>प्रिय अमुचा एक महाराष्ट्र देश हा : महाराष्‍ट्र का राज्य गीत

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भारत के राष्‍ट्रगान एवं राष्‍ट्र गीत की तरह के भारत के कई राज्यों ने कुछ गीतों को राज्य गीत का सा दर्जा दे रखा है। फिलहाल आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र इन दो राज्यों के राज्य गीत मेरे ध्यान में है और संयोग से मेरे संग्रह में भी है। आज आपको इसकी पहली कड़ी में महाराष्ट्र का गीत सुनवा रहा हूँ यह गीत श्रीपादकृष्ण कोल्हटकर (shripad krshna kolhatkar) ने लिखा है और संगीतकार शायद पं हृदयनाथ मंगेशकर हैं। इसे गाया है लता जी, ऊषा जी और हृदयनाथ मंगेशकर ने।

आईये सुनते हैं।

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बहु असोत सुंदर संपन्न की महा
प्रिय अमुचा एक महाराष्ट्र देश हा

गगनभेदि गिरिविण अणु नच जिथे उणे
आकांक्षांपुढति जिथे गगन ठेंगणे
अटकेवरि जेथील तुरंगि जल पिणे
तेथ अडे काय जलाशय नदाविणे
पौरुषासि अटक गमे जेथ दु:सहा

प्रासाद कशास जेथ हृदयमंदिरे ( प्रस्तुत गीत में लाल रंगों से लिखी लाईने नहीं है)
सद्भावांचीच भव्य दिव्य आगरे
रत्नां वा मौक्तिकांहि मूल्य मुळी नुरे

रमणईची कूस जिथे नृमणिखनि ठरे
शुद्ध तिचे शीलहि उजळवि गृहा
नग्न खड्ग करि, उघडे बघुनि मावळे
चतुरंग चमूचेही शौर्य मावळे
दौडत चहुकडुनि जवे स्वार जेथले
भासति शतगुणित जरी असति एकले
यन्नामा परिसुनि रिपु शमितबल अहा

विक्रम वैराग्य एक जागि नांदती
जरिपटका भगवा झेंडाहि डोलती
धर्म-राजकारण समवेत चालती
शक्तियुक्ति एकवटुनि कार्य साधिती

पसरे यत्कीर्ति अशी विस्मया वहा
गीत मराठ्यांचे श्रवणी मुखी असो
स्फूर्ति दीप्ति धृतिहि जेथ अंतरी ठसो
वचनि लेखनीहि मराठी गिरा दिसो
सतत महाराष्ट्रधर्म मर्म मनि वसो
देह पडो तत्कारणि ही असे स्पृहा

अगली कड़ी में सुनिये आंध्र प्रदेश का राज्य गीत

>रूठ के तुम तो चल दिये: राग हेमन्त में एक खूबसूरत गीत

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आईये आज आपको एक बहुत ही खूबसूरत गीत सुनवाते हैं, इस गीत को अनिलदा ने राग हेमन्त में ढ़ाला है, ताल है दादरा। लताजी जब इस गीत के पहले और दूसरे पैरा की पहली पंक्‍तिया गाती है तब वे लाईनें मन को छू सी जाती है।

आप ध्यान दीजिये इन दो लाईनों पर… हाल ना पूछ चारागर और रो दिया आसमान भी … को। कमर ज़लालाबादी के सुन्दर गीत और अनिल दा के संगीत निर्देशन के साथ लता जी ने किस खूबसूरती से न्याय किया है; गीत 1955 में बनी फिल्म जलती निशानी का है।

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रूठ के तुम तो चल दिए, अब मैं दुआ तो क्या करूँ
जिसने हमें जुदा किया, ऐसे ख़ुदा को क्या करूँ
जीने की आरज़ू नहीं, हाल न पूछ चारागर
दर्द ही बन गया दवा, अब मैं दवा तो क्या करूँ
सुनके मेरी सदा-ए-ग़म, रो दिया आसमान भी-२
तुम तक न जो पहुँच सके, ऐसी सदा को क्या करूँ

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rooth ke tum to ch…

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अब कहाँ सुनने को मिलता है ऐसा भरा-पूरा मालकौंस ?-२

