बिल गेट्स को शिकायती पत्र (Complaint to Bill Gates)

आदरणीय बिल्लू भिया को,
इंडिया से मुंगेरीलाल सरपंच का सलाम कबूल हो… आपके देश के एक और बिल्लू भिया (बतावत रहें कि प्रेसीडेंटवा रहे) ऊ भी इस पंचायत को एक ठो कम्प्यूटर दे गये हैं । अब हमरे गाँव में थोडा-बहुत हमही पढे-लिखे हैं तो कम्प्यूटर को हम घर पर ही रख लिये हैं । ई चिट्ठी हम आपको इसलिये लिख रहे हैं कि उसमें बहुत सी खराबी हैं (लगता है खराब सा कम्प्यूटर हमें पकडा़ई दिये हैं), ढेर सारी “प्राबलम” में से कुछ नीचे लिख रहे हैं, उसका उपाय बताईये –
१. जब भी हम इंटरनेट चालू करने के लिये पासवर्ड डालते हैं तो हमेशा ******** यही लिखा आता है, जबकि हमारा पासवर्ड तो “चमेली” है… बहुत अच्छी लडकी है…।
२. जब हम shut down का बटन दबाते हैं, तो कोई बटन काम नही करता है ।
३. आपने start नाम का बटन रखा है, Stop नाम का कोई बटन नही है…. रखवाईये…
४. क्या इस कम्प्यूटर में re-scooter नाम का बटन है ? आपने तो recycle बटन रखा है, जबकि हमारी सायकल तो दो महीने से खराब पडी है…
५. Run नाम के बटन दबा कर हम गाँव के बाहर तक दौड़कर आये, लेकिन कुछ नही हुआ, कृपया इसे भी चेक करवायें या फ़िर Sit नाम का बटन बनायें…
६. कल हमारी चाबियाँ खो गई थीं, Find का बटन दबाया, लेकिन नहीं मिली, क्या किया जाये ?
७. Out-Look का बटन दबा कर छोरे को बहुत देर तक बाहर देखने को बोला,,, भैंस और चमेली के अलावा कुछ नहीं दिखा….
८. programs तो आपने बहुत दिये हैं लेकिन हमरे काम का कुछ नहीं, इसलिये प्रार्थना है कि… जीटीवी, एमटीवी भी चालू करवा दें… मजा आ जायेगा….
९. Paste की भी कोई जरूरत नहीं है… हम तो नीम की दातौन करते हैं…
१०. सिर्फ़ एक बात तारीफ़ की है… कि आपने ये कैसे जाना कि यह “My Computer” है ?
जल्दी से जल्दी कम्प्यूटर ठीक करवाने की कृपा करें… ताकि पंचायत का काम “सई-साट” चले…

हस्ताक्षर / अंगूठा
सरपंच मुंगेरीलाल

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>बिल गेट्स को शिकायती पत्र (Complaint to Bill Gates)

>आदरणीय बिल्लू भिया को,
इंडिया से मुंगेरीलाल सरपंच का सलाम कबूल हो… आपके देश के एक और बिल्लू भिया (बतावत रहें कि प्रेसीडेंटवा रहे) ऊ भी इस पंचायत को एक ठो कम्प्यूटर दे गये हैं । अब हमरे गाँव में थोडा-बहुत हमही पढे-लिखे हैं तो कम्प्यूटर को हम घर पर ही रख लिये हैं । ई चिट्ठी हम आपको इसलिये लिख रहे हैं कि उसमें बहुत सी खराबी हैं (लगता है खराब सा कम्प्यूटर हमें पकडा़ई दिये हैं), ढेर सारी “प्राबलम” में से कुछ नीचे लिख रहे हैं, उसका उपाय बताईये –
१. जब भी हम इंटरनेट चालू करने के लिये पासवर्ड डालते हैं तो हमेशा ******** यही लिखा आता है, जबकि हमारा पासवर्ड तो “चमेली” है… बहुत अच्छी लडकी है…।
२. जब हम shut down का बटन दबाते हैं, तो कोई बटन काम नही करता है ।
३. आपने start नाम का बटन रखा है, Stop नाम का कोई बटन नही है…. रखवाईये…
४. क्या इस कम्प्यूटर में re-scooter नाम का बटन है ? आपने तो recycle बटन रखा है, जबकि हमारी सायकल तो दो महीने से खराब पडी है…
५. Run नाम के बटन दबा कर हम गाँव के बाहर तक दौड़कर आये, लेकिन कुछ नही हुआ, कृपया इसे भी चेक करवायें या फ़िर Sit नाम का बटन बनायें…
६. कल हमारी चाबियाँ खो गई थीं, Find का बटन दबाया, लेकिन नहीं मिली, क्या किया जाये ?
७. Out-Look का बटन दबा कर छोरे को बहुत देर तक बाहर देखने को बोला,,, भैंस और चमेली के अलावा कुछ नहीं दिखा….
८. programs तो आपने बहुत दिये हैं लेकिन हमरे काम का कुछ नहीं, इसलिये प्रार्थना है कि… जीटीवी, एमटीवी भी चालू करवा दें… मजा आ जायेगा….
९. Paste की भी कोई जरूरत नहीं है… हम तो नीम की दातौन करते हैं…
१०. सिर्फ़ एक बात तारीफ़ की है… कि आपने ये कैसे जाना कि यह “My Computer” है ?
जल्दी से जल्दी कम्प्यूटर ठीक करवाने की कृपा करें… ताकि पंचायत का काम “सई-साट” चले…

