>सेक्स चर्चा ….. राम ……….राम ……. लाहौल बिलाकुवत …………..

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अरे , भाई यह क्या गजब हो गया .मैंने तो सेक्स / काम – चर्चा की कड़ियाँ लिखनी शुरू कर दी .अब लोगों को कैसे साबित करूँगा कि मैं ब्लॉग हित ,देश हित ,जन हित …. में लिखता हूँ  ! . सेक्स /काम का जन से क्या सरोकार !  कुछ अन्य ब्लॉगर को देखो धर्म -चर्चा में विलीन हैं, अपने -अपने ब्लॉग पर अवतारों की चर्चा  करते हैं , और मैं मूढ़ सेक्स की बात करता हूँ ! छि छि छि ….. मैं लोगों को विचारकों के हवाले से कहता हूँ कि सेक्स प्रेम की यात्रा का उदगम स्थल है . काम जीवन का बाह्य सच है जिसे अनुभव कर जिससे तृप्त होकर हीं प्रेम को और प्रेम में डूब कर परमात्मा को पाया जा सकता  है . जब जीवन की सबसे मूल बीज प्रक्रिया को ना समझ पाया तो इश्वर को जानने का सवाल नहीं बनता .
मान लीजिये मुझे हरिद्वार जाना हो और मैं तो दिल्ली रहता हूँ . तब पहला काम क्या होगा ? पहला काम होगा कि मैं दिल्ली के बारे में जानु दिल्ली कहाँj है , किस दिशा में है , आदि तब हरिद्वार का पता लागों कि किस दिशा में ,कितनी दूरी  पर कहाँ स्थित है . मतलब , पहले जहाँ मैं खड़ा हूँ वह स्थान तो मालुम हो कहाँ है क्या है आदि आदि ………………अर्थात यात्रा का प्रारंभ पहले है अंत बाद में . ठीक उसी तरह जीवन के सफ़र में मोक्ष / परमात्मा की प्राप्ति मानव का ध्येय है . हम जहाँ खड़े हैं वह प्राथमिक बिंदु ही सेक्स है , जहाँ पैदा हुए वह सेक्स है , तब इसके बगैर इश्वर की चर्चा व्यर्थ न होगी ?
मेरे आलेख में लोग सेक्स का प्रचलित रूप ( मस्त राम की कहानी) ढूंढने आते हैं . नहीं मिलता तो मैं क्या करूँ क्योंकि मेरा सेक्स गूगल सर्च में आने वाले सेक्स से अलग है . मेरा सेक्स उन तमाम विचारकों मसलन ,वात्स्यायन,फ्रायड ,ओशो आदि से प्रभावित है . इन सब के विचारों में अपनी समझ खोल कर बनाई जा रही अवधारणा है . ऐसे समय में जब दुनिया में प्रेम घट रहा है , सेक्स विकृत हो रहा है , समाज द्वारा स्थायित्व के लिए बनाई गयी व्यवस्था विवाह /शादी टूट  रही है , दुनिया में एक दुसरे के प्रति नफरत बढ़ती जा रही है , आध्यात्मिकता की घोर जरुरत है . आध्यात्म से काम को ,सेक्स को जोड़े जाने की टूटी कड़ियों को मिलाने की आवश्यकता है . लेकिन नहीं मुझे यह सब नहीं लिखना चाहिए यह समाज के खिलाफ है !   विद्यालयों में सेक्स शिक्षा के नाम पर सेक्स कैसे करें , ऐड्स से कैसे बचें, कंडोम क्या है ,आदि बताया जा रहा है .लेकिन फ़िर भी मुझे चुप रहना चाहिए ,आप सभी को चुप रहना चाहिए क्योंकि अब तक हम चुप रहते आये हैं सेक्स को नितांत निजी और बिस्तर भर का उपक्रम मानते ए हैं ! भला वर्षों की मानसिकता को कैसे ठोकर मार  दें ? मन  चाहे दिन-रात चिंतन में लगा रहे , इंटरनेट पर बैठते हीं भले उंगलियाँ गूगल में सेक्स टाइप करती रहे पर हम चर्चा नहीं करेंगे ! क्योंकि इससे देश हित ,समाज हित , नहीं  जुड़े हैं . हम अवतारों की झूठी अफवाहें जरुर फैलायेंगे , किसी भी बिल्डिंग को धार्मिक स्थल की नक़ल बताएँगे , दूसरे धर्म को गाली देंगे , आतंकवादियों / नक्सलियों का समर्थन करेंगे पर साहब सेक्स चर्चा ….. राम ……….राम …………… लाहौल बिलाकुवत …………..

