जबलपुर का मौसम ब्लागिया मौसम

इन दिनों जबलपुर का मौसम ब्लागिया होता जा रहा है. जिन लोगो की सूची यहाँ है उसके अलावा भी ब्लॉगर जी होंगे मुझे जानकारी है कुछ ज्ञात कुछ विख्यात भी जिनके नाम इधर छपे हैं उनके लिए सादर आग्रह का ट्रक भेज दिया है की वे सभी लोग नियमित रूप से भले दस लाइन लिखे लिखें ज़रूर नहीं तो नूह की नौका डोल जाएगी .

· !! लाल और बवाल — जुगलबन…

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ब्लागिंग को ऐसो नसा भए सब लबरा मौन

पत्नी से पूँछें पति –हम आपके कौन ?’

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मेरी और से उसके सौन्दर्य की तारीफ़ ज़रूर का देना… !!

नूह की नौका के जात्री

माँ नरमदा की कृपा से

नौका जो यहाँ चलती है

जहाँ एक पहाड़ से दूसरे पहाड़ पे कूदते थे बन्दर

अब बेचारे शांत भाव से बरगी डेम का नज़ारा करतें है !!

हर तरफ से वज़नदार पोस्ट आ रहीं है,उधर अजय त्रिपाठी इधर विजय तिवारी और भाई डूबे जी क्या कहने….!विवेक रंजन श्रीवास्तव ,आचार्य संजीव वर्मा सलिल!!,

बवाल भाई जान मुझे लगता है ये घने नहीं बज रहे हैं , इनसे निकले सुरों में गाम्भीर्य का पुट है। यानी सबके सब जबलपुर का नाम ……….. खैर छोडिए ज़्यादा कहूँगा तो स्तीफा दे देने तक की नौबत आ जाती है ….. धुरंधर लिक्खाड़ में शुमार नूह की बनाई नाव पे बिराजे ब्लॉगर एन धुँआधार में नौकायन को उतारू हैं ………. अब तो आनंद ही आनंद हवे भाई।

ब्लॉग की चर्चा हो और भाई लाल साहब की चर्चा न करुँ हो इच्च नई सकता भाई वो तो नहीं कई और हैं जो उनके नाम से लाल-पीले….. हो जाएंगे तो अपुन न तो यथा के रहेंगे न ही तथा के ,,,,,,,,?

इधर अपने राम का गुसल खाने से निकलना हुआ था की बरसात आ गई ..बावरे फकीरा लांच.. से फारिग होते ही वायरल की ज़कड़न और फ़िर लोकसभा चुनाव फ़िर 23अप्रेल 2009,से मैजिक ट्रेन लाइफ लाइन के लिए एडवांस तैनाती यानी इतनी गंभीर पोस्ट लिखने का मौका कम ही मिलेगा जितनी गंभीर पोस्ट उपरोक्त मित्रों ने लिखी है . सभी को हार्दिक शुभकामनाएं

आप सोच रहे होंगे की इस पोस्ट में सुन्दरी का चित्र………?

सोचते रहिए अगर मिल जाए कहीं तो मेरी और से उसके सौन्दर्य की तारीफ़ ज़रूर का देना… सच कितनी सुंदर कल्पना है चित्र कार की कितना सुंदर देख लेते हैं चित्रकार लोग है न …?

बावरे-फकीरा एलबम से संगृहीत राशि 25 हज़ार सौंपी गई कलेक्टर श्री हरिरंजन राव को

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सवयस कल

जबलप

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969/A,Gate No.04,Sneh Nagar Road, Jabalpur (M.P.)

Phone: 09826143980 Email: savysachi@gmail.com

“बावरे-फकीरा से संगृहीत 25.000/- रूपए की राशि मैजिक-ट्रेन”लाइफ लाइन एक्सप्रेसके लिए सौंपी गयी “


सव्यसाची कला ग्रुप जबलपुर द्वारा बावरे फकीरा एलबम के ज़रिए एक सप्ताह से भी कम समय में जुटाई है धन राशि संस्था चाहती है कि “विश्व में जादुई रेल “कही जाने वाली

लाइफलाइनएक्सप्रेस के लिए आवश्यक आर्थिक सहायता देने हर वर्ग के नागरिक आगे आएं

*संस्था इस हेतु संकल्पित है कि आम नागरिक के मन में इस पुनीत कार्य हेतु भागीदारी की भावना जागृत हो

