एक संगीत पहेली

आज  कोई गीत नहीं!
आज महफिल के श्रोताओं के लिये एक पहेली। पंडित वेंकटेश कुमार का गाया हुआ राग हमीर का यह वीडियो देख  कर बताईये राग   हमीर पर कौनसा प्रसिद्ध हिन्दी (फिल्मी) गीत ढला हुआ है?

 

नहीं पहचान पाये! चलिये पं नचिकेता कुमार को भी सुन लीजिये इस बार तो जरूर पहचान सकेंगे।

 

 

पहचान लिया हो तो बताइये यह राग सुनने में आपको कैसा लगा?

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>एक संगीत पहेली

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आज  कोई गीत नहीं!
आज महफिल के श्रोताओं के लिये एक पहेली। पंडित वेंकटेश कुमार का गाया हुआ राग हमीर का यह वीडियो देख  कर बताईये राग   हमीर पर कौनसा प्रसिद्ध हिन्दी (फिल्मी) गीत ढला हुआ है?

 

नहीं पहचान पाये! चलिये पं नचिकेता कुमार को भी सुन लीजिये इस बार तो जरूर पहचान सकेंगे।

 

 

पहचान लिया हो तो बताइये यह राग सुनने में आपको कैसा लगा?

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सेक्सोफोन और बांसुरी पर राग मालकौंस: जुगलबन्दी

रोज आपको महफिल में फिल्मी गीत और गज़ले सुनाते रहे, कल संजय भाई ने एक तराना ऐसा सुना दिया की पूरे दिन तन मन पर वही छाया रहा। पता नहीं कितनी बार उसे सुना। फिर याद आया एक तराना ये तराना जो कर्नाटक शैली की सुप्रसिद्ध जोड़ी कादरी गोपालनाथ और प्रवीण गोदखिन्दी Kadri Gopalnath & Pravin Godkhindi ( उच्चारण में गलती हो तो क्षमा करें)
इस तराने के लिये दोनो कलाकारों ने सेक्सोफोन और बांसुरी पर जुगलबंदी की है। यह तराना सुनने के लिये आपको १४ मिनिट खर्च करने होंगे, क्यों कि बीच में द्रुत लय में सुन्दर आलाप भी है; हो सकता है कि १४ मिनिट आपके लिये बहुत ज्यादा हो परन्तु मुझे विश्वास है कि इस जुगलबंदी को सुनने के बाद आपको जो आनन्द मिलेगा वह बहुत बढ़िया होगा, आपको यह नहीं लगेगा कि टाइम खोटी किया।
हाँ पूरा आनन्द लेने के लिये पूरी जुगलबंदी सुननी होगी। देखते हैं आपको पसन्द आई तो खजाने में से कुछ और बन्दिशे निकालते हैं।
लीजिये सुनिये

चलते चलते

लखनऊ के डॉ प्रभात टण्डन भी अब महफिल के सदस्य हैं कल ही उनहोने जगजीत सिंह के गाये हुए और निदा फ़ाजली के लिखे दोहे पोस्ट किये है, आपने सुने कि नहीं? डॉ साहब का स्वागत है।

साथ ही नीरज भाई ने आशाजी के गाये हुए और मदनमोहन जी के संगीतबद्ध तीन सुन्दर गीत भी पोस्ट किये हैं, उन्हें भी जरूर सुनिये

>सेक्सोफोन और बांसुरी पर राग मालकौंस: जुगलबन्दी

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रोज आपको महफिल में फिल्मी गीत और गज़ले सुनाते रहे, कल संजय भाई ने एक तराना ऐसा सुना दिया की पूरे दिन तन मन पर वही छाया रहा। पता नहीं कितनी बार उसे सुना। फिर याद आया एक तराना ये तराना जो कर्नाटक शैली की सुप्रसिद्ध जोड़ी कादरी गोपालनाथ और प्रवीण गोदखिन्दी Kadri Gopalnath & Pravin Godkhindi ( उच्चारण में गलती हो तो क्षमा करें)
इस तराने के लिये दोनो कलाकारों ने सेक्सोफोन और बांसुरी पर जुगलबंदी की है। यह तराना सुनने के लिये आपको १४ मिनिट खर्च करने होंगे, क्यों कि बीच में द्रुत लय में सुन्दर आलाप भी है; हो सकता है कि १४ मिनिट आपके लिये बहुत ज्यादा हो परन्तु मुझे विश्वास है कि इस जुगलबंदी को सुनने के बाद आपको जो आनन्द मिलेगा वह बहुत बढ़िया होगा, आपको यह नहीं लगेगा कि टाइम खोटी किया।
हाँ पूरा आनन्द लेने के लिये पूरी जुगलबंदी सुननी होगी। देखते हैं आपको पसन्द आई तो खजाने में से कुछ और बन्दिशे निकालते हैं।
लीजिये सुनिये

