>राजशेखर रेड्डी के गम में मरने लिए 5000-5000 रूपये बांटे कांग्रेस ने

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अभी पिछले दिनों आँध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री राजशेखर रेड्डी की मौत विमान दुर्घटना में हो गई.सभी समाचार चैनल में कहा गया  कि  उनकी मौत के दुख में 462 लोगो ने आत्महत्या कर ली. आश्चर्य होता है न आज के समय में किसी नेता के लिए इतना प्यार देखकर!!! लेकिन बाद में मालूम पड़ा की ये प्यार नेता के लिए नहीं बल्कि पैसे के लिए था मतलब की कांग्रेस सरकार ने देश को जितने भी लोगो को खुदख़ुशी करने वालों में गिनाया था वो सभी खुदखुशी के कारण नहीं बल्कि अपनी स्वाभाविक मौत मरे थे.
जी हां एक सनसनीखेज़ खुलासे में ये बात सामने आई है की मरने वाले लोगो के घर वालो को सरकार ने 5000-5000 Rs. दिए थे और बदले में उनलोगों को ये बोलना था की “मरने वाला आदमी अपनी स्वाभाविक मौत नहीं मरा बल्कि उसने मुख्यमंत्री के गम में आत्महत्या की है.”
शर्म आती है ये बाते सुन-सुन कर की आज की कांग्रेस इतनी गिर चुकी है की लोगो की मौत पर भी राजनीति करने लगी
काश ये पैसा उन लोगो को मरने से पहले दिया जाता तो शायद वो दुनिया में होते .
 { ऑरकुट पर भाव्यांश के स्क्रेप का अंश  } 

>सेक्स चर्चा ….. राम ……….राम ……. लाहौल बिलाकुवत …………..