सव्यसाची-कला-ग्रुप जबलपुर द्वारा दिनांक 14 मार्च 2009 को स्थानीय मानस भवन जबलपुर में आयोजित पोलियो-ग्रस्त बच्चों की मदद हेतु साईं भक्ति एलबम बावरे-फकीरा का लोकार्पण किया गया था . जिसमें आभास जोशी एवं पोलियो-ग्रस्त गायक श्री ज़ाकिर हुसैन (वी ओ आई 02 फेम ) के अतिरिक्त स्थानीय कलाकार भी शामिल हुए थे . सव्यसाची कला ग्रुप ने एक सप्ताह से कम समय में “बावरे-फकीरा टीम” के संकल्प को पूर्ण करने के उद्येश्य से एलबम के प्रथम संस्करण के माध्यम से रूपए 25,000=00 की धन राशि संगृहीत की है माह अप्रैल 2009 में जबलपुर में आने वाली मैजिक-ट्रेन “लाइफ लाइन एक्सप्रेसके लिए 25.000/- रूपए की धनराशि श्री हरि रंजन राव कलेक्टर जबलपुर को भेंट की गयी.

इस अवसर पर प्रशासन की ओर से महेंद्र द्विवेदी जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला बाल विकास तथा संस्था की ओर से श्री के जी बिल्लोरे,के के बैनर्जी,मनोज सक्सेना,पप्पू शर्मा,डाक्टर विजय तिवारी “किसलय”,कर सलाहकार श्री दिलीप नेमा, राजेश पाठक “प्रवीण”,श्री निर्मल यादव, श्री नितिन अग्रवाल सहित संस्था के संस्थापक-अध्यक्ष श्री एस के बिल्लोरे सचिव श्री सुनील पारे उपस्थित रहे. सव्यसाची कला ग्रुप के संस्थापक अध्यक्ष श्री एस के बिल्लोरे ने बताया कि :”इस एलबम का निर्माण स्वर्गीया प्रमिला देवी की प्रेरणा से युवा संगीतकार श्रेयस जोशी,गायक आभास जोशी,संदीपा पारे(भोपाल) एवं गीतकार गिरीश बिल्लोरे मुकुल द्वारा किया गया था सभी ने नि:शुल्क उक्त कार्य को पूरे मनोयोग से पूर्ण किया है सव्यसाची-कला-ग्रुप जबलपुर इन कला साधकों का हार्दिक आभार मानते हुए नगर के उन सभी सम्मानित जनों का आभार मानता है जिनके कारण लक्ष्य की पूर्ती सहजता से हो सकी है |”

जिलाध्यक्ष श्री हरिरंजन राव ने डोनेशन स्वीकारते हुए कहा :-“लाइफ लाइन एक्सप्रेस के लिए यह पहला डोनेशन है जो सराहनीय है “

सुनील पारे

सचिव ,सव्यसाची कला ग्रुप जबलपुर

ठीकरा फोड़ समारोह से मिले समस्त ठीकरे मुझे स्वीकार्य : कहिये ॐ शान्ति…श्स्स्न्ती….!!

एक भाई साहब इर्दगिर्द भी ऐसा ही कुछ घट रहा है जो लोग उसे जानते भी नहीं बेचारे स्नेह वश उसके माथे पे टीका लगा के चले जातें हैं क्रम चला आगे तो ये तक हुआ कि जिनके बाल कड़े होने के कारण शेव करने में कठिनाई हो रही थी उनके बाल कार्यक्रम के इंतज़ाम में शामिल एक दुर्जन के सरकार्यक्रम के बाद के, ठीकरा फोड़ समारोह की चलरिपोर्ट पठन से खड़े हो जाते और सटसट शेव हो जाती . लंबे समय तक कुंठावश कसमें खाईं और खाई बनाई। जिसके बगैर सब कुछ चल सकता था । खैर “समय की प्रतीक्षा करना ज़रूरी थाकिंतु अब ज़रूरी हो गया था कि सब कुछ खुलासा कर दिया जाए सो वो आलेख के इसी किसी भाग में लिख दिया जाएगा । डरता भी हूँ की कहीं कोई बवाल न मच जाए .
किंतु एकतरफा कारर्वाई इस टीकाकरण समारोह के प्रायोजक भी अकबकाए…… अंत में पिछली कसमों पर इस उस का हवाला देकर बदली गयी जिसकी सबको उम्मीद थी
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  • नर्मदाकाधुँआधारस्वरुप:-सब को मालूम किंतु सब के लिए मनोरम नयनाभिराम दृश्य माँ ने हर और यहदृश्य नहीं रखा जहाँ ज़रूरी था वहाँ सरल मंथर भी रहीं माँ नर्मदा। नर्मदा जयंती की शुभकामनाओं के साथ