पिछले दिनों संजय पटेल जी ने संगीत मार्तण्ड ओमकारनाथ ठाकुर जी के स्वर में राग मालकौंस में रची बंदिश पग घुंघरू बांध मीरा नाची रे.. सुनवाई और शीर्षक में एक हल्की सी शिकायत कर दी कि अब कहाँ सुनने को मिलता है ऐसा भरा-पूरा मालकौंस ? उनकी शिकायत जायज भी तो है।
इस कड़ी में मैं भी यही शिकायत्त करना चाहूंगा साथ ही आपको राग मालकौंस की एक और बंदिश सुनवाना चाहूंगा। यह बंदिश लता मंगेशकर जी ने खुद द्वारा निर्मित मराठी फिल्म कंचन गंगा में गाई है। संगीतकार हैं पं वसंत देसाई।
आईये सुनते हैं…

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Shyam sundar roop …

क्या बंदिश सुनने के बाद भी संजय भाई जी का प्रश्‍न अनुत्तरित ही रहा कि अब कहाँ सुनने को मिलता है ऐसा भरा-पूरा मालकौंस?

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>अब कहाँ सुनने को मिलता है ऐसा भरा-पूरा मालकौंस ?-२

>पिछले दिनों संजय पटेल जी ने संगीत मार्तण्ड ओमकारनाथ ठाकुर जी के स्वर में राग मालकौंस में रची बंदिश पग घुंघरू बांध मीरा नाची रे.. सुनवाई और शीर्षक में एक हल्की सी शिकायत कर दी कि अब कहाँ सुनने को मिलता है ऐसा भरा-पूरा मालकौंस ? उनकी शिकायत जायज भी तो है।
इस कड़ी में मैं भी यही शिकायत्त करना चाहूंगा साथ ही आपको राग मालकौंस की एक और बंदिश सुनवाना चाहूंगा। यह बंदिश लता मंगेशकर जी ने खुद द्वारा निर्मित मराठी फिल्म कंचन गंगा में गाई है। संगीतकार हैं पं वसंत देसाई।
आईये सुनते हैं…
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Shyam sundar roop …

क्या बंदिश सुनने के बाद भी संजय भाई जी का प्रश्‍न अनुत्तरित ही रहा कि अब कहाँ सुनने को मिलता है ऐसा भरा-पूरा मालकौंस?

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कैसे भाये सखी रुत सावन की: मल्हार राग, लताजी और सी रामचन्द्र जोड़ी की एक सुन्दर जुगलबन्दी

सावन की ऋतु, बरखा की बूंदे और मल्हार राग…अगर यह तीनों एक साथ मिल जायें तो किसको नहीं सुहायेगा! पर हमारी नायिका को भी सावन की रुत नहीं भा रही, अपनी सखी से शिकायत कर रही है कि कैसे भाये सखी रुत सावन की…….! क्यों कि उसके पिया उसके पास नहीं है, मिलना तो दूर की बात आने की पाती का भी पता ठिकाना नहीं,ऐसे में नायिका अपनी मन की बात अपनी सखी को ही गाकर सुना रही है।
आप सब जानते हैं अन्ना साहब यानि सी रामचन्द्र और लताजी ने एक से एक लाजवाब गीत हमें दिये। फिल्म पहली झलक का यह गीत सुनिये देखिये सितार और बांसुरी का कितना सुन्दर प्रयोग मल्हार राग में अन्ना साहब ने किया है।
और हां…. यह गीत फिल्म पहली झलक का है।

कैसे भाये सखी रुत सावन की-२
पिया भेजी ना पतियां आवन की-२
कैसे भाये सखी रुत सावन की
छम छम छम छम बरसत बदरा-२
रोये रोये नैनों से बह गया कजरा
आग लगे ऐसे सावन को-२
जान जलावे जो बिरहन की
कैसे भाये सखी रुत सावन की-२
धुन बंसी की सावनिया गाये
आऽऽऽ सावनिया गाये
धुन बंसी की सावनिया गाये-२
घायल मन, सुर डोलत जाये
बनके अगन अँखियन में भड़के-२
आस लगी पिया दरशन की
कैसे भाये सखी रुत सावन की-२
पिया भेजी ना पतियां आवन की-२
कैसे भाये सखी रुत-२
आलाप आपके गुनगुनाने के लिये
म म रे सा, नि सा रे नि ध नि ध नि सा
म प द नि सा, रे सा रे नि सा ध निऽऽ प
म रे प ग म रे सा, प म रे प म नि द सा
म प द नि सा, नि नि प म ग म रि सा नि सा
प म ग म रे सा नि सा
प म ग म रे सा नि सा
सावन की
कैसे भाये सखी रुत आऽ सावन की