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अरे , भाई यह क्या गजब हो गया .मैंने तो सेक्स / काम – चर्चा की कड़ियाँ लिखनी शुरू कर दी .अब लोगों को कैसे साबित करूँगा कि मैं ब्लॉग हित ,देश हित ,जन हित …. में लिखता हूँ  ! . सेक्स /काम का जन से क्या सरोकार !  कुछ अन्य ब्लॉगर को देखो धर्म -चर्चा में विलीन हैं, अपने -अपने ब्लॉग पर अवतारों की चर्चा  करते हैं , और मैं मूढ़ सेक्स की बात करता हूँ ! छि छि छि ….. मैं लोगों को विचारकों के हवाले से कहता हूँ कि सेक्स प्रेम की यात्रा का उदगम स्थल है . काम जीवन का बाह्य सच है जिसे अनुभव कर जिससे तृप्त होकर हीं प्रेम को और प्रेम में डूब कर परमात्मा को पाया जा सकता  है . जब जीवन की सबसे मूल बीज प्रक्रिया को ना समझ पाया तो इश्वर को जानने का सवाल नहीं बनता .
मान लीजिये मुझे हरिद्वार जाना हो और मैं तो दिल्ली रहता हूँ . तब पहला काम क्या होगा ? पहला काम होगा कि मैं दिल्ली के बारे में जानु दिल्ली कहाँj है , किस दिशा में है , आदि तब हरिद्वार का पता लागों कि किस दिशा में ,कितनी दूरी  पर कहाँ स्थित है . मतलब , पहले जहाँ मैं खड़ा हूँ वह स्थान तो मालुम हो कहाँ है क्या है आदि आदि ………………अर्थात यात्रा का प्रारंभ पहले है अंत बाद में . ठीक उसी तरह जीवन के सफ़र में मोक्ष / परमात्मा की प्राप्ति मानव का ध्येय है . हम जहाँ खड़े हैं वह प्राथमिक बिंदु ही सेक्स है , जहाँ पैदा हुए वह सेक्स है , तब इसके बगैर इश्वर की चर्चा व्यर्थ न होगी ?
मेरे आलेख में लोग सेक्स का प्रचलित रूप ( मस्त राम की कहानी) ढूंढने आते हैं . नहीं मिलता तो मैं क्या करूँ क्योंकि मेरा सेक्स गूगल सर्च में आने वाले सेक्स से अलग है . मेरा सेक्स उन तमाम विचारकों मसलन ,वात्स्यायन,फ्रायड ,ओशो आदि से प्रभावित है . इन सब के विचारों में अपनी समझ खोल कर बनाई जा रही अवधारणा है . ऐसे समय में जब दुनिया में प्रेम घट रहा है , सेक्स विकृत हो रहा है , समाज द्वारा स्थायित्व के लिए बनाई गयी व्यवस्था विवाह /शादी टूट  रही है , दुनिया में एक दुसरे के प्रति नफरत बढ़ती जा रही है , आध्यात्मिकता की घोर जरुरत है . आध्यात्म से काम को ,सेक्स को जोड़े जाने की टूटी कड़ियों को मिलाने की आवश्यकता है . लेकिन नहीं मुझे यह सब नहीं लिखना चाहिए यह समाज के खिलाफ है !   विद्यालयों में सेक्स शिक्षा के नाम पर सेक्स कैसे करें , ऐड्स से कैसे बचें, कंडोम क्या है ,आदि बताया जा रहा है .लेकिन फ़िर भी मुझे चुप रहना चाहिए ,आप सभी को चुप रहना चाहिए क्योंकि अब तक हम चुप रहते आये हैं सेक्स को नितांत निजी और बिस्तर भर का उपक्रम मानते ए हैं ! भला वर्षों की मानसिकता को कैसे ठोकर मार  दें ? मन  चाहे दिन-रात चिंतन में लगा रहे , इंटरनेट पर बैठते हीं भले उंगलियाँ गूगल में सेक्स टाइप करती रहे पर हम चर्चा नहीं करेंगे ! क्योंकि इससे देश हित ,समाज हित , नहीं  जुड़े हैं . हम अवतारों की झूठी अफवाहें जरुर फैलायेंगे , किसी भी बिल्डिंग को धार्मिक स्थल की नक़ल बताएँगे , दूसरे धर्म को गाली देंगे , आतंकवादियों / नक्सलियों का समर्थन करेंगे पर साहब सेक्स चर्चा ….. राम ……….राम …………… लाहौल बिलाकुवत …………..

>भारत आर्थिक उपलब्धियों को लेकर उच्च विश्व रैंकिंग

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जब भारत आर्थिक उपलब्धियों को लेकर उच्च विश्व रैंकिंग प्राप्त करने के लिए तैयार खड़ा है, घोर गरीबी हटाना एवं करोड़ों नागरिकों को जीवन-यापन का समुचित स्तर प्रदान करना उसकी सबसे बड़ी चुनौतियाँ बन रही हैं। निस्संदेह इस सत्य की पहचान करते हुए तथा उसे स्वीकार करते हुए इस तथ्य की भी उपेक्षा नहीं की जा सकती कि हाल ही के दशकों में बड़ी संख्या में लोगों को गरीबी रेखा से ऊपर उठाने में सफलता मिली है। इक्कीसवीं शताब्दी के प्रारंभ में भारत की सामाजिक-आर्थिक वास्तविकता का केवल एक निराशाजनक चित्र प्रस्तुत करना उचित नहीं है। वास्तव में, आर्थिक सुधार से कतिपय क्षेत्रों में अपेक्षाकृत अधिक तीव्र गति से वृध्दि के कारण भारत समृध्दि के पथ पर अग्रसर है।

