>हिन्दी फ़िल्मों का पहला "रैप" गाना – रेलगाडी…

>इसे हिन्दी का पहला “रैप” गाना कहा जा सकता है… यूँ तो अशोक कुमार ने कई फ़िल्मों में कई गाने गाये हैं, बल्कि जब फ़िल्मों में अशोक कुमार का प्रवेश हुआ था तब देविका रानी के साथ उन्होंने कुछ गीत गाये । उस जमाने में हीरो को ही खुद का प्लेबैक देना होता था, जो कि शूटिंग के समय ही रिकॉर्ड कर लिया जाता था, उस परम्परा में के.एल.सहगल, सोहराब मोदी, चन्द्रमोहन आदि कई कलाकार उच्च कोटि के रहे… परन्तु यह गीत जो कि फ़िल्म आशीर्वाद का है, सन १९६८ का है, जब प्लेबैक गायन कोई नई बात नहीं रह गई थी, लेकिन संगीतकार वसन्त देसाई ने इस गाने को अशोक कुमार से ही गवाना उचित समझा… यह गाना यूँ तो एक बालगीत है, लेकिन बेहद तेज गति से गाया गया है, और यह कमाल कर दिखाया है अशोक कुमार ने.. गीत के कई शब्द पकड़ में नहीं आते, लेकिन ध्यान से सुनने पर मजा आ जाता है । इतना जरूर कह सकता हूँ कि “खांडवा-मांडवा” शब्द जरूर अशोक कुमार ने अपने आग्रह पर जोडा़ होगा । पूरे गांगुली परिवार का खंडवा (मप्र) से हमेशा विशेष प्रेम रहा है, यह गीत लिखा है हरेन्द्रनाथ चट्टोपाध्याय ने, जिन्होंने इस फ़िल्म में एक महत्वपूर्ण रोल भी किया । हरेन्द्रनाथ चट्टोपाध्याय ने फ़िल्म बावर्ची में भी एक अविस्मरणीय रोल किया था और एक गीत में पूरा अन्त्तरा भी गाया था… बहरहाल… इस “रैप” गाने का मजा लीजिये (नीचे दिये गये विजेट में प्ले पर चूहे का चटका लगायें)

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हिन्दी फ़िल्मों का पहला "रैप" गाना – रेलगाडी…

इसे हिन्दी का पहला “रैप” गाना कहा जा सकता है… यूँ तो अशोक कुमार ने कई फ़िल्मों में कई गाने गाये हैं, बल्कि जब फ़िल्मों में अशोक कुमार का प्रवेश हुआ था तब देविका रानी के साथ उन्होंने कुछ गीत गाये । उस जमाने में हीरो को ही खुद का प्लेबैक देना होता था, जो कि शूटिंग के समय ही रिकॉर्ड कर लिया जाता था, उस परम्परा में के.एल.सहगल, सोहराब मोदी, चन्द्रमोहन आदि कई कलाकार उच्च कोटि के रहे… परन्तु यह गीत जो कि फ़िल्म आशीर्वाद का है, सन १९६८ का है, जब प्लेबैक गायन कोई नई बात नहीं रह गई थी, लेकिन संगीतकार वसन्त देसाई ने इस गाने को अशोक कुमार से ही गवाना उचित समझा… यह गाना यूँ तो एक बालगीत है, लेकिन बेहद तेज गति से गाया गया है, और यह कमाल कर दिखाया है अशोक कुमार ने.. गीत के कई शब्द पकड़ में नहीं आते, लेकिन ध्यान से सुनने पर मजा आ जाता है । इतना जरूर कह सकता हूँ कि “खांडवा-मांडवा” शब्द जरूर अशोक कुमार ने अपने आग्रह पर जोडा़ होगा । पूरे गांगुली परिवार का खंडवा (मप्र) से हमेशा विशेष प्रेम रहा है, यह गीत लिखा है हरेन्द्रनाथ चट्टोपाध्याय ने, जिन्होंने इस फ़िल्म में एक महत्वपूर्ण रोल भी किया । हरेन्द्रनाथ चट्टोपाध्याय ने फ़िल्म बावर्ची में भी एक अविस्मरणीय रोल किया था और एक गीत में पूरा अन्त्तरा भी गाया था… बहरहाल… इस “रैप” गाने का मजा लीजिये (नीचे दिये गये विजेट में प्ले पर चूहे का चटका लगायें)

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हिन्दी फ़िल्मों का पहला "रैप" गाना – रेलगाडी…

इसे हिन्दी का पहला “रैप” गाना कहा जा सकता है… यूँ तो अशोक कुमार ने कई फ़िल्मों में कई गाने गाये हैं, बल्कि जब फ़िल्मों में अशोक कुमार का प्रवेश हुआ था तब देविका रानी के साथ उन्होंने कुछ गीत गाये । उस जमाने में हीरो को ही खुद का प्लेबैक देना होता था, जो कि शूटिंग के समय ही रिकॉर्ड कर लिया जाता था, उस परम्परा में के.एल.सहगल, सोहराब मोदी, चन्द्रमोहन आदि कई कलाकार उच्च कोटि के रहे… परन्तु यह गीत जो कि फ़िल्म आशीर्वाद का है, सन १९६८ का है, जब प्लेबैक गायन कोई नई बात नहीं रह गई थी, लेकिन संगीतकार वसन्त देसाई ने इस गाने को अशोक कुमार से ही गवाना उचित समझा… यह गाना यूँ तो एक बालगीत है, लेकिन बेहद तेज गति से गाया गया है, और यह कमाल कर दिखाया है अशोक कुमार ने.. गीत के कई शब्द पकड़ में नहीं आते, लेकिन ध्यान से सुनने पर मजा आ जाता है । इतना जरूर कह सकता हूँ कि “खांडवा-मांडवा” शब्द जरूर अशोक कुमार ने अपने आग्रह पर जोडा़ होगा । पूरे गांगुली परिवार का खंडवा (मप्र) से हमेशा विशेष प्रेम रहा है, यह गीत लिखा है हरेन्द्रनाथ चट्टोपाध्याय ने, जिन्होंने इस फ़िल्म में एक महत्वपूर्ण रोल भी किया । हरेन्द्रनाथ चट्टोपाध्याय ने फ़िल्म बावर्ची में भी एक अविस्मरणीय रोल किया था और एक गीत में पूरा अन्त्तरा भी गाया था… बहरहाल… इस “रैप” गाने का मजा लीजिये (नीचे दिये गये विजेट में प्ले पर चूहे का चटका लगायें)

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