>धार्मिक लपेटा-लपेटी पर लिखे माइक्रोपोस्ट को पढ़िये परन्तु मानियेगा नहीं

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सभी ब्लॉगर भाई और बहन से एक आग्रह करना चाहता हूँ . वर्तमान में हिंदी ब्लोगिंग लोकतंत्र  के पांचवे खम्भे  के तौर पर देखा जाने लगा  है . एक ऐसा मन्च बन गया है जहाँ लोग अपनी इच्छानुसार सूचना तंत्र का उपयोग कर रहे हैं . मुख्यधारा की मीडिया में हड़कंप मचा है जिसे बाहर से छुपाने की कोशिश की जा रही है . मंत्री से लेकर अफसर लोग भी यहाँ अपनी बात रख रहे हैं .सरकारी तनर पर दबाव डालने का काम हो अथवा लोगों को सुचना के अधिकार , बिजली चोरी , शिक्षा का अधिकार , अदालत आदी के प्रति जागरूकता हेतु कई ब्लॉग पर मुहीम जारी है .  आम लोगों तक पहुँचने का सशक्त माध्यम बन गया है . वह दिन दूर नहीं जब सुचना क्रांति के बढ़ते कदमों से हर घर में ब्लॉग पढ़ा जायेगा सोचिये तब मुख्यधारा की मीडिया का क्या होगा ? लेकिन अफ़सोस तब होता है जब कुछ पागल और धर्मांध लोग यहाँ इसे कूड़ा दान समझ कर अपने मानसिक मॉल-मूत्र का विसर्जन करते  हैं . और घोर निराशा होती है जब कुछ अच्छे और अनुभव वाले  लेखक इनको नज़रअंदाज करने के बजाय कुकर्मियो के कृत्य से दुखी होकर उनके नाम से पोस्ट पर पोस्ट ठेल रहे हैं  . ऐसे में उनका ही प्रचार हो रहा है . कृपा कर अब सभी लोग इस दो पागल धर्मभिरुओं के ऊपर लिखना बंद करें सब ठीक हो जायेगा . मुद्दों की कमी नहीं है हम खुद कहते हैं धर्म पर इस तरह अनर्गल बहस बंद हो परन्तु दूसरे ही दिन इसी बहस में कूद पड़ते हैं ! क्या हमारे दिन इतने फ़िर गये हैं कि किसी कट्टरपंथी के नाम से पोस्ट लगनी पड़े . मैंने अपने दिल की बात कह दी आशा है आप आग्रह को ठुकरायेंगे नहीं .
आप क्यों भूल जाते हैं कि जब कोई इन्हें पढ़ेगा ही नहीं तो ये कैसी भी धार्मिक, घटिया, असहिष्णुता या सांप्रदायिक बातें कर लें कोई फ़र्क नहीं पड़ता है. टिप्पणी में मोडरेशन का अधिकार प्रयोग करें, उसके लिये मोडरेशन लागू करने की जरुरत नहीं जहाँ धार्मिक विज्ञापनबाजी देखो वहीं उसका उपयोग करें . और मैंने एक और तरीका निकाला है उक्त पागल सांड की अपशब्दों वाली टिप्पणी मुझे भी मिली थी तब मैंने उस पर कोई पोस्ट ना लिखकर एक लम्बा पोस्ट उसे मेल कर दिया . मैंने तो जाना छोड़ दिया है ऐसी गलियों में जहाँ धर्म के नाम पर इंसानियत  बिकती  है . आप सभी समझदार हैं . देश दुनिया में क्या यही विषय रह गया है विमर्श के लिए . हम यहाँ उलझे हैं उधर कुछ लोग जो कल तक आतंकवाद का परोक्ष  रूप से समर्थन करते थे आज नक्सलवाद का कर रहे हैं और उन्हें जबाव देने वाला कोई नहीं है . तो वक़्त रहते चेतिए नहीं तो इस उभरते हुए जनमंच का कबाडा हो जायेगा .

>पर बांग्लादेश भी चिल्लाता , जो खुद औलाद नाजायज है !

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मृतकों का पश्चात्ताप , दे रहा जिन्दों को दस्तक
दिल्ली हुई नेतृत्व विहीन ,  झुका राष्ट्र का मस्तक.
है पड़ोसी मुल्क से आ रही ड्रैगन की फुंफकार
कहाँ गये वो रक्षक अपने , क्यों गिरी उनकी तलवार ?
ड्रैगन की फुंफकार तो फ़िर भी कुछ हद तक जायज है
पर बांग्लादेश भी चिल्लाता , जो खुद औलाद नाजायज है !
सबका कारण एक ,नहीं है रीढ़ की हड्डी
वरना भारत नहीं किसी से कभी फिसड्डी .

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