हस्ताक्षर / अंगूठा
सरपंच मुंगेरीलाल

आई टी "दीवार"

सीन – १
रवि (शशिकपूर) अपने भाई विजय (अमिताभ) के घर पहुँचता है –
रवि – आज मुझे “आईटी” थाने वालों ने एक लिस्ट दी है, जिसमें उन लोगों के नाम हैं, जो वायरस लिखते हैं, “साईट हैकिंग” करते हैं, और भी ऐसे कई काम जो कानून की नजर में गुनाह हैं, और उस लिस्ट में एक नाम तुम्हारा भी है भा…ई…। लो इस पर साइन कर दो ।
विजय – क्या है ये ?
रवि – इसमे लिखा है कि तुम अपने सारे गुनाह कबूल करने को तैयार हो… तुम अपने उन सभी साथियों के नाम पुलिस को बताने को तैयार हो, जो “हैकिंग” करते हैं, तुम पुलिस को यह भी बताओगे कि तुमने कौन-कौन से वायरस बनाये हैं, उनका कोड क्या है… सब बताओगे…
विजय – मैं इस पर साइन करूँगा, लेकिन मैं अकेले साइन नहीं करूँगा, मैं सबसे पहले साइन नहीं करूँगा । जाओ जाकर पहले उस आदमी का साइन लेकर आओ, जिसने मेरे बाप पर “पासवर्ड” चोरी करने का साइन लिया था, जाओ पहले उस आदमी का साइन लेकर आओ जिसने मेरे “मदर बोर्ड” को “रिसायकल बिन” में डाल दिया था । जाओ पहले उस आदमी का साइन लेकर आओ जिसने मेरी “वेबसाईट” को हैक करके उस पर लिख दिया था कि “इसका बाप चोर है”, उसके बाद, उसके बाद मेरे भाई तुम जिस “document” पर कहोगे मैं उस पर साइन करने को तैयार हूँ…
रवि – दूसरों के पाप गिनाने से तुम्हारे अपने पाप कम नहीं होंगे… ये सच्चाई नहीं बदल सकती कि तुम भी एक हैकर हो और जब तक ये दीवार हम दोनों के बीच है भाई… हम एक छत के नीचे नहीं रह सकते… मैं यहाँ से जा रहा हूँ…चलो माँ..
विजय – तुम जाना चहते हो तो जाओ… लेकिन माँ नहीं जायेगी (वो तो मेन सर्वर है)
माँ (निरुपा रॉय) – माँ जायेगी…
विजय – नहीं माँ तुम नहीं जा सकती, मैं जानता हूँ कि तुम मुझसे बहुत प्यार करती हो… सारी साईट्स मैनें तुम्हें खुश रखने के लिये ही हैक की थीं…
माँ – वो आदमी तेरा कौन था, जिसने तेरे बाप पर पासवर्ड चोरी का इल्जाम लगाया था, कोई नहीं…. वो आदमी तेरा कौन था जिसने तेरे मदर बोर्ड को रिसायकल बिन में डाल दिया था, कोई नही… वो आदमी तेरा कौन था जिसने तेरी साईट पर लिख दिया था कि “तेरा बाप चोर है”, कोई नही… लेकिन तू तो मेरा अपना क्लाईंट था, तूने अपने प्रोसेसर पर कैसे लिख दिया कि “ये फ़ाईल करप्ट है”…
(माँ गुस्से में लॉग आऊट कर जाती है, और विजय देखता रह जाता है)….