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Pahli Jhalak 1954 …

>कैसे भाये सखी रुत सावन की: मल्हार राग, लताजी और सी रामचन्द्र जोड़ी की एक सुन्दर जुगलबन्दी

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सावन की ऋतु, बरखा की बूंदे और मल्हार राग…अगर यह तीनों एक साथ मिल जायें तो किसको नहीं सुहायेगा! पर हमारी नायिका को भी सावन की रुत नहीं भा रही, अपनी सखी से शिकायत कर रही है कि कैसे भाये सखी रुत सावन की…….! क्यों कि उसके पिया उसके पास नहीं है, मिलना तो दूर की बात आने की पाती का भी पता ठिकाना नहीं,ऐसे में नायिका अपनी मन की बात अपनी सखी को ही गाकर सुना रही है।
आप सब जानते हैं अन्ना साहब यानि सी रामचन्द्र और लताजी ने एक से एक लाजवाब गीत हमें दिये। फिल्म पहली झलक का यह गीत सुनिये देखिये सितार और बांसुरी का कितना सुन्दर प्रयोग मल्हार राग में अन्ना साहब ने किया है।
और हां…. यह गीत फिल्म पहली झलक का है।

कैसे भाये सखी रुत सावन की-२
पिया भेजी ना पतियां आवन की-२
कैसे भाये सखी रुत सावन की
छम छम छम छम बरसत बदरा-२
रोये रोये नैनों से बह गया कजरा
आग लगे ऐसे सावन को-२
जान जलावे जो बिरहन की
कैसे भाये सखी रुत सावन की-२
धुन बंसी की सावनिया गाये
आऽऽऽ सावनिया गाये
धुन बंसी की सावनिया गाये-२
घायल मन, सुर डोलत जाये
बनके अगन अँखियन में भड़के-२
आस लगी पिया दरशन की
कैसे भाये सखी रुत सावन की-२
पिया भेजी ना पतियां आवन की-२
कैसे भाये सखी रुत-२
आलाप आपके गुनगुनाने के लिये
म म रे सा, नि सा रे नि ध नि ध नि सा
म प द नि सा, रे सा रे नि सा ध निऽऽ प
म रे प ग म रे सा, प म रे प म नि द सा
म प द नि सा, नि नि प म ग म रि सा नि सा
प म ग म रे सा नि सा
प म ग म रे सा नि सा
सावन की
कैसे भाये सखी रुत आऽ सावन की

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Pahli Jhalak 1954 …

>दुखियारे नैना ढंढे पिया को: मदनमोहन जी द्वारा संगीतबद्ध सुन्दर गीत

>महान संगीतकार मदनमोहन जी के बारे में अल्पना वर्मा जी ने अपने लेख में विस्तृत जानकारी दी, उनके गाये गीत भी सुनवाये। आज मैं आपको उनके बारे में ज्यादा ना बताते हुए सीधे उनका संगीतबद्ध एक सुन्दर गीत सुनवाता हूं। यह गीत राग गौड़ सारंग में ढला हुआ है पर इसमें अन्य रागों की छाया भी महसूस की जा सकती है, इस सुंदर गीत की कल्पना मदनमोहन जी से ही की जा सकती है।

यह गीत फिल्म निर्मोही (Nirmohi 1952) का है।इस गीत को गाया है लता मंगेशकर ने और गीतकार हैं इन्दीवर।
इस फिल्म में मुख्य भूमिकायें नूतन और सज्जन ने निभाई थी।

जबसे लाईफलोगर ने अपनी दुकान बढ़ा दी है तब से एक प्लेयर पर ज्यादा भरोसा रखना अच्छा नहीं, इसलिये ईस्निप्स का प्यलेर भी लगा देते हैं। एक बन्द भी हो गया तो दूसरा तो चलेगा।

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Dukhiyare Naina Dh…

दुखियारे नैना ढूँढ़ें पिया को
निसदिन करें पुकार
दुखियारे नैना

फिर क्या आएँगीं वो रातें
लौट गईं हैं जो बारातें
बीते दिन और बिछड़ा साथी
बहती नदी की धार
दुखियारे नैना …

