>हमें ना खाना महँगी चीनी , ना होना बीमार !

>महंगाई की मार , ऊपर से होली का त्यौहार
हमें ना खाना महँगी चीनी , ना होना बीमार !
जोगीरा……………….सा रा रा राआअ;;;;;;;;;;;;;;;;;;;
बिन चीनी ,बिन घी- मैदे के मालपुए बनायेंगे ,
आटे को पानी में छनकर वही ख़ुशी से खायेंगे !
जोगीरा……………….सा रा रा राआअ;;;;;;;;;;;;;;;;;;;
बिन पिचकारी और रंगों के होली खूब मनाएंगे ,
बाल्टी  में पानी भर कर सबको नहलायेंगे !
जोगीरा……………….सा रा रा राआअ;;;;;;;;;;;;;;;;;;;

बुरा न मानो होली है

netaji :- देवदास
पुनीत ओमर : छुपा-रुस्तम,
Varsa Singh : अब क्या मिसाल
Tara Chandra Gupta : तारे चन्द्रमा की वजह से supt
maya :महा ठगनी हम जानी,
अरुण ,क्या बात है…
Kavi Kulwant : आए तो छाए,
राज कुमार : मन भाए मूड न लागे,
anoop : खरपतवार,
TARUN JOSHI “NARAD”: नकद,नारायण-नारायण,
मनोज ज़ालिम “प्रलयनाथ” : जालिम लोग ही प्रलय लातें हैं…?
हिन्दु चेतना : जगह न पाए,
तेज़ धार : कर रहा हूँ,
Manvendra Pratap Singh , नाम बडे दर्शन…?
Vishu :बारहवां खिलाड़ी
SWAMEV MRIGENDRATA : झंडा ऊँचा रहे तुम्हारा,
देवेन्‍द्र प्रताप सिंह : प्रेम प्रताप पतियाले वाला,
Suresh Chiplunkar : मुन्ना भाई के सर्किट,बोले तो….?
mahashakti : तेज़ हवाओं से बचने की कोशिश में .
Ruchi Singh : अरुचिकर ब्लॉगर,
मिहिरभोज : कभी किसी रोज़ ,
अभिषेक शर्मा : हया यक लखत आयी और शबाब….आहिस्ता….
रीतेश रंजन : कभी तो मिलेगी,
neeshoo : कोई जब तुम्हारा…तोड़ दे
Abhiraj : अभी,राज़ रहने दो
आशुतॊष : कलयुग की रामायण,
गिरीश बिल्लोरे ‘मुकुल’: जो कहना था कह दिया अब ऊपर वाले के हाथ मे है…..

होली तो ससुराल

होली तो ससुराल की बाक़ी सब बेनूर
सरहज मिश्री की डली,साला पिंड खजूर
साला पिंड-खजूर,ससुर जी ऐंचकताने
साली के अंदाज़ फोन पे लगे लुभाने
कहें मुकुल कवि होली पे जनकपुर जाओ
जीवन में इक बार,स्वर्ग का तुम सुख पाओ..!!
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होली तो ससुराल की बाक़ी सब बेनूर
न्योता पा हम पहुंच गए मन संग लंगूर,
मन में संग लंगूर,लख साली की उमरिया
मन में उठे विचार,संग लें नयी बंदरिया .
कहत मुकुल कविराय नए कानून हैं आए
दो होली में झौन्क, सोच जो ऐसी आए …!!
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होली तो ससुराल की ,बाक़ी सब बेनूर
देवर रस के देवता, जेठ नशे में चूर ,
जेठ नशे में चूर जेठानी ठुमुक बंदरिया
ननदी उम्र छुपाए कहे मोरी बाली उमरिया .
कहें मुकुल कवि सास हमारी पहरेदारिन
ससुर देव के दूत जे उनकी हैं पनिहारिन..!!
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सुन प्रिय मन तो बावरा, कछु सोचे कछु गाए,
इक-दूजे के रंग में हम-तुम अब रंग जाएं .
हम-तुम अब रंग जाएं,फाग में साथ रहेंगे
प्रीत रंग में भीग अबीरी फाग कहेंगे ..!
कहें मुकुल कविराय होली घर में मनाओ
मंहगे हैं त्यौहार इधर-उधर न जाओ !!