>"लव जिहाद" सांप्रदायिक भड़ास निकलने का जरिया ….. जरुर पढिये

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अपने जीवन के 17 बसन्त देख चुकी श्रुति (काल्पनिक नाम) को यह नहीं मालूम था कि जो युवक विद्यालय जाते समय रास्ते में मिलता रहा और वे एक दूसरे के काफी नजदीक आ गये थे वह उससे प्रेम नहीं करता है बल्कि पूर्वांचल में चल रहे लव जिहाद का एक जेहादी है और वह उसे दलालों के जरियें खाडी देश के किसी शेख के हाथों बेच देगा। वह खुशकिश्मत थी कि बच गयी अन्यथा उसका भी वहीं हाल हुआ होता जो इस जेहाद की जद में फंस चुकी लड़कियों का हो रहा है।

आजमगढ़ जनपद के अहरौला कस्बे की रहने वाली श्रुति अग्रहरि पिछले एक माह से विद्यालय में पढ़ने जाती तो उसके पीछे एक युवक जो दिखने में स्मार्ट था वह लग जाता था। श्रुति और उसकी आंखे चार हो गयी। और वह उस युवक से प्रेम कर बैठी। वह युवक स्वंय को फूलपुर कस्बे के एक वैश्य परिवार का बताता था। बात शारीरिक सम्बन्धों तक नहीं पहुंची थी।इसी बीच 8 सितम्बर 2009 को श्रुति अचानक लापता हो गयी। परिजनों ने खोजबीन की इसी दौरान उन्हें सूचना मिली कि उनकी लड़की जौनपुर जनपद खुटहन के शाहगंज थानान्तगर्त अरन्द गांव के निवासी राशिद पुत्र जकरिया व अब्दुल पुत्र सन्तार जो शाहगंज के पक्का पोखरा के पास रहता है उन दोनों के साथ 8 सितम्बर को देखी गयी। इस बात की जानकारी जब परिजनों ने 9 सितम्बर को अहरौला थाने को दी तो थानाध्यक्ष ने कोई कार्यवाही नहीं की। इसके बाद परिजनों और अहरौला के कुछ लोग खुद अब्दुल के घर पहुंच गये और वहां से उसे पकड़कर लाये तथा अहरौला पुलिस को साँप दिया। 9 सितम्बर को जब ग्रामीणों ने आरोपी को खुद ही पुलिस को सौप दिया फिर भी पुलिस 24 घण्टे तक मूकदर्शक बनी रही। इसके बाद जब ग्रामीणों ने 10 सितम्बर को अहरौला थाने में तोड़ फोड़ शुरू कर दी तो पुलिस सक्रिय हुई और आरोपी पर थर्ड डिग्री का इस्तेमाल किया तो उसने जो रहस्योदघाटन किया उसके बाद तो पुलिस के पैरों तले से जमीन ही खिसक गयी पुलिस बैकफुट पर नजर आने लगी। उसने बताया कि युवती को उसने आजमगढ़ के फूलपुर कस्बे में रहने वाले बसपा नेता और पिछला विधानसभा चुनाव लड़ चुके इमरान खान उर्फ हिटलर के घर में रखा है। पुलिस इमरान खां उर्फ हिटलर के घर पर छापेमारी को लेकर मौन बनी रही। इसके बाद तों अहरौला के निवासियों और युवती के परिजनों ने ही सम्प्रदाय विशेष के प्रबल विरोध के बावजूद हिटलर के घर में घुसकर युवती को बरामद कर लिया और फूलपुर कोतवाली पर लाये। पुलिस सिर्फ तमाशबीन की भूमिका में रही। इसके बाद जब युवती ने बताया कि उसके साथ 10-12 की संख्या में अन्य युवतियां भी उस मकान में थी तो पुलिस को मानों सांप ही सूंघ गया। थाने से मात्र 200 मीटर की दूरी पर स्थित बसपा नेता के उस मकान पर छापेमारी करने में उसने 4 घंटे का समय लगा दिया। इसके बाद जब पुलिस छापेमारी करने पहुंुची तो उस मकान में आदमी तो क्या कोई परिन्दा भी नहीं मिला। इस घटना में राशिद भी पुलिस की गिरफ्त में आया लेकिन पुलिसिया पूछताछ में उसने क्या बताया यह बताने से पुलिस कतराती रही। 17 वर्षीय श्रुति को पुलिस फूलपुर कोतवाली ले गयी। और पहले तो वह उसके चरित्र हनन का प्रयास करती रही लेकिन जब वह अपनी बात पर अड़ी रही तो पुलिस ने मुकदमा दर्ज लिया और आगे की कार्यवाही कर रही है लेकिन वह भी घटना की तह में जाने से कतरा रही है। कारण यह है मामला काफी हाइप्रोफाइल नजर आ रहा है।

