>कुछ दर्द कलेजे से लगाने के लिये है

>अब ये भी नहीं ठीक कि हर दर्द मिटा दें
कुछ दर्द कलेजे से लगने के लिये है
स्व. मुकेश जी को पुण्य तिथी पर हार्दिक श्रद्धान्जली। आज मैं आपको मुकेशजी की गाई एक नायाब गैर फिल्मी गज़ल सुना रहा हूँ। इस गज़ल को लिखा है जानिंसार अख्तर ने और संगीत दिया है खैयाम साहब ने।
आईये सुनते हैं।
http://www.divshare.com/flash/playlist?myId=12388612-c94

अशआर मेरे यूं तो ज़माने के लिये है
कुछ शेर फ़कत उनको सुनने के लिये है

अब ये भी नहीं ठीक कि हर दर्द मिटा दें
कुछ दर्द कलेजे से लगाने के लिये है

आँखो में जो भर लोगे तो काँटो से चुभेंगे
ये ख्वाब तो पलकों पे सजाने के लिये है

देखुं जो तेरे हाथों को लगता है तेरे हाथ
मन्दिर में फ़कत दीप जलने के लिये है

सोचो तो बड़ी चीज़ है तहज़ीब बदन की
वर्ना तो बदन आग बुझाने के लिये है

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लाई किस्मत आँसुओं का जाम क्यूं..?

लुट गया दिन रात का आराम क्यूं- ए मुहब्बत  तेरा ये अंजाम क्यूं

महफिल में आज सुनिये 1949 में बनी  फिल्म लेख का एक  मधुर और बहुत कम  सुना जाने वाला गीत, लुट गया..। इस फिल्म के गायक है स्व. मुकेश और फिल्म के गीतकार- संगीतकार क्रमश: कमर जलालाबादी और कृष्ण दयाल हैं। फिल्म के मुख्य कलाकार हैं मोतीलाल, सुरैया, सितारादेवी और कुक्कू।

 

 

लुट गया दिन रात का आराम क्यूं
ऐ मुहब्बत तेरा ये अंजाम क्यूं

हमने मांगी थी मुहब्बत की शराब
लाई किस्मत आंसुओं का जाम क्यूं..लुट गया

दिल समझता है के तू है बेवफ़ा
आ रहा है लब पे तेरा नाम क्यूं..

लुट गया दिन रात का आराम क्यूं
ऐ मुहब्बत तेरा ये अंजाम क्यूं

 

>लाई किस्मत आँसुओं का जाम क्यूं..?

>

लुट गया दिन रात का आराम क्यूं- ए मुहब्बत  तेरा ये अंजाम क्यूं

महफिल में आज सुनिये 1949 में बनी  फिल्म लेख का एक  मधुर और बहुत कम  सुना जाने वाला गीत, लुट गया..। इस फिल्म के गायक है स्व. मुकेश और फिल्म के गीतकार- संगीतकार क्रमश: कमर जलालाबादी और कृष्ण दयाल हैं। फिल्म के मुख्य कलाकार हैं मोतीलाल, सुरैया, सितारादेवी और कुक्कू।

 

http://lifelogger.com/common/flash/flvplayer/flvplayer_basic.swf?file=http://mahaphil.lifelogger.com/media/audio0/733191_adwdwvzqtm_conv.flv&autoStart=false

 

लुट गया दिन रात का आराम क्यूं
ऐ मुहब्बत तेरा ये अंजाम क्यूं

हमने मांगी थी मुहब्बत की शराब
लाई किस्मत आंसुओं का जाम क्यूं..लुट गया

दिल समझता है के तू है बेवफ़ा
आ रहा है लब पे तेरा नाम क्यूं..

लुट गया दिन रात का आराम क्यूं
ऐ मुहब्बत तेरा ये अंजाम क्यूं

 

क्या आपने इरा नागरथ के गाने सुने हैं?

मेरी कोशिश रहती है कि महफिल में उन गायक- गायिकाओं के गाने आपको सुनाऊं जिन्हें उतनी शोहरत नहीं मिली जिनके वे हकदार थे। इस श्रेणी में आपको जो गाने सुनवा रहा हूँ उसमें पहले गाने में लता जी का साथ दिया है इरा नागरथ ने। आप अंदाजा लगा सकते हैं कि इरा नागरथ कौन थीं?…. इरा नागरथ; सुप्रसिद्ध संगीतकार रोशन की पत्नी थी। राजेश और राकेश रोशन की माँ तथा ऋत्विक रोशन की दादीजी।

इस गाने के बारे में कई मतभेद है कि यह गाना मीना कपूर ने गाया था, जो कि इस फिल्म के संगीतकार अनिल विश्वास की पत्नी थी। पर ध्यान से गाना सुनने पर आवाज मीना कपूर की नहीं लगती। कई लोगों का कहना है कि इरा नागरथ नहीं इरा मजूमदार ने यह गाना गाया है। शायद यूनुस भाई इस बारे में ज्यादा जानकारी दे सकें।

तब तक हम इन बातों में पड़ने की बजाय इस सुन्दर गाने का आनन्द लेते हैं।

इस गाने को लिखा है शम्स अज़ीमाबादी ने और संगीत … मेरे प्रिय संगीतकार अनिल विश्वास ने फिल्म का नाम है अनोखा प्यार जिसमें दिलीप कुमार, नलिनी जयवन्त, और नरगिस मुख्य भूमिका में थे और फिल्म के निर्देशक थे एम आई धर्मसे। धर्मसे ने दो और भी फिल्मों का निर्देशन किया था हमारी बात १९४३ और सौदागर १९५१