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खुलासा

· यूँ कि मैंने Vijay Tiwari “Kislay” एवं डूबेजीके आग्रह दिनांक 17-01-09 के कारण मीट की सहमति दी साथ ही भावातिरेक एवं ब्लागर्स मीट के लिए उत्साहित होकर आयोजन को सफल बनाने के लिए माहौल भी बनाया . समीर भाई की व्यस्तताओं के मद्दे नज़र ज़रूरी था कि उनके पिछले प्रवास पर संकल्पित मीट जैसा हश्र न हो । समय पर मैं पहुंचा किंतु कुछ मित्र अपनी वैयक्तिक परिस्थितियों के कारण न आ सके……! उनमें पंकज स्वामी,माधव सिंह यादव , डाक्टर विजय तिवारी आदि थे यह बात कोई अप्रत्याशित नहीं कोई भी व्यक्ति समय और सामयिक परिस्थिति के हाथों मजबूर हो सकता है । जो मित्र नहीं आए वे गैर जिम्मेदार नहीं थे उनकी परिस्थितियाँ थीं जो वे न आ सके. रहा आयोजन का सवाल बेहद उपयोगी था । रिपोर्ट न दे सका सरकारी व्यस्तताएं थीं . 10 से 5 बजे तक का काम नहीं है रात बिरात यदि कोई काम सौंपा जाता है निबाहना मेरा फ़र्ज़ है. जबलपुर के एक ब्लॉगर मित्र ने आयोजन की रिपोर्ट तैयार की और पोस्ट कर दी जो मीट की सफलता ही है भाई संजीव तिवारी उनकी यह तीसरी पोस्ट थी यानि मीट का असर अच्छा रहा . उधर बिटिया शैली एवं डूबे जी , सब उत्साहित रहे . एक मित्र डाक्टर प्रशांत कौरव ब्लागिंग का पाठ्यक्रम तैयार कराने का अनुरोध कर गए ताकि ब्लागिंग के लिए क्रेश कोर्स न्यूनतम दरों पर उनके कालेज जबलपुर-कालेज ऑफ़ मीडिया एंड जर्नलिज्म में चलाएं जा सकें . वे नि:शुल्क सेमीनार का भी आयोंजन करना चाहतें हैं ताकि हिन्दी-ब्लागिंग को बढावा मिले . मीट में यह भी तय हुआ कि हर ब्लॉगर कम-से-कम एक ब्लॉगर तैयार करे.
अब बताएं इसमें क्या किसी का सम्मान कम होता है सार्वजनिक कार्य करना न करना सबका अपना मामला है ।

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  • सार्वजनिक संकल्पों में कोई आए तो अच्छा न आए तो अच्छा । सभी अपना अपना व्यक्तित्व, क्षमता, दक्षता साथ लेकर चलते हैं । कोई अपनी रजाई में बैठ कर जाड़ों से बचता है तो कोई ठण्ड से बचने जोगिंग करता है। मेहनत करता है।
  • ग़लत दौनों नहीं तो भाई ग़लत कौन है…? – ग़लत हैं कुंठाएं,क्रोध,मतिभ्रम,…….
  • न तो मैं कोई संकल्प ले रहा हूँ न ही कोई कसम खा रहा हूँ कि मैं किसी समारोह में न जाउंगा जहाँ वे जातें हों जिनसे मैं असहमत हूँ ….. सच तो यह है कि मेरा शत्रु कष्ट में भी बुलाएगा तो ज़रूर जाउंगा । कोई (शत्रु-मित्र) कष्ट में होगा मुझे उसकी मदद करना ही होगा ।
  • मित्रो मुझे स्वीकारिए या नकारिये सुबह से शाम तक मुझे मेरे सभी काम पूरे करने हैं सो करूंगा सही बात सही वक्त पर करूंगा इसमें कोई गफलत होगी तो मैं जिम्मेदार हूँ कोई और नहीं …….. क्या हिन्दी ब्लॉगर की संख्या बढ़ने से किसी एक को लाभ होना है……….?
शायद राहत इन्दौरी साहब का ही शेर है:
ता उम्र जो अपना चेहरा पढ़ सका
अब हम उसके हाथों आइना नहीं देंगे