साथ-ही-साथ हमें वर्तमान भारतीय वस्तुस्थिति के नकारात्मक पक्ष की उपेक्षा नहीं करनी चाहिए। हमारी आबादी का एक बहुत बड़ा हिस्सा अभी भी गरीबी का शिकार है। समान रूप से अमीर और गरीब के बीच, शहरों तथा गाँवों के बीच तेजी से बढ़ती खाई भी चिंताजनक है। इसके कारण गाँवों को छोड़कर लोग शहरों की ओर भाग रहे हैं, जो प्रक्रिया वर्ष 1990 के दशक में आर्थिक सुधारों के बाद अधिक तीव्र हुई है। विकास की प्रक्रिया में क्षेत्रीय विषमताओं से समस्या और अधिक दुरूह हो गई है, जहाँ उत्तरी और पूर्वी राज्य दक्षिण और पश्चिम के राज्यों से काफी पीछे रह गए हैं।

मानव संसाधन भारत की बहुमूल्य संपदा है। तथापि मानव संसाधन तभी उपयोगी हो सकता है, जब रोटी, कपड़ा, मकान, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार तथा उत्तम प्राकृतिक और सामाजिक परिवेश जैसी बुनियादी जरूरतें सबके लिए पूरी हों। यदि देश में मानव संसाधन का बहुत बड़ा भाग गरीब है तो कोई भी देश समृध्द नहीं हो सकता। मुझे हमेशा इस बात पर आश्चर्य होता है, यदि भारत अपनी एक-तिहाई भली प्रकार से रह रही आबादी के बल पर इतनी उपलब्धि हासिल कर सकता है तो जब सभी मानव संसाधनों का पूरी तरह से उपयोग होगा, तब यह देश कहाँ पहुँच जाएगा? कितनी ऊँचाइयों को छू लेगा?

>"लव जिहाद" सांप्रदायिक भड़ास निकलने का जरिया ….. जरुर पढिये

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अपने जीवन के 17 बसन्त देख चुकी श्रुति (काल्पनिक नाम) को यह नहीं मालूम था कि जो युवक विद्यालय जाते समय रास्ते में मिलता रहा और वे एक दूसरे के काफी नजदीक आ गये थे वह उससे प्रेम नहीं करता है बल्कि पूर्वांचल में चल रहे लव जिहाद का एक जेहादी है और वह उसे दलालों के जरियें खाडी देश के किसी शेख के हाथों बेच देगा। वह खुशकिश्मत थी कि बच गयी अन्यथा उसका भी वहीं हाल हुआ होता जो इस जेहाद की जद में फंस चुकी लड़कियों का हो रहा है।

