>गर्व से कहो हम हिंदी है

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सबसे सरल जानी पहचानी 
राष्ट्र भाषा वो हिंदी है 
लोकप्रिय हो रही विश्व में 
भारत की गरिमा हिंदी है 


हाहाकार क्यों हिंदी को लेकर 
धर्मो का मंथन हिंदी है 
पैदा हुई संस्कृत की कोख से
भाषा की बड़ी बहन हिंदी है


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>किस्मत

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स्वर्ग और नरक के बीच में लटक गया
क्या करू अब मै जमी पर अटक गया
निकला था मैं स्वर्ग जाने को मगर
जाने कैसे रास्ता मैं भटक गया

किए थे कई पुण्य पिछले जन्म मे मैंने
उनके फल से स्वर्ग का टिकट कट गया
जाने कौनसा पाप बीच मे गया
रस्ते मे ही मेरा भेजा सटक गया

स्वर्ग जाना था मुझे, पर ये क्या होगया
जाने कौन मुझे इस धरती पर पटक गया
शायद स्वर्ग किस्मत को मंज़ूर नही था
इसलिए मैं स्वर्ग और नरक के बीच लटक गया

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>तेरे बिन

>तनहा तनहा
रात गुजारी,
तनहा तनहा दिन

खयालो में ही
खोया रहता हूँ,
सारा सारा दिन

नहीं सह सकता
विरह की पीडा
हर पल छिन

अब तो आजा
हरजाई,
नहीं लगता दिल
तेरे बिन

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>चम्पतिया आ गयी, चम्पतिया!!!!

>छोटी की घटना बड़ी हो गयी
मरी हुई एक बुढ़िया खड़ी हो गयी
उसे देखकर एक बूढा डर गया
थोडी देर बाद वो मर गया

तभी एक चिल्लाया
चम्पतिया गयी, चम्पतिया
मैंने पूछा ये चम्पतिया कौन है
वो बोला चम्पतिया को नही जानते
ये वही है जो कभी बिल्ली तो
कभी कुत्ता बन जाती है
कभी भूत बनकर लोगो को डराती है
अंधेरे का फायदा उठाकर
किसी को भी मार जाती है

मैं बोला क्या करते हो
क्यो इस बात से डरते हो
चम्पतिया का पता नही
ये कोरी बकबास है
एक बूढा जो निपट गया था
ये तो उसकी लाश है

हिन्दी मैं मस्ती

>श्री कृष्ण जन्माष्टमी

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माचो गोकुल में है त्यौहार, भयो नन्द लाल
खुशिया छाई है अपरम्पार, भयो नन्द लाल

मात यशोदा का है दुलारा,
सबकी आँखों का है तारा
अपनों गोविन्द मदन गोपाल
……… भयो नन्द लाल

मात यशोदा झूम रही है
कृष्णा को वो चूम रही है
झूले पलना मदन गोपाल
……… भयो नन्द लाल

देख के उसकी भोली सुरतिया
बोल रही है सारी सखिया
कितनो सुंदर है मदन गोपाल
……… भयो नन्द लाल

-जय श्री कृष्णा


>अब तो फांसी देदो जनाब

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हां मैंने ही बरसाई मौत
चुप्पी तोड़ बोला कसाब
क़बूल कर लिया अपना गुनाह
अब तो फांसी देदो जनाब

बहुत खेल लिया मौत का खेल
अब नहीं रहना मुझको जेल
ऊपर जाकर देना है खुदा को
अपने कर्मो का हिसाब
अब तो फांसी देदो जनाब

अब मुझसे सहन नहीं होती
ये रोज रोज की रिमांड
बार बार इस पूछताछ से
हो गया है दिमाग ख़राब
अब तो फांसी देदो जनाब

जो कुछ था सब बता दिया है
अब क्या है मेरे पास

बहुत हो गई मुकदमा बाजी
बंद करो ये मेरी किताब
अब तो फांसी देदो जनाब

क़बूल कर लिया अपना गुनाह
अब तो फांसी देदो जनाब

– निर्भय जैन