>कर्म प्रधान विश्व रचि राखा…

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कर्म ही प्रधान है , कर्म ही मानव को अमीर ,गरीव,महान,तुच्छ बनाता है; वही शान्ति,सुख भी देता है ; अनुरूप कर्म ही -धर्म है । देखिये एक सद कथा –अखंड ज्योति, गायत्री परिवार से साभार। —चित्र पर क्लिक करें ।