>छात्र राजनीति पर जारी विमर्श में भाग लीजिये

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एक बार फ़िर डूसू चुनाव आ गया है और देखना है कि इस बार विश्वविद्यालय प्रशासन के क्या इरादे हैं ? वैसे छात्र राजनीति को करीब से जानने वाले विश्लेषक कहते हैं कि यदि डूसू भी प्रतिबंधित हो जाए तो दिल्ली की राजनीतिक फिजा में एक नई सरगर्मी पैदा होगी , एक घुटन महसुसू होगी छात्रों को , एक संघर्ष का वातावरण तैयार होगा और तब जामिया , जे एन यू और डी यू के छात्र नेतृत्व का सही परीक्षण होगा और परीक्षण कामयाब रहा तो देश भर में  सन 74 जैसा कुछ सामने आ सकता है | 

छात्र-राजनीति के विषय में आप क्या सोचते हैं ? क्या छात्र राजनीति के साथ भी राजनीति हो रही है और इसका दमन किया जा रहा है ? क्यों आमतौर पर छात्रों में “राजनीति” के प्रति उदासीनता का भाव देखने को मिलता है ? छात्र राजनीति का भविष्य क्या है ? आपके सुझाव ? 

( इस मुद्दे पर ” विमर्श “ नामक स्तम्भ में बहस चल रही है , आप भी भाग लीजिये और अपनी प्रतिक्रिया दीजिये और साथ ही यदि इस मुद्दे पर आलेख तैयार कर सकते हैं , किसी छात्र राजनीति से जुडे व्यक्ति अथवा विश्लेषक का साक्षात्कार ला सकते हैं तो जरुर करें | आप अपने खाते से लोगिन कर लेख ड्राफ्ट में डालें अथवा हमें मेल करें पता है janokti@gmail.com 

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>प्लीज उसे मेरा बाप मत कहो …………………..

>इस सप्ताह के सर्वाधिक लोकप्रिय आलेख ,लेखक के नाम और लिंक दिए गये हैं

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जनोक्ति .कॉम पर इस सप्ताह के सर्वाधिक लोकप्रिय आलेख ,लेखक के नाम और लिंक दिए गये हैं  . आप भी पढ़िये और विमर्श में भाग लीजिये . 

>जनोक्ति.कॉम पर अपने लेख पोस्ट करने का आसान तरीका !

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प्रिय आत्मन .

आप का जनोक्ति परिवार में स्वागत है ! हमारे हिंदी वेब पोर्टल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करके पंजीयन करें .  आप निम्न विषयों पर अपनी जनोक्ति पर प्रकाशित कर सकते हैं

अंधेर नगरी( सरकारी नीति ) ,अध्यात्म, इतिहास ,कला-संस्कृति, कविता, कृषिजगत, खेल-कूद, गीत-ग़ज़ल,चौथा खंभा,जीवन,जीवन बीमा, तकनीक,दर्शन,दस्तावेज़, दिल्ली -एनसीआर, दीवान-ए-आम,नारी, पर्यटन,पर्व-त्यौहार, पाठक उवाच, प्रकृति,प्रेरक-कथा, बड़ी खबर, ब्लॉग-जगतो , भारतनामा, मीडिया-संसार, यूपी-बिहार, राष्ट्रीय , रोजी-रोटी, विविध,व्यंग,शिक्षा,संगीत-संसार, संसद मार्ग (राजनैतिक ),समाज ,सम्पादक उवाच , साक्षात्कार, साहित्य, सिनेमा-संसार, सुझाव,सेक्स और समाज ,स्मृति-लेख

कृपया पोस्ट करते समय निम्न बातों का ध्यान रखें :

  • यदि रचना पूर्व में किसी ब्लॉग या वेबसाइट पर प्रकाशित हो तो कृपया शीर्षक जरुर बदल दें और संभव हो तो अग्रांश भी बदलने की कोशिश करें .
  • पोस्ट करते समय डेशबोर्ड के दायें साइडबार में दिख रहे केटेगरी में से उपयुक्त का चयन कर उसमें टिक जरुर करें . और यथासंभव उपयुक्त फोटो भी डाल दें .
  • एक आग्रह और है कि अपनी किसी भी रचना को अपने ब्लॉग के अलावा जनोक्ति.कॉम पर पहले प्रकाशित करें , वैसे यह आपके ऊपर है , हमारी कोई बाध्यता नहीं है !

