>पंडित नरेन्द्र शर्मा, अली अकबर खां और लताजी का एक अनोखा गीत

>-गीतकार आदरणीय पंडित नरेन्द्र शर्माजी को उनकी पुण्यतिथी (11 फरवरी) पर सादर समर्पित-
आप कल्पना कीजिये अगर हिन्दी के सुप्रसिद्ध गीतकार पंडित नरेन्द्र शर्माजी (Pt. Narendra Sharma), जिनके अधिकांश गीत शुद्ध हिन्दी में लिखे गये हैं; अगर उर्दू में गीत लिखें तो! अच्छा ऐसा कीजिये कल्पना मत कीजिये नीचे दिये प्लेयर के प्ले बटन पर क्लिक कर शान्ति से पूरे गीत को सुनिये। देखिये फिल्म आंधियां (Andhiyaan-1952) का यह गीत कितना शानदार है।
हो भी ना क्यों, इसमें पण्डितजी और लता जी (Lata Mangeshkar) के साथ संगीत की जुगलबंदी सुप्रसिद्ध सरोदवादक उस्ताद अली अकबर खाँ (Ustad Ali Akbar Khan) साहब ने जो की है। यानि इस गीत का संगीत अली अकबर खां साहब का दिया हुआ है। यह गीत तीन भागों में है। हर भाग एक अलग अलग मूड में है।
इस फिल्म आंधियां में मुख्य भूमिकायें देवानन्द (Devanand), निम्मी( Nimmi) , दुर्गा खोटे( Durga Khote), कल्पना कार्तिक (Kalpana Kartik) और के. एन सिंह (K.N.Singh) ने निभाई थी। नवकेतन (Navketan)बेनर्स के तले बनी इस फिल्म का निर्देशन चेतन आनंद (Chetan Anand) ने किया था।
लीजिये गीत सुनिये-
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है कहीं पर शादमानी और कहीं नाशादियाँ
आती हैं दुनिया में सुख-दुख की सदा यूँ आँधियाँ, आँधियाँ -२
है कहीं पर शादमानी और कहीं नाशादियाँ

क्या राज़ है, क्या राज़ है- क्या राज़ है, क्या राज़ है
आज परवाने को भी अपनी लगन पर नाज़ है, नाज़ है
क्यों शमा बेचैन है, ख़ामोश होने के लिये -२
आँसुओं की क्या ज़रूरत -२
दिल को रोने के लिये -२
तेरे दिल का साज़ पगली -२
आज बेआवाज़ है -२
है कहीं पर शादमानी और कहीं नाशादियाँ

आऽहै कहीं पर शादमानी और कहीं नाशादियाँ -२
आती हैं दुनिया में सुख-दुख की सदा यूँ आँधियाँ, आँधियाँ

आईं ऐसी आँधियाँ
आईं ऐसी आँधियाँ, आँधियाँ
बुझ गया घर का चिराग़
धुल नहीं सकता कभी जो पड़ गया आँचल में दाग़ -२
थे जहाँ अरमान -थे जहाँ अरमान
उस दिल को मिली बरबादियाँ, बरबादियाँ
है कहीं पर शादमानी और कहीं नाशादियाँ -२

ज़िंदगी के सब्ज़ दामन में -२
कभी फूलों के बाग़
ज़िंदगी के सब्ज़ दामन में
ज़िंदगी में सुर्ख़ दामन में कभी काँटों के दाग़ -२
कभी फूलों के बाग़ कभी काँटों के दाग़
फूल-काँटों से भरी हैं ज़िंदगी की वादियाँ

है कहीं पर शादमानी और कहीं नाशादियाँ
आती हैं दुनिया में सुख-दुख की सदा यूँ आँधियाँ, आँधियाँ -२
है कहीं पर शादमानी और कहीं नाशादियाँ

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लावण्यादी की पापाजी को श्रद्धान्जली
पापाजी , आपकी बिटिया , आपको सादर प्रणाम करती है

>बीता हुआ एक सावन: लता जी का एक नायाब अनरिलिज्ड गाना

>इस सुन्दर गाने को जमालसेन जी ने संगीतबद्ध किया था फिल्म पहले कदम के लिये परन्तु किसी कारण से यह गाना रिलीज नहीं हो पाया। इसे लताजी ने गाया गाया है। इस गाने के शब्दों की खूबसूरती पर खास ध्यान दीजिये। शब्दों को किस खूबसूरती से पिरोया गया है जैसे- आँखों में कटी- जब भी कटी- रात हमारी।हर पैरा की अन्तिम लाईन को भी लता जी ने कुछ सैकण्ड रुक कर कुछ अलग तरीके से गाया है।