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चलते चलते

लखनऊ के डॉ प्रभात टण्डन भी अब महफिल के सदस्य हैं कल ही उनहोने जगजीत सिंह के गाये हुए और निदा फ़ाजली के लिखे दोहे पोस्ट किये है, आपने सुने कि नहीं? डॉ साहब का स्वागत है।

साथ ही नीरज भाई ने आशाजी के गाये हुए और मदनमोहन जी के संगीतबद्ध तीन सुन्दर गीत भी पोस्ट किये हैं, उन्हें भी जरूर सुनिये

हमारी ख़ाक में मिलती तमन्ना देखते जाओ: राग हंसकिंकिनी पर आधारित एक गीत

लीजिये आज एक बार फिर शास्त्रीय संगीत पर आधारित एक खूबसूरत गीत.. फिल्म नया ज़माना (1957)। यह गाना राग हंसकंकिनी/कंकिनी पर आधारित है। इस गीत की सबसे बढ़िया बातें है वो है स्व. प्रेम धवन का एकदम बढ़िया गीत और उतना ही बढ़िया कनु घोष का संगीत।

यह गीत फिल्म नया जमाना  का है, जिसमें मुख्य भूमिकायें माला सिन्हा और प्रदीप कुमार  ने निभाई थी। इस गीत को गाया है  लता जी ने। लीजिये आनन्द उठाईये इस मधुर गीत का।

 

कहाँ जाते हो,
टूटा दिल, हमारा देखते जाओ
किए जाते हो हमको
बेसहारा देखते जाओ
कहाँ जाते हो…
करूँ तो क्या करूँ
अब मैं तुम्हारी इस निशानी को
अधूरी रह गई अपनी
तमन्ना देखते जाओ
कहाँ जाते हो…
कली खिलने भी ना पाई
बहारें रूठ कर चल दी
दिया क़िस्मत ने कैसा
हमको धोखा देखते जाओ
कहाँ जाते हो…
तमन्ना थी की दम निकले
हमारा तेरी बाहों में
हमारी ख़ाक में मिलती
तमन्ना देखते जाओ
कहाँ जाते हो..

>हमारी ख़ाक में मिलती तमन्ना देखते जाओ: राग हंसकिंकिनी पर आधारित एक गीत

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लीजिये आज एक बार फिर शास्त्रीय संगीत पर आधारित एक खूबसूरत गीत.. फिल्म नया ज़माना (1957)। यह गाना राग हंसकंकिनी/कंकिनी पर आधारित है। इस गीत की सबसे बढ़िया बातें है वो है स्व. प्रेम धवन का एकदम बढ़िया गीत और उतना ही बढ़िया कनु घोष का संगीत।

यह गीत फिल्म नया जमाना  का है, जिसमें मुख्य भूमिकायें माला सिन्हा और प्रदीप कुमार  ने निभाई थी। इस गीत को गाया है  लता जी ने। लीजिये आनन्द उठाईये इस मधुर गीत का।

 

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कहाँ जाते हो,
टूटा दिल, हमारा देखते जाओ
किए जाते हो हमको
बेसहारा देखते जाओ
कहाँ जाते हो…
करूँ तो क्या करूँ
अब मैं तुम्हारी इस निशानी को
अधूरी रह गई अपनी
तमन्ना देखते जाओ
कहाँ जाते हो…
कली खिलने भी ना पाई
बहारें रूठ कर चल दी
दिया क़िस्मत ने कैसा
हमको धोखा देखते जाओ
कहाँ जाते हो…
तमन्ना थी की दम निकले
हमारा तेरी बाहों में
हमारी ख़ाक में मिलती
तमन्ना देखते जाओ
कहाँ जाते हो..