सब कुछ निपटने के बाद आप सब चाय पर सादर आमंत्रित हैं जो आए उनका भला जो न आएं उनका भी भला
अब मेरी और से कोई पोस्ट न आएगी जिसमे जबलपुरिया मीट के बाद के तीसरे विश्व युद्ध का आभास हो भाई सपको ब्लॉग:सलाम

जबलपुर का आभास पाकिस्तान में छा गया




संतुलित शिला

धुआं धार
बावरे फकीरा के गायक “आभास जोशी” के पाकिस्तान के संगीत प्रेमियों ने हाथों हाथ लिया , अलका याग्निक,कुमार शानू, और जबलपुर के लाड़ले आभास ने 19/04/08 को करांची में एक रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किया। आभास के पिता श्री रविन्द्र जोशी एवं उनकी वयोवृद्ध मातु श्री पुष्पा जोशी आभास की इस उड़ान को देख कर बेहद अभिभूत हैं।जबलपुर का यह नन्हाँ बच्चा देखते-देखते इतना बड़ा हो जाएगा किसी ने कभी सोचा न था । आभास को पसंद करने वाले लोगों की सूची बेहद लम्बी है।

आभास तुम् धुआं धार की तरह गाओ……..किंतु संतुलन मत खोना ……..जबलपुर से रिश्ते का संतुलन जबलपुरिया होने का एहसास है इसे मत भूलना ।

पुत्र लालसा का मिथक तोड़ते 105 परिवार

बेटियों के लिए नकारात्मक नज़रिया रखने वालों के लिए जबलपुर जिले के १०५ परिवारों से सीख लेना चाहिए जिनने केवल २ बेटियों के बाद परिवार कल्याण को अपना लिया ये जानते हुए
कि इसके बाद उनको पुत्र प्राप्ति न हों सकेगी ,


[“बाल विवाह मत करना माँ”अपनी माँ को रक्षा सूत्र बांधती एक बेटी ]
ये खुलासा तब हुआ जब मैं अपने सहयोगी स्टाफ के साथ म० प्र० सरकार की लाडली लक्ष्मी योजना की उपलब्धि के बाद आंकडों का विश्लेषण कर रहा था । 500 लाडली लक्ष्मीयों में से 89 वो हैं जिनकी बड़ी बहन ही है और भाई अब नहीं आ सकेगा , 6 बालिकाओं के तो न तो बहन होगी न ही भाई , यानी 21 प्रतिशत परिवारों ने पुत्र की लालसा के मिथक तोड़ दिए, क्यों न सकारात्मक सोच को उभार के हम कुरीतियों से निज़ात पाएं ….!!
अब शायद म० प्र० सरकार के इस प्रयास की सराहना सभी को करनी ही होगी ।