बीता हुआ एक सावन एक याद तुम्हारी
ले देके ये दो बातें दुनिया है हमारी
बीता हुआ एक सावन


मजबूर बहुत दूर ये तकदीर के खेते
आराम से सोये ना कभी चैन से लेते
आँखो में कटी, जब भी कटी, रात हमारी
ले देके ये दो बातें….बीता हुआ सावन …

एक बार बरसने दो बरसती है घटायें
हम रोते हैं, दिन रात बता किसको बतायें
हंसती है हमें देखके तकदीर हमारी
ले देके ये दो बातें….बीता हुआ सावन …

भरपाये मुहब्बत से, दिल टूट गया है
तू रूठा तो, ले सारा जहाँ रूठ गया है,
ये जहाँ रूठ गया है
एक साथ दिये जाती है ये ठेस हमारी
ले देके ये दो बातें….बीता हुआ सावन …

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01 – Lata Mangesh…

>ओ जिन्दगी के मालिक तेरा ही आसरा है: लताजी- नाजनीन 1951

>लताजी के पता नहीं और कितने गीत हैं जो हमने सुने ही नहीं, जैसे जैसे खोजता हूं एक से एक लाजवाब नगीने मिलते जाते हैं। आज ऐसा ही एक और कम सुना-सुनाया जाने वाला गीत मिला है जो आपके लिये प्रस्तुत है।
यह गीत फिल्म नाजनीन 1951 का है। गीतकार शकील संगीतकार गुलाम मोहम्मद और इस फिल्म के मुख्य कलाकार मधुबाला और नासिर खान थे।
आइये गीत सुनते हैं।

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ओ जिन्दगी के मालिक तेरा ही आसरा है-२
क्यूँ मेरे दिल की दुनिया बरबाद कर रहा है-२
ओ जिन्दगी के मालिक तेरा ही आसरा है

तुझको मेरी क़सम है बिगड़ी मेरी बना दे-२
या तू नहीं है भगवन दुनिया को ये बता दे
ऊँचा है नाम तेरा अपनी दया दिखा दे
क्या मेरी तरह तू भी मजबूर हो गया है
ओ जिन्दगी के मालिक तेरा ही आसरा है

ख़ामोश है बता क्यूँ सुन कर मेरा फ़साना-२
क्या पाप है किसी से दुनिया में दिल लगाना
अच्छा नहीं है मालिक दुखियों का घर जलाना
खुद ढाये खुद बनाये आखिर ये खेल क्या है
ओ जिन्दगी के मालिक तेरा ही आसरा है

बरबादियों का मेरी अंजाम जो भी होगा
ठु्करा के मेरी हस्ती नाकाम तू भी होगा
गर मिट गई मोहब्बत बदनाम तू भी होगा
यूँ बेवजह किसी का दिल तोड़ना बुरा है

ओ जिन्दगी के मालिक तेरा ही आसरा है: लताजी- नाजनीन 1951

लताजी के पता नहीं और कितने गीत हैं जो हमने सुने ही नहीं, जैसे जैसे खोजता हूं एक से एक लाजवाब नगीने मिलते जाते हैं। आज ऐसा ही एक और कम सुना-सुनाया जाने वाला गीत मिला है जो आपके लिये प्रस्तुत है।
यह गीत फिल्म नाजनीन 1951 का है। गीतकार शकील संगीतकार गुलाम मोहम्मद और इस फिल्म के मुख्य कलाकार मधुबाला और नासिर खान थे।
आइये गीत सुनते हैं।

ओ जिन्दगी के मालिक तेरा ही आसरा है-२
क्यूँ मेरे दिल की दुनिया बरबाद कर रहा है-२
ओ जिन्दगी के मालिक तेरा ही आसरा है

तुझको मेरी क़सम है बिगड़ी मेरी बना दे-२
या तू नहीं है भगवन दुनिया को ये बता दे
ऊँचा है नाम तेरा अपनी दया दिखा दे
क्या मेरी तरह तू भी मजबूर हो गया है
ओ जिन्दगी के मालिक तेरा ही आसरा है

