जो हैं तकदीरवाले वही कुर्बान होते हैं.. लताजी की एक गज़ल

कोठे पर गाये जाने वाले गीत हमने पहले भी सुने हैं। लीजिये आज एक मधुर गीत सुनिये फिल्म जीवन मृत्यु से। गाया है लताजी ने , लिखा है आनन्द बक्षी ने और संगीतकार हैं लक्ष्मीकांत प्यारे लाल।

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ज़माने में अजी ऐसे कई नादान होते हैं
वहाँ ले जाते हैं कश्ती जहाँ तूफ़ान होते हैं
शमा की बज़्म में आ कर के परवाने समझते हैं
यहीं पर उम्र गुज़रेगी यह दीवाने समझते हैं
मगर इक रात के
हाँ हाँ.. मगर एक रात के ये तो फ़क़त मेहमान होते हैं
ज़माने में

मोहब्बत सबकी महफ़िल में शमा बन कर नहीं जलती
हसीनों की नज़र सब पे छुरी बन कर नहीं चलती
जो हैं तक़दीर वाले बस वही क़ुर्बान होते हैं
ज़माने में

डुबो कर दूर साहिल से नज़ारा देखनेवाले
लगा कर आग चुप के से तमाशा देखनेवाले
तमाशा आप बनते हैं तो क्यों हैरान होते हैं
ज़माने में


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>जो हैं तकदीरवाले वही कुर्बान होते हैं.. लताजी की एक गज़ल

>कोठे पर गाये जाने वाले गीत हमने पहले भी सुने हैं। लीजिये आज एक मधुर गीत सुनिये फिल्म जीवन मृत्यु से। गाया है लताजी ने , लिखा है आनन्द बक्षी ने और संगीतकार हैं लक्ष्मीकांत प्यारे लाल।

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ज़माने में अजी ऐसे कई नादान होते हैं
वहाँ ले जाते हैं कश्ती जहाँ तूफ़ान होते हैं
शमा की बज़्म में आ कर के परवाने समझते हैं
यहीं पर उम्र गुज़रेगी यह दीवाने समझते हैं
मगर इक रात के
हाँ हाँ.. मगर एक रात के ये तो फ़क़त मेहमान होते हैं
ज़माने में

मोहब्बत सबकी महफ़िल में शमा बन कर नहीं जलती
हसीनों की नज़र सब पे छुरी बन कर नहीं चलती
जो हैं तक़दीर वाले बस वही क़ुर्बान होते हैं
ज़माने में

डुबो कर दूर साहिल से नज़ारा देखनेवाले
लगा कर आग चुप के से तमाशा देखनेवाले
तमाशा आप बनते हैं तो क्यों हैरान होते हैं
ज़माने में