए।
आन्ध्र प्रदेश वैसे भी जल रहा है। तेलंगाना अभियान ने राज्य को चीर दिया है।
सरकार पर और दबाव डालने के लिए क्या यह किसी की साजिश है?
क्या कोइ राज भवन जैसी सुरक्षित स्थान में ही घुसकर ऐसा स्टिंग ऑपरेशन कर सकता है?
तिवारी जी एक जाने माने और अनुभवी राजनैतिक भी हैं।
क्या वे ऐसी मूर्खता वाली हरकत कर सकते हैं?
ऐसी हरकत को कैसे कोई गुप्त रख सकता है?
क्या राज भवन के कर्मचारी यह भाँप नहीं सकते की क्या हो रहा है?
यह कैसे संभव है कि कोई राज्य पाल के शयन कक्ष में घुसकर एक ऐसा कैमरा लगा दे और एंगल  भी ऐसा एडजस्ट कर दे कि सब कुछ रिकॉर्ड हो जाए?

नारायण दत्त तिवारी को बड़ी कम्पनी ने विज्ञापन के लिये अनुबंधित किया


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