ख़ामोश है बता क्यूँ सुन कर मेरा फ़साना-२
क्या पाप है किसी से दुनिया में दिल लगाना
अच्छा नहीं है मालिक दुखियों का घर जलाना
खुद ढाये खुद बनाये आखिर ये खेल क्या है
ओ जिन्दगी के मालिक तेरा ही आसरा है

बरबादियों का मेरी अंजाम जो भी होगा
ठु्करा के मेरी हस्ती नाकाम तू भी होगा
गर मिट गई मोहब्बत बदनाम तू भी होगा
यूँ बेवजह किसी का दिल तोड़ना बुरा है

>ज़मीन की खाक़ होकर आसमान से दिल लगा बैठे

>कुछ भी नहीं कह सकेंगे इन सुंदर गीतों के बारे में; बस आप तो इन दो गीतों को सुन लीजिये, और इन गीतों को रचने वाले कलकारों को दाद दें. कि क्या खूबसूरत गीत उन्होने बनाये। दोनों ही फिल्म चोर बाजार Chor Bazar(1954) से चोरी किये हैं| गीतकार हैं शकील बूंदायूंनी और संगीतकार हैं सरदार मलिक, और गाया है लताजी ने। फिल्म के मुख्य कलाकार शम्मी कपूर और सुमित्रा देवी हैं।

हुई ये हम से नादानी तेरी महफ़िल में जा बैठे
ज़मीन की खाक़ होकर आसमान से दिल लगा बैठे
हुआ खून-ए-तमन्ना इसका शिक़वा क्या करें तुमसे
न कुछ सोचा न कुछ समझा जिगर पर तीर खा बैठे
ख़बर क्या थी गुलिस्तान-ए-मुहब्बत में भी खतरे हैं
जहाँ गिरती है बिजली हम उसी डाली पे जा बैठे
न क्यों अंजाम-ए-उल्फ़त देख कर आँसु निकल आये
जहाँ को लूटने वाले खुद अपना घर लुटा बैठे

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Huyi yeh hum se na…

चलता रहे ये कारवां,
उम्र-ए-रवां का कारवां – २
चलता रहे ये कारवां,उम्र-ए-रवां का कारवां

शाम चले, सहर चले, मंज़िल से बेखबर चले-२
बस यूँ ही उम्र भर चले, रुक ना सके यहाँ वहाँ
चलता रहे ये कारवां, उम्र-ए-रवां का कारवां

फूले फले मेरी कली, ग़म ना मिले तुझे कभी-२
गुज़रे खुशी में ज़िन्दगी, आए ना मौसम-ए-खिज़ां
चलता रहे ये कारवां, उम्र-ए-रवां का कारवां

दुनिया का तू हबीब हो, मंज़िल तेरी क़रीब हो-२
इन्सां तेरा नसीब हो, तुझ पे ख़ुदा की हो अमां
चलता रहे ये कारवां, उम्र-ए-रवां का कारवां

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Chalta rahe yeh ka…

>जग कहता मैं हूं अंधी-मैं कहती अंधा जग सारा: मन्नाडे द्वारा संगीतबद्ध एक और गीत

>आपको याद होगा मैने पिछले साल आपको मन्नाडे द्वारा संगीतबद्ध एक मधुर गीत “भूल सके ना हम तुझे”
सुनवाया था। उस गीत से पता चलता है कि मन्नाडे कितने गुणी, कितने विद्वान कलाकार हैं। गायक होने के साथ वे कितने बढ़िया संगीतकार मन्नादा हैं हमें पता ना था।
ओर्कुट में मेरी एक मित्र हैं रिचा विनोद! वे हिन्दी गीतों की बहुत बड़ी संग्राहक होने के साथ बहुत बड़ी प्रशंसिका हैं। बहुत सारे पुराने गाने उनके विशाल संग्रह में है। मैने मेल से यह गीत रिचाजी को भेजा था, तो मेल के प्रत्युतर में रिचाजी ने मुझे मन्नादा के संगीतबद्ध दो गीत और भेज दिये। बंदा तो खुश खुश!!
वे दो गीत निम्न है
जग कहता है मैं हूं अंधी- गीतकार प्यारे लाल संतोषी- फिल्म नैना 1953 और नहीं मालूम कि पिया जब से मिले तुम गीतकार कवि प्रदीप_ फिल्म चमकी। दूसरे गीत की ऑडियो क्वालिटी इतनी खास नहीं है और गाना का संगीत -गीत भी औसत सा ही है, परन्तु जग कहता मैं अंधी गीत बहुत ही मधुर है और ऑडियो भी ठीक है सो मुझे लगा यह गीत आपको भी सुनवाना चाहिये।
इस सुन्दर गीत को भेजने के लिये रिचा जी का बहुत बहुत धन्यवाद।