आजमगढ़ जनपद के अहरौला कस्बे की रहने वाली श्रुति अग्रहरि पिछले एक माह से विद्यालय में पढ़ने जाती तो उसके पीछे एक युवक जो दिखने में स्मार्ट था वह लग जाता था। श्रुति और उसकी आंखे चार हो गयी। और वह उस युवक से प्रेम कर बैठी। वह युवक स्वंय को फूलपुर कस्बे के एक वैश्य परिवार का बताता था। बात शारीरिक सम्बन्धों तक नहीं पहुंची थी।इसी बीच 8 सितम्बर 2009 को श्रुति अचानक लापता हो गयी। परिजनों ने खोजबीन की इसी दौरान उन्हें सूचना मिली कि उनकी लड़की जौनपुर जनपद खुटहन के शाहगंज थानान्तगर्त अरन्द गांव के निवासी राशिद पुत्र जकरिया व अब्दुल पुत्र सन्तार जो शाहगंज के पक्का पोखरा के पास रहता है उन दोनों के साथ 8 सितम्बर को देखी गयी। इस बात की जानकारी जब परिजनों ने 9 सितम्बर को अहरौला थाने को दी तो थानाध्यक्ष ने कोई कार्यवाही नहीं की। इसके बाद परिजनों और अहरौला के कुछ लोग खुद अब्दुल के घर पहुंच गये और वहां से उसे पकड़कर लाये तथा अहरौला पुलिस को साँप दिया। 9 सितम्बर को जब ग्रामीणों ने आरोपी को खुद ही पुलिस को सौप दिया फिर भी पुलिस 24 घण्टे तक मूकदर्शक बनी रही। इसके बाद जब ग्रामीणों ने 10 सितम्बर को अहरौला थाने में तोड़ फोड़ शुरू कर दी तो पुलिस सक्रिय हुई और आरोपी पर थर्ड डिग्री का इस्तेमाल किया तो उसने जो रहस्योदघाटन किया उसके बाद तो पुलिस के पैरों तले से जमीन ही खिसक गयी पुलिस बैकफुट पर नजर आने लगी। उसने बताया कि युवती को उसने आजमगढ़ के फूलपुर कस्बे में रहने वाले बसपा नेता और पिछला विधानसभा चुनाव लड़ चुके इमरान खान उर्फ हिटलर के घर में रखा है। पुलिस इमरान खां उर्फ हिटलर के घर पर छापेमारी को लेकर मौन बनी रही। इसके बाद तों अहरौला के निवासियों और युवती के परिजनों ने ही सम्प्रदाय विशेष के प्रबल विरोध के बावजूद हिटलर के घर में घुसकर युवती को बरामद कर लिया और फूलपुर कोतवाली पर लाये। पुलिस सिर्फ तमाशबीन की भूमिका में रही। इसके बाद जब युवती ने बताया कि उसके साथ 10-12 की संख्या में अन्य युवतियां भी उस मकान में थी तो पुलिस को मानों सांप ही सूंघ गया। थाने से मात्र 200 मीटर की दूरी पर स्थित बसपा नेता के उस मकान पर छापेमारी करने में उसने 4 घंटे का समय लगा दिया। इसके बाद जब पुलिस छापेमारी करने पहुंुची तो उस मकान में आदमी तो क्या कोई परिन्दा भी नहीं मिला। इस घटना में राशिद भी पुलिस की गिरफ्त में आया लेकिन पुलिसिया पूछताछ में उसने क्या बताया यह बताने से पुलिस कतराती रही। 17 वर्षीय श्रुति को पुलिस फूलपुर कोतवाली ले गयी। और पहले तो वह उसके चरित्र हनन का प्रयास करती रही लेकिन जब वह अपनी बात पर अड़ी रही तो पुलिस ने मुकदमा दर्ज लिया और आगे की कार्यवाही कर रही है लेकिन वह भी घटना की तह में जाने से कतरा रही है। कारण यह है मामला काफी हाइप्रोफाइल नजर आ रहा है।

श्रुति बताती है कि 8 सितम्बर को जब वह स्कूल से आ रही थी तो उसी समय तीन की संख्या में लोगों ने उसके मुंह पर रूमाल रखकर उसे दबोच लिया। इसके बाद वह बेहोश हो गयी। जब वह होश में आयी तो देखा कि वह एक कमरे में है। उसके शरीर पर बुर्के जैसा वस्त्र है। उसके नाखून काट दिये गये है तथा गले की माला और हाथ का रक्षासूत्र भी काट लिया गया था। कुल मिलाकर उसकी पहचान समाप्त करने की कोशिश की गयी थी। उसके बाद 9 सितम्बर की दोपहर में फिर उसे बेहोश कर दिया गया। इसके बाद वह दूसरे स्थान पर थी। उसके पास खान नामक एक आदमी था जो मोबाइल पर बात कर रहा था कि लड़की को कहा पहुंचायें सर किस रास्ते व कैसे ले जाय इसके बाद पुन:उसे बेहोश कर दिया गया। जब उसे होश आया तो उसने अपने आपकों दूसरे कमरे में पाया जहां 10-12 की संख्या में और भी लड़कियां थी। होश आने के बाद उसे दुसरे कमरे में बन्द कर दिया गया जिसमें एक और महिला थी जिसे खान की बीबी कहा जा रहा था। 10 सितम्बर की सुबह फिर खान ने बात की। सर लड़की को क्या करें बात समाप्त होने के बाद खान की बीबी ने कहा कि मुंह धुल लों। इसके बाद उसने उसे जबरिया नकब पहनाना शुरू कर दिया। इसी बीच हंगामा हुआ और किसी ने दरवाजा खटखटाया फिर शोर हुआ तो मैने खान की बीबी का प्रतिरोध करके दरवाजा खोल दिया। इसके बाद मेरे परिजन मुझे वहां से निकालकर ले गये। इस बात की जानकारी होने के बाद पुलिस ने दुबारा वहां पर छापेमारी करने में 4घण्टे लगा दिये। तब तक वहां कोई नहीं था। प्यार की आड़ में चल रहे इस धंधे को ही लब जिहाद का नाम दिया गया है जिसमें सम्प्रदाय विशेष के युवक येन-केन-प्रकारेण हिन्दु युवतियों को अपने माया जाल में फंसाते है। और अपने बॉस को सौप देते है। बॉस उन युवतियों का क्या करता है यह तो मुख्य सरगना की गिरफ्तारी के बाद ही पता चलेगा। अभी तक पुलिस न तो मुख्य सरगना को गिरफ्तार कर सकी है और न ही इस प्रयास में ही दिखाई दे रहीं है ताकि लब जिहाद के मुख्य सरगना को दबोचा जा सके।