बच्चे

संगमरमर की चट्टानों, को शिल्पी मूर्ती में बदल देता , सोचता शायद यही बदलाव उसकी जिन्दगी में बदलाव लाएगा. किन्तु रात दारू की दूकान उसे गोया खींच लेती बिना किसी भुमिका के क़दम बढ जाते उसी दूकान पे जिसे आम तौर पे कलारी कहा जाता है. कुछ हो न हो सुरूर राजा सा एहसास दिला ही देता है. ये वो जगह है जहाँ उन दिनो स्कूल काम ही जाते थे यहाँ के बच्चे . अभी जाते हैं तो केवल मिड-डे-मील पाकर आपस आ जाते हैं . मास्टर जो पहले गुरु पद धारी होते थे जैसे आपके बी०के0 बाजपेई, मेरे निर्मल चंद जैन, मन्नू सिंह चौहान, आदि-आदि, अब शिक्षा कमी हो गए है . मुझे फतेचंद मास्साब , सुमन बहन जी सब ने खूब दुलारा , फटकारा और मारा भी , अब जब में किसी स्कूल में जाता हूँ जीप देखकर वे बेचारे बेवज़ह अपनी गलती छिपाने की कवायद मी जुट जाते. जी हाँ वे ही अब रोटी दाल का हिसाब बनाने और सरपंच सचिव की गुलामी करते सहज ही नज़र आएँगे आपको ,गाँव की सियासत यानी “मदारी” उनको बन्दर जैसा ही तो नचाती है. जी हाँ इन्ही कर्मियों के स्कूलों में दोपहर का भोजन खाकर पास धुआंधार में कूदा करतें हैं ये बच्चे, आज से २०-२५ बरस पहले इनकी आवाज़ होती थी :-“सा’ब चौअन्नी मैको” {साहब, चार आने फैंकिए} और सैलानी वैसा ही करते थे , बच्चे धुआंधार में छलाँग लगाते और १० मिनट से भे काम समय में वो सिक्का निकाल के ले आते थे , अब उनकी संतति यही कर रही है….!!एक बच्चे ने मुझे बताया-“पापा”[अब बाबू या पिता जी नही पापा कहते हैं] दारू पियत हैं,अम्मा मजूरी करत हैं,तुम क्या स्कूल नहीं जाते ….?जाते हैं सा’ब नदी में कूद के ५/- सिक्का कमाते हैं….? शाम को अम्मा को देत हैंकित्ता कमाते हो…?२५-५० रुपैया और का…? तभी पास खडा शिल्पी का दूसरा बेटा बोल पडा-“झूठ बोल रओ है दिप्पू जे पइसे कमा के तलब[गुठका] खात है..

"लाडली-लक्ष्मी"

हमको मालूम न था कि एक दम सोच में बदलाव आ जाएगा ,बेटियों के बारे में बदलनी ही चाहिए ,एक सरकार सोच बदल देने में सफल क्यों हुई ……??क्या सरकारें केवल शासक होतीं हैं ….?आपको ये सवाल आपको सता रहें हैं आप खोज़ना चाहते हैं”यकीनन “
तो आप “लाडली-लक्ष्मी” योजना पे गौर करिए भारत में मध्य-प्रदेश एक ऐसा प्रदेश है जन्हाँ मानव-विकास को भी महत्त्व पूर्ण माना है… अधोसंराचानात्मक विकास के साथ साथ जीवन-समंकों की सकारात्मक दिशा तय करने वाली मध्य-प्रदेश सरकार ने जो कार्यक्रम चलाए उनमे “लाडली-लक्ष्मी ” योजना सबसे चर्चित योजना है।
बेटियां अब समाज पर बोझ नहीं है अपितु लक्ष्मी सदृश्य है । प्रदेश सरकार ने बेटी के जन्म लेते ही उसे लखपति बनाने का मार्ग प्रशस्त किया है । सरकार द्वारा इसके लिये शुरू की गई ”लाडली लक्ष्मी” योजना से मेरी परियोजना क्षेत्र बाल-विकास परियोजना बरगी ने जबलपुर जिले की किसी भी ग्रामीण परियोजना की तुलना में सर्वाधिक प्रकरण 490 प्रकरण तैयार कर विभाग अध्यक्ष को भेज दिए हैं. जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास विभाग श्री महेन्द्र द्विवेदी के मार्ग दर्शन में मुझे मिली इस सफलता की चाबी कुमारी माया मिश्रा,संध्या नेमा,मीना बड़कुल,नीलिमा दुबे,जीवन श्रीवास्तव,जयंती अहिरवार, सरला कुशवाहा,सुषमा मांडे के हाथों में रही । प्रदेश सरकार अपनी ओर से लाडली लक्ष्मी योजना के तहत पंजीकृत हर बालिका को 5 वर्ष तक प्रति वर्ष 6 हजार रूपये अर्थात कुल 30 हजार रूपये के राष्ट्रीय बचत पत्र क्रय करके देगी । जब बालिका विवाह योग्य होगी तब उसे करीबन लाख रूपये से अधिक की राशि मिलेगी । इसके अलावा बालिका जब छठी कक्षा में पहुंचेगी तब उसे दो हजार रूपये, नवी कक्षा में प्रवेश पर साढ़े सात हजार रूपये तथा 11वीं एवं 12वीं कक्षा में अध्ययन के दौरान 200 रूपये प्रतिमाह के हिसाब से छात्रवृत्ति भी प्रदान की जायेगी ।