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Download Link: Jag Kehta Hai Mai Andhi_Lata_MannaDey_PLSantoshi_Naina1953.mp3

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Jag Kehta Hai Mai …

जग कहता है मैं हूं अंधी
मैं कहती अंधा जग सारा
मैने ज्योत जगा ली उनकीऽऽ
खोकर आंखों का उजियारा

दूनिया ना देखूं में
देखूं तो है दिनराती
मैं देखूं…

ओ मेरे तनमन, ओ मेरे जीवन
ओ मेरे साथी
देखूं तो दिन राती, मैं देखूं…

आंखों वाले अंधे हैं वोऽऽ
जो खुद को पहचान ना पाये-२
मैं तुमको पहचान गई रे-२
जगा प्रीत की बाती
मैं देखूं तो है दिन राती, मैं देखूं…

अपने अपने रंग में दुनियाऽऽ
अपना अपना राग सुनाये-२
अपनी लगन का ले एक तारा
तेरे गीत नित गाती
मैं देखूं तो है दिन राती, मैं देखूं…

जग कहता मैं हूं अंधी-मैं कहती अंधा जग सारा: मन्नाडे द्वारा संगीतबद्ध एक और गीत

आपको याद होगा मैने पिछले साल आपको मन्नाडे द्वारा संगीतबद्ध एक मधुर गीत “भूल सके ना हम तुझे”
सुनवाया था। उस गीत से पता चलता है कि मन्नाडे कितने गुणी, कितने विद्वान कलाकार हैं। गायक होने के साथ वे कितने बढ़िया संगीतकार मन्नादा हैं हमें पता ना था।
ओर्कुट में मेरी एक मित्र हैं रिचा विनोद! वे हिन्दी गीतों की बहुत बड़ी संग्राहक होने के साथ बहुत बड़ी प्रशंसिका हैं। बहुत सारे पुराने गाने उनके विशाल संग्रह में है। मैने मेल से यह गीत रिचाजी को भेजा था, तो मेल के प्रत्युतर में रिचाजी ने मुझे मन्नादा के संगीतबद्ध दो गीत और भेज दिये। बंदा तो खुश खुश!!
वे दो गीत निम्न है
जग कहता है मैं हूं अंधी- गीतकार प्यारे लाल संतोषी- फिल्म नैना 1953 और नहीं मालूम कि पिया जब से मिले तुम गीतकार कवि प्रदीप_ फिल्म चमकी। दूसरे गीत की ऑडियो क्वालिटी इतनी खास नहीं है और गाना का संगीत -गीत भी औसत सा ही है, परन्तु जग कहता मैं अंधी गीत बहुत ही मधुर है और ऑडियो भी ठीक है सो मुझे लगा यह गीत आपको भी सुनवाना चाहिये।
इस सुन्दर गीत को भेजने के लिये रिचा जी का बहुत बहुत धन्यवाद।

Download Link: Jag Kehta Hai Mai Andhi_Lata_MannaDey_PLSantoshi_Naina1953.mp3

Jag Kehta Hai Mai …

जग कहता है मैं हूं अंधी
मैं कहती अंधा जग सारा
मैने ज्योत जगा ली उनकीऽऽ
खोकर आंखों का उजियारा

दूनिया ना देखूं में
देखूं तो है दिनराती
मैं देखूं…

ओ मेरे तनमन, ओ मेरे जीवन
ओ मेरे साथी
देखूं तो दिन राती, मैं देखूं…

आंखों वाले अंधे हैं वोऽऽ
जो खुद को पहचान ना पाये-२
मैं तुमको पहचान गई रे-२
जगा प्रीत की बाती
मैं देखूं तो है दिन राती, मैं देखूं…

अपने अपने रंग में दुनियाऽऽ
अपना अपना राग सुनाये-२
अपनी लगन का ले एक तारा
तेरे गीत नित गाती
मैं देखूं तो है दिन राती, मैं देखूं…