राह में नैना दिया जलाएँ
आप जलें और जिया जलाएँ
जिस से जीवन भी जल जाए
वो कैसी जलधार
दुखियारे नैना …

>यही बहार है, दुनिया को भूल जाने की, खुशी मनाने की- लताजी का एक और मधुर गीत

>लताजी की आवाज की एक खास बात पर आपने ध्यान दिया होगा, जब वे कोई वियोग, दुखी: या दर्द भरा गीत गाती है तो उनके स्वर में बहुत दर्द सुनाई देता है मानो लता जी उस गीत के भावों को अपने मन में चित्रित कर गाती है। ठीक इसी तरह लता जी के गाये शोख, मस्ती भरे गीतों में उनके स्वरों में यही भाव साफ सुनाई देता है।
आज जो गीत मैं सुनवाने जा रहा हूँ, आप ध्यान से सुनेंगे तो पायेंगे मानों लता जी एक अल्हड़ युवती की तरह नाचती- इठलाती- मचलती हुई गा रही हों।
मैने पहले भी कहा था कि पता नहीं कैसे इतने मधुर गीत रेडियो- टीवी पर सुनाई नहीं देते! आईये आज इसी श्रेणी में बड़े दिनों के बाद लताजी का एक और मधुर और दुर्लभ गीत सुना रहा हूँ। पता नहीं लता जी के गाये इस तरह के और कितने गीत होंगे जो हमारे लिये अनसुने ही हैं।
यह गीत लताजी ने फिल्म रागरंग Raagrang (1952)के लिये गाया था। गीत को संगीत दिया है रोशन ने और गीतकार हैं कैफ़ इरफ़ानी।

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ला ला ला लाऽ
यही बहार है, यही बहार हैऽ
यही बहार है दुनिया को भूल जाने की
खुशी मनाने की
यही घडी है जवानी के गुनगुनाने की
हाँ, मुस्कुराने की

ये प्यारे प्यारे नज़ारे ये ठंडी ठंडी हवा
ये हल्का हल्का नशा
ये काली काली घटाओं की मस्त मस्त अदा
ये कोयलों की सदा
मचल के आ गयी, रुत मस्तियाँ लुटाने की
झूम जाने की।
यही बहार हैऽऽ

कली कली से ये भंवरे ने मुस्कुरा के कहा
नज़र मिला के कहा
नज़र से काम न निकला तो गुदगुदा के कहा
गले लगा के कहा
किया है प्यार तो, किया है प्यार तोऽ
किया है प्यार तो परवा न कर ज़माने की
हँसी उडाने की
यही बहार है…

ओ ओ ओऽऽऽऽ
जो टूटता है रुबांऽऽऽऽ
जो टूटता है रुबां, उसको टूट जाने दे
मेरे शबाब को जी भर के गीत गाने दे
हाँ, गीत गाने दे-२
तड़प उठी हैं, तड़प उठी हैंऽ
तड़प उठी हैं तमन्नाएं झूम जाने की
हाँ, लगी बुझाने की

यही बहार है, दुनिया को भूल जाने की, खुशी मनाने की- लताजी का एक और मधुर गीत

लताजी की आवाज की एक खास बात पर आपने ध्यान दिया होगा, जब वे कोई वियोग, दुखी: या दर्द भरा गीत गाती है तो उनके स्वर में बहुत दर्द सुनाई देता है मानो लता जी उस गीत के भावों को अपने मन में चित्रित कर गाती है। ठीक इसी तरह लता जी के गाये शोख, मस्ती भरे गीतों में उनके स्वरों में यही भाव साफ सुनाई देता है।
आज जो गीत मैं सुनवाने जा रहा हूँ, आप ध्यान से सुनेंगे तो पायेंगे मानों लता जी एक अल्हड़ युवती की तरह नाचती- इठलाती- मचलती हुई गा रही हों।
मैने पहले भी कहा था कि पता नहीं कैसे इतने मधुर गीत रेडियो- टीवी पर सुनाई नहीं देते! आईये आज इसी श्रेणी में बड़े दिनों के बाद लताजी का एक और मधुर और दुर्लभ गीत सुना रहा हूँ। पता नहीं लता जी के गाये इस तरह के और कितने गीत होंगे जो हमारे लिये अनसुने ही हैं।
यह गीत लताजी ने फिल्म रागरंग Raagrang (1952)के लिये गाया था। गीत को संगीत दिया है रोशन ने और गीतकार हैं कैफ़ इरफ़ानी।