श्रुति बताती है कि 8 सितम्बर को जब वह स्कूल से आ रही थी तो उसी समय तीन की संख्या में लोगों ने उसके मुंह पर रूमाल रखकर उसे दबोच लिया। इसके बाद वह बेहोश हो गयी। जब वह होश में आयी तो देखा कि वह एक कमरे में है। उसके शरीर पर बुर्के जैसा वस्त्र है। उसके नाखून काट दिये गये है तथा गले की माला और हाथ का रक्षासूत्र भी काट लिया गया था। कुल मिलाकर उसकी पहचान समाप्त करने की कोशिश की गयी थी। उसके बाद 9 सितम्बर की दोपहर में फिर उसे बेहोश कर दिया गया। इसके बाद वह दूसरे स्थान पर थी। उसके पास खान नामक एक आदमी था जो मोबाइल पर बात कर रहा था कि लड़की को कहा पहुंचायें सर किस रास्ते व कैसे ले जाय इसके बाद पुन:उसे बेहोश कर दिया गया। जब उसे होश आया तो उसने अपने आपकों दूसरे कमरे में पाया जहां 10-12 की संख्या में और भी लड़कियां थी। होश आने के बाद उसे दुसरे कमरे में बन्द कर दिया गया जिसमें एक और महिला थी जिसे खान की बीबी कहा जा रहा था। 10 सितम्बर की सुबह फिर खान ने बात की। सर लड़की को क्या करें बात समाप्त होने के बाद खान की बीबी ने कहा कि मुंह धुल लों। इसके बाद उसने उसे जबरिया नकब पहनाना शुरू कर दिया। इसी बीच हंगामा हुआ और किसी ने दरवाजा खटखटाया फिर शोर हुआ तो मैने खान की बीबी का प्रतिरोध करके दरवाजा खोल दिया। इसके बाद मेरे परिजन मुझे वहां से निकालकर ले गये। इस बात की जानकारी होने के बाद पुलिस ने दुबारा वहां पर छापेमारी करने में 4घण्टे लगा दिये। तब तक वहां कोई नहीं था। प्यार की आड़ में चल रहे इस धंधे को ही लब जिहाद का नाम दिया गया है जिसमें सम्प्रदाय विशेष के युवक येन-केन-प्रकारेण हिन्दु युवतियों को अपने माया जाल में फंसाते है। और अपने बॉस को सौप देते है। बॉस उन युवतियों का क्या करता है यह तो मुख्य सरगना की गिरफ्तारी के बाद ही पता चलेगा। अभी तक पुलिस न तो मुख्य सरगना को गिरफ्तार कर सकी है और न ही इस प्रयास में ही दिखाई दे रहीं है ताकि लब जिहाद के मुख्य सरगना को दबोचा जा सके।

-डॉ। ईश्वरचंद्र त्रिपाठी (साभार :प्रवक्ता डौट कॉम )

लेखक ने अप्रत्यक्ष तौर पर किस ओर इशारा किया है यह कहने की जरुरत नहीं है । क्या एक संप्रदाय विशेष सचमुच ऐसा कर रहा है ? क्या कोई ऐसा कर रहा है तो इसके पीछे कौन सी सामाजिक परिस्थिति है ? क्या ऐसा नहीं कि दो बड़े समुदायों के मध्य फैली तरह-तरह की भ्रांतियां इसे बढावा दे रही है ? अक्सर मुसलमान युवकों के बीच इस बात की चर्चा होती है कि हिंदू लड़की के साथ सेक्स करने पर जन्नत हासिल होगी और हिंदू युवक कहते हैं एक मुस्लिम लड़की के साथ सेक्स करने पर सौ यज्ञों का पुन्य मिलेगा । क्या इन दुष्प्रचारों से तो ऐसा नहीं हो रहा ? समाज को अपनी सोच बदलनी होगी नही तो ये लव के नाम पर हो रहा जिहाद हमें ले डूबेगा ।



>IS INDIA NEEDS SEX EDUCATION IN SCHOOLS

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SEX EDUCATION IN SCHOOLS

A WRONG DECISION

Is India really needs Sex Education in Schools?