-डॉ। ईश्वरचंद्र त्रिपाठी (साभार :प्रवक्ता डौट कॉम )

लेखक ने अप्रत्यक्ष तौर पर किस ओर इशारा किया है यह कहने की जरुरत नहीं है । क्या एक संप्रदाय विशेष सचमुच ऐसा कर रहा है ? क्या कोई ऐसा कर रहा है तो इसके पीछे कौन सी सामाजिक परिस्थिति है ? क्या ऐसा नहीं कि दो बड़े समुदायों के मध्य फैली तरह-तरह की भ्रांतियां इसे बढावा दे रही है ? अक्सर मुसलमान युवकों के बीच इस बात की चर्चा होती है कि हिंदू लड़की के साथ सेक्स करने पर जन्नत हासिल होगी और हिंदू युवक कहते हैं एक मुस्लिम लड़की के साथ सेक्स करने पर सौ यज्ञों का पुन्य मिलेगा । क्या इन दुष्प्रचारों से तो ऐसा नहीं हो रहा ? समाज को अपनी सोच बदलनी होगी नही तो ये लव के नाम पर हो रहा जिहाद हमें ले डूबेगा ।



>फतवा, फतवा, फतवा, फतवा

>बलात्कार की शिकार लड़की को 200 कोड़े मारने की सजा
जेद्दाह में एक सऊदी अदालत ने पिछले साल सामूहिक बलात्कार की शिकार लड़की को 90 कोड़े मारने की सजा दी थी। उसके वकील ने इस सजा के खिलाफ अपील की तो अदालत ने सजा बढ़ा दी और हुक्म दिया: ‘200 कोड़े मारे जाएं।’ लड़की को 6 महीने कैद की सजा भी सुना दी। अदालत का कहना है कि उसने अपनी बात मीडिया तक पहुंचाकर न्याय की प्रक्रिया पर असर डालने की कोशिश की। कोर्ट ने अभियुक्तों की सजा भी दुगनी कर दी। इस फैसले से वकील भी हैरान हैं। बहस छिड़ गई है कि 21वीं सदी में सऊदी अरब में औरतों का दर्जा क्या है? उस पर जुल्म तो करता है मर्द, लेकिन सबसे ज्यादा सजा भी औरत को ही दी जाती है।

बेटी से निकाह कर उसे गर्भवती किया
पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले में एक व्यक्ति ने सारी मर्यादाओं को तोड़ते हुए अपनी सगी बेटी से ही शादी कर ली और उसे गर्भवती भी कर दिया है। यही नहीं , वह इसे सही ठहराने के लिए कहा रहा है कि इस रिश्ते को खुदा की मंजूरी है। सबसे आश्चर्यजनक बात तो यह है कि इस निकाह का गवाह कोई और नहीं खुद लड़की की मां और उस शख्स की बीवी थी। जलपाईगुड़ी के कसाईझोरा गांव के रहने वाले अफज़ुद्दीन अली ने गांव वालों से छिपाकर अपनी बेटी से निकाह किया था इसलिए उस समय किसी को इस बारे में पता नहीं चला। अब छह महीने बाद लड़की गर्भवती हो गई है ।