सीन – २
विजय (अमिताभ) अपने भाई रवि (शशिकपूर) को मिलने एक जगह पहुँचता है… (वही पुल के नीचे)
विजय – मुझे यहाँ मिलने क्यों बुलाया है ?
रवि – तुम्हारी कम्पनी में मुझे कोई घुसने नही देता है, और मेरे घर आना तुम जैसे सॉफ़्टवेयर इंजीनियर की शान के खिलाफ़ है, इसलिये हम कहीं और ही मिल सकते थे । इस इंटरनेट पार्लर में जहाँ हमारा बचपन साथ-साथ बीता, यही ठीक जगह है…
विजय – पहले मुझे ये बताओ कि इस समय मुझे सुनने वाला कौन है, एक “डाटा एन्ट्री ऑपरेटर” या एक “आईटी पुलिसवाला”…
रवि – जब तक सॉफ़्टवेयर इंजीनियर बोलेगा, एक डाटा एन्ट्री ऑपरेटर सुनेगा, और जब एक हैकर बोलेगा तो “आईटी पुलिसवाला” सुनेगा…
विजय – रवि तुम नही जानते तुमने सारे हैकरों को अपना दुश्मन बना लिया है, तुम ये शहर छोडकर चले जाओ…
रवि – मेरे कम्प्यूटर आदर्श मुझे इसकी इजाजत नहीं देते…
विजय – उफ़्फ़, तुम्हारे उसूल, तुम्हारे आदर्श, क्या दिया है तुम्हारे इन उसूलों ने तुम्हें…. एक ४८६ कम्प्यूटर, एक सडा सा डॉस, एक मामूली सा अकाउंटिंग सॉफ़्टवेयर… देखो, देखो, देखो… ये वही मैं हूँ और ये वही तुम हो… हम दोनों एक साथ इस इंटरनेट पार्लर से निकले थे… लेकिन आज तुम कहाँ रह गये और मैं कहाँ आ गया… आज मेरे पास वेब साईट है, पेंटियम ४ है, ओरेकल, पावर बिल्डर है, बैंक बैलेन्स है… क्या है,,, क्या है तुम्हारे पास… ?
रवि – मेरे पास “परमानेंट सरकारी जॉब” और सर्वर का मदरबोर्ड है…
(टूँ..टूँ..टूँ… कम्प्यूटर हैंग होने की आवाज आती है… और विजय देखता रह जाता है)

आई टी "दीवार" (Film Deewar of IT Industry)

