अम्‍बूमंणि रामदौस और उनकी विषय वस्‍तु

आज खबर पढ़ रहा था तो पढ़ने में आया कि कोई हालीवुड स्टार ह्यूं जैकमैन 2008 के सबसे कामोत्‍तेजक अर्थात Sexy पुरुष चुने गए है। भारतीय के लिये शर्म की बात यह की भारत का को नंग धडग आदमी इस दौड़ में शामिल नही हो पाया। जॉन अब्राहम, सलमान, हासमी पता नही कितने कपड़ा उतारू एक्‍टरों की मेहनत पर बट्टा लग गया। ये भारतीय एक्‍टर कितनी मेहनत करते है कमोत्तेजक कहलाने में किन्‍तु हो गया ढ़ाक के तीन पात, देश की बात होने पर सिर्फ इन्‍ही के चर्चे होते है किन्‍तु जहॉं विदेश की बात आती है, दुनिया में इनका नामो निशान नही होता है, बिल्‍कुल क्रिकेट खिलाडियों की तरह भारत में जो खेलने आता है उसे पटक के हरा देते है, किन्‍तु जब विदेश दौरे में हार जाते है तो कहते है कि बेईमानी कर के जीत लिये, खिसियानी बिल्‍ली खम्‍भा नोचे, ऐसे है भारतीय एक्‍टर और भारतीय क्रिकेट टीम।

आज कल तो सेक्‍स और सेक्‍सी दोनो ने समाज में बहुत गंदा वातावरण फैला दिया है। इसी में रामदौस भी अड़ गये है कि अब मर्द की शादी मर्द से करा के ही दम लेगे, चाहे मनमोहन साहब कितने खफ़ा क्‍यो न हो ? मनमोहन साहब भी करे तो करे क्‍या चार दिन के मेहमान जो ठहरे पता नही अगली बार कुर्सी मिले भी कि न मिले, गे मामले में उनकी रूचि देख कर लगता है कि शायद कही साहब अपने लिये नये पार्टनर तो नही खोज रहे है, अब पता चला कि Sexy Man ऐसे लोगो के लिये चुना जाता है अब तो उन्‍हे सबसे कमोत्तजक पुरूष ह्यूं जैकमैन पंसद आ ही जायेगे सूत्रों से पता चला है कि उन्‍हे पीएम इन वेटिंग से जितना खतरा नही है उससे ज्‍यादा राहुल बाबा से है। चुनाव का समय है सुनाई दे रहा था कि राहुल बाबा को 84 के सिक्ख दंगो का खेद है, मुस्लिम इन्दिरा दादी ने सिक्‍खो पर दंड़ा करने में कसर नही छोड़ी थी अब ईसाई पुत्र राहुल हिन्‍दुओं पर दंड़ा किये पड़े है। चुनाव आ रहा है तो राजनीति खेली ही जायेगी, वो चाहे अच्‍छी हो या गंदी राजनीति तो राजनीति होती है, आज कल केन्‍द्रीय खाजने में कमी की खबर आ रही है, जॉच करने में पता चला कि कुछ मनमोहन साहब मैडम के आदेश पर अमेरिका के गरीब में बॉट आये और जो कुछ बचा वो मुस्लिम अनुदान आयोग में चला गया, मुस्लिम छात्रों को वजीफा।

खैर बहुत बेबात की बात हो गई, पर रामदौस वाली बात शतप्रतिशत सही है, तभी वे समलैंगिक (gay) सम्बनधों के पीछे पड़ा है, पहले से ही यह आदमी बद्दिमाग लग रहा था किन्‍तु आज कल चुनाव में हार के डर पता नही क्‍या क्‍या कर रहे है। कुछ लोगो का कहना है कि इसमें गलत क्‍या है तो मेरा कहना है कि हर प्रश्न का उत्‍तर नही होता है। अब भाई आका वही है तो जो करे सर आखो में, अब वो मर्द को दर्द देना चाहते है तो हम क्‍या कर सकते है, हमारी Constituency से भी नही है कि हम उन्हे उनके कृत्‍य से रोकने के लिये वोट न देने की घमकी दे सकते है। अगर वे हमारी Constituency से होते भी तो कोई फर्क नही पड़ता, वे इतना सब पड़ने के बाद स्‍यवं जान जाते कि बंदा हमको तो वोट नही ही देगा।

खैर शेष फिर ……………..