स्वामी विवेकानंद जी कहते है –

“तुम्‍हारे भविष्‍य को निश्चित करने का यही समय है। इस लिये मै कहता हूँ, कि तभी इस भरी जवानी मे, नये जोश के जमाने मे ही काम करों। काम करने का यही समय है इसलिये अभी अपने भाग्‍य का निर्णय कर लो और काम में जुट जाओं क्‍योकिं जो फूल बिल्‍कुल ताजा है, जो हाथों से मसला भी नही गया और जिसे सूँघा ही नहीं गया, वही भगवान के चरणों मे चढ़ाया जाता है, उसे ही भगवान ग्रहण करते हैं। इसलिये आओं ! एक महान ध्‍येय कों अपनाएँ और उसके लिये अपना जीवन समर्पित कर दें “

स्त्री-पुरुष चरित्र विचार -स्वामी विवेकानन्द

“”तमाम पुरुषो के लिए अपनी स्त्री के सिवा अन्य सभी स्त्री माता के समान होनी चाहिए , जब मै अपने आस-पास नजर करता हु और जिसे आप “स्त्रीसन्मान” कहते है वो देखता हू तो उसे देखकर मेरा आत्मा घृणा से भर जाता है ! जब तक आप स्त्रीपुरूष मे भेद के प्रश्नको लक्ष मे लेना छोड देके सर्वसामान्य मानवता की भूमिका पर मिलना नहीं सिखते तब तक आपका स्त्री समाज सच्चा विकास नहीं करेगा , वहा तक वो खिलौने से विशेष कुछ नही ! लग्न-विच्छेद या तलाक का कारण ये ही सब है !!
आपका पुरुष-वर्ग नीचे झुक के कुर्सी देता है और दूसरे ही पल वो उसके रुप की प्रशंसा करने लगता है और कहता है,”ओह मैडम ,तुम्हारे नैन कितने सुन्दर है ! “-ऐसा करने का आपको क्या अधिकार है ? पुरूष इतना आगे बढने की धृष्ठता कैसे कर सकता है ? और आप स्त्री-वर्ग ऐसी छुट कैसे दे सकते है ?
ऐसी घटना मानवता के अधम पक्ष को उत्तेजना देता है , उद्दात आदर्शो को ये पोषता नहीं. “—–स्वामी विवेकानन्द