लेस्बियन यानी "समलैंगिकता " बनाम भारत ? ये संबध भारतीय संस्कृति के लिए खतरा

विश्व पटल पर कोई आवाज अगर बुलंद होती है तो इसका असर दुनिया के कर कोने पर होता हैं। हाल में ही भारत सहित विश्व के कई देशों में लेस्बियन यानी ” समलैंगिता” का हो हल्ला रहा । दिल्ली , मुम्बई सहित विश्व के कई शहरों में कदम ताल हुआ। भारत में भी लोगों ने अपनी बुलंद आवाज में समलैंगिकता को सही ठहराते हुए इसे संवैधानिक दर्जा देने की हिमाकत की।भारत में समलौंगिक सम्बंध को जुर्म करार दिया गया है । दो एक ही सेक्स के लोगों के बीच का संबध कानूनी तौर गलत होगा। और इस तरह के कार्य पर कानूनी दाव पेंच में फंस जायेगें। पर इसके ठीक विपरीत केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री अंबुमणि रामदौस ने समलैगिकता को उचित ठहराया है । पर कोर्ट ने स्वास्थ्य मंत्रालय की अर्जी को खारिज कर दिया । और रामदौस के बयान को भी अंदेखा कर दिया । साथ ही साथ गृह मंत्रालय भी लेस्बियन संबध को नकार दिया है । जबकि राम दास का कहना है इस तरह के बालिग जोड़ों के खिलाफ धारा ३७७ के तहत मुकदमा दर्ज नहीं किया जाना चाहिए। रामदास ने कहा कि लेस्बियन संबध से एडस जैसे रोगों मे कमी आयेगी । पर क्या भारत में समलैगिकता को स्वीकार करना उचित होगा ? मेरे अनुसार तो नहीं ? आप की क्या राय है ? जरूर बतायें?ब्रिटेन में एक महिला मंत्री ने अपनी समलैंगिक पार्टनर से शादी रचा ली । कोषागार मंत्री ऐंजला ईगल हाउस आफ कामंस की इकलौती घोषित सदस्य है।पर वहां की सभ्यता अलग है हमारे देश से। अब भारत में इस तरह के संबध को मंजूरी कब मिलेगी। पर यह समलैगिक संबध हमारे समाज के रीति रिवाज के बिल्कुल परे हैं । यदि भारत में लेस्बियन संबधों को मंजूरी मिल जाती है। तो हमारे समाज में उथल पुथल सम्भव है ।भारत विश्व के समस्त देशों के अलग हैं। यहां की पंरम्पराये, संस्कृति और रीति रिवाज विश्व के अलग करती है । समलैंगिक क्रांति को भारत अगर स्वीकृति देता है तो यह हमारे समाज में इसका बुरा असर पड़ सकता है । वैसे मेरे अनुसार लेस्बियन संबध भारत जैसे देश के लिए नहीं है । हमारे युवाओं के बेहतरी के लिए समलैंगिकता एक खतरा मात्र है और कुछ नहीं ।

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