सीन – १
रवि (शशिकपूर) अपने भाई विजय (अमिताभ) के घर पहुँचता है –
रवि – आज मुझे “आईटी” थाने वालों ने एक लिस्ट दी है, जिसमें उन लोगों के नाम हैं, जो वायरस लिखते हैं, “साईट हैकिंग” करते हैं, और भी ऐसे कई काम जो कानून की नजर में गुनाह हैं, और उस लिस्ट में एक नाम तुम्हारा भी है भा…ई…। लो इस पर साइन कर दो ।
विजय – क्या है ये ?
रवि – इसमे लिखा है कि तुम अपने सारे गुनाह कबूल करने को तैयार हो… तुम अपने उन सभी साथियों के नाम पुलिस को बताने को तैयार हो, जो “हैकिंग” करते हैं, तुम पुलिस को यह भी बताओगे कि तुमने कौन-कौन से वायरस बनाये हैं, उनका कोड क्या है… सब बताओगे…
विजय – मैं इस पर साइन करूँगा, लेकिन मैं अकेले साइन नहीं करूँगा, मैं सबसे पहले साइन नहीं करूँगा । जाओ जाकर पहले उस आदमी का साइन लेकर आओ, जिसने मेरे बाप पर “पासवर्ड” चोरी करने का साइन लिया था, जाओ पहले उस आदमी का साइन लेकर आओ जिसने मेरे “मदर बोर्ड” को “रिसायकल बिन” में डाल दिया था । जाओ पहले उस आदमी का साइन लेकर आओ जिसने मेरी “वेबसाईट” को हैक करके उस पर लिख दिया था कि “इसका बाप चोर है”, उसके बाद, उसके बाद मेरे भाई तुम जिस “document” पर कहोगे मैं उस पर साइन करने को तैयार हूँ…
रवि – दूसरों के पाप गिनाने से तुम्हारे अपने पाप कम नहीं होंगे… ये सच्चाई नहीं बदल सकती कि तुम भी एक हैकर हो और जब तक ये दीवार हम दोनों के बीच है भाई… हम एक छत के नीचे नहीं रह सकते… मैं यहाँ से जा रहा हूँ…चलो माँ..
विजय – तुम जाना चहते हो तो जाओ… लेकिन माँ नहीं जायेगी (वो तो मेन सर्वर है)
माँ (निरुपा रॉय) – माँ जायेगी…
विजय – नहीं माँ तुम नहीं जा सकती, मैं जानता हूँ कि तुम मुझसे बहुत प्यार करती हो… सारी साईट्स मैनें तुम्हें खुश रखने के लिये ही हैक की थीं…
माँ – वो आदमी तेरा कौन था, जिसने तेरे बाप पर पासवर्ड चोरी का इल्जाम लगाया था, कोई नहीं…. वो आदमी तेरा कौन था जिसने तेरे मदर बोर्ड को रिसायकल बिन में डाल दिया था, कोई नही… वो आदमी तेरा कौन था जिसने तेरी साईट पर लिख दिया था कि “तेरा बाप चोर है”, कोई नही… लेकिन तू तो मेरा अपना क्लाईंट था, तूने अपने प्रोसेसर पर कैसे लिख दिया कि “ये फ़ाईल करप्ट है”…
(माँ गुस्से में लॉग आऊट कर जाती है, और विजय देखता रह जाता है)….

सीन – २
विजय (अमिताभ) अपने भाई रवि (शशिकपूर) को मिलने एक जगह पहुँचता है… (वही पुल के नीचे)
विजय – मुझे यहाँ मिलने क्यों बुलाया है ?
रवि – तुम्हारी कम्पनी में मुझे कोई घुसने नही देता है, और मेरे घर आना तुम जैसे सॉफ़्टवेयर इंजीनियर की शान के खिलाफ़ है, इसलिये हम कहीं और ही मिल सकते थे । इस इंटरनेट पार्लर में जहाँ हमारा बचपन साथ-साथ बीता, यही ठीक जगह है…
विजय – पहले मुझे ये बताओ कि इस समय मुझे सुनने वाला कौन है, एक “डाटा एन्ट्री ऑपरेटर” या एक “आईटी पुलिसवाला”…
रवि – जब तक सॉफ़्टवेयर इंजीनियर बोलेगा, एक डाटा एन्ट्री ऑपरेटर सुनेगा, और जब एक हैकर बोलेगा तो “आईटी पुलिसवाला” सुनेगा…
विजय – रवि तुम नही जानते तुमने सारे हैकरों को अपना दुश्मन बना लिया है, तुम ये शहर छोडकर चले जाओ…
रवि – मेरे कम्प्यूटर आदर्श मुझे इसकी इजाजत नहीं देते…
विजय – उफ़्फ़, तुम्हारे उसूल, तुम्हारे आदर्श, क्या दिया है तुम्हारे इन उसूलों ने तुम्हें…. एक ४८६ कम्प्यूटर, एक सडा सा डॉस, एक मामूली सा अकाउंटिंग सॉफ़्टवेयर… देखो, देखो, देखो… ये वही मैं हूँ और ये वही तुम हो… हम दोनों एक साथ इस इंटरनेट पार्लर से निकले थे… लेकिन आज तुम कहाँ रह गये और मैं कहाँ आ गया… आज मेरे पास वेब साईट है, पेंटियम ४ है, ओरेकल, पावर बिल्डर है, बैंक बैलेन्स है… क्या है,,, क्या है तुम्हारे पास… ?
रवि – मेरे पास “परमानेंट सरकारी जॉब” और सर्वर का मदरबोर्ड है…
(टूँ..टूँ..टूँ… कम्प्यूटर हैंग होने की आवाज आती है… और विजय देखता रह जाता है)