>रौशनी

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दूर कही से आती हुई एक किरण दिखती हे
अनजाने टेड़े मेड़े रास्तो पे मंजिल दिखती हे
वो जहान दिखता हे जहाँ  खुशिया मिलती हे
वो  बाग़ दिखता हे जहाँ कलिया खिलती हे

रौशनी ही रौशनी हे
आँखें भी हँसती हे
तूफ़ान आ सकता हे
पर ये नहीं डरती हे

तारे भी गाते हे साथ साथ
और पंछी भी करने लगे हे बात
हवां भी बहती हे साथ साथ
और राहे बन रही अपने आप

रौशनी ही रौशनी हे
और एक  खुशी की हँसी हे
कुछ हल्का डर सा भी हे
पर ये ना रुकी हे

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