फ़ूल ही फ़ूल खिल उठे मेरे पैमाने में: मेहदी हसन की आवाज और राग गौड़ मल्हार

दोस्तों सावन का महीना चालू हो गया है, भले ही जम के पानी ना बरस रहा हो लेकिन हल्की फुहारें ही सही; तन मन को शीतलता तो दे रही है, ऐसे में अगर राग मल्हार सुना जाये और वो भी शहंशाह ए गज़ल मेहदी हसन साहब के स्वर में तो कितना आनन्द आयेगा?

हसन साहब बीमार हैं, आपने उनकी कई गज़लें सुखनसाज़ पर सुनी ही है। आईये आज आपको हसन साहब की आवाज में और राग मल्हार (राग गौड़ मल्हार) में ढली एक छोटी सी नज़्म सुनाते हैं। आप आनन्द लीजिये और हसन साहब की सलामती के लिये दुआ कीजिये।

फ़ूल ही फ़ूल खिल उठे मेरे पैमाने में
आप क्या आये बहार आ गई मैखाने में
आप कुछ यूं मेरे आईना-ए-दिल में आये
जिस तरह चांद उतर आया हो पैमाने में

(यह शेर प्रस्तुत गज़ल में नहीं है, सुनने को भले ना मिले पढ़ने का आनन्द तो उठाया ही जा सकता है।

आपके नाम से ताबिन्दा है उनवा-ए- हयात
वरना कुछ बात नहीं थी मेरे अफ़साने में

Phool hi phool khi…

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>फ़ूल ही फ़ूल खिल उठे मेरे पैमाने में: मेहदी हसन की आवाज और राग गौड़ मल्हार

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दोस्तों सावन का महीना चालू हो गया है, भले ही जम के पानी ना बरस रहा हो लेकिन हल्की फुहारें ही सही; तन मन को शीतलता तो दे रही है, ऐसे में अगर राग मल्हार सुना जाये और वो भी शहंशाह ए गज़ल मेहदी हसन साहब के स्वर में तो कितना आनन्द आयेगा?

हसन साहब बीमार हैं, आपने उनकी कई गज़लें सुखनसाज़ पर सुनी ही है। आईये आज आपको हसन साहब की आवाज में और राग मल्हार (राग गौड़ मल्हार) में ढली एक छोटी सी नज़्म सुनाते हैं। आप आनन्द लीजिये और हसन साहब की सलामती के लिये दुआ कीजिये।

फ़ूल ही फ़ूल खिल उठे मेरे पैमाने में
आप क्या आये बहार आ गई मैखाने में
आप कुछ यूं मेरे आईना-ए-दिल में आये
जिस तरह चांद उतर आया हो पैमाने में

(यह शेर प्रस्तुत गज़ल में नहीं है, सुनने को भले ना मिले पढ़ने का आनन्द तो उठाया ही जा सकता है।

आपके नाम से ताबिन्दा है उनवा-ए- हयात
वरना कुछ बात नहीं थी मेरे अफ़साने में

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“तेरे भीगे बदन की खूशबू से ” मेहंदी हसन द्वारा गाया एक फ़िल्मी गीत

इसमे कोई शक नही कि जनाब मेहंदी हसन के चाहने  वाले न सिर्फ़ पाकिस्तान के आवाम मे बल्कि अपने देश मे भी लाखॊ की तादाद मे हैं । लेकिन हमसे अधिकतर मेहंदी हसन जी को  गजल और गैर फ़िल्मी गानों के रुप जानते रहे हैं । लेकिन उनकी दूसरी शख्सियत पाकिस्तान के उर्दू सिनेमा के साथ भी जुडी  है । पाकिस्तानी अदाकार नदीम और शबनम पर फ़िल्माया गया यह रोंमानटिक गाना  “शराफ़त” से लिया गया है । यह फ़िल्म १९७० के आसपास पाकिस्तान मे रिलीज हुयी थी । पेश है मेहंदी हसन जी की दिलकश आवाज :

तेरे भीगे बदन की खूशबू से 
लहरें भी हुयी मस्तानी सी
तेरी जुल्फ़ को छू कर आज हुई
खामोश हवा दीवानी सी
यह रुप का कुन्दन दहका हुआ
यह जिस्म का चंदन महका हुआ
इलजाम न देना फ़िर मुझको
हो जाये अगर नादानी सी
बिखरा हुआ काजल आंखॊ मे
तूफ़ान की हलचल सांसो मे
यह नर्म लबों की खामोशी
पलकों मे छुपी हैरानी सी
तेरे भीगे बदन की खूशूबू से
लहरे भी हुयी मस्तानी सी
तेरी जुल्फ़ को छू कर आज हुई
खामोश हवा दीवानी सी ।