मस्जिद में नमाज अदा करने पर महिलाओं को मिला फतवा
असम के हाउली टाउन में कुछ महिलाओं के खिलाफ फतवा जारी किया गया क्योंकि उन्होंने एक मस्जिद के भीतर जाकर नमाज अदा की थी। असम के इस मुस्लिम बाहुल्य इलाके की शांति उस समय भंग हो गई , जब 29 जून शुक्रवार को यहां की एक मस्जिद में औरतों के एक समूह ने अलग से बनी एक जगह पर बैठकर जुमे की नमाज अदा की। राज्य भर से आई इन महिलाओं ने मॉडरेट्स के नेतृत्व में मस्जिद में प्रवेश किया। इस मामले में जमाते इस्लामी ने कहा कि कुरान में महिलाओं के मस्जिद में नमाज पढ़ने की मनाही नहीं है। जिले के दीनी तालीम बोर्ड ऑफ द कम्युनिटी ने इस कदम का विरोध करते हुए कहा कि इस तरीके की हरकत गैरइस्लामी है। बोर्ड ने मस्जिद में महिलाओं द्वारा नमाज करने को रोकने के लिए फतवा भी जारी किया।

कम कपड़े वाली महिलाएं लावारिस गोश्त की तरह
एक मौलवी के महिलाओं के लिबास पर दिए गए बयान से ऑस्ट्रेलिया में अच्छा खासा विवाद उठ खड़ा हुआ है। मौलवी ने कहा है कि कम कपड़े पहनने वाली महिलाएं लावारिस गोश्त की तरह होती हैं , जो ‘ भूखे जानवरों ‘ को अपनी ओर खींचता है। रमजान के महीने में सिडनी के शेख ताजदीन अल-हिलाली की तकरीर ने ऑस्ट्रेलिया में महिला लीडर्स का पारा चढ़ा दिया। शेख ने अपनी तकरीर में कहा कि सिडनी में होने वाले गैंग रेप की वारदातों के लिए के लिए पूरी तरह से रेप करने वालों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। 500 लोगों की धार्मिक सभा को संबोधित करते हुए शेख हिलाली ने कहा , ‘ अगर आप खुला हुआ गोश्त गली या पार्क या किसी और खुले हुए स्थान पर रख देते हैं और बिल्लियां आकर उसे खा जाएं तो गलती किसकी है , बिल्लियों की या खुले हुए गोश्त की ?’

कामकाजी महिलाएं पुरुषों को दूध पिलाएं
काहिरा : मिस्र में पिछले दिनों आए दो अजीबोगरीब फतवों ने अजीब सी स्थिति पैदा कर दी है। ये फतवे किसी ऐरे-गैरे की ओर से नहीं बल्कि देश के टॉप मौलवियों की ओर से जारी किए जा रहे हैं।
देश के बड़े मुफ्तियों में से एक इज्ज़ात आतियाह ने कुछ ही दिन पहले नौकरीपेशा महिलाओं द्वारा अपने कुंआरे पुरुष को-वर्करों को कम से कम 5 बार अपनी छाती का दूध पिलाने का फतवा जारी किया। तर्क यह दिया गया कि इससे उनमें मां-बेटों की रिलेशनशिप बनेगी और अकेलेपन के दौरान वे किसी भी इस्लामिक मान्यता को तोड़ने से बचेंगे।

गले लगाना बना फतवे का कारण
इस्लामाबाद की लाल मस्जिद के धर्मगुरुओं ने पर्यटन मंत्री नीलोफर बख्तियार के खिलाफ तालिबानी शैली में एक फतवा जारी किया है और उन्हें तुरंत हटाने की मांग की है। बख्तियार पर आरोप है कि उन्होंने फ्रांस में पैराग्लाइडिंग के दौरान अपने इंस्ट्रक्टर को गले लगाया। इसकी वजह से इस्लाम बदनाम हुआ है।

