>“तेरे भीगे बदन की खूशबू से ” मेहंदी हसन द्वारा गाया एक फ़िल्मी गीत

>इसमे कोई शक नही कि जनाब मेहंदी हसन के चाहने  वाले न सिर्फ़ पाकिस्तान के आवाम मे बल्कि अपने देश मे भी लाखॊ की तादाद मे हैं । लेकिन हमसे अधिकतर मेहंदी हसन जी को  गजल और गैर फ़िल्मी गानों के रुप जानते रहे हैं । लेकिन उनकी दूसरी शख्सियत पाकिस्तान के उर्दू सिनेमा के साथ भी जुडी  है । पाकिस्तानी अदाकार नदीम और शबनम पर फ़िल्माया गया यह रोंमानटिक गाना  “शराफ़त” से लिया गया है । यह फ़िल्म १९७० के आसपास पाकिस्तान मे रिलीज हुयी थी । पेश है मेहंदी हसन जी की दिलकश आवाज :
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तेरे भीगे बदन की खूशबू से 
लहरें भी हुयी मस्तानी सी
तेरी जुल्फ़ को छू कर आज हुई
खामोश हवा दीवानी सी
यह रुप का कुन्दन दहका हुआ
यह जिस्म का चंदन महका हुआ
इलजाम न देना फ़िर मुझको
हो जाये अगर नादानी सी
बिखरा हुआ काजल आंखॊ मे
तूफ़ान की हलचल सांसो मे
यह नर्म लबों की खामोशी
पलकों मे छुपी हैरानी सी
तेरे भीगे बदन की खूशूबू से
लहरे भी हुयी मस्तानी सी
तेरी जुल्फ़ को छू कर आज हुई
खामोश हवा दीवानी सी ।

“तेरे भीगे बदन की खूशबू से ” मेहंदी हसन द्वारा गाया एक फ़िल्मी गीत

इसमे कोई शक नही कि जनाब मेहंदी हसन के चाहने  वाले न सिर्फ़ पाकिस्तान के आवाम मे बल्कि अपने देश मे भी लाखॊ की तादाद मे हैं । लेकिन हमसे अधिकतर मेहंदी हसन जी को  गजल और गैर फ़िल्मी गानों के रुप जानते रहे हैं । लेकिन उनकी दूसरी शख्सियत पाकिस्तान के उर्दू सिनेमा के साथ भी जुडी  है । पाकिस्तानी अदाकार नदीम और शबनम पर फ़िल्माया गया यह रोंमानटिक गाना  “शराफ़त” से लिया गया है । यह फ़िल्म १९७० के आसपास पाकिस्तान मे रिलीज हुयी थी । पेश है मेहंदी हसन जी की दिलकश आवाज :

तेरे भीगे बदन की खूशबू से 
लहरें भी हुयी मस्तानी सी
तेरी जुल्फ़ को छू कर आज हुई
खामोश हवा दीवानी सी
यह रुप का कुन्दन दहका हुआ
यह जिस्म का चंदन महका हुआ
इलजाम न देना फ़िर मुझको
हो जाये अगर नादानी सी
बिखरा हुआ काजल आंखॊ मे
तूफ़ान की हलचल सांसो मे
यह नर्म लबों की खामोशी
पलकों मे छुपी हैरानी सी
तेरे भीगे बदन की खूशूबू से
लहरे भी हुयी मस्तानी सी
तेरी जुल्फ़ को छू कर आज हुई
खामोश हवा दीवानी सी ।

>पाकिस्तान के महान गायक सलीम रज़ा का एक मधुर गाना

>

बहुत दिनों से महफिल सजी नहीं थी तो  आज  मन हुआ कुछ अच्छा सा गाना नेट से ढूंढ कर लगाया जाये और  कई घंटो की मेहनत के बाद एक ऐसा जबरदस्त गाना मिला, जिसे मैने लगातार कम से कम 20 बार सुना। गाने को सुनने पर लगता है कि इस गाने को तलत महमूद ने गाया  है। यह गाना पाकिस्तान के गायक सलीम रज़ा ( Saleem Raza) ने फिल्म सीमा Seema  (1963)के लिये गाया है। मुझे उम्मीद है आपको भी यह बहुत पसन्द आयेगा। 

सलीम रज़ा के कुछ गानों का लिंक मैने नीचे दिया है उन्हें सुनने  और देखने पर आपको यही महसूस होगा कि ये सारे गाने तलत महमूद ने ही गाये हैं।

http://lifelogger.com/common/flash/flvplayer/flvplayer_basic.swf?file=http://mahaphil.lifelogger.com/media/audio0/562484_hqrapbtcis_conv.flv&autoStart=false

भूल जाओगे तुम करके वादा सनम
तुम्हे दिल दिया तो ये जाना
भूल जाओगे तुम करके वादा …
तुम्हे… भूल…

दर्द का है समां गम की तन्हाई है
जिस तरफ देखिये बेकसी छाई है-२
आज  हर साँस पर होके बेताब दिल
धड़कने लगा तो ये जाना
भूल जाओगे तुम