What is Sex Education. Why to Students of school age. Is it is very necessary to teach in Schools? Is it needed in Indian culture?
For western countries which are very cold and covered with ice and more than 6-8 months in a year – sex education is alright according to their climate condition. Sex is common and in many terms it is open not because of their culture but because of very cold whether. Is sex education is good for Indian culture which is very hot country. Clothing, fooding habits depends on the climate conditions of the region. India (ASIA countries) are basically hot countries, so sex is not open and common.
Sex is a subject which needs practical or experimental if it is taught. If it is comes in education, boys and girls openly read and see adult books and movies. How we can stop their involvement form sex. More than 40-50 percent boys of schools age (some percent girls also) reads or comes in touch with adult magazines, adult movies which is prohibited today for them.
If sex education is given, it will become legal and boys and girls read it openly as legal subject. There will be no boundary for boys and girls. Definitely most of them will cross the Laxman Rekha.
Do we allow out children (specially girls) to have sex experience in school age, before marriage. Our Indian Culture not allows sex before marriage. Till date no medicine, tablets, syrups has been produced which will decrease sex desire of youngsters. How we can save our culture. What will happen tour moral values.
Instead of promoting sex education – Government should introduce Yog and Prayanam in school education. If not Yog and Prayanam altest simple sitting ‘Dhyan’ sitting 10-15 minutes silently on the floor in ‘Padmasan’, ‘Didhasan’ or simple sitting. This will increase attention, patience, tolerance, creativity, intelligence. Games can also be provided. This will be helpful in their all round development.
Moral teaching can also be given. Anti corruption campaign can also be organized in schools.
Children can motivated to make marches against corruption. Plantation : students can be motivated towards plantation, green peace movement.
Handicraft : They can be given handicraft knowledge.
NGO : They can be involved in Scout/Guide, NSS activities to make them busy.
Games : Games / competitions can be organized. More and more boys and girls can be motivated to take part in football, kabaddi, hockey, athletic which needs physical stamina and develop body.
Strong Youth Strong Country : There are various activities if started and motivated in schools, boys and girls will have no time to look towards the sex. SEX EDUCATION IS NOT FIT FOR INDIA CLIMATE AND CULTURE.
Sex education is nothing than a concept which came from western countries. Western countries are inspiring more and more towards Yog, Prayanam, Dhyan and India is adopting their western culture. We should try to make our young generation more confident, strong and they themselves says with proud “NO SEX BEFORE MARRIGE “
( Sunil Patel ) M.Com, Computer OperatorBharat Scouts & Guides,National Training Centre, Pachmarhi Madhya Pradesh-461881Phone : 9406544426E-mail : mailto:suntel@sancharnet.in

>सेक्स…….. बिंदास अ…. अ..अ. …. अ बोल (भाग -२)

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दो-तीन दिन से मैं विश्विद्यालय (जामिया ) नहीं जा पा रहा हूँ । नौ और दस फ़रवरी को शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय संगोष्ठी में व्यवस्था का देख रहा था । संगोष्ठी का विषय था – शिक्षा और राष्ट्र पुनर्निर्माण में छात्रों की भूमिका । वहां जामिया , जे एन यू तथा डीयू के युवा शक्ति के अलावा शिक्षकगण और कुछ प्रख्यात शिक्षाविद जिनमें श्री दीनानाथ बत्रा ,श्री धर्मेन्द्र जिज्ञासु व श्री बीएस राजपूत मौजूद थे । चर्चा के दौरान शिक्षा और राष्ट्र पुनर्निर्माण को लेकर विभिन्न विषयों पर प्रतिभागियों समेत अतिथि वक्ताओं ने भी अपनी -अपनी बात रखी । मुझे ठीक -ठीक याद नहीं , लेकिन किसी ने यौन शिक्षा पर काफी अच्छे तर्क प्रस्तुत करते हुए उसे हटाने की मांग की । आज के उत्तर आधुनिक युग में आपको ये बात बड़ी संकुचित और रुढिवादी लग सकती हैं ! ये तो मैं पिछले आलेख में कह चुका हूँ की आपको रुढियों को परिभाषित करना होगा ।