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ला ला ला लाऽ
यही बहार है, यही बहार हैऽ
यही बहार है दुनिया को भूल जाने की
खुशी मनाने की
यही घडी है जवानी के गुनगुनाने की
हाँ, मुस्कुराने की

ये प्यारे प्यारे नज़ारे ये ठंडी ठंडी हवा
ये हल्का हल्का नशा
ये काली काली घटाओं की मस्त मस्त अदा
ये कोयलों की सदा
मचल के आ गयी, रुत मस्तियाँ लुटाने की
झूम जाने की।
यही बहार हैऽऽ

कली कली से ये भंवरे ने मुस्कुरा के कहा
नज़र मिला के कहा
नज़र से काम न निकला तो गुदगुदा के कहा
गले लगा के कहा
किया है प्यार तो, किया है प्यार तोऽ
किया है प्यार तो परवा न कर ज़माने की
हँसी उडाने की
यही बहार है…

ओ ओ ओऽऽऽऽ
जो टूटता है रुबांऽऽऽऽ
जो टूटता है रुबां, उसको टूट जाने दे
मेरे शबाब को जी भर के गीत गाने दे
हाँ, गीत गाने दे-२
तड़प उठी हैं, तड़प उठी हैंऽ
तड़प उठी हैं तमन्नाएं झूम जाने की
हाँ, लगी बुझाने की

>महफिल की पहली वर्षगांठ और दो मधुर गीत

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जिसे सुन आप निश्चय ही प्रसन्न हो जायेंगे… और हाँ महफिल पर आज तक बजाये गये सारे गीतों के लिंक एक साथ।

देखते देखते महफिल को एक साल पूरा हो गया, पुराने गीतों को एक जगह एकत्रित करने का मन हुआ। कुछ मेरे संकलन में से , कुछ चोरी चकारी कर एकत्रित किये गये गीतों को फिलहाल कुछ खास श्रोतावर्ग नहीं मिला। शायद भारतिय शास्त्रीय संगीत पर आधारित इतने मधुर गीतों का जमाना अब नहीं रहा, पर मैं अपनी ही धुन में इस पर गीत चढ़ाये जा रहा हूँ। पिछले एक साल में ५० पोस्ट भी मैं इस पर नहीं पर चढ़ा पाया। खैर ..
आज पहली वर्षगांठ पर मैं अपनी सबसे पसंदीदा गीतों में से दो गाने यहाँ प्रस्तुत कर रहा हूँ।
ये दोनों ही फिल्म आलाप के गीत हैं, आलाप फिल्म उन फिल्मों में से एक है जिनमें अमिताभ और सभी कलाकारों ने अपना सर्वश्रेष्‍ठ अभिनय किया। इस फिल्म में अमिताभ के अलावा दूसरी जो सबसे बड़ी खास बातें थी वह थी जयदेव जी का सीधे दिल में उतर जाने वाला संगीत, डॉ राही मासूम रज़ा और हरिवंशराय बच्चनजी का गीत और ऋषिकेश मुखर्जी का लाजवाब निर्देशन।
बहरहाल आज इस पहले जन्मदिन पर मुझे उचित यही लगा कि संगीत की देवी माँ सरस्वती, शारदा, विद्यादायिनी.. को नमन किया जाये लीजिये सुनिये यह मधुर प्रार्थना…इस धुन को जयदेवजी ने अलाउद्दीन खाँ साहब की धुन से प्रेरित होकर राग भैरवी में बनाया है, और इसे गाया है लताजी और दिलराज कौर ने।

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आलाप फिल्म के इस दूसरे गीत को जब भी मैं सुनता हूँ पता नहीं क्यों आँखें नम हो जाती है। इस सुंदर गीत को गाया है दक्षिण के महान गायक डॉ के जे येसुदास ने। येसुदास हिन्दी बिल्कुल नहीं जानते पर इस गीत में उनका हिन्दी का उच्चारण कितना बढ़िया है।
यह हिन्दी फिल्मों का दुर्भाग्य ही है कि येशुदास जैसे कलाकारों से हिन्दी में ज्यादा गाने नहीं गवा सके।
अगर मुझे हिन्दी फिल्मों के शीर्ष १०० गीतों की सूचि बनाने को कहा जाये तो निश्चय ही इस गीत का क्रमांक बहुत ऊपर होगा।

