होली तो ससुराल

होली तो ससुराल की बाक़ी सब बेनूर
सरहज मिश्री की डली,साला पिंड खजूर
साला पिंड-खजूर,ससुर जी ऐंचकताने
साली के अंदाज़ फोन पे लगे लुभाने
कहें मुकुल कवि होली पे जनकपुर जाओ
जीवन में इक बार,स्वर्ग का तुम सुख पाओ..!!
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होली तो ससुराल की बाक़ी सब बेनूर
न्योता पा हम पहुंच गए मन संग लंगूर,
मन में संग लंगूर,लख साली की उमरिया
मन में उठे विचार,संग लें नयी बंदरिया .
कहत मुकुल कविराय नए कानून हैं आए
दो होली में झौन्क, सोच जो ऐसी आए …!!
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होली तो ससुराल की ,बाक़ी सब बेनूर
देवर रस के देवता, जेठ नशे में चूर ,
जेठ नशे में चूर जेठानी ठुमुक बंदरिया
ननदी उम्र छुपाए कहे मोरी बाली उमरिया .
कहें मुकुल कवि सास हमारी पहरेदारिन
ससुर देव के दूत जे उनकी हैं पनिहारिन..!!
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सुन प्रिय मन तो बावरा, कछु सोचे कछु गाए,
इक-दूजे के रंग में हम-तुम अब रंग जाएं .
हम-तुम अब रंग जाएं,फाग में साथ रहेंगे
प्रीत रंग में भीग अबीरी फाग कहेंगे ..!
कहें मुकुल कविराय होली घर में मनाओ
मंहगे हैं त्यौहार इधर-उधर न जाओ !!

मुकुल के दोहे

प्रिया बसी है सांस में मादक नयन कमान
छब मन भाई,आपकी रूप भयो बलवान।
सौतन से प्रिय मिल गए,बचन भूल के सात
बिरहन को बैरी लगे,क्या दिन अरु का रात
प्रेमिल मंद फुहार से, टूट गयो बैराग,
सात बचन भी बिसर गए,मदन दिलाए हार ।
एक गीत नित प्रीत का,रचे कवि मन रोज,
प्रेम आधारी विश्व की , करते जोगी खोज । ।
तन मै जागी बासना,मन जोगी समुझाए-
चरण राम के रत रहो , जनम सफल हों जाए । ।

दधि मथ माखन काढ़ते,जे परगति के वीर,
बाक-बिलासी सब भए,लड़ें बिना शमशीर .
बांयें दाएं हाथ का , जुद्ध परस्पर होड़
पूंजी पति के सामने,खड़े जुगल कर जोड़

क्‍या आप सही हिन्‍दी लिख रहे है ?

अक्सर हम हिन्दी को लेकर दुविधा में रहते हैं, कि क्या हम सही बोल/लिख रहे है? इसका मुख्‍य कारण यह है कि हम गलत लिखते है इसलिये गलत उच्चारण भी करते हैं। जैसे कुछ लोग हिन्दी को हिन्दि, मालूम को मालुम या मलूम, विष का विश या विस और स्थान को अस्थान आदि लिखते है। यही कारण है कि वे बोलने में भी लिखने के अनुसार उच्चाकरण करते है। आज से हिन्दी की कक्षा शुरू हो रही है, इस कक्षा में हम कुछ ऐसे ही शब्दों ठीक करने का प्रयास करेगें।  

गलत शब्‍द

सही शब्‍द

अस्‍पष्‍ट

स्‍पष्‍ट  

अस्‍कूल

स्‍कूल  

अस्‍थान

स्‍थान  

अछर, अच्‍छर

अक्षर

अस्‍नान

स्‍नान  

अस्‍पर्श 

स्‍पर्श  

गिरस्‍थी

गृहस्‍थी 

बेजजी, बेज्‍जती 

बेइज्ज़ती

स्त्रि, इस्‍त्री     

स्‍त्री

छिन भर, छन भर

छण भर

भगती, भक्‍ती

भक्ति

इस्थिति

स्थिति

छमा   

क्षमा   

मतबल 

मतलब

उधारण 

उदाहरण

ज़बरजस्‍ती     

जबरदस्‍ती

मदत  

मदद

उमर

उम्र   

नखलऊ, लखनउ

लखनऊ

मुकालबे

मुकाबले

अस्‍‍तुति

स्‍तुति

प्रालब्‍ध 

प्रारब्‍ध

शाशन, सासन, साशन,  

शासन 

बिद्या  

विद्या

शाबास 

शाबाश 

ग्यान

ज्ञाऩ

छत्रिय  

क्षत्रिय  

अधिकतर लोग इन शब्‍दों में हमेशा गलती करते है। कुछ ऐसे अक्षर भी जिनके कारण यह गलती हमेशा होती रहती है। वे अक्षर है- इ/ई, उ/ऊ, ए/ऐ, ओ/औ, स/श/ष, घ/ध और क्ष/छ को लिखने में गलती करते है, और यही कारण है कि हम लिखने के साथ बोलने में भी अशुद्धि दिखाते है।

गृहकार्य– यदि आपको भी कुछ ऐसे शब्दो का ज्ञान हो जिनका उच्‍चारण गलत होता है, बताइयेगा ताकि अगली कक्षा में उसे समायोजित किया जाय। अगली कक्षा के गुरूजी प्रमेन्‍द्र प्रताप सिंह रहेगें, बड़े शख्‍़त गुरूजी है उनसे बच कर रहना।