लता: ऐ दिल मेरी वफ़ा में कोई असर नहीं है

मैं मर रही हूँ जिन पर उनको खबर नहीं है

ऐ दिल मेरी वफ़ा में

मेरे ही दिल में रह कर मुझ पर नज़र नहीं है

ऐ दिल मेरी वफ़ा में …

इरा: दिल लेके अब कहाँ है दिल के जगाने वाले-२

आँखों से दूर क्यों है दिल में समाने वाले-२

कोई उन्हें बताएं मुझको खबर नहीं है

ऐ दिल मेरी वफ़ा में …

लता: उठते हैं दिल के शोले,आँखों में है अन्धेरा

मैं हो गई किसी की, कोई हुआ न मेरा-३

जो आग इधर लगी है, वो आग उधर नहीं है

ऐ दिल मेरी वफ़ा में …

इरा: अब याद में किसी की, मर मर के जी रही हूँ

आँसू जो आ रहें हैं, आँखों में पी रही हूँ

अब याद में किसी की, मर मर के जी रही हूँ

होती है दिल में और आँख कर रही है

ऐ दिल मेरी वफ़ा में …

Ai Dil Meri Wafa M…

जब बात अनोखा प्यार फिल्म की चली हो तो लगे हाथ इस फिल्म के दो और सुन्दर गाने भी आपको सुनवा देता हूँ। और वह है जीवन सपना टूट गया– यह गाना जिया सरहदी ने लिखा है और इसे लता जी और मुकेश दोनो ने अलग अलग गाया है। दोनों गानों की पहली पंक्ति एक सी है – जीवन सपना टूट गया। बाकी का गाना पूरा अलग है। लीजिये दोनों गानों का आनन्द उठाईये। पहले लताजी का गाया हुआ।

Jeevan Sapna Toot …

और मुकेशजी का गाया हुआ :

JeevanSapnaTootGay…

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>क्या आपने इरा नागरथ के गाने सुने हैं?

>

मेरी कोशिश रहती है कि महफिल में उन गायक- गायिकाओं के गाने आपको सुनाऊं जिन्हें उतनी शोहरत नहीं मिली जिनके वे हकदार थे। इस श्रेणी में आपको जो गाने सुनवा रहा हूँ उसमें पहले गाने में लता जी का साथ दिया है इरा नागरथ ने। आप अंदाजा लगा सकते हैं कि इरा नागरथ कौन थीं?…. इरा नागरथ; सुप्रसिद्ध संगीतकार रोशन की पत्नी थी। राजेश और राकेश रोशन की माँ तथा ऋत्विक रोशन की दादीजी।

इस गाने के बारे में कई मतभेद है कि यह गाना मीना कपूर ने गाया था, जो कि इस फिल्म के संगीतकार अनिल विश्वास की पत्नी थी। पर ध्यान से गाना सुनने पर आवाज मीना कपूर की नहीं लगती। कई लोगों का कहना है कि इरा नागरथ नहीं इरा मजूमदार ने यह गाना गाया है। शायद यूनुस भाई इस बारे में ज्यादा जानकारी दे सकें।

तब तक हम इन बातों में पड़ने की बजाय इस सुन्दर गाने का आनन्द लेते हैं।

इस गाने को लिखा है शम्स अज़ीमाबादी ने और संगीत … मेरे प्रिय संगीतकार अनिल विश्वास ने फिल्म का नाम है अनोखा प्यार जिसमें दिलीप कुमार, नलिनी जयवन्त, और नरगिस मुख्य भूमिका में थे और फिल्म के निर्देशक थे एम आई धर्मसे। धर्मसे ने दो और भी फिल्मों का निर्देशन किया था हमारी बात १९४३ और सौदागर १९५१

लता: ऐ दिल मेरी वफ़ा में कोई असर नहीं है

मैं मर रही हूँ जिन पर उनको खबर नहीं है

ऐ दिल मेरी वफ़ा में

मेरे ही दिल में रह कर मुझ पर नज़र नहीं है

ऐ दिल मेरी वफ़ा में …

इरा: दिल लेके अब कहाँ है दिल के जगाने वाले-२

आँखों से दूर क्यों है दिल में समाने वाले-२

कोई उन्हें बताएं मुझको खबर नहीं है

ऐ दिल मेरी वफ़ा में …

लता: उठते हैं दिल के शोले,आँखों में है अन्धेरा

मैं हो गई किसी की, कोई हुआ न मेरा-३

जो आग इधर लगी है, वो आग उधर नहीं है

ऐ दिल मेरी वफ़ा में …

इरा: अब याद में किसी की, मर मर के जी रही हूँ

आँसू जो आ रहें हैं, आँखों में पी रही हूँ

अब याद में किसी की, मर मर के जी रही हूँ

होती है दिल में और आँख कर रही है

ऐ दिल मेरी वफ़ा में …

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Ai Dil Meri Wafa M…

जब बात अनोखा प्यार फिल्म की चली हो तो लगे हाथ इस फिल्म के दो और सुन्दर गाने भी आपको सुनवा देता हूँ। और वह है जीवन सपना टूट गया– यह गाना जिया सरहदी ने लिखा है और इसे लता जी और मुकेश दोनो ने अलग अलग गाया है। दोनों गानों की पहली पंक्ति एक सी है – जीवन सपना टूट गया। बाकी का गाना पूरा अलग है। लीजिये दोनों गानों का आनन्द उठाईये। पहले लताजी का गाया हुआ।

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और मुकेशजी का गाया हुआ :

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