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इन दोनों गीतों को सुनने के बाद बताईये कि ये दोनों गीत आपको कैसे लगे?
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अब प्रस्तुत है पिछले साल में प्रकाशित सारी पोस्ट के लिंक एक ही जगह

एक दुर्लभ गाना पहाड़ी सान्याल/ कानन देवी की आवाज में
ज्युथिका रॉय का गाया एक गाना – चुपके चुपके बोल
सरस्वतीदेवी का दुर्लभ गाना
क्या आपने मुबारक बेगम का यह गाना सुना है ?
ये किसके इशारे जहाँ चल रहा है?
कुछ और ज़माना कहता है, कुछ और है जिद मेरे दिल की
एम कांई दिलीप कुमार बनातु नथी- युसुफ़ साहब की आवाज में एक गाना सुनिये
क्या आपने इरा नागरथ के गाने सुने हैं?
सपना बन साजन आये और बीता हुआ एक सावन… वाह जमाल सेन
गाना जो आप बार बार सुनना चाहेंगे
गायकी में शोहरत की बुलंदियों से किराना की दुकानदारी तक: जी एम दुर्रानी
पाकिस्तान के महान गायक सलीम रज़ा का एक मधुर गाना
चार महान गायकों के पहले गाने
मशहूर गायक जिन्हें अंतिम दिनों में भीख तक मांगनी पड़ी
प्रिय पापा अब तो आपके बिना……. (गुजराती गीत)
आ मुहब्बत की बस्ती बसायेंगे हम
श्याम म्हाने चाकर राखोजी- तीन स्वरों में मीरां का एक भजन
दुनिया ये दुनिया, तूफान मेल — हिन्दी और बांग्ला में सुनिये
दीकरो मारो लाडकवायो: एक सुंदर गुजराती लोरी (गुज्रराती)
लताजी का यह गाना शायद आपने नहीं सुना होगा!
भूल सके ना हम तुम्हें: मन्ना डे द्वारा संगीतबद्ध गीत
दिले नाशाद को जीने की हसरत हो गई तुमसे… एक खूबसूरत मुजरा (गज़ल)
तेरी आँखों को जब देखा, कँवल कहने को जी चाहा – मेहदी हसन की एक उम्दा गज़ल-
ओ वर्षा के पहले बादल: जगमोहन
दो मधुर होली गीत …
शबाब (१९५४) फ़िल्म के तीन मधुर गीत !!!
संगीतकार रोशन साहब का एक ही धुन का दो फिल्मों में सुंदर प्रयोग !!!
प्यारी तुम कितनी सुंदर हो: जगमोहन
ये ना थी हमारी किस्मत के विसाले यार होता : नूरजहाँ और सलीम रज़ा
रोने से और इश्क़ में बेबाक हो गये
ऋतु आये ऋतु जाये सखी री… चार रागों में ढ़ला एक शास्त्रीय गीत
देवता तुम हो मेरा सहारा: रफी साहब के साथ भी
दे उतनी सज़ा- जितनी है खता.. सलीम रज़ा
इस दिल से तेरी याद भुलाई नहीं जाती… रफी साहब
लाई किस्मत आँसुओं का जाम क्यूं..?
प्रीत में है जीवन: सहगल साहब का एक और यादगार गीत !!!
मिला दिल, मिल के टूटा जा रहा है
हमारी ख़ाक में मिलती तमन्ना देखते जाओ: राग हंसकिंकिनी पर आधारित एक गीत
अनिल दा की पुण्य तिथी पर उन्ही की आवाज में गाया हुआ एक गीत
ऐ मेरे हमसफर: अभिनेत्री नूतन का गाया एक दुर्लभ गीत
स्वतंत्रता दिवस पर किशोर कुमार का गाया हुआ एक बेशकीमती और दुर्लभ गीत !!
बादल देखी डरी हो स्याम…. ज्यूथिका रॉय
ना ना बरसो बादल , आज बरसे नैन से जल: लताजी
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