ससुर को पति पति को बेटा
एक फतवा की शिकार मुजफरनगर की ईमराना भी हुई। जो अपने ससुर के हवश का शिकार होने के बाद उसे आपने ससुर को पति ओर पति को बेटा मानने को कहा ओर ऐसा ना करने पे उसे भी फतवा जारी करने की धमकी मिली।

फतवा क्या है
जो लोग फतवों के बारे में नहीं जानते, उन्‍हें लगेगा कि यह कैसा समुदाय है, जो ऐसे फतवों पर जीता है। फतवा अरबी का लफ्ज़ है। इसका मायने होता है- किसी मामले में आलिम ए दीन की शरीअत के मुताबिक दी गयी राय। ये राय जिंदगी से जुड़े किसी भी मामले पर दी जा सकती है। फतवा यूँ ही नहीं दे दिया जाता है। फतवा कोई मांगता है तो दिया जाता है, फतवा जारी नहीं होता है। हर उलमा जो भी कहता है, वह भी फतवा नहीं हो सकता है। फतवे के साथ एक और बात ध्‍यान देने वाली है कि हिन्‍दुस्‍तान में फतवा मानने की कोई बाध्‍यता नहीं है। फतवा महज़ एक राय है। मानना न मानना, मांगने वाले की नीयत पर निर्भर करता है।

>कुंवारी बेटियों ने नंगे होकर हल चलाया

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बारिश के लिए लड़कियों ने नंगी होकर हल चलाया ” । बिहार के बांके बाज़ार कस्बे में किसानों की मर्जी पर उनकी कुंवारी बेटियों ने ऐसा किया । प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक लड़कियों ने सूर्यास्त के बाद मंत्रोचारण के साथ खेतों में हल चलाया और इस काम में गाँव की महिलाओं ने उनकी मदद की ।

पानी के लिए सारी दुनिया में हाहाकार मचा है । मौनसून की बेरुखी से बिहार-यूपी में किसानों की शामत आई हुई है । बारिश न हुई तो खेती –बाड़ी चौपट ,खाने को अन्न मिलना मुश्किल हो जाएगा । फसल के मौके पर बादलों के देव की नाराजगी से खौफजदा इन किसानों की आंखों में विदर्भ और बुंदेलखंड के दृश्य तैरते रहते हैं । जब इन्सान डरा हुआ हो तो अंधविश्वास की डोर और भी पक्की हो जाती है ।यूपी- बिहार के विभिन्न इलाकों में आए दिन देवराज इन्द्र को मनाने के लिए तरह -तरह के टोटके कर रहे हैं । कहीं मेढक-मेढकी की शादी करवाई जा रही है तो कहीं बैलों की जगह लोग ख़ुद जुए में लग खेत जोत रहे हैं । ऐसे में इस घटना को अंधविश्वास कहें या कुछ भी पर इन ग्रामीण किसानों को पूरा भरोसा है कि इन्द्र को भी शर्म आएगी और वो जलवृष्टि अवश्य करेंगे ।

>सच है तो क्या नंगे होकर घूमा जाए?