>“तेरे भीगे बदन की खूशबू से ” मेहंदी हसन द्वारा गाया एक फ़िल्मी गीत

>इसमे कोई शक नही कि जनाब मेहंदी हसन के चाहने  वाले न सिर्फ़ पाकिस्तान के आवाम मे बल्कि अपने देश मे भी लाखॊ की तादाद मे हैं । लेकिन हमसे अधिकतर मेहंदी हसन जी को  गजल और गैर फ़िल्मी गानों के रुप जानते रहे हैं । लेकिन उनकी दूसरी शख्सियत पाकिस्तान के उर्दू सिनेमा के साथ भी जुडी  है । पाकिस्तानी अदाकार नदीम और शबनम पर फ़िल्माया गया यह रोंमानटिक गाना  “शराफ़त” से लिया गया है । यह फ़िल्म १९७० के आसपास पाकिस्तान मे रिलीज हुयी थी । पेश है मेहंदी हसन जी की दिलकश आवाज :
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तेरे भीगे बदन की खूशबू से 
लहरें भी हुयी मस्तानी सी
तेरी जुल्फ़ को छू कर आज हुई
खामोश हवा दीवानी सी
यह रुप का कुन्दन दहका हुआ
यह जिस्म का चंदन महका हुआ
इलजाम न देना फ़िर मुझको
हो जाये अगर नादानी सी
बिखरा हुआ काजल आंखॊ मे
तूफ़ान की हलचल सांसो मे
यह नर्म लबों की खामोशी
पलकों मे छुपी हैरानी सी
तेरे भीगे बदन की खूशूबू से
लहरे भी हुयी मस्तानी सी
तेरी जुल्फ़ को छू कर आज हुई
खामोश हवा दीवानी सी ।

तेरी आँखों को जब देखा, कँवल कहने को जी चाहा

– मेहदी हसन की एक उम्दा गज़ल-

मेरा मानना है गज़लों के मामले में मेहदी हसन के मुकाबले शायद ही कोई गायक ठहरता होगा। एक से एक उम्दा गज़लें हसन साहब ने गाई है। किस का जिक्र करूं किस को छोड़ूं !!!! सूरज को आईना दिखाने का साहस मुझमें नहीं। मैं आज आपको मेहदी हसन साहब की सबसे बढ़िया गज़ल सुनवा रहा हूँ।

वैसे इसे गज़ल से ज्यादा प्रेम गीत कहना चाहिये, नायक ने नायिका के आँखो और होठों की किस सुन्दरता से तारीफ की है। बस आप गज़ल सुनकर ही आनंद लीजिये।

तेरी आँखो को जब देखा
कँवल कहने को जी चाहा
मैं शायर तो नहीं लेकिन
गज़ल कहने को जी चाहा

तेरा नाजुक बदन छूकर
हवाएं गीत गाती है
बहारें देखकर तुझको
नया जादू जगाती है
तेरे होठों को कलियों का
बदल कहने को जी चाहा

मैं शायर तो नहीं लेकिन
गज़ल कहने को जी चाहा

इजाजत हो तो आँखो में
छुपा लूं, ये हंसी जलवा
तेरे रुख़सार पे करले
मेरे लब़ प्यार का सज़दा
तुझे चाहत के ख्वाबों का
महल कहने को जी चाहा

मैं शायर तो नहीं लेकिन
गज़ल कहने को जी चाहा
तेरी आँखो में जब देखा..

>तेरी आँखों को जब देखा, कँवल कहने को जी चाहा

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– मेहदी हसन की एक उम्दा गज़ल-

मेरा मानना है गज़लों के मामले में मेहदी हसन के मुकाबले शायद ही कोई गायक ठहरता होगा। एक से एक उम्दा गज़लें हसन साहब ने गाई है। किस का जिक्र करूं किस को छोड़ूं !!!! सूरज को आईना दिखाने का साहस मुझमें नहीं। मैं आज आपको मेहदी हसन साहब की सबसे बढ़िया गज़ल सुनवा रहा हूँ।

वैसे इसे गज़ल से ज्यादा प्रेम गीत कहना चाहिये, नायक ने नायिका के आँखो और होठों की किस सुन्दरता से तारीफ की है। बस आप गज़ल सुनकर ही आनंद लीजिये।

http://lifelogger.com/common/flash/flvplayer/flvplayer_basic.swf?file=http://mahaphil.lifelogger.com/media/audio0/653376_pkvzqhihrx_conv.flv&autoStart=false

तेरी आँखो को जब देखा
कँवल कहने को जी चाहा
मैं शायर तो नहीं लेकिन
गज़ल कहने को जी चाहा

तेरा नाजुक बदन छूकर
हवाएं गीत गाती है
बहारें देखकर तुझको
नया जादू जगाती है
तेरे होठों को कलियों का
बदल कहने को जी चाहा

मैं शायर तो नहीं लेकिन
गज़ल कहने को जी चाहा

इजाजत हो तो आँखो में
छुपा लूं, ये हंसी जलवा
तेरे रुख़सार पे करले
मेरे लब़ प्यार का सज़दा
तुझे चाहत के ख्वाबों का
महल कहने को जी चाहा

मैं शायर तो नहीं लेकिन
गज़ल कहने को जी चाहा
तेरी आँखो में जब देखा..