खैर ! संगोष्ठी के दौरान हीं मुझे एक ने जामिया से फ़ोन पर एक घटना की जानकारी दी जो इस प्रकार है-” हेलो , हाँ ……. जयराम , एक मजेदार बात सुन यार , ……………….तेरे डिपार्टमेंट की वो लौंडिया थी न .(नाम नहीं बताऊंगा ) ………… वही तेरी जूनियर यार ………….. अरे वही जो चार पाँच लौंडों के साथ दिन भर घुमती है । …….हुआ ये कि आज उसको जामिया गॉर्ड ने पकड़ लिया था …………अरे वो (नाम ) काला-पीला सा लड़का नहीं इधर उधर करता है उसी के साथ लगी पड़ी थी…… रूम में । …. गॉर्ड ने देखा होगा या जो भी हो बड़ा हंगामा हुआ …….. साला ………… मजा खूब आया……………. उसका होंठ से पुरा खून निकल रहा था ……. कपड़ा-उपडा भी इधर उधर था सब मजे ले रहे थे ,…………. नाटक खूब हुआ तुम रहते तब देखते ।” देखियेऔर सोचिये , हमारा समाज किस ओर जा रहा है ? पढ़ाई करने गई लड़कियां , पढने आए लड़के सारा काम छोड़ कर कक्षा में ही सेक्स कर रहे हैं । कम पढ़े -लिखे या नासमझ बच्चे नहीं ये उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहे छात्र थे । जामिया जैसी बड़ीकेन्द्रीय विश्विद्यालय में पढने वाले बच्चे ! अब आप कहीं मुझे भी श्री राम सेना वाला तथाकथित तालिबानी तो नहीं कह देंगे ? मुझे शक है। हो सकता है आप में से कुछ आज सेक्स के इस नंगेपन को आधुनिकता समझते हों ! ये सब कहीं न कहीं हमारी शिक्षा और संस्कारों को दर्शाता है । प्रथम गुरु कहलाने वाली माता आज आधुनिक ममी होती जा रही है वो भी किड्स प्ले स्कूल में बच्चे को डाल कर निश्चिंत हो जाती है। पिता जी भी डैड बन गए हैं जिन्हे बच्चा क्या करता है , क्या सीखता है अथवा उसे क्या सिखाया जा रहा है , इन बातों से कोई खास सरोकार नहीं । तब तो ऐसा ही युवा वर्ग होगा , फ़िर हम इसकी चिंता क्यूँ करते हैं ? जब सेक्स शिक्षा को स्कूलों में लागू करने , टीवी -सिनेमा आदि के माध्यम से ग़लत सही चीजों को प्रोत्साहन मिलता है , तभी हम क्यूँ खामोश रहते है । समय रहते चेतिए । आधुनिकीकरण और विकसित बनने के चक्कर में कहीं आने वाली नस्लें केवल सेक्स जैसी भोगवादी न हो जाए । इसी भोग ने सदियों से पूर्व और पाश्चात्य का भेद बना कर रखा है। दौर चाहे भूमंडलीकरण का हो या बाजारीकरण का हमें इस बात को समझना चाहिए कि भारत के चारो ओर भौगोलिक ही नहीं वरण सांस्कृतिक और संवेदनात्मक घेरा भी है । ऐड्स की आड़ लेकर(जबकि सच तो यही है किऐड्स का मूल कारण सेक्स का अज्ञान नहीं बल्कि सेक्स का अतिरेक है अर्थात अनैतिक यौन सम्बन्ध , अप्राकृतिक यौनाचार , असमय उत्तेजना आदि )आज जिस तरह से सेक्स के प्रति जागृत फैलाने के बहाने विद्यालयों से लेकर घर -घर में टीवी -सिनेमा -इंटरनेट के माध्यम से और भी बेकार की कुंठाओं को बढावा मिल रह है जो आगे चलकर घातक साबित होगा और जिसका लक्षण अभी से दिखना शुरू हो गया है । ( आगे जारी……………………….. )