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अभी हाल ही में टीवी पर एक कार्यक्रम शुरू हुआ ‘सच का सामना’। पहले लग रहा था कि कार्यक्रम में कुछ विशेष होगा किन्तु जब आये दिन इसके ट्रेलर दिखाये गये और बाद में इसकी पहली ही कड़ी के कुछ अंशों को देखा तो लगा कि हम भारतीय भी विकास की राह में कुछ ज्यादा ही आगे आ गये हैं।
21 सवाल और फिर सच और झूठ का निर्णय। अन्त में सब कुछ सच्चा तो एक करोड़ नहीं तो टाँय-टाँय फिस्स। सवाल कोई ऐसे नहीं जो आपकी मेधा का परीक्षण करें। सवाल ऐसे नहीं जो आपकी क्षमता को सिद्ध करें। सवाल वे भी नहीं जिनसे आपकी सामाजिक स्थिति का आकलन होता हो। इसके अलावा सवाल ऐसे भी नहीं जिनके माध्यम से कहा जा सके कि आपने सच का सामना करने की हिम्मत जुटाई।
सवाल ऐसे के परिवार टूट सकें। सवाल ऐसे कि परिवार बिखर सकें। सवाल इस दर्जे के कि आपस में अविश्वास पैदा हो सके। सवाल वो जो कलह मचवा दें। एक बानगी-
क्या आपने अपने पिता को चाँटा मारा?
क्या आप अपनी बेटी की उम्र की लड़की से शारीरिक सम्बन्ध बना चुके हैं?
क्या आप सार्वजनिक स्थल पर निर्वस्त्र हुए हैं?
आदि-आदि।
इस कार्यक्रम की पहली (शायद पहली ही थी) कड़ी में जब कार्यक्रम देखना शुरू किया तो सीट पर बैठी महिला पाँच लाख जीत चुकी थी। एक सवाल पूछा गया कि क्या आप किसी दूसरे आदमी के साथ शारीरिक सम्बन्ध बना सकतीं हैं, यदि आपके पति को इसका पता न लग सके? एक-दो क्षण के विचार करने के बाद उस महिला का जवाब था नहीं।
एक आवाज उभरी जिसने पालीग्राफ का परिणाम बताया और सभी ने सुना ‘आपका जवाब सही नहीं है।’ महिला सन्न रह गई, कहा नो…नो। पास में बैठे उसके पति ने अपने सिर पर हताशा से हाथ फेरा। चश्में को सिर पर चढ़ा कर अपनी आँखों को हाथों से ढँका।
एंकर ने महिला को सीट से उठाकर उसके पति और अन्य परिवारीजनों के पास तक पहुँचाया, साथ ही परिवार के सुखी रहने की बधाई दी। बधाई….सुखी परिवार की। जब वहाँ सवाल रहा हो शारीरिक सम्बन्ध का, बच्चों का साथ मिले इस कारण शादी को स्वीकारते रहने का तो सोचा जा सकता है कि परिवार कितना सुखी होगा?
आखिर ऐसे सवालों के द्वारा हम किस सच का और किस हिम्मत का सामना करने की बात कर रहे हैं?
अपने आपको नंगा दिखाने का प्रयास हमारी हिम्मत है?
अपनी बहू-बेटियों को, लड़को को सरेआम सबके सामने नंगा करवा देना क्या सच का सामना है?
ऐसे कार्यक्रमों में एक करोड़ जीतने के बाद किस तरह की बधाई देंगे? शाबास, अपनी बेटी की उम्र वाली लड़की से सेक्स करने की बधाई। अपने पिता को थप्पड़ मारने की बधाई। किसी के साथ भी कुछ भी कर गुजरने की हिम्मत रखने की बधाई।
यही सब है जो हमें बताता है कि हम कहाँ जा रहे हैं। इस तरह के सवालों के बाद परिवार में पर्दे में रखने जैसा बचा ही क्या है? अब एक आराम तो है कि घर में नये दम्पत्ति के लिए किसी तरह के संकोच की जरूरत नहीं। सब जाने हैं कि बन्द कमरे में पति-पत्नी करते क्या हैं। जगह की कमी के कारण सब एकसाथ लेटो-बैठो। सब लोग सब जानते हैं, सबक सामने ही करने लगो। (यही तो कहते हैं ऐसे कार्यक्रमों का समर्थन करने वाले कि आजकल सभी को पता है कि सच क्या है)
चलिए सच के लिए अब नंगा होकर घूमा जाये क्योंकि सभी को मालूम है कि कपड़ों के भी इन्सान नंगा ही है।

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