यह आतंकवाद के भूमंडलीय करण की लपटें हैं.जो तेल के कुओं के इर्दगिर्द से घूमतीं हुई जयपुर तलक आ गई …!

मेरा उत्तर:-वास्तव में मुम्बई भी इसका शिकार थी, विश्व में कोई भी धर्म आतंक वादी तरीके से स्थायित्व नहीं पा सका इस बात के कई उदाहरण हैं.
मेरे हिसाब से तिजारत और सियासत दौनों ही जिम्मेदार हैं……इसके लिए…………!
आप क्या सोचातें है…?

बुरा न मानो होली है

netaji :- देवदास
पुनीत ओमर : छुपा-रुस्तम,
Varsa Singh : अब क्या मिसाल
Tara Chandra Gupta : तारे चन्द्रमा की वजह से supt
maya :महा ठगनी हम जानी,
अरुण ,क्या बात है…
Kavi Kulwant : आए तो छाए,
राज कुमार : मन भाए मूड न लागे,
anoop : खरपतवार,
TARUN JOSHI “NARAD”: नकद,नारायण-नारायण,
मनोज ज़ालिम “प्रलयनाथ” : जालिम लोग ही प्रलय लातें हैं…?
हिन्दु चेतना : जगह न पाए,
तेज़ धार : कर रहा हूँ,
Manvendra Pratap Singh , नाम बडे दर्शन…?
Vishu :बारहवां खिलाड़ी
SWAMEV MRIGENDRATA : झंडा ऊँचा रहे तुम्हारा,
देवेन्‍द्र प्रताप सिंह : प्रेम प्रताप पतियाले वाला,
Suresh Chiplunkar : मुन्ना भाई के सर्किट,बोले तो….?
mahashakti : तेज़ हवाओं से बचने की कोशिश में .
Ruchi Singh : अरुचिकर ब्लॉगर,
मिहिरभोज : कभी किसी रोज़ ,
अभिषेक शर्मा : हया यक लखत आयी और शबाब….आहिस्ता….
रीतेश रंजन : कभी तो मिलेगी,
neeshoo : कोई जब तुम्हारा…तोड़ दे
Abhiraj : अभी,राज़ रहने दो
आशुतॊष : कलयुग की रामायण,
गिरीश बिल्लोरे ‘मुकुल’: जो कहना था कह दिया अब ऊपर वाले के हाथ मे है…..