>जनोक्ति.कॉम पर समाचारों का प्रकाशन शुरू , आप भी आइये

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जनोक्ति परिवार के सभी सदस्यों और पाठकों के लिए एक और खुशी की खबर है . जनोक्ति.कॉम पर दिन भर के मुख्य समाचारों को अपने पाठकों के लिए परोसने का काम शुरू हो गया है . आप सभी जानते हैं अभी तक जनोक्ति.कॉम पर राजनीति , सरकार की नीति , सामाजिक मुद्दों , मीडिया , सिनेमा , साहित्य समेत विविध विषयों पर केवल आलेख , साक्षात्कार आदि प्रकाशित किये जाते रहे हैं . जनोक्ति परिवार के कई सदस्यों और पाठकों का सुझाव था कि यहाँ समाचार भी दिए जाएँ ताकि वेबसाइट पर आने वालों को किसी तरह की कमी का अहसास ना हो और वो एक जगह हर चीज पा सकें . वस्तुतः हमने उनके सुझाव पर अमल करते हुए साइडबार में ” बड़ी खबर पर एक नज़र ” नाम से एक नया कॉलम शुरू किया है जिसमें दिन भर की १० बड़ी खबर को प्रकाशित किया जायेगा . अभी जो खबर पोस्ट किये जा रहे हैं उनमें से अधिकांश  विभिन्न समाचार एजेंसियों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित हैं . जनोक्ति .कॉम के लिए दिल्ली- एनसीआर – पटना , लखनऊ , भोपाल , रायपुर और जयपुर में  संवाददाता नियुक्त करने के लिए काम जारी है . जल्द हीं एक अच्छी टीम के साथ हम उन ख़बरों को पाठकों के सामने लायेंगे जो मुख्यधारा की मीडिया में दबा दी जाती हैं या अत्यंत छोटे रूप में प्रस्तुत की जाती है .हमारे  निरंतर बढ़ते कदमों को आपके सहारे की जरुरत है . ज्यादा से ज्यादा लोग जुड़ें और दूसरों को जोड़ें , इसी आशा के साथ जनोक्ति.कॉम पर आपका पुनः स्वागत है !
जनोक्ति परिवार 

>गाँधी के सेक्स जीवन पर नई किताब से हुआ बवाल

>क्या बापू अर्ध-दमित सेक्स मैनियॉक थे ?



जनोक्ति .कॉम पर पढ़िये के०पी० त्रिपाठी का यह लेख जिसमें ब्रिटिश लेखक द्वारा हाल ही में लिखी गयी एक किताब के हवाले से गाँधी के जीवन से जुड़ी उन बातों पर प्रकाश डाला गया है जो अब तक अनछुआ ही रहा है . पढ़िये और खुद फैसला करिए कि इसमें कितना हकीकत और कितना फ़साना है ?


>जनोक्ति .कॉम पर इस सप्ताह प्रकाशित आलेख

>एक लक्ष्य बना लें कि आपकी मुद्दों पर आधारित पोस्ट ब्लोगवाणी पर सर्वाधिक पढ़ी जाए

