मेरे देश को खिलौना मत बनाओ

तुम जो व्यवस्था पे हावी होकर मेरे देश को बिगाड़ने बरबाद करने पे तुले होमित्र इस देश को खिलौना मत बनाओ खेलो मत यहाँ खून की होलियाँ मेरे मुल्क की सियासी तासीर को मत बिगाड़ो आदमी हाड मांस से बना है , उसे सिर्फ़ वोट समझ के मरने मत छोडो , उसकी कराह को सत्ता तक जाने वाली पगडंडी से मत जोडो
मित्र ये देश तुम्हारी वजह से नहीं मज़दूरों,सिपाहियों,किसानों,युवाओं का देश है देश जो मुंबई है जिसे कई बार तुमआमची मुंबईकह कर देश को दुत्कारतें हो । तुम सभी रुको देखो मेरा देश तुम्हारा नहीं उन वीर बांकुरों का कृतज्ञ है जो मुंबई को बचाने शहीद हुए । तुमने कहा था न कि यह तुम्हारी मुंबई है ….मुर्खता पूर्ण विचार था जिसे सच मान रहे थे सच कहूं ये मुंबई,ही नही समूचा देश समूचे देश का है । एक आम आदमी – क्या सोचता है शहीदों तुम्हें आतंकियों की गोली ने नहीं मारा , । सच के करीब जा रहा है मेरा देश मित्र सुनो उनकी बोलती आंखों की आवाज़ को ,