>"सेक्स" एकदम बिंदास अ.. अ .अ.. अ.. अ ……बोल

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इतनी आपा-धापी और उथल-पुथल भरे राजनितिक व आर्थिक परिदृश्य में बांकी चिन्ताओ से परे सेक्स चर्चा ‘ -स्त्री विमर्श की आड़ में खूब फल- फूल रहा है। क्या आउटलुक और क्या ब्लॉग ! मोहल्ले की फैलाई इस बीमारी ने किस -किस को संक्रमित कर दिया कहना मुश्किल है ! इसके बरक्स कई अन्य ब्लोगरों की सामाजिक सरोकार वाले आलेख एक अदद टिप्पणी की बाट जोहते -जोहते सरकारी दफ्तरों के पुरानी फाइल की भांति धूल फांक रहा है । ‘मोहल्ले’ पर सविता भाभी को लेकर बड़ा बबाल मचा । सम्बंधित पोस्ट पर गर्दाउड़ान गाली-गल्लम भी हुआ । सेक्स चर्चा को जिस परिप्रेक्ष्य में विचार -विमर्श का केन्द्र बिन्दु बनाया गया , उसमें अधिक से अधिक टिप्पणी पाने अतिरिक्त कोई और उद्देश्य नहीं दिखता है । मुझे सेक्स को लेकर बहस करने से परहेज नहीं है । निश्चित रूप से आज सेक्स को लेकर हमें नए सिरे से सोचने की , नया दृष्टिकोण अपनाने की जरुरत है। लेकिन उद्देश्य सार्थक हो ।

समय चक्र परिवर्तित हुआ है , जिस वज़ह से अनेक पुरानी परम्पराएँ टूटती नज़र आ रही है। कल का सम्भोग आज सेक्स का रूप ले चुका है। सेक्स केवल बंद कमरों के भीतर बिछावन तक सीमित न हो कर शिक्षा मंदिरों(डीपी एस दिल्ली की घटना याद होगी ) से होते हुए कार्य स्थली (कॉल सेंटरों की कहानी भी आप तक पहुँच गई होगी) तक विस्तार ले चुका है। पाश्चात्य का अनुकरण किसी और क्षेत्र में तो नहीं परन्तु सेक्स और भ्रष्टाचार के मामले में जम कर हुआ है। कुछ लोग इसे मेट्रो शहरों में सीमित बताते हैं जबकि ये मसला भी महानगरीय उच्च -मध्य वर्गो (अर्थात विकासशील इंडिया )से निकल कर देहातों में मध्य- निम्न वर्गो (गरीब भारत जिसे अमेरिकाऔर यूरोप वाले रियल इंडिया कहते हैं)तक फ़ैल चुका है । ऐसा भी नहीं है कि यह सब अचानक हो गया । किसी भी सामाजिक परिवर्तन / बदलाव के पीछे कई छोटी -बड़ी ,साधारण से साधारण घटनाएँ सालों से भूमिका बना रहे होते हैं । यहाँ में जिस बदलाव की बात कर रहा हूँ वो यु ही नहीं हुआ उसके पीछे सूचनातंत्र की महती भूमिका रही है । हालाँकि सूचना क्रांति ने हमें काफी सुख-सुविधाएं मुहैया करायी लेकिन भारतीय समाज को उससे बहुत बड़ा घाटा हुआ है। विज्ञान का ये वरदान हमारी संस्कृति के लिए अभिशाप ही साबित हुआ । चलिए अतीत में बहुत दूर न जाकर स्वतंत्र भारत को लेकर आगे बढ़ते हैं। हम बात कर रहें हैं सेक्स के सामाजिक सन्दर्भों की । अवैध संबंधो को अब तक भारत में सामाजिक मान्यता नहीं मिली है बावजूद इसके व्यक्तिगत स्वतंत्रता की छतरी लगाये अनैतिकता से बचने की कोशिश जारी है। आज कदम -कदम पर आधुनिकता के नाम पर सामाजिक दायरे ,सदियों से चली आ रही परम्पराए तोड़ी जा रही हैं। मुझे पता है आप कहेंगे कि परम्पराएँ टूटनी ही चाहिए । ठीक हैं मैं भी कहता हूँ, हाँ पर वो परम्पराएँ ग़लत होनी चाहिए । ध्यान रहे कभी प्रथाएं नहीं टूटी बल्कि कुप्रथाएं तोड़ी गई हैंऔर इसे बदलाव नहीं क्रांति /आन्दोलन कहा गया। उदाहरण के लिए समय-समय पर हुए समाज और धर्म सुधार आंदोलनों को समझनेका प्रयास करें तो बात स्पष्ट हो जायेगी । वर्तमान समय में युवा वर्ग मानसिक तौर पर उत्तर आधुनिक है या बनना चाहता है। आज का प्रगतिशील युवा अक्सर परम्पराओं को रूढ़ी कहना ज्यादा पसंद करता है । और इसको तोड़ कर ख़ुद को विकास की दिशा में अग्रसर समझता है। यहाँ हमें परम्पराओं तथा रुढियों में अन्तर करना सीखना होगा।