>जनोक्ति ब्लॉग के सभी साथी लेखकों को पाठकों को नमस्कार !
काफी दिनों की खोजबीन के बाद अंततः “जनोक्ति ब्लॉग” के लिए यह थीम मिला है और काफी संतोषजनक है . एक बार पुनः ब्लॉग-जगत पर अपनी सक्रियता बढाने की दिशा में कोशिश कर रहा हूँ . अध्ययन की वजह से समय का अभाव और बचे-खुचे समय में जनोक्ति.कॉम को प्रतिस्थापित करने का प्रयास दोनों ही कारण से इस मंच पर आना कम हो गया था . एक बात तो है डोट. कॉम पर भले चले जाइए पर ब्लॉग का अपना मज़ा है  . बहुत सारी आज़ादी है यहाँ . ब्लॉग-जगत लगातार विवादों में फंसा हुआ है . हर जगह ब्लोगवाणी के हॉट , ज्यादा पढ़े गये, और प्रतिक्रिया प्राप्त पोस्टों की चर्चा है जो निरर्थक होने के बावजूद छाये हुए हैं . पर कोई बात नहीं सैकड़ों ब्लॉगर रोजाना ना सही , साप्ताहिक या पाक्षिक ही सही अच्छे और सरोकारों वाले आलेख लिखते हैं . अगर आपको उनके ब्लॉग तक पहुंचना है तो चिट्ठाजगत से रोजाना जुड़ने वाले ब्लोग्स की सूची प्राप्त करने के लिए सबस्क्राइब करें . उनमें से कई ब्लॉग आपको स्तरीय और वैचारिक रूप से पठनीय होते हैं . ऐसे ही ब्लोग्स की चर्चा जनोक्ति ब्लॉग पर पहले भी की जाती रही है , हालाँकि वह अनियमित ही रहा लेकिन अब इसे नये तरीके से शुरू किया जायेगा . आपको भी यदि सामाजिक – सांस्कृतिक और राजनीतिक मुद्दों पर आधारित अच्छी पोस्ट मिले तो उसके बारे में अवश्य बताएं और लिंक सहित उसकी चर्चा इस मंच पर करें . क्योंकि अब पाठक उब चुके हैं हिंदी ब्लॉगजगत से जहाँ ४०-६० % पोस्ट केवल ब्लॉग और ब्लॉगर के आपसी टकराव के बारे में ही लिखी जाती है और बाकी ३०-३५ प्रतिशत धार्मिक उन्माद फ़ैलाने वाले मुद्दों पर , इसीलिए जनोक्ति के सभी लेखक साथियों से आग्रह है कि आप सरोकारी लेखों को नियमित रूप से लिखें और अधिक-से -अधिक प्रचारित-प्रसारित करें . एक लक्ष्य बना लें कि  आपकी मुद्दों पर आधारित पोस्ट ब्लोगवाणी पर सर्वाधिक पढ़ी जाए .

विशेष इस शुभकार्य के लिए शुभकामनाएं !

जयराम “विप्लव ” { मोडरेटर : जनोक्ति ब्लॉग ” }

>संदेह में उम्मीद

>नया वर्ष ए़क पत्थर है-
पानी से घिस चिकना हो गए
उन् ढेर सारे काले, लाल, सफ़ेद पत्थरों में से ए़क-
केक के खाली हो गए डिब्बे में रख
पिछली विदा में जो दिए थे तुमने- सजाने को कमरे में|

नया वर्ष ए़क पत्थर है
जो दिखा-
सड़क किनारे, चाय की टप्पी पे सिगरेट पीते,
दुनिया और मेरे बीच धुआँ सा था जब,
-थूथन उठाये अपनी दोनों आँखों से मुझे घुरता|
उस की पूँछ में ए़क छेद है,
इस ओर की दुनिया से
उस ओर की दुनिया में जाने के लिए ए़क सुरंग की तरह
-मैं उठा लाया हूँ|

नया वर्ष ए़क पत्थर है-
जो फेंक दें बीच की खाई में,
हर बार को झुठलाती,
इस दफा,
आ ही जाए पेंदे से टकराने की आवाज,
या क्या पता कर ही दे आकाश में सुराख
जो उछाल दें तबियत से|
..मुश्किल सिर्फ इतनी सी है दोस्त
की इस मुश्किल वक़्त में
तबियत का होना ए़क संदेह है|

नया वर्ष ए़क पत्थर है
ट्रक के पहिये से छिटक कर
मेरे सर पर आ लगा है
और अब ए़क पत्थर मेरे भीतर भी है,
सर पर उग आये गुमड़ में|
इन्हीं दो पत्थरो के बीच रख
पीसना है मुझे- साल भर मसाला
(इस सन्नाटे में लगाने को छौंक)
पीसनी है मुझे- साल भर गेंहू
दर्रनी है मुझे – साल भर दाल
और पूरे साल
वही रोटी – वही दाल|

नया वर्ष ए़क पत्थर है
-मील का|
जिस पर लिखा है
कहाँ तक चल चुके हम?
कहाँ था हमें जाना?
और ए़क प्रश्न-
अब पहुचेंगे कहाँ हम ?

नया वर्ष ए़क पत्थर है
-मेरे हाथ में|
जो दिखा-
सड़क किनारे, चाय की टप्पी पे सिगरेट पीते,
दुनिया और मेरे बीच धुआँ सा था जब|

– इस बाज़ार से दूर
जो डाली जा रही हो नीव किसी घर की
उसी में कही रखनी है मुझे