कैसे गुजरेगी शाम कैसे होगी सहर
अब ना वो मंजिले और ना वो हमसफर-२
देखते देखते रह गुजर ए गुजर
अंधेरा हुआ तो ये जाना
भूल जाओगे तुम

चांद को देखकर हो रहा हो है गुमां
फूल के रुख  पे छाई  हो जैसे खजां 
मुस्कुराता हुआ मेरी

उम्मीद का चमन लुट गया तो

ये जाना भूल जाओगे तुम

करके वादा सनम

इस गाने को सुनने के बाद मैने गूगल पर सलीम रज़ा के बारे में जानकारी  ढूंढी तो कुछ नहीं मिला, बहुत देर सर खपाने के बाद मुझे मेरी गलती पता चली मैं रज़ा  की स्पैलिंग Raja  लिख रहा था। बाद में Raza  लिख कर सर्च किया तो बहुत सारा खजाना मिल गया। उस खजाने के कुछ अनमोल नग्में आपके लिये पेश किये हैं। भूल जाओगे तुम ….. के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली पर बहुत सारे वीडियो मिले। उनमें से एक वीडीयो यहाँ प्रस्तुत हैं। यह  गज़ल फिल्म पायल की  झंकार   से है और इसका संगीत दिया है रशीद अत्तरे ने।

 

 

सलीम रज़ा के और बहुत सारे गाने (वीडियो) देखने के लिये आप यहाँ क्लिक करें

सलीम रज़ा के बारे में  ज्यादा जानकारी के लिये यहाँ और यहाँ तथा उनके गाये हुए सारे गानों  के बारे में जानने के लिये यहाँ क्लिक करें।

 इस गज़ल को हरिहरन ने अपने एल्बम सूकून में भी गाई है चलते चलते उसे भी सुन लीजिये यहाँ

     

 

चिट्ठाजगत Tag: गाने. संगीत

पाकिस्तान के महान गायक सलीम रज़ा का एक मधुर गाना

बहुत दिनों से महफिल सजी नहीं थी तो  आज  मन हुआ कुछ अच्छा सा गाना नेट से ढूंढ कर लगाया जाये और  कई घंटो की मेहनत के बाद एक ऐसा जबरदस्त गाना मिला, जिसे मैने लगातार कम से कम 20 बार सुना। गाने को सुनने पर लगता है कि इस गाने को तलत महमूद ने गाया  है। यह गाना पाकिस्तान के गायक सलीम रज़ा ( Saleem Raza) ने फिल्म सीमा Seema  (1963)के लिये गाया है। मुझे उम्मीद है आपको भी यह बहुत पसन्द आयेगा। 

सलीम रज़ा के कुछ गानों का लिंक मैने नीचे दिया है उन्हें सुनने  और देखने पर आपको यही महसूस होगा कि ये सारे गाने तलत महमूद ने ही गाये हैं।

भूल जाओगे तुम करके वादा सनम
तुम्हे दिल दिया तो ये जाना
भूल जाओगे तुम करके वादा …
तुम्हे… भूल…

दर्द का है समां गम की तन्हाई है
जिस तरफ देखिये बेकसी छाई है-२
आज  हर साँस पर होके बेताब दिल
धड़कने लगा तो ये जाना
भूल जाओगे तुम

कैसे गुजरेगी शाम कैसे होगी सहर
अब ना वो मंजिले और ना वो हमसफर-२
देखते देखते रह गुजर ए गुजर
अंधेरा हुआ तो ये जाना
भूल जाओगे तुम

चांद को देखकर हो रहा हो है गुमां
फूल के रुख  पे छाई  हो जैसे खजां 
मुस्कुराता हुआ मेरी

उम्मीद का चमन लुट गया तो

ये जाना भूल जाओगे तुम

करके वादा सनम

इस गाने को सुनने के बाद मैने गूगल पर सलीम रज़ा के बारे में जानकारी  ढूंढी तो कुछ नहीं मिला, बहुत देर सर खपाने के बाद मुझे मेरी गलती पता चली मैं रज़ा  की स्पैलिंग Raja  लिख रहा था। बाद में Raza  लिख कर सर्च किया तो बहुत सारा खजाना मिल गया। उस खजाने के कुछ अनमोल नग्में आपके लिये पेश किये हैं। भूल जाओगे तुम ….. के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली पर बहुत सारे वीडियो मिले। उनमें से एक वीडीयो यहाँ प्रस्तुत हैं। यह  गज़ल फिल्म पायल की  झंकार   से है और इसका संगीत दिया है रशीद अत्तरे ने।

 

हुस्न को चांद जवानी को बदल कहते हैं

 

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सलीम रज़ा के बारे में  ज्यादा जानकारी के लिये यहाँ और यहाँ तथा उनके गाये हुए सारे गानों  के बारे में जानने के लिये यहाँ क्लिक करें।

 इस गज़ल को हरिहरन ने अपने एल्बम सूकून में भी गाई है चलते चलते उसे भी सुन लीजिये यहाँ

     

 

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