>बी टी बेंगन व भारत —

>

बी टी बेंगन– विविध तर्क व व्याख्याएं —

एक तरफ हरित क्रान्ति के जनक जैव विशेषग्य बी टी बैंगन को हानिकारक कह रहे हैं तो दूसरी ओर किरण मजूमदार जैसे बिज़नेस बाले लोगभावनात्मक नहीं तर्क पूर्ण विवेचना हो के माध्यम से बायोटेक को झटका, रिसर्च प्रभावित होना, अवैज्ञानिक तौर तरीके के बहाने सकी पक्षदारी कर रहे हैं।
वस्तुतः बिजेनेस वाले एसे लोग न तो विज्ञान को समझते हैं न सामाजिकता को ,भावना को, वे सिर्फ धंधे को समझते हैं, येन केन प्रकारेण–व्यवसाय बस।परम्परागत या भारतीय विज्ञान को ये लोग अवैज्ञानिक मानते है –अंग्रेज़ी व विदेशी एवं कमाई के चश्मे के कारण |वस्तुतः विज्ञान सिर्फ तर्क पर चलता है, व धंधा बाज़ार पर। पर जहां मानव व जीव की बात आती है वहां भावना आधारित तर्क पर विवेचना होनी चाहिए । सिर्फ तर्क केवल कुतर्क होता है । विज्ञान या तर्क -मानव के लिए हैं नाकि मानव -विज्ञान या तर्क के लिए । अतः भावनात्मक तर्क पूर्ण विवेचना होनी चाहिए प्रत्येक बिंदु की । जैव विशेषग्य व कृषि विशेषज्ञों के अनुसार यह प्रतीत होता है कि —
—१.महंगे विदेशी बीज के लिए किसानों को अपना बहुत सा धन खर्च करना होगा , अपना देशी बीज व्यर्थ होजाएंगे। देशी प्रजातियाँ भी कालान्तर में नष्ट होकर हम पूर्णतः विदेशों पर आश्रित होंगे। जो वही स्थिति है जब ईस्ट इंडिया कंपनी के ब्रिटिशबुनाई की मशीनों के कारण भारतीय जुलाहों घरेलू उद्योग की हुई थी
—२। धन के लालच में एक ही फसल के बहु उत्पादन से अन्य फसलें चौपट होंगी , कीट-पक्षी-पशु जगत , वनस्पति जगत पर दुष्प्रभाव से ईकोलोजी प्रभावित होगी |
—३। और संवर्धन के लिए विदेशी तकनीक, विदेशी यंत्र, विदेशी मुद्रा के लिए देशी धन का उपयोग –>महंगाई??
हमें होशियार रहना होगा