>ए दिल ए बेकरार जैसे भी हो गुजार : एक और दुर्लभ गीत

>आईये आज आपको लता जी का एक और दुर्लभ गीत सुनवाते हैं। संगीतकार गुलाम मुहम्मद भी उन संगीतकारों में से एक थे जिन्होने लताजी की खूबसूरत आवाज का अपने संगीत में बहुत शानदार उपयोग किया। लता के शुरूआती दिनों में आगे गीतों में उनकी आवाज में एक अलग ही तरह की कशिश है, आईये सुनकर ही अनुभव कीजिये।
फिल्म मांग 1950
संगीतकार: गुलाम मुहम्मद
गीतकार सगीर उस्मानी (इस फिल्म के एक और गीत के बारे में गीतायन से प्राप्त जानकारी के अनुसार)

http://sagarnahar.googlepages.com/player.swf

ए दिल ए बेकरार
जैसे भी हो गुजार
कौन तेरा गमखार
कहने को है हजार-२
लाख तुझे रोका
खा ही गया धोका
कहती ना थी हर बार-२
मत कर किसी से प्यार
ए दिल ए बेकरार…..
सुख था झूठा सपना
जिसको समझ अपना
सुख को दुख: पर वार
सह ले गम की मार
ए दिल ए बेकरार…..
देख लिया अंजाम
आखिर हुआ नाकाम-२
प्यार बड़ा दुश्‍वार
पा न सका मझधार
ए दिल ए बेकरार…..

http://www.hindi-movies-songs.com से साभार

ए दिल ए बेकरार जैसे भी हो गुजार : एक और दुर्लभ गीत

आईये आज आपको लता जी का एक और दुर्लभ गीत सुनवाते हैं। संगीतकार गुलाम मुहम्मद भी उन संगीतकारों में से एक थे जिन्होने लताजी की खूबसूरत आवाज का अपने संगीत में बहुत शानदार उपयोग किया। लता के शुरूआती दिनों में आगे गीतों में उनकी आवाज में एक अलग ही तरह की कशिश है, आईये सुनकर ही अनुभव कीजिये।
फिल्म मांग 1950
संगीतकार: गुलाम मुहम्मद
गीतकार सगीर उस्मानी (इस फिल्म के एक और गीत के बारे में गीतायन से प्राप्त जानकारी के अनुसार)

ए दिल ए बेकरार
जैसे भी हो गुजार
कौन तेरा गमखार
कहने को है हजार-२
लाख तुझे रोका
खा ही गया धोका
कहती ना थी हर बार-२
मत कर किसी से प्यार
ए दिल ए बेकरार…..
सुख था झूठा सपना
जिसको समझ अपना
सुख को दुख: पर वार
सह ले गम की मार
ए दिल ए बेकरार…..
देख लिया अंजाम
आखिर हुआ नाकाम-२
प्यार बड़ा दुश्‍वार
पा न सका मझधार
ए दिल ए बेकरार…..

http://www.hindi-movies-songs.com से साभार

>गरीबों का हिस्सा गरीबों को दे दो- लताजी का एक और अद्‍भुद गीत

>बहुत दिनों बाद आज लता जी और अनिल बिस्‍वास की जुगलबंदी में एक और दुर्लभ गीत, प्रस्तुत है। पता नहीं इतने मधुर गीत छुपे कैसे रह जाते हैं?
फिल्म: लाडली १९४९
संगीतकार: अनिल बिस्‍वास
गीतकार: सफ़दर’आह’ या प्रेम धवन संशय है। गीत की शैली को देखते हुए प्रेम धवन ही सही लगते हैं।

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गरीबों का हिस्सा गरीबों को दे दो
गरीबों को दे दो – २
गरीबों का…
अमीरोंऽऽऽऽऽऽऽ
अमीरों हमें सूखी रोटी ही दे दो -२
गरीबों का हिस्सा…

जो पहले थी वही है हालत हमारी
थे पहले भी भूखे, है अब भी भिखारी
हमें सांसे है हाथ फैले हुए दो
गरीबों का हिस्सा…

ये ऊंची इमारत, ये रेशम के कपड़े
ना कुटिया ही हमको, ना खादी के टुकड़े
हमें भी तो अपना बदन ढ़ांकने दो-२
गरीबों का हिस्सा…

अगर रूखी सूखी ये खाकर बचेंगे
तो कल को ये गांधी जवाहिर बनेंगे
इन्हें सिर्फ जीने का मौका ही दे दो
गरीबों का हिस्सा…

http://hindi-films-songs.com से साभार

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