आगे हम बात करेंगे सेक्स से जुड़े दो खास विवादित मुद्दे -“समालैंगिक संबधों तथा अवैध संबंधों” परइन दो बिन्दुओं की व्यापकता कम नही है । परिवार ,समाज, विद्यालय ,कार्यस्थल अर्थात स्थान (देश) , विभिन्न् परिस्थितिवश और काल (समय) के आधार पर ही सेक्स का स्वरुप और इसकी नैतिकता /अनैतिकता को परिभाषित किया जा सकता है। ये तो चिरंतन सत्य है कि कोई भी चीज देश ,काल, परिस्थितिओं पर टिका होता है। जिस बात को आज मान्यता देने अथवा दिलाने की मांग चल रही है या यूँ कहें कि कुछ हद तक मजबूरीवश स्वीकार भी किया जा रहा है, वह नई तो नहीं है पर स्वरुप बदल गया है। समलैंगिक सेक्स पहले भी होता रहा है। किशोरावस्था में सेक्सुअल शारीरिक बदलावों से उत्पन्न उत्सुकता की वज़ह से एक्के -दुक्के लोग ऐसा करते थे । आज कि तरह तब कोई लेस्बियन /गे समाज नही था । समाज की नजर में ये तब बुरी बात थी बहुत हद तक आज भी है । पर कहीं न कहीं आज ये सब फैशन बनता जा रहा है । समलैंगिक होना अप्राकृतिक है यह सब जानते -बुझते हैं। भला एक पुरूष -पुरूष के साथ ,एक स्त्री-स्त्री के साथ पुरा जीवन कैसे गुजर सकती है ? उनके मध्य वो भावनात्मक जुडाव कैसे आ सकता है जो दो विपरीत लिंगों के प्रति एक स्त्री-पुरूष के मध्य होता है। इस बात को विज्ञान भी मानता है । प्रकृति ने नर-नारी की रचना ही इस प्रकार की है दोनों का सम्बन्ध अन्योन्याश्रित है।

पश्छिम में ऐसा -वैसा कुछ भी होना आम बात है क्योंकि हमारा जीवन दर्शन और उनका जीवन दर्शन बिल्कुल ही विपरीत है ,जैसे उत्तरी व दक्षिणी ध्रुव । वहां सेक्स एक जरुरत है । इंसान भावशून्यता में जीता है । ज्यादा सेज्यादा भौतिक सुखों की प्राप्ति ही जीवन का लक्ष्य है । ऐसे में पाश्चात्य के जीवनशैली के बीजको भारत भूमि (विपरीत काल -देश और परिस्थिति)में उगाकर फसल काटने की बात सोचना कहाँ की बुद्धिमानी है। आज समलैंगिकता के समर्थक लोगों से वंश वृद्धि की भी बात नही कही जा सकती , ये टेस्ट ट्यूब बेबी का जमाना है भाई । वंश बढ़ने का उपाय तो कर लिया प्रगतिशील मानवों ने लेकिन निकट का फायदा देखने से पूर्व दूर का नुक्सान नही सोच पाया । *क्या माँ-बाप एक टेस्ट ट्यूब बेबी से उतना प्यार कर पाएंगे जो अपने गर्भ से उत्पन्न बच्चे से स्वतः हो जाता है ? *क्या वो बच्चा अपने माँ-बाप, परिवार , पड़ोस आदि के प्रति वफादार होगा ? नहीं बिल्कुल नहीं। यहाँ भी प्रकृति पर विजय पाने का परिणाम बुरा ही होगा। उस दिन की कल्पना कीजिये जब हर घर में टेस्ट ट्यूब बेबी होगा । तब परिवार -समाज चीजें इतिहास की किताबों में दफ़न हो जाएँगी । इस दिशा में मानव के कदम डगमगाते -डगमगाते ही सही पर बढ़ जरुर रहे है।

आगे अगले पोस्ट में ……………तब तक सोचियेगा ……………………………………….